महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड में रहने वाले 81 वर्षीय असगरअली वोहरा को जमीन से जुड़े पुराने विवाद में बड़ी राहत मिली है। वोहरा का दावा है कि उन्होंने पीएम मोदी के साथ गुजरात के वडनगर के बीएन स्कूल में पढ़ाई की थी। 8 सितंबर को उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात भी की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद जमीन विवाद से जुड़ी एक कंपनी ने विवादित प्लॉट पर अपना दावा छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
पीएम मोदी से क्या अपील की थी?
असगरअली वोहरा के मुताबिक, वह प्रधानमंत्री मोदी के स्कूल के साथी रहे हैं। उन्होंने 8 सितंबर को पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान पालघर जिले में जमीन के एक टुकड़े को लेकर चल रहे विवाद की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी।
वोहरा के अनुसार, यह मामला भयंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित करीब 2,810 वर्ग मीटर के प्लॉट से जुड़ा है। उनका कहना है कि उन्होंने यह जमीन वर्ष 1989 में खरीदी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2011 में स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स नाम की दो कंपनियों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया।
वोहरा ने दावा किया था कि दोनों कंपनियों का संबंध भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से है। हालांकि, इन आरोपों और जमीन के मालिकाना हक को लेकर संबंधित पक्षों के दावों को अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं में देखा जा रहा है।
कंपनी ने निर्माण की अनुमति भी वापस की
इस मामले में अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ने के साथ ही निर्माण से जुड़ी अनुमति भी वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने मीरा-भायंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर को पत्र सौंपा है। इसमें कंपनी ने अपना कमेंसमेंट सर्टिफिकेट यानी निर्माण शुरू करने की अनुमति सरेंडर करने की जानकारी दी है।
कंपनी का कहना है कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए यह प्लॉट खरीदा था। इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को उसे निर्माण की अनुमति मिली थी। लेकिन जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है, इसलिए कंपनी अब निर्माण की अनुमति वापस कर रही है।
कंपनी ने नगर निगम से अनुमति रद्द करने और परियोजना के लिए पहले जमा की गई फीस वापस करने का भी अनुरोध किया है।
2015 की पुलिस शिकायत भी वापस लेने की तैयारी
इस विवाद में 2015 में एक पुलिस शिकायत भी दर्ज हुई थी। इसमें असगरअली वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोखा पर जमीन में कथित तौर पर आपराधिक रूप से घुसने और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक, अब इस शिकायत को वापस लेने की दिशा में भी बातचीत शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि नरेंद्र मेहता ने वोहरा के सहयोगी अजय ढोखा के जरिए संपर्क किया, ताकि 2015 की पुलिस शिकायत को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
16 सितंबर को होने वाली अहम नगर निगम की सुनवाई से पहले संबंधित अधिकारियों को ऐसे पत्र सौंपे गए हैं, जिनमें निर्माण अनुमति सरेंडर करने और पुलिस शिकायत वापस लेने से जुड़े कदमों की पुष्टि की गई है।
वोहरा का आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन को दो संस्थाओं के बीच बांट दिया गया था। उनका कहना है कि 2015 में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कंपनी की ओर से निर्माण अनुमति वापस करने के कदम को इस पुराने विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।





























