नई दिल्ली में आयोजित BRICS Bharat Innovates Exposition में भारत की टेक्नोलॉजी कंपनी EyeROV के अंडरवाटर रोबोट ने खास ध्यान खींचा। कंपनी के मुताबिक, 17 सितंबर को उसने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत छह बड़े नेताओं ने उसके पवेलियन का दौरा किया था।
इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा शामिल थे।
यह प्रदर्शनी 11 और 12 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित की गई थी। इसका आयोजन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के साथ किया गया था। 12 सितंबर को बंद कमरे में हुई बैठक के बाद नेताओं ने प्रदर्शनी का दौरा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया पर इस दौरे की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा था, “भारत का इनोवेशन, दुनिया के लिए समाधान।”
प्रदर्शनी में अंतरिक्ष तकनीक, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर समेत कई क्षेत्रों से जुड़ी 37 कंपनियों और स्टार्टअप ने हिस्सा लिया था।
EyeROV ने दिखाया सैन्य स्तर का अंडरवाटर रोबोट
EyeROV ने प्रदर्शनी में Trout नाम का अंडरवाटर रोबोट पेश किया। इसे केरल के कोच्चि में IROV Technologies ने तैयार किया है। यह रोबोट समुद्र के अंदर गहरे पानी में निगरानी, खोज और विभिन्न तकनीकी काम करने के लिए बनाया गया है।
Trout करीब 300 मीटर की गहराई तक काम कर सकता है। इसे भारतीय नौसेना के साथ मिलकर विकसित किया गया है। कंपनी ने इसे Defence India Startup Challenge के तहत तैयार किया था।
बाद में भारतीय नौसेना ने Trout रोबोट के लिए करीब 47 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी दिया। इससे कंपनी को रक्षा क्षेत्र में अपने स्वदेशी रोबोट की क्षमता साबित करने में मदद मिली है।
समुद्र के अंदर कई तरह के काम कर सकता है
EyeROV के मुताबिक, Trout का इस्तेमाल समुद्र के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे की निगरानी और जांच के लिए किया जा सकता है। इनमें अंडरसी कम्युनिकेशन केबल, बंदरगाह और समुद्र में मौजूद ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा इसका इस्तेमाल रक्षा, खोज और बचाव अभियान, समुद्री रिसर्च और जहाजों तथा पानी के अंदर बने ढांचों की जांच में भी किया जा सकता है।
इस रोबोट में 4K कैमरा और 10x ऑप्टिकल जूम की सुविधा है। इसमें सोनार सिस्टम भी लगाया गया है, जिसकी मदद से कम रोशनी या खराब दृश्यता वाले पानी में भी आसपास की चीजों की जानकारी हासिल की जा सकती है।
रोबोट में एक खास रोबोटिक आर्म भी है, जिसकी मदद से पानी के अंदर वस्तुओं को पकड़ने और काटने जैसे काम किए जा सकते हैं। इसके अलावा यह पानी के अंदर अपनी स्थिति और दिशा का पता लगाने में भी सक्षम है।
सॉफ्टवेयर से आसानी से किया जा सकता है कंट्रोल
Trout को EyeROV के i-Control Hub सॉफ्टवेयर के जरिए संचालित किया जाता है। इसमें कैमरे की तस्वीर, सोनार और रोबोट की लोकेशन जैसी जानकारी एक साथ दिखाई देती है।
रोबोट में ऑटो-डेप्थ, ऑटो-हेडिंग और स्टेशन कीपिंग जैसी सुविधाएं हैं। इसके अलावा इसमें जियोफेंसिंग, रिटर्न-टू-होम और मिशन के दौरान अपने रास्ते को दोबारा फॉलो करने जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी दी गई हैं।
कंपनी के मुताबिक, उसके रोबोट का इस्तेमाल बांध, पुल, बंदरगाह और समुद्र में मौजूद दूसरी संरचनाओं की जांच के लिए किया जा सकता है। EyeROV ने Tata Power, NHPC, Adani, ONGC, BPCL और Maersk जैसी कंपनियों को अपने औद्योगिक ग्राहकों में बताया है।
BRICS नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी कंपनी की पहचान
BRICS प्रदर्शनी में बड़े नेताओं के दौरे से EyeROV को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीक दिखाने का मौका मिला है। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि इन नेताओं के दौरे के बाद उसे कोई नया अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर या साझेदारी मिली है।
BRICS कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच स्टार्टअप और कारोबार को बढ़ावा देना भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 11 सितंबर को BRICS बिजनेस फोरम में हर साल 100 BRICS स्टार्टअप को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में पहुंचाने और हर साल 1,000 नई कारोबारी साझेदारियां बनाने की बात कही थी।
EyeROV का कहना है कि वह रक्षा, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, समुद्री सुरक्षा और समुद्री रिसर्च जैसे क्षेत्रों में अपनी तकनीक का विस्तार कर रही है। भारतीय नौसेना से मिले ऑर्डर के बाद BRICS मंच पर मिली यह अंतरराष्ट्रीय पहचान कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है।






























