TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी

    ‘गांधी परिवार’ बार-बार नीचा ना दिखाता तो ‘इतिहास’ ही नहीं ‘वर्तमान’ भी करता मनमोहन सिंह का उदार मूल्यांकन

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    Tata Sons Row: चंद्रशेखरन परिवार का TVS Motor से क्या कनेक्शन? ₹60 करोड़ के लोन से उठे हितों के टकराव के सवाल

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा, भारत-कनाडा ट्रेड डील को साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    BRICS VS G7

    BRICS बनाम G7: क्या दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन बदल चुका है?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    सरस्वती धरोहर विकास बोर्‍ के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच सरस्वती के उद्गम स्थल पर

    मोदी के ‘सेवा संकल्प’ को सरस्वती के पुनरुद्धार से जोड़ रहा हरियाणा, ‘आदि बद्री’ से सभ्यता और संस्कृति को सहेजने की मुहिम

    स्त्री भारतीय स्त्री-विमर्श को पश्चिमी प्रतिमानों के अनुकरण से आगे ले जाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के भीतर स्त्री की अवधारणा को पुनः देखने का अवसर प्रदान करती है।

    स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी

    ‘गांधी परिवार’ बार-बार नीचा ना दिखाता तो ‘इतिहास’ ही नहीं ‘वर्तमान’ भी करता मनमोहन सिंह का उदार मूल्यांकन

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    Tata Sons Row: चंद्रशेखरन परिवार का TVS Motor से क्या कनेक्शन? ₹60 करोड़ के लोन से उठे हितों के टकराव के सवाल

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा, भारत-कनाडा ट्रेड डील को साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    BRICS VS G7

    BRICS बनाम G7: क्या दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन बदल चुका है?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    सरस्वती धरोहर विकास बोर्‍ के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच सरस्वती के उद्गम स्थल पर

    मोदी के ‘सेवा संकल्प’ को सरस्वती के पुनरुद्धार से जोड़ रहा हरियाणा, ‘आदि बद्री’ से सभ्यता और संस्कृति को सहेजने की मुहिम

    स्त्री भारतीय स्त्री-विमर्श को पश्चिमी प्रतिमानों के अनुकरण से आगे ले जाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के भीतर स्त्री की अवधारणा को पुनः देखने का अवसर प्रदान करती है।

    स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

ईसाई धर्म जैसा आज है, वैसा वो कैसे बना- द्वितीय अध्याय : इस्लाम से ईसाइयों का परिचय

इतिहासकार बताते हैं कि पैगंबर मुहम्मद पहली बार अपने कारवां के दौरान सीरिया में ईसाइयों से मिले थे। आगे चलकर उनके लिए बहिरा नाम के एक ईसाई भिक्षु से मिलना एक परंपरा बन गई थी।

Vaishali Shukla द्वारा Vaishali Shukla
24 November 2022
in प्रीमियम
ईसाई धर्म इतिहास

SOURCE TFI

Share on FacebookShare on X

ईसाई धर्म का इतिहास: इस श्रृंखला के पहले अध्याय में हमने जाना कि ईसाई धर्म का आकार और विस्तार कैसे हुआ। रोमन साम्राज्य के दो विभाजित भागों में से पूर्वी अधिक फला-फूला। पहली सहस्राब्दी के बाद के वर्षों में इसे बीजान्टिन साम्राज्य के रूप में जाना जाने लगा। अपने चरम पर साम्राज्य ने भूमध्य सागर उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में अपने पंखों का विस्तार किया। इसने पूर्व-इस्लाम अरब दुनिया में भी अपनी पैठ बना ली थी। प्रस्तुत लेख में हम ईसाई धर्म का इतिहास के बारें में विस्तार से चर्चा करने जा रहे है।

ईसाई धर्म का इतिहास: पैगंबर और ईसाइयों के बीच प्रारंभिक बातचीत

इतिहासकार बताते हैं कि पैगंबर मुहम्मद पहली बार अपने कारवां के दौरान सीरिया में ईसाइयों से मिले थे। आगे चलकर उनके लिए बहिरा नाम के एक ईसाई भिक्षु से मिलना एक परंपरा बन गई थी। वास्तव में ऐसा भी कहा जाता है कि पैगंबर के मिशन की पुष्टि वारका इब्न नवाफल नामक एक ईसाई विद्वान ने की थी। वरका पैगंबर की पत्नी खदीजा के चचेरे भाई थे। ऐसा माना जाता है कि वारका ने कहा था, “उनके पास सबसे बड़ा कानून आया है जो मूसा के पास आया था; निश्चय ही वह इन लोगों कें पैग़ंबर हैं।”

संबंधितपोस्ट

‘भारत पर इस्लामी आक्रमण होगा, तो किस तरफ होंगे सेना के मुस्लिम’? अंबेडकर को था संदेह, लिखा – इस्लाम के लिए हमारा देश दारुल हर्ब

शोएब जमई हिंदुस्तान में क्रिकेट ख़ुद में एक धर्म है, उसे हिंदू-मुसलमान में मत बांटो

वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद : मुस्लिम संगठन ने वंदे मातरम को स्वीकार करने को हमला बताया

और लोड करें

इस्लाम और ईसाई धर्म में दार्शनिक मतभेद थे लेकिन उनके अनुयायी लगभग एक दशक तक काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे। सऊदी अरब के नजरान से ईसाई मदीना में पैगंबर से मिलने आते थे। वहीं दूसरी ओर पैगंबर बीजान्टिन सम्राट हेराक्लियस और एक्सम के नेगस के साथ- साथ सासैनियन सम्राट चोस्रोस को पत्र भेजकर उनका एहसान वापस किया था।

और पढ़ें- ईसाई धर्म जैसा आज है, वैसा वो कैसे बना- प्रथम अध्याय

ईसाई धर्म का इतिहास: अरब-बीजान्टिन युद्ध

यह वह समय था जब बीजान्टिन और सासानियन दोनों अपने 2 शताब्दी लंबे युद्धों से थके हुए थे। इसके अतिरिक्त, बुबोनिक प्लेग ने उन्हें एक दूसरे पर धीमी गति से चलने के लिए मजबूर किया था। हालांकि, सम्राट हेराक्लियस 629 में खोए हुए क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करके और ट्रू क्रॉस को यरुशलेम में पुनर्स्थापित करके एक रणनीतिक जीत हासिल करने में सक्षम हुए। ट्रू क्रॉस वह क्रॉस है जिस पर यीशु को सूली पर चढ़ाया गया ।

लगभग उसी समय, पैगंबर मुहम्मद पूरे अरब जगत को एक छतरी के नीचे लाने में कामयाब रहे। उन्होंने इसे हासिल करने के लिए विजय और गठबंधन दोनों का प्रयोग किया। एकीकृत अरब की अंतर्निहित आदिवासी प्रकृति का मतलब था कि क्रॉस की बहाली के कुछ महीनों के भीतर अरबों ने बीजान्टिन के खिलाफ एक आक्रमण शुरू किया।

इस लड़ाई का तात्कालिक कारण घासनीड्स के हाथों मुहम्मद के राजदूत की हत्या थी। घसानिड्स एक अरब जनजाति थे जिसका राज्य बीजान्टिन का एक जागीरदार राज्य था। बड़ी तस्वीर में मुताह की लड़ाई काफी हद तक अनिर्णायक थी क्योंकि मुहम्मद की सेना को अपने 3 प्रमुख नेताओं की मौत के कारण पीछे हटना पड़ा था। उनकी ओर से बीजान्टिन पीछे हटने वाली पार्टी पर पूर्ण हमले के साथ आगे नहीं बढ़े।

और पढ़ें- अघोरियों की रहस्यमयी और अज्ञात दुनिया

ईसाइयों ने उनकी कृपा के लिए भुगतान किया

यह एक महत्वपूर्ण और इतिहास बदलने वाली भूल थी। 3 साल बाद मुसलमानों ने वापसी की और उसामा बिन ज़ायद के अभियान में बीजान्टिन को हरा दिया। पैगंबर मुहम्मद ने मुताह की लड़ाई में बीजान्टिन द्वारा अपने पिता और पैगंबर के दत्तक पुत्र की हत्या का बदला लेने के लिए उसामा को भेजा था।

मुहम्मद ने उसामा पर इतना भरोसा किया कि उनकी 20 साल की छोटी उम्र उनके लिए कोई बाधा नहीं थी। इस अभियान के नेता के रूप में घोषित करने के बाद जब पैगंबर की मृत्यु हुई, तो उसामा ने अबू बकर से समर्थन प्राप्त किया जो मुहम्मद के उत्तराधिकारियों में से एक थे। युवा उसामा के सफल अभियान ने द्वार खोल दिए। मुस्लिम शासकों ने बीजान्टिन साम्राज्य (सीरिया और मिस्र) के दक्षिणी प्रांतों को निशाना बनाना आरम्भ कर दिया।

634 ईस्वी में अरबियों ने सीरिया और रोमन फिलिस्तीन पर हमला किया। हेराक्लियस बीमार पड़ गया था और सेना का नेतृत्व करने में असमर्थ था। रशीदुन खलीफाट बलों ने अजनादायन की लड़ाई में एक निर्णायक जीत दर्ज की। शीघ्र ही उन्होंने दमिश्क (सीरिया) पर चढ़ाई की और कुछ समय के लिए उस पर अधिकार कर लिया। तब बीजान्टिन ने पुनरुद्धार के कुछ संकेत दिए।

उस समय तक हेराक्लियस ने घेराबंदी को उलटने के लिए सेना को बरामद कर लिया था। मुसलमानों ने पीछे धकेला और स्वस्थ होने में 2 साल लग गए। 636 में, बीजान्टिन मूर्खता से अरबियों के साथ एक घमासान लड़ाई के जाल में गिर गए। अरब सेना ने बीजान्टिन पर तबाही मचाने के लिए गहरी घाटियों और चट्टानों का इस्तेमाल किया। दमिश्क आखिरकार हार गया। यह अरबों के हाथों में पड़ने वाला पहला बड़ा ईसाई शहर था।

इसका प्रभाव बहुत बड़ा था। इतिहासकार जोननेस ज़ोनारास के शब्दों में, “[…] तब से [सीरिया के पतन के बाद] इश्माएलियों की जाति रोमनों के पूरे क्षेत्र पर आक्रमण करने और लूटने से नहीं रुकी।” इस विजय की गति ने उन्हें दो साल की समय सीमा में यरुशलेम, गाजा, मेसोपोटामिया और एंटिओक पर कब्जा करने में सहायता की। 630 के दशक के अंत तक, बीजान्टिन मेसोपोटामिया और बीजान्टिन आर्मेनिया उनके नियंत्रण में थे और अब वे मिस्र पर नजर गड़ाए हुए थे। 642 ईस्वी में खलीफा ने मिस्र और त्रिपोलिटनिया पर कब्जा कर लिया।

और पढ़ें-  चित्रकूट से चित्तौड़ बने नगर में बप्पा रावल ने कैसे भरी शक्ति, जानिए इसके पीछे का इतिहास

अफ्रीका और इबेरियन प्रायद्वीप (स्पेन) की विजय

मिस्र पर अधिकार करने के बाद मुस्लिम सेना ने उत्तरी अफ्रीका पर अधिकार करने का प्रयास किया। 644 ईस्वी में उनकी कमान में पूर्वी लीबिया था। इस बीच अरब जगत में गृहयुद्ध छिड़ गया, जिसके बाद उमय्यद सत्ता में आए। उमय्यद अपने दृष्टिकोण में कुछ अधिक योजनाबद्ध थे। उन्होंने अपना समय लिया। इस बीच उन्होंने अपनी खुद की एक नौसेना विकसित करके अपनी सेना को मजबूत किया। उनकी नौसेना ने 655 ईस्वी में बीजान्टिन के खिलाफ आश्चर्यजनक जीत दर्ज की। जीत ने अरबों के लिए भूमध्यसागरीय मार्ग खोल दिया।

बीजान्टिन नुकसान से पूरी तरह से उबर नहीं पाए। नुकसान ने उन्हें एक पूर्ण सेना के बजाय एक छापा मारने वाली पार्टी में बदल दिया। उन्होंने अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में अरबों के खिलाफ छोटी झड़पें आरम्भ कीं। उमय्यद ने मिस्र को अफ्रीका के लिए लॉन्च पैड के रूप में इस्तेमाल किया। वहां से, उन्होंने 663 में अनातोलिया पर छापा मारा। 665 ईस्वी से 689 ईस्वी तक बीजान्टिन और अरब उत्तरी अफ्रीका में लड़ते रहे।

उनके श्रेय के लिए, बीजान्टिन अरबों द्वारा किए गए कुछ प्रमुख लाभों को उलटने में सक्षम थे। उदाहरण के लिए, उन्होंने उन्हें 678 ई. में कांस्टेंटिनोपल को लंबे समय तक जीतने नहीं दिया। लेकिन वे इसका फायदा एक दिन भी नहीं उठा सके। वे क्यों करेंगे? उनका सम्राट बूढ़ा और कमजोर था। उसने अरबों से संधि कर ली।

जस्टिनियन (द्वितीय) के समय हेराक्लियन राजवंश के अंतिम शासक अरबों ने अपनी इच्छा से बीजान्टिन प्रदेशों को लूट लिया। उसने अपनी पूंजी भी खो दी। जस्टिनियन 705 ईस्वी में सत्ता में वापस आया लेकिन अरबों ने केवल उसके अधीन अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी।

जस्टिनियन का कार्यकाल समाप्त होने के 5 साल बाद अरबों ने कॉन्स्टेंटिनोपल की घेराबंदी शुरू की, लेकिन जीत हासिल करने में असमर्थ रहे। उसके बावजूद अरबों ने अफ्रीका, सिसिली और पूर्व के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था।

इस बीच क्षेत्रों के लिए अरबों की भूख खत्म नहीं हो रही थी। वे और अधिक के लिए आकांक्षी थे और अब इबेरियन प्रायद्वीप के गिरने का समय था। इबेरियन प्रायद्वीप में, काउंट जूलियन, एक स्थानीय क्रांतिकारी ने इबेरियन प्रायद्वीप पर एक संयुक्त आक्रमण शुरू करने के लिए एक अरब गवर्नर मूसा के साथ एक समझौता किया। काउंट जूलियन एक विसिगोथ गुट का नेतृत्व कर रहा था जो रोडरिक द्वारा सत्ता के हड़पने से असंतुष्ट था।

आक्रमण सफल रहा लेकिन काउंट जूलियन ने क्षेत्रों के लिए अरबों के लालच को कम करके आंका था। 710 और 714 के बीच मूसा ने पूरे पूर्वोत्तर, उत्तरी पर्वत और प्रायद्वीप के पश्चिम और पूर्व में कब्जा कर लिया।

714 ईस्वी में उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें वापस बुलाए जाने तक, एक छोटे से पहाड़ी क्षेत्र को छोड़कर अधिकांश प्रायद्वीप उनके नियंत्रण में था। वहां रहने वाले लोग 5 सदियों से भी अधिक समय तक इस्लामवादियों से लड़ते रहे और अंततः सफल हुए।

और पढ़ें- पारसी देश के सबसे धनाढ्य और सबसे उद्यमी अल्पसंख्यक हैं, साथ ही वंशवाद के ध्वजवाहक भी

यरुशलेम का पतन

दुनिया के बीजान्टिन भाग में एक आभासी युद्धविराम हासिल किया गया था। दोनों साम्राज्यों ने एक-दूसरे को मान्यता देकर राजनयिक संबंध स्थापित किए। लेकिन सब कुछ हंकी-डोरी नहीं था। चर्च, जो उस समय के दौरान एक शक्तिशाली राजनीतिक इकाई थी, विशेष रूप से इस बात से असंतुष्ट थी कि अरबों के अधीन यरुशलेम के साथ कैसा व्यवहार किया गया था। विजय की पहली शताब्दी के लिए, यरुशलेम की पवित्रता को मुस्लिम शासकों द्वारा बनाए रखा गया था, जिन्होंने अपने अराजकतावादी वर्गों को नियंत्रण में रखा था।

अरब दुनिया विकेंद्रीकृत हो रही थी और मुस्लिम-ईसाई युद्ध की कमी की भरपाई अंतर-अरब संघर्षों द्वारा की गई थी। धार्मिक कट्टरपंथियों ने राजनीतिक सत्ता पर कब्जा कर लिया। उन्होंने सभी गैर-मुस्लिमों को इस्लाम में परिवर्तित करने का नैतिक दायित्व महसूस किया। पहले केवल मूर्तिपूजकों को दंडित किया जाता था जबकि ईसाइयों को जजिया देकर अपने धर्म का पालन करने की अनुमति थी।

725 ई. के बाद स्थितियां बदलीं। अब, ईसाइयों को कहा गया था कि या तो धर्म परिवर्तन करो या मर जाओ। खलीफाओं के लाभ के लिए यरुशलेम की संपत्ति बगदाद की ओर बहने लगी। यरुशलेम की दीवारों के विनाश के साथ ईसाई विरोधी नीति को औपचारिक रूप दिया गया।

उस समय, ईसाई किसी तरह अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ रहना सीख रहे थे। उन्होंने अरबों को ग्रीको-रोमन साहित्य का अरबी में अनुवाद करना सिखाया था। कई ईसाइयों ने अरब दुनिया में एक प्रमुख स्थान प्राप्त किया।

तथ्य यह है कि अरब नौसेना बीजान्टिन की तुलना में मजबूत थी, मुख्य रूप से उन्हें अपने रैंकों में मोनोफिसाइट क्रिश्चियन कॉप्ट और जेकोबाइट सीरियाई ईसाई नाविकों को काम पर रखने के लिए फुसलाया था। जेरूसलम की घटना ने ईसाइयों को अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। वे एक युद्धविराम की आड़ में पुराने बीजान्टिन गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए फिर से संगठित होने लगे।

और पढ़ें- केवल राजस्थान ही नहीं संपूर्ण भारतवर्ष से जुड़ी है ‘कठपुतली’ की जड़ें

बीजान्टिन पुनरुद्धार

आधिकारिक तौर पर, युद्धविराम 863 ईस्वी तक जारी रहा। उस वर्ष, बीजान्टिन जनरल पेट्रोनास ने लालकोन की लड़ाई में जीत दर्ज करके एक बढ़त हासिल की, अचानक हार के समाचार ने बगदाद और समारा को दंगों में भेज दिया, चिंता फैल गई थी और आर्मेनिया के बाद के नुकसान से भी कोई मदद नहीं हो पायी।

बीजान्टिन अगले 100 वर्षों तक अपने अपराध के साथ जारी रहे। उन्हें अरब साम्राज्य के आंतरिक झगड़ों और बेसिल I द्वारा एक क्षेत्रीय बल में बीजान्टिन की पुनर्स्थापना द्वारा सहायता प्रदान की गई थी। उनके उत्तराधिकारियों ने उनके नक्शेकदम पर चलते हुए विजय और गठबंधनों के माध्यम से जीत की होड़ ली। 995 ईस्वी में, तुलसी द्वितीय ने अरबों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। उसने अलेप्पो को राहत दी, सीरिया को जीत लिया, ओरोंटेस घाटी पर कब्जा कर लिया और आगे दक्षिण चला गया।

ब्रिटिश इतिहासकार पियर्स पॉल रीड के अनुसार, “1025 तक बीजान्टिन भूमि मेस्सिना के जलडमरूमध्य और पश्चिम में उत्तरी एड्रियाटिक से लेकर उत्तर में डेन्यूब नदी और क्रीमिया तक और पूर्व में यूफ्रेट्स से परे मेलिटेन और एडेसा के शहरों तक फैली हुई थी। ।”

बीजान्टिन ने 1078 तक इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। हालांकि यरुशलेम अभी भी उनकी पहुंच से बाहर था। यही तथ्य 3 धर्मयुद्धों का कारण बना। श्रृंखला के अगले भाग में, हम धर्मयुद्धों को उनके कारणों और कैसे उन्होंने ईसाई धर्म के इतिहास को आकार दिया ये जानेंगे। आशा करते है लेख ईसाई धर्म का इतिहास आपको पसंद आया होगा ऐसे ही लेख पढ़ने के लिए हमें सब्सक्राइब करें।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें.

Tags: ChristianityIslamइबेरियन प्रायद्वीपइस्लामईसाईजस्टिनियनधर्मयुद्धधार्मिक कट्टरपंथीबीजान्टिनमुस्लिम शासक
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

जनता दल से टूटकर बने JDU और JDS अब पूर्ण रूप से ‘खत्म’ होने वाले हैं

अगली पोस्ट

जब “गाइड” में व्यभिचार को बढ़ावा देने को लेकर देव आनंद को मिला सरकारी नोटिस

संबंधित पोस्ट

भारत का अंतरिक्ष धमाका 2026: ISRO के गगनयान मिशन से टूटेगा अमेरिका का घमंड, पाकिस्तान और चीन रहेंगे स्तब्ध
चर्चित

भारत का अंतरिक्ष धमाका 2026: ISRO के गगनयान मिशन से टूटेगा अमेरिका का घमंड, पाकिस्तान और चीन रहेंगे स्तब्ध

3 November 2025

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO, ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विज्ञान और तकनीक में भारत किसी से पीछे नहीं है। मार्च 2026...

क्या नेताजी सचमुच 1945 में मारे गए थे? मुथुरामलिंगा थेवर और गुमनामी बाबा ने खोला रहस्य
इतिहास

क्या नेताजी का निधन सचमुच 1945 विमान हादसे में हुआ था? मुथुरामलिंगा थेवर और गुमनामी बाबा ने खोला रहस्य

31 October 2025

रहस्य जो आज भी जीवित है जब इतिहास की किताबों में लिखा गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1945 में विमान हादसे में मरे, तो...

कांग्रेस की संघ से डर नीति पर अदालत की चोट: जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक
चर्चित

कांग्रेस की संघ से डर नीति पर अदालत की चोट: जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक

29 October 2025

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के लिए यह क्षण किसी राजनीतिक झटके से कम नहीं है। राज्य की धारवाड़ बेंच ने सरकार के उस विवादास्पद सरकारी...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

ONGC finds gas off Odisha: Can the Mahanadi basin fuel India’s energy future?

ONGC finds gas off Odisha: Can the Mahanadi basin fuel India’s energy future?

00:07:22

India-Russia Relations: Putin की रणनीति और भारत के लिए आगे क्या? | Maj Gen Deepak Mehra (Retd)

00:12:10

The Su-57 Question: Is India Taking a Huge Risk by Waiting for AMCA only ? IAF | Stealth fighter

00:05:37

Beginning Of Saudi Arabia's End ? A Case Study...

00:16:00

₹2 Crore Film, ₹143 Crore Hit: The ‘Hanuman Ansh’ Box Office Shock

00:02:46
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited