अपने ही बयान से फंस गए ट्रंप, आखिर युक्रेन युद्ध से कौन बना रहा पैसा
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    नितिन नबीन

    स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच BJP का बड़ा प्लान: युवाओं तक पहुंचेगी पार्टी, सांसदों-विधायकों को मिला विशेष जिम्मा

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज, पीएम मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की कही बात

    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    नितिन नबीन

    स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच BJP का बड़ा प्लान: युवाओं तक पहुंचेगी पार्टी, सांसदों-विधायकों को मिला विशेष जिम्मा

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज

    पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सियासत तेज, पीएम मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की कही बात

    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

अपने ही बयान से फंस गए ट्रंप, आखिर युक्रेन युद्ध से कौन बना रहा पैसा ?

प्रश्न यह है कि जब वाशिंगटन खुद मान रहा है कि वह हथियारों की बिक्री से मुनाफ़ा कमा रहा है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी खरीद को युद्ध का ईंधन क्यों बताया जाता रहा है? ये पश्चिम का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
23 September 2025
in AMERIKA, अर्थव्यवस्था, भारत, भू-राजनीति, यूरोप, विश्व, व्यवसाय
अपने ही बयान से फंस गए ट्रंप, आखिर युक्रेन युद्ध से कौन बना रहा पैस

ट्रंप ने अनजाने में ही सही, अमेरिकी पाखंड को उजागर तो कर ही दिया है।

Share on FacebookShare on X

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के कथित नैतिक ताने-बाने को हिला कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यूक्रेन युद्ध से पैसा बना रहा है, क्योंकि नाटो देश अमेरिकी हथियार खरीद रहे हैं। यह टिप्पणी सीधे उस पश्चिमी नैरेटिव को चुनौती देती है, जिसके तहत भारत पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि रूस से तेल खरीदकर वह पुतिन की युद्ध मशीन को ताक़त देता है।

प्रश्न यह है कि जब वाशिंगटन खुद मान रहा है कि वह हथियारों की बिक्री से मुनाफ़ा कमा रहा है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी खरीद को युद्ध का ईंधन क्यों बताया जाता रहा है? अगर यह सही भी है तो इसमें गलत क्या है। सवाल यह कि अमेरिका और नाटो देश भी तो यूक्रेन को युद्ध के लिए समर्थन और हथियार दोनों दे रहे हैं। वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। ये देश अगर युक्रेन को मदद न करते तो यह युद्ध तो कब का समाप्त हो चुका होता। तो क्या इसके लिए वे दोषी नहीं हैं।

संबंधितपोस्ट

ईरान का बड़ा जवाबी हमला, कुवैत में पैट्रियट सिस्टम और जॉर्डन में THAAD रडार नष्ट करने का दावा

आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइल का होगा भारत में निर्माण? राफेल ने शुरू की भारतीय कंपनियों से बातचीत

मॉनसून ने पूरे देश को किया कवर, दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश से जनजीवन प्रभावित

और लोड करें

अमेरिकी हथियार उद्योग और युद्ध की अर्थव्यवस्था

जानकारी हो कि अमेरिका का रक्षा उद्योग वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा है। स्टॉकहोम स्थित SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2015-19 और 2020-24 के बीच अमेरिकी हथियार निर्यात में 21% की वृद्धि हुई है। इससे उसकी वैश्विक हिस्सेदारी 43% तक पहुंच गई है। इस दौरान रूस का निर्यात घटकर लगभग 64% कम हो गया (SIPRI, 2025)।

यूरोप के नाटो देशों ने रूस—यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अपने रक्षा बजट दोगुने-तिगुने कर दिए हैं। पोलैंड ने अमेरिकी HIMARS रॉकेट सिस्टम और F-35 फाइटर जेट्स खरीदे और जर्मनी ने मिसाइल रक्षा प्रणाली का बड़ा करार किया। यही कारण है कि ट्रंप ने कहा कि “अमेरिका पैसे कमा रहा है।” साफ शब्दों में कहें तो यह युद्ध अमेरिकी कंपनियों—लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और बोइंग के लिए मुनाफा कमाने का बड़ा अवसर बन चुका है। वे कमा भी रहे हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूरी

यहीं पर भारत की स्थिति कुछ अलग है। जानकारी हो कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। वह अपनी 85% ज़रूरतें विदेश से पूरी करता है। आंकड़ों के आधार पर बात करें तो युद्ध से पहले रूस से उसका आयात 2% से भी कम था। लेकिन 2022 के बाद रूस ने यूरोपीय बाजार खोने पर भारत को भारी छूट पर तेल बेचना शुरू कर दिया। IEA (International Energy Agency) की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में भारत ने रूस से लगभग 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mb/d) तेल आयात किया, जो उसके कुल आयात का 38% था (IEA, 2024)। इससे भारत को महंगाई पर नियंत्रण रखने और अरबों डॉलर बचाने में मदद मिली।

Reuters के मुताबिक जुलाई 2025 में भी भारत का रूसी तेल आयात करीब 1.5 mb/d रहा, यानी कुल आयात का लगभग 34% (Reuters, 2025)। इससे साफ है कि भारत ने रूस से तेल खरीद को आर्थिक व ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम माना, न कि युद्ध को राजनीतिक समर्थन।

पश्चिम का पाखंड और दोहरे मानदंड

यहीं पर पश्चिम का दोहरा रवैया उजागर होता है। यहां पर सबसे बड़ी बात यह कि भारत जो तेल खरीदता है, वह नागरिक उपभोग और विकास की ज़रूरत है। लेकिन, अमेरिका जो हथियार बेचता है, वह तो सीधे युद्ध और विनाश का साधन है। लेकिन पश्चिम का नैरेटिव अलग है। अमेरिका और यूरोपीय संघ बार-बार कहते हैं कि भारत का तेल आयात रूस को युद्ध के लिए राजस्व देता है। परंतु, अमेरिकी हथियार बिक्री को वे “लोकतंत्र की रक्षा” और “स्वतंत्रता की लड़ाई” के नाम पर वैध ठहराते हैं। यह दोहरा रवैया क्यों?

Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के अनुसार, फरवरी 2022 के बाद से भारत रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 20% से अधिक खरीदार रहा है (CREA, 2024)। लेकिन उसी अवधि में अमेरिका और यूरोप के हथियार सौदे कई गुना बढ़े हैं और इनका असर सीधा युद्ध को लंबा करने पर पड़ता है। इसलिए उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।

वैसे अमेरिका के लिए यह कोई नई बात नहीं है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिकी उद्योग ने यूरोप और एशिया के देशों में हथियार बेचकर भारी कमाई की। शीत युद्ध के दौर में भी वियतनाम, अफगानिस्तान और मध्य-पूर्व अमेरिकी कंपनियों के अनुबंधों से भर गए। इराक युद्ध (2003) और अफगानिस्तान में दो दशक तक चले सैन्य अभियानों ने हथियार कंपनियों और निजी कॉन्ट्रैक्टर्स को अरबों डॉलर दिए। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने 1961 में चेतावनी दी थी कि “मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स” लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। आज तो ट्रंप का यह बयान उस चेतावनी की पुष्टि करता हुआ लगता है।

भारत का पक्ष और कूटनीति

वैसे भारत बार-बार कह चुका है कि उसका तेल आयात राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक निर्णय है। भारत का इतना बड़ा उपभोक्ता वर्ग महंगे तेल पर निर्भर नहीं रह सकता। अगर भारत ने रूस से तेल न खरीदा होता तो महंगाई आसमान छू लेती और विकास दर पर गंभीर असर पड़ता। इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही होतीं।

दिलचस्प यह भी है कि भारत से रिफाइन होकर बने पेट्रोल और डीज़ल यूरोप को भी निर्यात होते हैं। यानी परोक्ष रूप से वही यूरोपीय देश, जो भारत की आलोचना करते हैं, उसी रूसी तेल से बने उत्पाद का ही उपयोग करते हैं। भारत ने तटस्थता की नीति अपनाते हुए युद्ध पर संवाद और शांति की पैरवी की है। भारत के लिए प्राथमिकता अपनी जनता की भलाई और ऊर्जा सुरक्षा है। वह ऐसा क्यों न करे?

ट्रंप ने अनजाने में ही सही, अमेरिकी पाखंड को उजागर तो कर ही दिया है। जब अमेरिका खुद मान रहा है कि वह युद्ध से मुनाफ़ा कमा रहा है, तो उसके पास भारत पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचता। भारत के लिए यह सबक है कि उसे अपनी स्थिति और स्पष्टता से दुनिया के सामने रखनी चाहिए। तेल खरीदना और हथियार बेचना एकसमान नहीं हैं। भारत यह कदम अपनी जनता की ज़रूरत के लिए उठा रहा है, जबकि अमेरिका का मकसद लाभ और भू-राजनीतिक दबदबा है।

आज के समय की बात करें तो आधुनिक युद्ध सिर्फ़ रणभूमि पर ही नहीं, बल्कि बाज़ार और उद्योगों में भी लड़े जाते हैं। यूक्रेन युद्ध इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है। अमेरिका का हथियार उद्योग इस युद्ध से फल-फूल रहा है, रूस का तेल उद्योग उसकी रीढ़ है। ऐसे में भारत जैसे देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए व्यावहारिक कदम उठा रहे हैं। इसमें गलत क्या है?

लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान भारत के खिलाफ उनके इस नैरेटिव को उलट देता है। ट्रंप ने मान लिया कि अमेरिका युद्ध से “कमाई” कर रहा है। ऐसे में उनका यह कहना कि भारत का तेल आयात युद्ध को ईंधन देता है, यह तो सिर्फ़ पश्चिमी पाखंड ही है। असली सवाल यही है कि युद्ध को लंबा खींचने वाला कौन है—वह जो तेल खरीदकर अपनी जनता को राहत देता है, या वह जो बम और मिसाइल बेचकर मुनाफ़े की राजनीति करता है?

Tags: Americaarms marketIndiaoil purchaseRussiaTRUMPUkraineअमेरिकाट्रंपतेल खरीदभारतयूक्रेनरूसहथियारों का बाजार
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

धर्मरक्षा के लिए बलिदान हुए करोड़ों अज्ञात हिंदुओं का हरिद्वार में सामूहिक तर्पण

अगली पोस्ट

इस्लामिक NATO की ओर पहला क़दम: ट्रंप और अरब-मुस्लिम नेताओं की सीक्रेट मीटिंग के क्या हैं मायने?

संबंधित पोस्ट

भारत-जापान शिखर सम्मेलन
अर्थव्यवस्था

भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

2 July 2026

भारत और जापान ने अपने रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देते हुए गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में आर्थिक...

डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,
AMERIKA

डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

27 June 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द भारत का दौरा करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसकी पुष्टि की है। रुबियो ने एक इंटरव्यू में...

अमेरिका-ईरान समझौते का दावा
AMERIKA

अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

16 June 2026

पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

A Decade After 709 Crackdown: Remembering China's Human Rights Lawyers

A Decade After 709 Crackdown: Remembering China's Human Rights Lawyers

00:04:16

China's War on Human Rights Lawyers: The Legacy of the 709 Crackdown

00:03:57

IRAN EYES RED SEA GAMBIT

00:02:34

US- IRAN CONFLICT INTENSIFIES

00:03:05

Mass Detentions and Enforced Disappearances: The Aftermath of July 5

00:03:20
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited