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21 मार्च: हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश, सिर्फ 2 मिनट का अंतर और पाँच करोड़ लोगों की जिन्दगियों का खात्मा

21 मार्च 1943 को जर्मन सेना के ही एक जनरल ने हिटलर को मारने की साज़िश रची थी, अगर ये साज़िश कामयाब हो जाती, तो न सिर्फ कई करोड़ जिंदगियां बचतीं, बल्कि दुनिया का इतिहास, भूगोल भी बदला नज़र आता

Ayush Aman Rai द्वारा Ayush Aman Rai
21 March 2026
in इतिहास, ज्ञान
21 मार्च: हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश, सिर्फ 2 मिनट का अंतर और पाँच करोड़ लोगों की जिन्दगियों का खात्मा

हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश

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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान Adolf Hitler के खिलाफ कई साजिशें रची गईं, लेकिन 21 मार्च 1943 की साजिश खास इसलिए थी क्योंकि यह एक suicide mission थी और अगर ये कामयाब हो जाती तो शायद द्वितीय विश्वयुद्ध वहीं खत्म हो जाता

1943 का मार्च बीतते-बीतते दूसरा विश्वयुद्ध चरम पर पहुँच चुका था। जर्मनी पूरी आक्रामकता के साथ आगे बढ़ रहा था। हालांकि पूर्वी मोर्चे पर (स्टालिनग्राद) क़रीब 6 महीने चली घेरेबंदी के बाद एक महीने पहले फरवरी में ही जर्मनी की करारी हार हुई थी। ये दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी की पहली हार थी, हालांकि पश्चिमी मोर्चे पर जर्मनी की बढ़त अभी भी जारी थी। 

लेकिन इस बीच जर्मन सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी, खासकर मेजर जनरल Henning von Tresckow, यह समझ चुके थे कि हिटलर जर्मनी को विनाश की ओर ले जा रहा है। आख़िरकार वो और उनके कुछ साथी हिटलर के तख्तापलट की योजना तैयार करते हैं, ताकि युद्ध् को खत्म किया जा सके।

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मेजर जनरल ट्रेस्को ने योजना बनाई कि जब हिटलर सोवियत संघ के बोरिसोव स्थित आर्मी हेडक्वार्टर का दौरा करेगा, तब उसकी यूनिट उसे गिरफ्तार कर लेगी और बर्लिन में तख्तापलट किया जाएगा। 
लेकिन उनकी योजना फेल हो गई, क्योंकि शायद हिटलर को किसी तरह साज़िश की भनक लग गई। वो वहां पहुंचा तो, लेकिन भारी सुरक्षा घेरे के साथ। इस दौरे के दौरान उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जनरल ट्रेस्को की यूनिट की जगह हिटलर के वफादार SS गार्ड्स ने सँभाल रखी थी। साजिशकर्ताओं को कोई मौका नहीं मिला और वो उसके क़रीब तक नहीं पहुँच सके।

ऑपरेशन ‘फ्लैश’: हिटलर की किस्मत और खराब डेटोनेटर

इसके बाद ट्रेस्को ने 13 मार्च 1943 को “ऑपरेशन फ्लैश” नाम से एक और योजना बनाई। इस बार हिटलर को गिरफ़्तार करने की जगह उसे मारने की योजना बनी। हिटलर सोवियत संघ विन्नित्सा (अभी यूक्रेन) का दौरा कर जर्मनी के रास्टेनबर्ग वापस उड़ान भरने वाला था। उसके विमान के लिए स्मोलेंस्क में एक स्टॉप रखा गया था, ताकि विमान में ईंधन लिया जा सके और हिटलर थोड़ा आराम भी कर सके।
 उस वक्त जनरल ट्रेस्को, श्लाब्रेंडॉर्फ और उनके साथी सोवियत संघ के स्मोलेंस्क में ही तैनात थे। तय हुआ कि हिटलर के विमान में किसी तरह बम रख उसे हवा में ही उड़ा दिया जाए।

साजिश के अनुसार हिटलर को खास सिपहसालार को शराब की बोतल गिफ्ट की जानीं थीं, जिससे पहले से ही एक टाइमर सेट किया हुआ बम छिपा कर रखा जाना था। इस काम के लिए एक यंग ऑफ़िसर को चुना गया, जिसे ख़ुद इस योजना की जरा भी भनक नहीं थी। उसने बस वही किया जो उसके सीनियर अधिकारियों ने उससे कहा था। 
सब कुछ जनरल ट्रेस्को की योजना के मुताबिक़ ही हुआ। बिना किसी संदेह वाइन का वो पार्सल हिटलर के अंगरक्षकों ने स्वीकार कर लिया और उसे विमान में रखवा दिया।
जल्दी ही हिटलर के विमान ने उड़ान भर ली। 
साजिशकर्ताओं ने बम को मिन्स्क (आज बेलारूस) के ऊपर फटने के लिए सेट किया था, ठीक इसी वक्त साजिशकर्ताओं की एक दूसरी टीम बर्लिन में तख्तापलट के लिए तैयार थी।
इस टीम को बस एक कोडवर्ड का इंतज़ार था- जो था “फ्लैश”, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें वो कोड वर्ड कभी नहीं मिला। दरअसल वो बम फटा ही नहीं, क्योंकि हिटलर की क़िस्मत से बम का डेटोनेटर ही ख़राब निकल गया।

21 मार्च- हिटलर की हत्या का आत्मघाती मिशन

लगातार दूसरी नाकामयाबी के बाद साजिशकर्ताओं ने हिटलर को खत्म करने के लिए एक आत्मघाती हमले की तैयारी की। अब तक की सबसे सटीक और ख़तरनाक योजना। इसके लिए उन्होने दिन चुना- 21 मार्च, यानी आज का ही दिन। 

ये दिन जर्मनी में “हीरोज मेमोरियल डे” (प्रथम विश्व युद्ध के मृत सैनिकों की याद में मनाया जाने वाला दिन) के रूप में मनाया जाता था। हिटलर इस मौके पर बर्लिन के ज़ॉयगहाउस म्यूज़ियम में पहुंचने वाला था, जहां उसे एक समारोह में शामिल होना था और मारे गए जर्मन सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने साथ रेड आर्मी के जीते हुए हथियारों की प्रदर्शनी का मुआयना भी करना था।
जनरल ट्रेस्को के लिए इससे अच्छा मौका कुछ और नहीं हो सकता था, क्योंकि इस समारोह के दौरान हिटलर को एस्कॉर्ट करने के लिए जो लोग चुने गए थे, उनमें उनका ही एक ख़ास आदमी- कर्नल फ्रीहेर वॉन गर्सडॉर्फ भी शामिल थे।
ट्रेस्को उन्हे इस बात का पूरा यकीन दिला चुके थे कि हिटलर को खत्म करना ही जर्मनी को बचाने का एक मात्र रास्ता है, लिहाज़ा जर्मनी के लिए कर्नल गर्सडॉर्फ इस आत्मघाती मिशन के लिए तैयार हो गए और उन्होंने हिटलर की हत्या की साजिश में शामिल होने का फैसला किया।

टाइमर में 2 मिनट का अंतर और 5 करोड़ जिंदगियों का खात्मा

21 मार्च 1943 को जब Hitler बर्लिन के ज़ॉयगहाउस (पुराना शस्त्रागार, Unter den Linden) इस प्रर्दर्शनी देखने के लिए पहुंचा तो एक्सपर्ट के रूप में कर्नल गर्सडॉर्फ को ही उन्हें इस प्रदर्शनी को दिखाने की जिम्मेदारी दी गई। कर्नल गर्सडॉर्फ इस मौके को बिल्कुल भी गंवाना नहीं चाहते थे। उन्होने अपने कोट की जेबों में दो ताक़तवर बम छिपा लिए, जिनके फ्यूज 10 मिनट के टाइमर पर सेट किए गए थे। जैसे ही हिटलर संग्रहालय में दाखिल हुए, गर्सडॉर्फ ने इन ग्रेनेड्स के फ्यूज़ ऑन कर दिए। उनकी योजना थी कि जैसे ही 10 मिनट होने में कुछ सेकेंड बचेंगे- वो हिटलर के क़रीब जाएंगे और उन्हें गले लगाकर ख़ुद को विस्फोट से उड़ा देंगे।
हिटलर के मारे जाते ही तख्तापलट (coup) की विस्तृत योजना भी तैयार थी, जो इस हमले के सफल होते ही लागू की जानी थी।
लेकिन हिटलर की क़िस्मत एक बार फिर शानदार निकली। तय कार्यक्रम से उलट हिटलर संग्रहालय का दौरा सिर्फ 8 मिनट में ही खत्म कर, वहां से बाहर निकल गया और सीधा अपनी कार में बैठ गया।
अब कर्नल गर्सडॉर्फ के पास अपनी जान बचाने का दो मिनट से भी कम का समय बचा था। आख़िरकार वो वहां मौजूद टॉयलेट में घुसे और किसी तरह बम को आखिरी क्षणों में defuse कर दिया। इस असफल प्रयास के बाद उन्हें वापस पूर्वी मोर्चे पर भेज दिया गया और अंत तक किसी का उन पर कोई संदेह तक नहीं हुआ। यहां तक कि हिटलर को भी इस साज़िश का कभी पता नहीं चल सका। 

सैन्य इतिहासकार मानते हैं कि अगर 21 मार्च 1943 की उस सुबह हिटलर उस प्रदर्शनी में दो मिनट और रुका होता तो शायद मौजूदा इतिहास आज से काफी अलग होता। 

लेकिन हिटलर की वो दो मिनट की जल्दबाजी दूसरे विश्वयुद्ध खत्म होने में दो वर्षों की लंबी देरी साबित हुई। इन दो वर्षों के दौरान क़रीब पाँच करोड़ लोग मारे गए, जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की थी। 
इस सच्ची घटना पर Valkyrie नाम की एक फिल्म भी बनाई गई थी, जिसमें प्रसिद्ध अभिनेता टॉम क्रूज़ ने कर्नल गर्सडॉर्फ की भूमिका निभाई थी।

Tags: 21 March 1943 plotAdolf Hitler assassination attemptsHenning von Tresckow conspiracyHitler bombing plot SmolenskOperation Flash 1943Rudolf Christoph von Gersdorff suicide missionWorld War 2 German resistance
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