आसनसोलमें मस्जिद के लाउडस्पीकर को लेकर शुरू हुआ विवाद जिस तरह हिंसा में बदल गया, उसने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहांगीरी मोहल्ला पुलिस चौकी पर उग्र भीड़ का हमला, पथराव, तोड़फोड़ और पुलिस को आंसू गैस व लाठीचार्ज का सहारा लेना यह दिखाता है कि राज्य में भीड़ का डर कानून से बड़ा होता जा रहा है।
नई सरकार बनने के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन अपराध और सांप्रदायिक तनाव पर सख्त नियंत्रण स्थापित करेगा, लेकिन हालात अब भी चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहे हैं। छोटी-छोटी घटनाएं तेजी से हिंसक रूप ले रही हैं और पुलिस को मौके पर हालात संभालने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। आसनसोल की घटना ने यह बहस फिर तेज कर दी है कि क्या पश्चिम बंगाल में अपराध और उपद्रव से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार जैसी कड़ी प्रशासनिक सख्ती की जरूरत महसूस होने लगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इस तरह की घटनाएं सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं। वहीं विपक्ष भी राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था संभालने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार उपद्रवियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर कानून का डर कायम कर पाएगी, या फिर ऐसी घटनाएं आगे भी राज्य की शांति को चुनौती देती रहेंगी।
वहीं सवाल ये उठ रहा है कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद भी ऐसी दिक्कतें क्यों हो रही है, क्या बंगाल में भी बीजेपी को योगी नियम का पालन करना पड़ेगा, तब जाकर बंगाल में सुधार होगा। हालांकि वहां हो रहे अपराध को देखकर साफ समझ आ रहा है कि इसके पीछे विपक्ष का हाथ है। जिसे बीजेपी की सरकार बिल्कुल समझ नहीं आ रही है।
































