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फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा को सही तरीके से आयोजित करने में पूरी तरह असफल रही है। इसलिए NTA को बदला जाए या उसका पूरी तरह पुनर्गठन किया जाए।
याचिका में मांग की गई है कि नीट -UG 2026 की दोबारा परीक्षा न्यायिक निगरानी में कराई जाए, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। FAIMA ने कोर्ट से कहा है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह NTA की जगह एक नया, मजबूत, तकनीकी रूप से उन्नत और पूरी तरह स्वतंत्र परीक्षा निकाय बनाए।
दरअसल, 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा पर पेपर लीक के आरोप लगे थे। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हुए “अनुमानित प्रश्नपत्र” में असली परीक्षा के 100 से ज्यादा सवालों का मिलान पाया गया था।
FAIMA ने मांग की है कि एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में हाई लेवल निगरानी समिति बनाई जाए। इस समिति में साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए, ताकि नई परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक नया परीक्षा निकाय नहीं बनता, तब तक NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। साथ ही, परीक्षा प्रणाली को डिजिटल और सुरक्षित बनाया जाए। FAIMA ने सुझाव दिया है कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराया जाए।
वहीं सीबीआई जांच में के शिवम नाम के लड़के को पकड़ा गया है, जिसका लिंक राजस्थान से इसको लेकर लगातार जांच जारी है, वहीं कोर्ट ने बच्चों को कहां है कि दूबारा उन्हें फोर्म भरने की जरुरत नहीं है, उसी फोर्म के आधार पर दूसरी बार परीक्षा ली जाएगी। जिससे छात्रों को राहत मिला है। वहीं सीबीआई की टीम NTA ऑफिस पहुंची हैं जांच के लिए।
इसके अलावा, FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि CBI को 4 हफ्तों के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाए। इस रिपोर्ट में पेपर लीक नेटवर्क, गिरफ्तार लोगों, आरोपियों और जांच की प्रगति की पूरी जानकारी हो। संगठन ने यह भी कहा है कि परीक्षा के सेंटरवार रिजल्ट सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच हो सके।
































