TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    edit post
    Devender Mahto Ranchi student protest

    Jharkhand Student Protest: रांची में सड़कों पर छात्र, CBI जांच और JSSC CGL पर क्यों अटका पेंच?

    edit post
    Gen Z voter and BJP

    क्या Gen Z बीजेपी के साथ है? धर्मेंद्र प्रधान के दावे का Election Data से समझिए सच

    edit post
    बीजेपी हेडऑफिस में पार्टी के महामंत्री (संगठन) बी.एल.संतोष की अध्यक्षता में त्रिपुरा की बैठक

    मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा की टॉप लीडरशिप के साथ बीजेपी आलाकमान की बैठकों का दौर, कामकाज की समीक्षा के साथ जवाबदेही तय करने पर जोर

    edit post
    थाइलैंड से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट

    थाइलैंड से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में भयानक टर्बुलेंस, कई यात्री घायल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    edit post
    GOBARdhan Scheme Gas Import Bill

    GOBARdhan Scheme: ₹23,731 करोड़ की योजना से कैसे घटेगा भारत का $5 Billion गैस Import Bill?

    edit post
    Bihar Liquor Ban NCAER REPORT

    Bihar Liquor Ban: बिहार को फायदा हुआ या नुकसान? NCAER रिपोर्ट ने उठाए सवाल

    edit post
    Indian Economy Under Modi Govt Since 2014

    12 साल, 22 सेक्टर और एक तस्वीर: क्या भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सचमुच बदल गया?

    edit post
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    edit post
    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    edit post
    Territorial Army AI Cyber Security and Direct Entry

    टेरिटोरियल आर्मी में अब AI और साइबर एक्सपर्ट्स की सीधी एंट्री? रक्षा मंत्रालय की नई योजना से बदल जाएगा TA का रोल

    edit post
    म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 जून से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौर पर थे

    म्यांमार के रेयर अर्थ खनिज, भारत की रणनीति और चीन की चुनौती

    edit post
    INS 'निपुण' भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV)।

    INS निपुण: नेवी के बेड़े में शामिल होने वाला ये डाइविंग सपोर्ट वेसल इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    edit post
    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    edit post
    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    edit post
    अमेरिका का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    edit post
    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    edit post
    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    edit post
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    edit post
    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    edit post
    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    edit post

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    edit post
    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    edit post
    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    edit post
    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    edit post
    Devender Mahto Ranchi student protest

    Jharkhand Student Protest: रांची में सड़कों पर छात्र, CBI जांच और JSSC CGL पर क्यों अटका पेंच?

    edit post
    Gen Z voter and BJP

    क्या Gen Z बीजेपी के साथ है? धर्मेंद्र प्रधान के दावे का Election Data से समझिए सच

    edit post
    बीजेपी हेडऑफिस में पार्टी के महामंत्री (संगठन) बी.एल.संतोष की अध्यक्षता में त्रिपुरा की बैठक

    मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा की टॉप लीडरशिप के साथ बीजेपी आलाकमान की बैठकों का दौर, कामकाज की समीक्षा के साथ जवाबदेही तय करने पर जोर

    edit post
    थाइलैंड से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट

    थाइलैंड से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में भयानक टर्बुलेंस, कई यात्री घायल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    edit post
    GOBARdhan Scheme Gas Import Bill

    GOBARdhan Scheme: ₹23,731 करोड़ की योजना से कैसे घटेगा भारत का $5 Billion गैस Import Bill?

    edit post
    Bihar Liquor Ban NCAER REPORT

    Bihar Liquor Ban: बिहार को फायदा हुआ या नुकसान? NCAER रिपोर्ट ने उठाए सवाल

    edit post
    Indian Economy Under Modi Govt Since 2014

    12 साल, 22 सेक्टर और एक तस्वीर: क्या भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सचमुच बदल गया?

    edit post
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    edit post
    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    edit post
    Territorial Army AI Cyber Security and Direct Entry

    टेरिटोरियल आर्मी में अब AI और साइबर एक्सपर्ट्स की सीधी एंट्री? रक्षा मंत्रालय की नई योजना से बदल जाएगा TA का रोल

    edit post
    म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 जून से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौर पर थे

    म्यांमार के रेयर अर्थ खनिज, भारत की रणनीति और चीन की चुनौती

    edit post
    INS 'निपुण' भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV)।

    INS निपुण: नेवी के बेड़े में शामिल होने वाला ये डाइविंग सपोर्ट वेसल इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    edit post
    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    edit post
    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    edit post
    अमेरिका का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    edit post
    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    edit post
    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

    edit post
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    edit post
    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    edit post
    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    edit post

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    edit post
    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    edit post
    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    edit post
    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

Chandra Shekhar Patel द्वारा Chandra Shekhar Patel
14 August 2026
in इतिहास, चर्चित, भारत
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: सामूहिक स्वराज, व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है

विभाजन के दौरान पाकिस्तान के पंजाब से भारत की तरफ आता एक परिवार

Share on FacebookShare on X

15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है

 सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ ना पूरी है

संबंधितपोस्ट

सऊदी-पाक-तुर्की का ‘सुपर ब्लॉक’: तीनों में से किसी एक पर हमला तो तीनों मिलकर लड़ेंगे जंग; क्या है भारत का प्लान ?

लंदन में CJP प्रदर्शन के समर्थन कार्यक्रम में पहुंचीं ग्रेटा थनबर्ग, भारत में तेज हुई राजनीतिक बहस

मॉनसून ने पूरे देश को किया कवर, दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश से जनजीवन प्रभावित

और लोड करें

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई द्वारा 15 अगस्त 1947 के दिन लिखी गई यह कविता है जिसमें बताया गया है कि 31 दिसंबर 1929 को रावी नदी के तट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारतीय तिरंगा झंडा फहरा कर पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। एवं आगामी 26 जनवरी को देश भर मे  शपथ के कार्यक्रम का आयोजन का निर्णय किया था।
उस समय अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू और इस प्रस्ताव का समर्थन महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया, लेकिन 15 अगस्त 1947 को देश दो टुकड़ों में विभाजित हो गया- हिंदुस्तान और पाकिस्तान

विभाजन केवल धरती का नहीं होता विभाजन वहाँ रहने वालों की संवेदनाओं का भी होता है

धर्म के आधार पर हुए इस विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर अपनी संपत्ति छोड़ कर अपनी मातृभूमि जिसके लिए वे वर्षों लड़ते रहे, जिसकी भावना उस भूमि पर बरसों से थी भूमि भले ही गुलाम रही हो लेकिन उसका गुजर बसर उसी भूमि पर होता था और आजादी के बाद उस भूमि को उसे छोड़ना पड़ा। विश्व इतिहास में कभी भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को पलायन नहीं करना पड़ा था।
आमतौर पर अगस्त का महीना बारिश का रहता है आसपास की गलियां सड़कें बारिश के पानी से भर जाती हैं लेकिन 1947 के उस अगस्त में वहां की सड़कें बारिश के पानी से नहीं, बल्कि खून से सनी हुई थीं।

विभाजन के दौरान पलायन का एक दृश्य

विभाजन का मुख्य कारण उस समय दो प्रकार की विचारधाराओं के मध्य संघर्ष था “एक जिन्हें आजाद देश चाहिए और दूसरे वे जिन्हें अलग देश चाहिए “


बंगाल
 विभाजन वह घाव जो कभी भर ना सका

लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन के समय कहा था “बंगाल का विभाजन सुविधाओं  के लिए नहीं बल्कि मुस्लिम प्रांत बनाने के लिए है, जिसमें इस्लाम और उनके अनुयायियों की प्रधानता होगी”  इस तरह ब्रिटिश सरकार के द्वारा विभाजन को धार्मिक रंग देना शुरू
किया गया। 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल का विभाजन हुआ उसे विरोध दिवस के रूप में सिर्फ बंगाल नहीं, पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और देशवासियों द्वारा मनाया गया।

अंग्रेजों ने धर्म के आधार पर बंगाल का विभाजन किया था

जुलूस निकाले गए, प्रदर्शन हुए, सड़कों पर वंदे मातरम के नारे से आंदोलनों ने नया रूप ले लिया। जगह-जगह विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार हो रहा था।अंततः 12 दिसंबर 1911 को बंगाल का विभाजन वापस ले लिया गया और 1 जनवरी 1912 में इसे प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया |बंगाल का विभाजन और पुनः एक करने की ब्रिटिश सरकार की कोशिश ने भारत को गहरा घाव दिया जिसकी पीड़ा आज भी ना केवल
बंगाल की जनता को है बल्कि पूरे भारत को बंगाल विभाजन को वापस लेने के बाद जो घाव भरने का प्रयास किया था वह घाव भरने की जगह उल्टा 1947 में पुनः खुल गया बंगाल का विभाजन भारत की एकता अखंडता के इतिहास में एक बड़ा मोड़ लेने वाली घटना थी वास्तव में बंगाल का विभाजन एक
पाकिस्तान के बीजारोपण की शुरुआत थी।

वंदे मातरम का विभाजन  (देश के विभाजन के विचार को बल)

जिस वंदे मातरम का उद्घोष कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बंगाल का विभाजन रद्द करा दिया, लेकिन जब उस वंदे मातरम को धर्म के चश्मे से देखा जाने लगा, तब  वंदे मातरम  का  विभाजन  हो  जाता है जबकि खिलाफत आंदोलन के समय दिनों की शुरुआत वंदे मातरम  से हुआ करती थी और अनेक मुस्लिम नेता इसके सम्मान में उठकर खड़े हुआ करते थे।

 1882 से आया वंदे मातरम का पहला विरोध 
 सन 1923 में काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अली ने की | अंततः  तुष्टीकरण  की  राजनीति  के कारण वंदे मातरम का विभाजन हो गया और देश के विभाजन के विचार को बल मिलना शुरू हो गया  ।

विचार परिवर्तन
हम सभी ने अपने विद्यार्थी जीवन में एक गीत जरूर सुना होगा गाया भी होगा

                             “सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा”

     यह गीत सन 1905 इकबाल ने लिखा था जो कि हिंदुस्तान की आजादी के पहले “तराना ए हिंद” के नाम से लिखा था| उस समय सामूहिक देशभक्ति गीत के द्वारा अविभाजित हिंदुस्तान के लोगों को एक साथ रहने की शिक्षा  दिया करते थे ।उस गीत में कुछ ऐसे अंश भी हैं जिसमें सभी धर्मों को यह कहा गया है कि

              “हिंदी है हम वतन हैं हिंदोस्तां हमारा”

वे देशभक्ति और राष्ट्रवाद की प्रेरणा भी दिया करते थे लेकिन कालांतर में जाकर उन्होंने बाद जो लिखा उसको सुनकर और उसको पढ़करआप सभी को आश्चर्य भी हो सकता है कि ऐसा व्यक्तित्व जो “सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा” की बात कर रहा था उसने तराना ए हिंद के बाद तराना ए मिल्ली लिखा जिसके बोल थे   

“मुस्लिम है हम वतन हैं, सारा जहां हमारा

आसान नहीं मिटाना, नामों निशा हमारा”

वर्ष 1938 में जिन्ना को लेकर इकबाल ने अपना भाषण दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि

 “केवल एक ही रास्ता है, मुसलमानों को जिन्ना के हाथों को मजबूत करना चाहिए और उन्हें मुस्लिम लीग में शामिल होना चाहिए।  भारत की आजादी का प्रश्न- जैसा कि अब हल किया जा रहा है, हिंदुओं और अंग्रेजों दोनों के खिलाफ हमारे संयुक्त मोर्चे द्वारा काउंटर  किया जा सकता  है इसके बिना हमारी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा“

भारत विभाजन से जुड़ी एक बैठक में पंडित नेहरू, माउंटबेटन और जिन्ना

    1933 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब के पी(P) अफगानिस्तान के ए (A)कश्मीर के (K)के बलूचिस्तान  के स्तान(ISTAN) को लेकर पाकिस्तान की परिकल्पना को जन्म दिया था। जो विश्व के पटल पर अलग पाकिस्तान देश की पहली मांग थी। उसके पश्चात 23 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग के  अधिवेशन में लाहौर में हुआ था इसकी अध्यक्षता मोहम्मद अली जिन्ना ने की थी इस अधिवेशन में भारत से पृथक एक अलग मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान की की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया । अब यह संघर्ष भारतीय बनाम अंग्रेज नहीं रह गया था बल्कि कांग्रेस, मुस्लिम लीग, और ब्रिटिश शासन तीनों के बीच का संघर्ष था ।

हाँ। मैं इसे एज-इट-इज रखते हुए, आपके मूल विचार, क्रम, उद्धरण और भाषा को बनाए रखकर सिर्फ टाइपो, वाक्य-विन्यास, पैराग्राफिंग और टूटे हुए टेक्स्ट को व्यवस्थित कर रहा हूँ। तथ्य/दावे अपनी तरफ से बदल नहीं रहा हूँ। जहाँ मूल टेक्स्ट में शब्द स्पष्ट रूप से बिगड़े हुए हैं, वहाँ उन्हें संदर्भ के अनुसार ठीक किया है।

अखंड भारत: विभाजन की त्रासदी से पुनः एकता के संकल्प तक

1933 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब के P (पी), अफगानिस्तान के A (ए), कश्मीर के K (के) और बलूचिस्तान के ‘स्तान’ (ISTAN) को लेकर पाकिस्तान की परिकल्पना को जन्म दिया था। यह विश्व पटल पर अलग पाकिस्तान देश की पहली मांग थी।

इसके पश्चात 23 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग का अधिवेशन लाहौर में हुआ था। इसकी अध्यक्षता मोहम्मद अली जिन्ना ने की थी। इस अधिवेशन में भारत से पृथक एक अलग मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया गया।

अब यह संघर्ष केवल भारतीय बनाम अंग्रेज नहीं रह गया था, बल्कि कांग्रेस, मुस्लिम लीग और ब्रिटिश शासन—तीनों के बीच का संघर्ष बन चुका था।
डॉ. राम मनोहर लोहिया ने विभाजन को कभी भी स्वीकार नहीं किया था और वे इसके विरोधी थे। मौलाना आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खान, इमारत केसरिया के मौलाना सरदार, मौलाना अकील-उर-रहमान, तुफैल अहमद मंगलोरी जैसे कई लोग थे, जिन्होंने बहुत सक्रियता के साथ मुस्लिम लीग की विभाजन की राजनीति का विरोध किया था।

यह बात सिद्ध हो चुकी है—

“सामूहिक स्वराज व्यक्तिगत स्वराज में परिवर्तित हो जाता है तो पाकिस्तान का निर्माण होता है।”

3 जून 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विभाजन को स्वीकार करने के साथ ही जनता से अपील करते हुए कहा था—

“कई पीढ़ियों से हमने स्वतंत्र व संयुक्त भारत के लिए संघर्ष किया तथा सपने भी देखे हैं, इसलिए उस देश के विभाजन का विचार भी बहुत कष्टदायक है। परंतु फिर भी मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारा वर्तमान निर्णय सही है। यह समझना आवश्यक है कि तलवारों द्वारा भी अनेक प्रांतों को भारतीय संघ राज्य में रखना संभव नहीं। यदि उन्हें जबरन भारतीय संघ में रखा गया तो कोई प्रगति और नियोजन संभव नहीं होगा। राष्ट्र में संघर्ष और परस्पर झगड़ों के जारी रहने से देश की प्रगति रुक जाएगी। भोली जनता के कत्ल से तो विभाजन ही अच्छा है।”

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है कि हालात की मजबूरी थी और अनुभव किया गया कि हम जिस मार्ग पर चल रहे हैं, उसके द्वारा गतिरोध को हल नहीं किया जा सकता। अतः हमको देश का विभाजन स्वीकार करना पड़ा।

इस प्रकार की घटना अमेरिका में भी हुई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अमेरिका के विभाजन की जगह गृहयुद्ध को स्वीकार किया था। अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही गृहयुद्ध के बीज पनप रहे थे, किंतु बड़ी कुशलता से अब्राहम लिंकन ने गृहयुद्ध को स्वीकार किया और बंटवारे को नकारा।

इस गृहयुद्ध में लगभग 6 लाख से अधिक मौतें हुईं, किंतु उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका संयुक्त राज्य अमेरिका के रूप में बने रहे और आज भी एक हैं।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए बंटवारे का अर्थ

15 अगस्त 1947 को उस समय जीवित कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपने सपनों वाला पूर्ण स्वराज ढूंढ रहे होंगे।

वे ढूंढ रहे होंगे उस लाहौर को, जहां भगत सिंह शहीद हुए थे।
वे ढूंढ रहे होंगे गुरु नानक की जन्मस्थली ननकाना साहिब को।
वे ढूंढ रहे होंगे बलूचिस्तान की हिंगलाज माता के मंदिर को।
वे ढूंढ रहे होंगे ढाका के शक्ति पीठ ढाकेश्वरी मंदिर को।

वे उन सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद कर रहे होंगे, जिन्होंने बंगाल के विभाजन की विभीषिका के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी और बंगाल का विभाजन होने नहीं दिया था। लेकिन उसके कुछ वर्ष बाद बंगाल ही नहीं, बल्कि देश का विभाजन हो गया था।

महात्मा गांधी ने “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया था, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि अंग्रेजों ने तो भारत छोड़ा, साथ ही भारत के कई मुसलमान भारत छोड़कर चले गए।

पाकिस्तान के मशहूर शायर फैज अहमद फैज ने भी विभाजन के बाद की व्यथा अपनी शायरी के माध्यम से व्यक्त की—

सुबह-ए-आजादी — अगस्त 1947

“ये दाग-दाग उजाला, ये शबगज़ीदा सहर
इंतज़ार था जिसका, ये वो सहर तो नहीं।
ये वो सहर तो नहीं जिसकी आरज़ू लेकर
चले थे यार कि मिल जाएगी कहीं न कहीं।”

बांग्लादेश का अपनी संस्कृति में वापस लौटने का कदम

1906 में रवींद्रनाथ टैगोर ने “आमार सोनार बांग्ला” की रचना की, जो बंटवारे का विरोध करने वाली रचना थी। इसमें बंगाल की अस्मिता के बारे में बताया गया था। 1971 में यह गीत बांग्लादेश का राष्ट्रगान बन गया। रवींद्रनाथ टैगोर  भी अखंड भारत की संकल्पना रखते थे। वर्ष 1940 में वे दुनिया में नहीं रहे। यदि होते तो अधूरी आजादी को देखकर दुखी होते।

वर्ष 1947 में बंगाल का दूसरी बार विभाजन हुआ, जो पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाने लगा। उस समय बंगाल के मुसलमानों की यह सोच थी कि एक पृथक क्षेत्र उन्हें शिक्षा, रोजगार और अधिक अवसर उपलब्ध कराएगा। जबकि यह सोच गलत साबित हुई और उन्होंने अपनी भूल सुधारी तथा पुनः बांग्लादेश बना।

बांग्लादेश की अपनी भाषा और संस्कृति की अलग पहचान है। वहां 98% आबादी बांग्ला भाषा का प्रयोग करती है और वहां की आधिकारिक भाषा भी बांग्ला है। यही कारण था कि वहां की संस्कृति अलग थी, जिस पर पाकिस्तान का अलगाववादी रंग नहीं चढ़ पाया। बलूचिस्तान भी उसी ओर बढ़ रहा है।

अखंड भारत की संकल्पना

भारत में मुस्लिम आबादी लगभग 14 प्रतिशत है, लेकिन अखंड हो जाने के बाद इन देशों की जनसंख्या शामिल हो जाने पर लगभग मुस्लिम आबादी 30% के बराबर हो जाएगी।

भारत में मुसलमानों की कोई विशेष भाषा नहीं रही। बंगाल के मुसलमान बंगाली बोलते हैं, पंजाब के मुसलमान पंजाबी बोलते हैं, बिहार के मुसलमान बिहारी बोलते हैं, गुजरात के मुसलमान गुजराती बोलते हैं और चेन्नई के मुसलमान तमिल भाषा बोलते हैं।

साथ ही, चेन्नई के मुसलमान और चेन्नई के हिंदू की उपासना पद्धति और भोजन पद्धति को छोड़ दिया जाए और चेन्नई के मुसलमान की तुलना गुजरात के मुसलमान से की जाए, तो दोनों के रहन-सहन में अपेक्षाकृत चेन्नई में रहने वाले मुसलमान और चेन्नई में रहने वाले हिंदू का जनजीवन और जीवन पद्धति लगभग बराबर ही रहेगी।

यही तो एक कारण है अखंड भारत की ओर बढ़ते कदम का, क्योंकि अखंड भारत उपासना पद्धति और भाषा पर नहीं, बल्कि संस्कृति पर आधारित है। आज की वर्तमान परिस्थिति में अखंड भारत का सपना हो सकता है कि बहुत सारे लोगों को एक काल्पनिक सपना या एक असंभव विचार लगे, किंतु किसी राष्ट्र के लिए या राष्ट्र की संकल्पना के लिए 50 या 100 वर्ष कम ही होते हैं।

अगर इतिहास के कालखंड पर जाएं तो पाएंगे कि आज से लगभग 100 वर्ष पहले ऐसे देश अस्तित्व में ही नहीं थे, जो आज अस्तित्व में हैं। और आने वाले 100 वर्षों में कई देश एक भी हो सकते हैं, बन भी सकते हैं। बांग्लादेश नया देश बना, जर्मनी एक हुआ।

“जब बर्लिन (जर्मनी) की दीवार टूट सकती है तो भारत की सीमाएं एक क्यों नहीं हो सकतीं?”

किसी राष्ट्र की संकल्पना संस्कृति के आधार पर होती है, धर्म के आधार पर नहीं। यदि धर्म के आधार पर होती तो सारे मुस्लिम राष्ट्र, सारे ईसाई देश एक देश होते।
यदि समान रूप-रंग के आधार पर देश बनता तो जापान, कोरिया, चीन, म्यांमार और इंडोनेशिया एक राष्ट्र होते।
भारत की परंपरा और राष्ट्रीयता किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। सभी लोग खुद को राष्ट्रीय जीवन के साथ जोड़ेंगे तो अखंड भारत एक वास्तविकता होगी। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान को एक करने की इस बाधा को दूर करने में सक्षम होंगे।

वह “सिंध” फिर हमारा होगा

भारत का राष्ट्रगान, जिसे प्रत्येक भारतीय गाते हुए गौरवान्वित होता है, उसकी एक पंक्ति है—

“पंजाब सिंध गुजरात मराठा, द्राविड़ उत्कल बंग।”

हमारे राष्ट्रगान में से सिंध शब्द को हटाया नहीं गया। सिंध प्रांत वर्तमान भारत में नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में है। लेकिन हम अपने राष्ट्रगान में सिंध का उल्लेख भी करते हैं, क्योंकि आज नहीं तो कल सिंध भी भारत का होगा और पूर्ण स्वराज का सपना, जो हमारे पूर्वजों ने देखा था, वह सच होगा।

महात्मा गांधी को भारत का विभाजन होने की कसक अंतिम समय तक रही। उन्होंने पाकिस्तान जाने के संदर्भ में कहा था कि भारत के दंगे शांत होने के बाद वे पाकिस्तान भी जाएंगे। इसके लिए वह कोई पासपोर्ट नहीं लेंगे, क्योंकि पाकिस्तान भी उन्हीं का देश है और अपने देश जाने के लिए उन्हें पासपोर्ट नहीं चाहिए। हालांकि दुर्भाग्यवश महात्मा गांधी की हत्या हो गई।

तिब्बत का संघर्ष है प्रेरणादायक

हर वर्ष मैं जबलपुर, मध्य प्रदेश में हर ठंड के मौसम में गोल बाजार में लगने वाले तिब्बती मार्केट जाता हूं, जहां गर्म कपड़े काफी कम दामों में और अच्छी क्वालिटी के मिल जाते हैं। तिब्बती मार्केट में खरीदे हुए सामान को जिस थैले में रखकर हम सभी को देते हैं, उसमें उनके देश का नक्शा बना हुआ है। यह केवल नक्शा नहीं, उनकी भावना है, जो उसे जीवंत करने के लिए तीन पीढ़ियों से संघर्षरत हैं। इतने वर्षों में उनका आत्मविश्वास तनिक भी कम नहीं हुआ है।

तिब्बत मार्केट में मिलने वाला थैला

आज तिब्बत का स्वतंत्रता आंदोलन, जो पिछले 60 सालों से अपने देश से दूर दूसरे देश की धरती पर भी जारी है, बल्कि समय बढ़ते-बढ़ते उनका आत्मविश्वास और बढ़ रहा है। मानो वे चीन से कह रहे हों— “कब तक रोकोगे हमें? हम अपने देश पर जरूर आएंगे।”

जब तिब्बत जैसा देश, जो भूमिहीन होकर भी अपनी अस्मिता के लिए लड़ रहा है, संघर्ष कर रहा है, अपनी संस्कृति को बनाए रखने के साथ-साथ अपनी भूमि के बिना भी उसे अपनी मां मानकर नक्शे के रूप में सदा अपने दिल में धारण किए हुए है, तो हमारे जैसा विशाल राष्ट्र, जिससे दुनिया के कई देशों को प्रेरणा मिली है, आज नहीं तो कल अखंड भारत के सपने को हम पूरा कर पाएंगे।

सन 1971 में बांग्लादेश अखंड भारत के सपने को पूरा करने के लिए एक कदम आगे बढ़ चुका है। उसी तरह पाकिस्तान को भी अपने पुराने घर में लौटना होगा, अपनी संस्कृति को समझकर उस पर गर्व करना होगा। तभी हम इस व्यक्तिगत स्वराज को परिवर्तित कर सामूहिक स्वराज में परिवर्तित कर पाएंगे और भारत को पुनः अखंड बनाएंगे।

जाते-जाते अटल जी की कविता, जिसका मैंने शुरुआत में प्रारंभ किया था, उसकी अंतिम कुछ पंक्तियों को संकल्प के रूप में दिया जा रहा है—

“बस इसी लिए तो कहता हूं
आजादी अभी अधूरी है।
कैसे उल्लास मनाऊं मैं?
थोड़े दिन की मजबूरी है।

दिन दूर नहीं, खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएंगे,
गिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएंगे।

उस स्वर्ण दिवस के लिए
आज से कमर कसें, बलिदान करें।
जो पाया उसमें खो न जाएं,
जो खोया उसका ध्यान करें।”

Tags: अखंड भारतअटल बिहारी वाजपेईजिन्नातिब्बतनेहरूबंटवाराभारतभारत-पाकिस्तानमाउंटबेटनविभाजन विभीषिका स्मृति दिवसस्वतंत्रता संग्राम
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

Independence Day से पहले दिल्ली में बम धमकियों से हड़कंप, हाई कोर्ट समेत 6 जगहों को ईमेल से धमकी

संबंधित पोस्ट

edit post
Independence Day से पहले दिल्ली में बम धमकियों से हड़कंप
चर्चित

Independence Day से पहले दिल्ली में बम धमकियों से हड़कंप, हाई कोर्ट समेत 6 जगहों को ईमेल से धमकी

14 August 2026

स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली में बम धमकियों से हड़कंप मच गया। राजधानी में छह अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों को ईमेल के जरिए बम से...

edit post
सावन में चिकन-मटन की दुकानें बंद कराने के नोटिस
चर्चित

सावन में चिकन-मटन की दुकानें बंद कराने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

14 August 2026

सावन महीने में अमरोहा में चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को इलाहाबाद...

edit post
अमेरिका का बड़ा दावा
चर्चित

अमेरिका का बड़ा दावा: चीन पर टैरिफ से बचाने वाले 40 से ज्यादा देशों पर नजर, भारत भी सूची में

14 August 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ समेत 40 से ज्यादा व्यापारिक साझेदारों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी प्रशासन...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Logged in as Sambhrant Mishra. Edit your profile. Log out? Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

RAW Chief’s Dhaka Visit: Is India Rebuilding Security Ties With Bangladesh? Reset or Routine?

RAW Chief’s Dhaka Visit: Is India Rebuilding Security Ties With Bangladesh? Reset or Routine?

00:03:30

Kargil From the Sky: Inside IAF’s Operation Safed Sagar

00:05:36

India Eyes Sixth-Generation Fighters: Why FCAS Matters Beyond AMCA

00:05:03

Beyond S-400: Why India's Indigenous Kusha Missile Could Change Air Defence

00:03:42

Rigvedic Names in Denmark? Nick Collins on India’s Forgotten Links With Europe

00:32:39
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited