अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान से जुड़े रणनीतिक जलमार्गों पर लगभग नियंत्रण हासिल कर चुका है और जल्द ही पूरी तरह नियंत्रण में ले सकता है। उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने यह बात अपने पूर्व निजी वकील माइकल कोहेन के साथ एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि जब अमेरिका ने बी-2 बमवर्षकों से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब ईरान परमाणु हथियार बनाने से करीब दो सप्ताह दूर था।
ईरान के साथ समझौता करना मुश्किल क्यों?
ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और उसके नेतृत्व को सैन्य कार्रवाई में काफी नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि ईरान के कई बड़े नेता अब नहीं रहे, इसलिए उसके साथ बातचीत के जरिए समझौता करना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि ईरान का नेतृत्व कौन कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, यही वजह है कि दोनों देशों के बीच बातचीत और समझौते की प्रक्रिया आसान नहीं है।
अमेरिका में बढ़ सकती हैं पेट्रोल और ऊर्जा की कीमतें
ट्रंप ने यह भी माना कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का असर अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अमेरिका में ऊर्जा और पेट्रोल की कीमतें कुछ बढ़ सकती हैं।
ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है, भले ही इसके लिए अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ समय के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़े।
ट्रंप ने बी-2 बमवर्षकों के हमले का किया बचाव
ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बी-2 बमवर्षकों से किए गए हमले का भी बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि सभी बम अपने निर्धारित लक्ष्यों पर गिरे थे।
उन्होंने कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता तो वह इजरायल और मध्य पूर्व के दूसरे देशों के लिए बड़ा खतरा बन जाता। ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन का भी जिक्र किया और कहा कि इन देशों पर ईरान की मिसाइलों से हमले हुए थे।
ट्रंप बोले- इजरायल को बचाने के लिए कार्रवाई जरूरी थी
ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ता। उन्होंने कहा कि इजरायल के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
ट्रंप ने अपनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि अगर उन्हें फिर से ऐसा फैसला लेने का मौका मिलता, तो वह दोबारा भी यही कदम उठाते।
माइकल कोहेन कौन हैं?
माइकल कोहेन कई वर्षों तक डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील और करीबी सहयोगी रहे हैं। बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद कोहेन ने ट्रंप के खिलाफ गवाही दी और उनके प्रमुख आलोचकों में शामिल हो गए।
ट्रंप ने कोहेन के साथ बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ अपनी नीति, परमाणु हथियारों के खतरे और अमेरिका पर पड़ने वाले आर्थिक असर को लेकर अपना पक्ष रखा।
































