विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिका के नए कानून को लेकर चर्चा हुई, जिसका असर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब रुबियो के जल्द ही भारत आने की उम्मीद है।
जयशंकर ने रुबियो के सामने Sanctioning Russia and Iran Act (SRIA) को लेकर भारत की चिंताएं रखीं। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने SRIA को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका और भारत अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
नए अमेरिकी कानून में क्या है?
Sanctioning Russia and Iran Act 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कानून बनाया है। यह कानून रूस और ईरान से जुड़े मामलों में अमेरिका को प्रतिबंध, टैरिफ और अन्य कार्रवाई करने की ज्यादा ताकत देता है।
कानून में रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा क्षेत्र और उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल की ढुलाई के लिए किया जाता है।
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून अमेरिका को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता देता है, जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं। भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लग जाएगा। कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसा करने का अधिकार देता है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिका को लेना होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
भारत लगातार कहता रहा है कि रूस से तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा फैसला है। भारत का कहना है कि वह अलग-अलग देशों से तेल खरीदता है और कीमत तथा बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है।
रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और भारत के बीच पहले भी मतभेद रहे हैं। अगस्त में राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
अमेरिका का आरोप रहा है कि रूस से तेल खरीदकर भारत अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध क्षमता को बनाए रखने में मदद कर रहा है। भारत इन आरोपों के बीच अपने व्यापार और आर्थिक हितों की सुरक्षा की बात कहता रहा है।
अब आगे क्या होगा?
मार्को रुबियो के अक्टूबर में भारत आने की उम्मीद है। यह इस साल उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। माना जा रहा है कि उनकी यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हो सकती है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर भी चर्चा होगी।
इस समय भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी अगले महीने की शुरुआत में भारत आने की संभावना बताई जा रही है।
ऐसे में जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात किसी अंतिम समाधान के बजाय दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर आगे होने वाली बातचीत की शुरुआत के तौर पर देखी जा सकती है। भारत ने साफ कर दिया है कि रूस से तेल खरीदने और नए अमेरिकी प्रतिबंध कानून को लेकर उसकी चिंताएं अमेरिका के सामने दर्ज हैं।






























