भारत के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) को लेकर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया है कि इसके पहले प्रोटोटाइप की पहली उड़ान सितंबर 2028 तक होगी। उन्होंने कहा कि 5.5 जनरेशन के इस विमान पर काम तेज़ी से चल रहा है। इसी के साथ सवाल यह भी है कि जब AMCA आ रहा है, तो भारत तेजस Mk1A और राफेल पर भी एक साथ पैसा क्यों लगा रहा है।
जवाब यह है कि तीनों विमानों की भूमिका और समय-सीमा अलग है। तेजस से वायुसेना में स्वदेशी विमानों की संख्या बढ़ेगी, राफेल अभी आधुनिक क्षमता देता है और AMCA आगे की स्टील्थ ज़रूरत के लिए है।
AMCA: स्वदेशी स्टील्थ फाइटर
AMCA दो इंजन वाला स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे पांचवीं पीढ़ी की तकनीक पर बनाया जा रहा है। रक्षा सचिव के मुताबिक पहले नमूने की उड़ान सितंबर 2028 तक होनी है।
इसका डिज़ाइन ऐसा रखा गया है कि रडार पर इसका सिग्नल बहुत कम दिखे। हथियार विमान के अंदर ही लगेंगे, बाहर नहीं, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ना मुश्किल होगा। विमान में आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अलग-अलग सेंसरों की जानकारी को एक साथ जोड़ने वाली प्रणाली लगाई जाएगी।
शुरुआती AMCA में GE का F414 इंजन लगाने का प्रस्ताव है। आगे के बेहतर संस्करण के लिए भारत ज़्यादा ताकतवर इंजन बनाने पर काम कर रहा है।
AMCA बनने के बाद पांचवीं पीढ़ी के फाइटर के लिए भारत को पूरी तरह किसी विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही विमान डिज़ाइन, इंजन, रडार और हथियार प्रणालियों की तकनीक भी देश में ही विकसित होगी।
राफेल: अभी की ज़रूरत
AMCA को तैयार होने में वक्त लगेगा, जबकि वायुसेना को आने वाले सालों में आधुनिक विमान चाहिए। राफेल यही कमी पूरी करता है।
भारत फ्रांस से 114 और राफेल खरीदने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। रक्षा सचिव के अनुसार इस सौदे से देश में लड़ाकू विमानों की दूसरी बड़ी उत्पादन लाइन बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने साफ किया कि इससे तेजस और AMCA जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों पर असर नहीं पड़ेगा।
राफेल को आमतौर पर 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर माना जाता है। यह हवा से हवा की लड़ाई, ज़मीनी ठिकानों पर हमले और लंबी दूरी के मिशन, तीनों में इस्तेमाल हो सकता है।
इसमें दो Safran M88 इंजन लगे हैं। दो इंजन होने से ताकत ज़्यादा मिलती है और लंबे मिशन में भरोसा भी रहता है। भारतीय राफेल में Meteor हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, SCALP क्रूज़ मिसाइल और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम शामिल हैं।
राफेल का फायदा यह है कि वायुसेना को आधुनिक क्षमता आज ही मिल जाती है, भविष्य की तकनीक का इंतज़ार नहीं करना पड़ता। भारत में इसके निर्माण से विमान उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी और निजी कंपनियों को भी काम मिलेगा।
तेजस Mk1A: स्वदेशी उत्पादन का आधार
तेजस Mk1A हल्का, सिंगल इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर है। इसमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम है।
इसकी अहमियत सिर्फ इस्तेमाल में नहीं, देश में बनने में भी है। जितने ज़्यादा तेजस बनेंगे, उतना ही भारत का विमान निर्माण ढांचा मज़बूत होगा और आगे बड़े विमान बनाने के लिए ज़रूरी औद्योगिक क्षमता तैयार होगी।
तेजस Mk1A में GE का F404-IN20 इंजन लगता है, जो आफ्टरबर्नर वाला टर्बोफैन इंजन है। बड़ी संख्या में शामिल होने पर यह वायुसेना के पुराने विमानों पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है। इसके साथ देश में निर्माण, रखरखाव और कल-पुर्ज़ों का पूरा तंत्र भी खड़ा होता है।
रक्षा सचिव के अनुसार इंजन की उपलब्धता बढ़ने से तेजस Mk1A की सप्लाई में तेज़ी आने की उम्मीद है। साल के अंत तक कम से कम एक पूरी स्क्वाड्रन मिलने की संभावना बताई गई है।
तीनों विमान क्यों जरुरत क्यों ?
सवाल यही है कि जब भारत AMCA जैसा अत्याधुनिक विमान बना रहा है, तो तेजस और राफेल पर भी इतनी बड़ी तैयारी क्यों? इसका जवाब तीनों की अलग भूमिका और अलग समय-सीमा में है। तेजस का काम बड़ी संख्या में स्वदेशी लड़ाकू विमान उपलब्ध कराना है। राफेल का काम अभी और निकट भविष्य में उच्च क्षमता वाली लड़ाकू ताकत को मजबूत करना है। वहीं AMCA को आने वाले दशकों के लिए स्टील्थ और पांचवीं पीढ़ी की क्षमता तैयार करनी है।
तेजस का काम बड़ी संख्या में स्वदेशी फाइटर उपलब्ध कराना है। राफेल अभी और निकट भविष्य में ऊंची क्षमता वाली ताकत देता है। AMCA को आने वाले दशकों के लिए स्टील्थ और पांचवीं पीढ़ी की क्षमता तैयार करनी है। तीनों एक-दूसरे का विकल्प नहीं हैं।
तीनों विमानों के इंजन में भी छिपी है बड़ी कहानी
भारत के लिए लड़ाकू विमान बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसका इंजन बनाना भी है। फिलहाल तेजस Mk1A में अमेरिकी GE F404 और AMCA के शुरुआती संस्करण में GE F414 जैसे विदेशी इंजन पर निर्भरता बनी हुई है। राफेल में फ्रांस के Safran के M88 इंजन इस्तेमाल होते हैं।
यही कारण है कि भविष्य के लिए भारत की चुनौती केवल विमान के ढांचे तक सीमित नहीं है। उच्च क्षमता वाला लड़ाकू विमान इंजन विकसित करना सबसे कठिन तकनीकी क्षेत्रों में से एक है। AMCA के आगे के संस्करणों के लिए ज्यादा शक्तिशाली इंजन विकसित करने की कोशिश इसी बड़ी जरूरत से जुड़ी है।
विमान का ढांचा बनाना एक बात है, इंजन बनाना दूसरी। फिलहाल तेजस Mk1A में अमेरिकी GE F404 और AMCA के शुरुआती संस्करण में GE F414 लगेगा। राफेल में फ्रांस की Safran का M88 इंजन है, यानी तीनों में विदेशी इंजन ही हैं।
हाई-थ्रस्ट फाइटर इंजन बनाना सबसे मुश्किल तकनीकी कामों में गिना जाता है। AMCA के आगे के संस्करणों के लिए ज़्यादा ताकतवर इंजन विकसित करने की कोशिश इसी वजह से हो रही है।
कुल मिलाकर भारत का लक्ष्य सिर्फ ज़्यादा विमान लेना नहीं है, बल्कि डिज़ाइन और निर्माण से लेकर इंजन और हथियारों तक अपना मज़बूत घरेलू ढांचा बनाना है।





























