भारतीय वायुसेना को स्वदेशी HTT-40 ट्रेनर विमान मिलने शुरू हो गए हैं, लेकिन इन विमानों से नए पायलटों की ट्रेनिंग शुरू होने में अभी समय लगेगा। 18 सितंबर को बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने वायुसेना को पहले तीन HTT-40 विमान सौंपे थे। यह परियोजना एक दशक से भी ज्यादा समय से इंतजार कर रही थी। हालांकि, 21 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन विमानों से नए पायलटों की ट्रेनिंग पूरी तरह शुरू होने में करीब दो साल तक लग सकते हैं।
इसकी मुख्य वजह यह है कि विमानों को सीधे नए कैडेट्स के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पहले अनुभवी फ्लाइंग इंस्ट्रक्टरों को इन विमानों को उड़ाने और इनके जरिए प्रशिक्षण देने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद नए पायलटों के लिए पाठ्यक्रम और उड़ान से जुड़े नियम तैयार किए जाएंगे।
अभी नए पायलटों की ट्रेनिंग क्यों नहीं होगी?
HAL ने जो तीन HTT-40 विमान वायुसेना को सौंपे हैं, उन्हें चेन्नई के पास तांबरम स्थित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल भेजा जाएगा। यहां पहले प्रशिक्षकों को इन विमानों को उड़ाने और इनसे पायलटों को प्रशिक्षण देने की जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद हैदराबाद के पास स्थित एयर फोर्स अकादमी में नए पायलटों की ट्रेनिंग शुरू करने की तैयारी होगी। इसके लिए वायुसेना को करीब 25 से 30 HTT-40 विमानों का बेड़ा और पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर चाहिए।
इसके अलावा, नए विमान के लिए उड़ान संचालन के नियम और प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम भी तैयार करना होगा। यानी केवल विमान मिलने से ट्रेनिंग शुरू नहीं हो सकती। प्रशिक्षकों को तैयार करना और प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था बनाना भी जरूरी है।
अमेरिकी इंजन की कमी से रुका उत्पादन
HTT-40 परियोजना की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक इंजन की कमी रही है। इस विमान का डिजाइन और असेंबली भारत में होती है, लेकिन इसमें अमेरिका की कंपनी हनीवेल का TPE331-12B टर्बोप्रॉप इंजन लगाया जाता है।
अमेरिकी कंपनी की सप्लाई चेन में आई समस्याओं के कारण HAL को समय पर इंजन नहीं मिल पाए। इसका असर विमान बनाने और वायुसेना को उनकी आपूर्ति करने की समयसीमा पर पड़ा।
वायुसेना ने 2023 में HAL को 70 HTT-40 विमान बनाने का ऑर्डर दिया था। इस सौदे की कीमत 6,838 करोड़ रुपये थी। योजना के मुताबिक, HAL को वित्त वर्ष 2025-26 में 12 विमान देने थे, लेकिन इंजन की कमी के कारण एक भी विमान की डिलीवरी नहीं हो सकी। इसके बाद लक्ष्य घटाकर तीन विमान कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, हनीवेल ने कुछ महीने पहले इंजनों की पहली खेप भेजी और आगे समय पर सप्लाई का भरोसा दिया। अधिकारियों का कहना है कि अगर इंजन लगातार मिलते रहें, तो HAL हर साल करीब 20 HTT-40 विमान बना सकता है। विमान पूरी तरह संचालन के लिए तैयार होने के बाद 36 और विमानों का ऑर्डर देने की भी योजना है।
HTT-40 परियोजना में पहले भी हुई देरी
HTT-40 का सफर आसान नहीं रहा है। पुराने HPT-32 ट्रेनर विमानों को सुरक्षा कारणों से उड़ान से हटाए जाने के बाद HAL ने उनके विकल्प के रूप में HTT-40 पर काम शुरू किया था।
2012 में रक्षा मंत्रालय और वायुसेना ने HAL के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। उनका मानना था कि HTT-40 की कीमत स्विट्जरलैंड के 75 Pilatus PC-7 Mk II विमानों से भी ज्यादा पड़ेगी। इसके बाद वायुसेना ने स्विस विमान खरीदने का फैसला किया, लेकिन HAL ने स्वदेशी HTT-40 का विकास जारी रखा।
इस विमान को तकनीकी मंजूरी मिलने में भी समय लगा। सितंबर 2019 में इसके प्रोटोटाइप ने छह बार लगातार स्पिन करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद अगस्त 2021 तक स्पिन सर्टिफिकेशन से जुड़ी उड़ान जांच पूरी कर ली गई। आखिरकार मार्च 2023 में इसे बनाने का ऑर्डर दिया गया।
वायुसेना में पायलटों की ट्रेनिंग कैसे होती है?
भारतीय वायुसेना में पायलटों को अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए कई तरह के ट्रेनर विमानों का इस्तेमाल होता है।
पहला चरण: बेसिक ट्रेनिंग
अब तक नए पायलटों की शुरुआती ट्रेनिंग मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड में बने Pilatus PC-7 Mk II विमानों से होती रही है। HTT-40 को इस भूमिका में शामिल किया जाना है। यह विमान PC-7 Mk II की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, बल्कि उसके साथ इस्तेमाल किया जाएगा। वायुसेना के पास ऐसे 75 स्विस विमान हैं।
दूसरा चरण: इंटरमीडिएट ट्रेनिंग
इसके बाद लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए चुने गए पायलट PC-7 Mk II और भारत में बने Kiran Mk-1A जेट ट्रेनर जैसे विमानों पर प्रशिक्षण लेते हैं। Kiran पुराना विमान है और इसे बदलने के लिए अभी तक नया विमान उपलब्ध नहीं हो पाया है।
तीसरा चरण: एडवांस ट्रेनिंग
अगले चरण में पायलट ब्रिटेन में बने Hawk एडवांस्ड जेट ट्रेनर पर प्रशिक्षण लेते हैं। इसके बाद वे लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए आगे बढ़ते हैं।
इस तरह वायुसेना की प्रशिक्षण व्यवस्था में PC-7 Mk II, Kiran Mk-1A, Hawk और नए HTT-40 जैसे विमान शामिल हैं। इसके अलावा, लड़ाकू विमानों के दो सीटों वाले ट्रेनिंग संस्करण भी इस्तेमाल किए जाते हैं।
स्वदेशी इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर की कमी भी चुनौती
वायुसेना के सामने एक और चुनौती स्वदेशी इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर की कमी है। HJT-36 विमान का विकास भी देरी का सामना कर रहा है। इस कारण पायलटों की ट्रेनिंग के दूसरे चरण में इस्तेमाल होने वाले विमानों की कमी दूर नहीं हो सकी है।
इसी बीच HAL ने HTT-40 के साथ Tejas Mk1 के अंतिम दो दो-सीट वाले ट्रेनर विमान भी वायुसेना को सौंपे हैं। इन विमानों का इस्तेमाल पायलटों को लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण देने में किया जाता है।
वायुसेना के लिए क्यों अहम है HTT-40?
HTT-40 भारत में विकसित ट्रेनर विमान है। इसका उद्देश्य शुरुआती प्रशिक्षण के लिए विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करना और देश में ही प्रशिक्षण विमानों की उपलब्धता बढ़ाना है।
लेकिन इस परियोजना ने यह भी दिखाया है कि किसी विमान का स्वदेशी डिजाइन होना ही पर्याप्त नहीं है। उसके जरूरी पुर्जों, खासकर इंजन की नियमित सप्लाई भी जरूरी है। अगर इंजन समय पर नहीं मिलते, तो तैयार विमान भी वायुसेना तक नहीं पहुंच पाते और पायलटों की ट्रेनिंग प्रभावित होती है।
फिलहाल पहले तीन HTT-40 विमानों से प्रशिक्षकों को तैयार किया जाएगा। तब तक नए पायलटों की शुरुआती ट्रेनिंग मुख्य रूप से स्विस PC-7 Mk II विमानों से जारी रहेगी। अब HAL के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन बढ़ाकर हर साल करीब 20 विमान देने और इंजन की सप्लाई नियमित बनाए रखने की है। इससे तय होगा कि स्वदेशी ट्रेनर विमान वायुसेना की जरूरतों को कितनी जल्दी पूरा कर पाते हैं।

































