राजनीति

गोर्बाचेव की कमजोर नीतियों और ‘घटिया नेतृत्व’ के कारण हुआ था USSR का विघटन, समझिए कैसे?

'पश्चिमी देशों के नायक और अपने देश के खलनायक' सोवियत संघ के आखिरी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव के लिए यह शब्द एकदम सटीक बैठते...

दंगों की राजधानी बन गया है झारखंड, NCRB के आंकड़े कर रहे हैं इसकी पुष्टि

देश का एक छोटा राज्य झारखंड, इस समय राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर झारखंड जहां राजनीतिक रूप से अस्थिरता...

आप नेता भी गजब हैं, पहले आरोप लगाते हैं फिर लिखित में क्षमा मांगते हुए बिलबिलाने लगते हैं

झूठ बोलो, बार-बार झूठ बोलो और इतना झूठ बोलो, इतना प्रोपेगेंडा फैलाओ की एक दिन उसे सच बना दो। पर कोई कितना भी...

पहले भारतीयों ने “चाय” को अस्वीकार कर दिया था, फिर ‘क्रूर पूंजीवाद’ ने सबकुछ बदल दिया

"अजी हम तो देसी हैं, हम चाय पीते हैं", इस वाक्यांश को आपने कई-कई बार सुना होगा, कभी न कभी स्वयं भी दोहराया...

‘अन्ना ने केजरीवाल को सलाह दी’ लेकिन केजरीवाल ने तो अपने ‘राजनीतिक गुरु’ को ही लात मार दी!

“राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता”, यह इस व्यवसाय का सबसे कटु सत्य है पर इसका सबसे निकृष्ट रूप हमें ऐसे...

‘भीख चाहिए तो ले लो पर व्यापार संभव नहीं’, भारत ने आतंक की फैक्ट्री पाकिस्तान को दिया स्पष्ट संदेश

'मजबूरी का नाम महात्मा गांधी' कहावत यूं ही नहीं कहा जाता है, यह कूटनीति की ऐसी दुविधा को दर्शाता है, जो भारत को...

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