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मराठा राजनीति के नए छत्रपति हैं देवेंद्र फडणवीस, जिनका कोई सानी नहीं है

Guest Author द्वारा Guest Author
15 October 2019
in मत
देवेंद्र फडणवीस
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2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के पक्ष में आने के बाद तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री चुनने की। राज्य में पहली बार सरकार का नेतृत्व करने जा रही भाजपा को दरकार थी एक ऐसे चेहरे की जो न केवल देश के दूसरे सबसे बड़े सियासी सूबे में पार्टी की जड़ों को मजबूत कर सके, बल्कि महाराष्ट्र को विकास के रास्ते पर भी तेजी से आगे ले जा सके। मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक मुख्यमंत्री पद को लेकर जिन दावेदारों के नाम की चर्चा प्रमुख रूप से हो रही थी वो थे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एकनाथ खडसे, स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे और तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस।

पार्टी ने काफी विचार-विमर्श और संघ की स्वीकृति के बाद नागपुर से तीन बार के विधायक और युवा देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लगा दी।

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वैसे तो उस चुनाव में यह नारा “दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र” खूब चला था लेकिन भाजपा ने चुनाव में देवेंद्र फडणवीस को सीएम  उम्मीदवार घोषित नहीं किया था, इसीलिए देश भर के राजनीतिक जानकार इस फैसले को अप्रत्याशित और जोखिम भरा बता रहे थे। उनके इस आंकलन के पीछे कई तर्क भी थे जैसे महाराष्ट्र की राजनीति में लगभग हमेशा ही मराठा नेताओं का वर्चस्व था और  फडणवीस आते हैं राज्य के महज 3% जनाधार वाले ब्राह्मण समुदाय से। जिस वजह से वो राज्य की किसी भी सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले में फिट नहीं बैठते थे दूसरी ओर उस समय फडनवीस की उम्र थी महज  44 वर्ष और उन्हें पूरे राज्य की राजनीति का बहुत ज्यादा अनुभव भी नहीं था। ऐसे में शरद पवार और अशोक चव्हाण सरीखे मंझे हुए सियासी सूरमाओं के सामने  एक युवा, अनुभवहीन, गैर मराठा,गैर ओबीसी नेता को राज्य की पहली भाजपा  सरकार की कमान देने का फैसला विरोधियों की समझ से परे था ।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति को करीब से जानने वाले कहते हैं कि मोदी वो कभी नहीं करते जिसकी उनके विरोधी उनसे अपेक्षा करते हैं, महाराष्ट्र के मामले में भी यही हुआ।

अब कहने को तो  फडनवीस के सिर सीएम का ताज सच चुका था लेकिन इस ताज में हीरों  की जगह जड़े थे कांटे। फडणवीस के सामने पार्टी के भीतर फैली गुटबाजी, शिवसेना जैसे कटु सहयोगी के साथ सुचारू रूप से सरकार चलाना , राज्य में एनसीपी, कांग्रेस के प्रभाव को सीमित करना और भ्रष्टाचार में लिप्त राज्य के प्रशासनिक तंत्र को साफ करने जैसी अनेकों चुनौतियां थीं।

देवेंद्र फडणवीस हर मोर्चे पर न सिर्फ इन सभी चुनौतियों से पूरी ताकत के साथ एक योद्धा की भांति लड़े बल्कि एक सफल परिणाम के साथ विजयी बनकर सबके सामने भी आए।

तो आइये हम भी बात करते हैं देवेंद्र फडणवीस के व्यक्तित्व की कुछ ऐसे खूबियों के बारे में जिनकी वजह से वो  आज देश के सबसे लोकप्रिय एवं ताकतवर मुख्यमंत्रियों में से एक है।

जनप्रिय नेता

महाराष्ट्र  के भूतपूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक के बाद बतौर सीएम पाँच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले, फडणवीस राज्य के मात्र दूसरे मुख्यमंत्री हैं।  पिछले 47 सालों में राज्य में कोई भी सीएम अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है।  यह तथ्य दर्शाता है कि महाराष्ट्र की जनता और नेताओं के बीच फडणवीस की  कितनी जबरदस्त पकड़ है। अतिशयोक्ति नहीं होगी यदि यह कहा जाए कि आर्थिक रूप से महाराष्ट्र के बेहद पिछड़े क्षेत्र विदर्भ से आने वाले फडणवीस आज राज्य के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।

यही कारण है कि 2014 के उलट इस बार के विधानसभा चुनावों से पहले ही भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

भाजपा की नई इलेक्शन मशीन

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बारे में कहा जाता है कि वह भाजपा के लिए एक इलेक्शन विनिंग मशीन की तरह हैं जो न सिर्फ भाजपा को उसके परंपरागत चुनावी क्षेत्रों में जीत दिलाना जानते हैं बल्कि वह भाजपा के लिए नए चुनावी क्षेत्रों और विषम परिस्थितियों में भी अपनी पार्टी को जीत दिलाने में माहिर हैं।

अब अगर महाराष्ट्र में चुनावों के लिहाज से भाजपा के प्रदर्शन पर नजर डालें तो भंडारा-गोंदिया का लोकसभा उपचुनाव जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर पार्टी ने फडणवीस  के नेतृत्व में लगभग सभी छोटे-बड़े चुनाव जीते हैं

राज्य में 2014 तक चौथे नंबर का दर्जा रखने वाली भाजपा ने पिछले 5 सालों में अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक नगर निकाय एवं महानगर पालिकायें जीती है यही कारण कि फडणवीस  के समर्थक यह कहते नहीं थकते कि आज के युवा मुख्यमंत्रियों में उनके जैसी चुनावी राजनीति की समझ रखने वाला दूसरा कोई नेता नहीं है

एक योग्य प्रशासक

देवेंद्र फडणवीस  ने अपने कार्यकाल में हर क्षेत्र में राज्य का विकास करने का एक सफल प्रयास किया है राज्य में एक ईमानदार सरकार का नेतृत्व करते हुए फडणवीस पर उनके विरोधी भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं सिद्ध कर सके हैं। फडणवीस ने राज्य में सड़कों और फ्लाईओवर के जाल बिछाने से लेकर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में नई सिंचाई परियोजना शुरू करने तक हर क्षेत्र में बेहद मुस्तैदी के साथ काम किया।

केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने से महाराष्ट्र की जनता को भी केंद्र की योजनाओं का पूरा और शीघ्रता से लाभ मिला। जहां एक तरफ कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें आयुष्मान भारत और किसान सम्मान निधि जैसे जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में हिचकिचा रही थीं,  वहीं महाराष्ट्र सरकार ने अटल पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत, मुद्रा लोन जैसी विभिन्न योजनाओं का लाभ बड़ी तत्परता से जनता तक पहुंचाया।

बेहतरीन राजनीतिक प्रबंधक

पाँच साल पहले राज्य में  122 सीटें जीतकर भाजपा ने सरकार तो बना ली थी लेकिन सरकार का कार्यकाल पूरा कर पाना, बिना विवाद के सरकार के फैसलों को विधानसभा से पारित करवा पाने जैसे कई विषयों पर संशय की स्थिति अब भी बरकरार थी।  इन विपरीत परिस्थितियों में भी देवेंद्र फडणवीस ने अपने कुशल राजनीतिक प्रबंधन का परिचय देते हुए तकरीबन हर मुद्दे पर न केवल शिवसेना को अपने पक्ष में करने में सफल रहे बल्कि कई मुद्दों पर उनके विरोध को लेकर एनसीपी और कांग्रेस के नेता भी अलग-अलग भाषा बोलते हुए नजर आए।

राज्य में मराठा आरक्षण आंदोलन हो किसान आंदोलन को या फिर भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा फडणवीस ने  बेहद तत्परता और परिपक्वता  से इन आंदोलनों को संभाला और इन्हें विपक्ष का चुनावी मुद्दा नहीं बनने दिया।

यह फडणवीस की राजनीतिक सूझबूझ का ही कमाल था कि पिछले पांच सालों में राज्य के नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटील और सातारा से तीन बार के सांसद उदयनराजे भोसले जैसे विपक्ष के अनेक कद्दावर नेता एक के बाद भाजपा का दामन थामते हुए नजर आये।

कुशल एवं प्रभावी वक्ता

फडणवीस आज की राजनीति के सबसे बेहतरीन वक्ताओं में से एक माने जाते हैं। प्रभावी ढंग से जनता से सीधा संवाद स्थापित करना हो या शिवसेना के विरोधाभासओं को नजरअंदाज करके हर विषय पर अपनी पार्टी की स्पष्ट राय रखनी हो, फडणवीस संवाद की कला में अपने समकालीन नेताओं से काफी आगे नजर आते हैं।

अपनी हाजिर जवाबी और हास्यप्रद संवाद शैली के बावजूद अपने पूरे कार्यकाल में फडणवीस ने शायद ही ऐसा कोई बयान दिया हो जिसको लेकर पार्टी की फजीहत हुई हो। हिंदी गानों के शौकीन फडणवीस कहते हैं कि आंकड़ों के खेल में कोई उनका हाथ नहीं पकड़ सकता क्योंकि सरकार के लगभग सभी विभागों से जुड़े आवश्यक आंकड़े उन्हें हर समय याद होते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी जैसी शासन शैली और जनता से जुड़ने की कला हो, अमित शाह जैसे चुनावी राजनीति की समझ या फिर स्वर्गीय अरुण जेटली जैसी राजनीतिक प्रबंधन और प्रभावी संवाद की कला, फडणवीस में एक सफल राजनेता के सभी गुण मौजूद हैं। यही कारण है कि उनके प्रशंसक उनमें  भविष्य का प्रधानमंत्री देखते हैं तो विपक्षी नेता भी दबी जुबान यह कहते हुए दिख जाते हैं कि महाराष्ट्र में फिलहाल फडणवीस का दूर-दूर तक कोई विकल्प नहीं हैं।

Tags: देवेंद्र फडणवीसमहाराष्ट्र
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