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बजट 2023: भारत ने लैटिन अमेरिका के लिए बजट में 7 प्रतिशत की वृद्धि क्यों की?

इसके पीछे का मास्टर प्लान समझ लीजिए।

Yogesh Sharma द्वारा Yogesh Sharma
5 February 2023
in विश्व, समीक्षा
India's Latin American Gambit: Uncovering Secrets behind Aid Diplomacy

Source- TFI

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भारत अब वैश्विक कूटनीति से दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं बना रहा हैं। विश्व पर एकक्षत्र राज करने की रणनीतियों पर काम कर रहे अमेरिका को भी अब भारत कूटनीतिक स्तर पर मात देने का प्लान तैयार कर रहा है। अमेरिका पूरी दुनिया पर अपनी दादागिरी चलाता आया है और वो चाहता है कि दुनिया उसके अनुसार ही चलें। भारत की बात की जायें तो भारत के साथ भी अमेरिका का बर्ताव कुछ ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। भारत के साथ कई कई मौकों पर उसका दोगलापन देकने को मिला है, जिसके चलते भारत ने अब उसे उसके ही घर में घेरने का प्लान तैयार कर लिया है। इस लेख में हम आपको बताएगें कि भारत कैसे लैटिन अमेरिका में अपनी धाक जमाकर अमेरिका की समस्याएं बढ़ाने की तैयारी में हैं।

और पढ़ें: सऊदी को कर दिया लेकिन अमेरिका ने भारत को नहीं किया ब्लैक लिस्ट, वजह जयशंकर हैं

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बजट में विदेशों को सहायता में आवंटन में कटौती की

दरअसल, हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2023-2024 का बजट पेश किया। इस दौरान  भारत ने 2022-23 में विदेशों को सहायता के लिए कुल आवंटन 6,005 करोड़ रुपये से घटाकर आगामी वित्त वर्ष 2023-24 में 5,848 करोड़ रुपये कर दिया है। यानी केंद्रीय बजट में विदेशों को सहायता में आवंटन के लिए 2.6 प्रतिशत की कटौती की गई है। परंतु यहां ध्यान देने योग्य बात ये है कि लैटिन अमेरिका के बजट में भारत ने 7 फीसदी बढ़ा दिया है। आपको यही समझाने का प्रयास करेंगे कि भारत ने ऐसा क्यों किया? इसके पीछे भारत की रणनीति क्या है? लेकिन इससे पहले ये समझ लेते हैं कि वित्त वर्ष 2023-2024 में भारत ने किस देश के बजट में कटौती की है और किसके बजट में बढ़ोतरी?

बता दें कि जिन देशों का आवंटन कम किया गया है, उनमें भूटान, अफगानिस्तान और मॉरीशस शामिल हैं। साथ ही, बांग्लादेश, नेपाल, संकटग्रस्त श्रीलंका, मंगोलिया और यूरेशियन, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों के लिए बजट आवंटन में वृद्धि की गई है। भूटान के लिए आवंटन 2022-23 में 2,500 करोड़ रुपये था, जिसे वित्त वर्ष 2023-24 में कम कर 2,400 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं अफगानिस्तान के लिए आवंटन को 350 करोड़ रुपये से घटाकर 200 करोड़ रुपये और मॉरीशस का 575 करोड़ रुपये से घटाकर 460 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

लैटिन अमेरिका के बजट में वृद्धि

वहीं इस बजट में सरकार ने 2022-23 में बांग्लादेश के लिए आवंटन 170 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2023-24 में 200 करोड़ रुपये, नेपाल के लिए 425 करोड़ रुपये से 550 करोड़ रुपये, श्रीलंका के लिए 75 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दिया है। मंगोलिया को 2.50 करोड़ रुपये से 7 करोड़ रुपये, जबकि अफ्रीकी देशों के आवंटन को 160 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यूरेशियन देशों के लिए इसे 65 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये कर दिया गया है और लैटिन अमेरिकी देशों के लिए आवंटन 7 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

और पढ़ें: अमेरिका की कुटिल चाल: चीन पर भारत के साथ रहो, पाकिस्तान पर ज्ञान दो

अमेरिका के प्रति बढ़ता असंतोष

अब आते हैं कि आखिर भारत लैटिन अमेरिका में अपनी धाक क्यों जमा रहा है? दरअसल, इस क्षेत्र में अमेरिका के प्रति असंतोष देखने को मिल रहा है। क्यूबा से लेकर ब्राजील और मेक्सिको तक में ‘अमेरिकी विरोधी’ भावनाओं ने अमेरिका को परेशान कर रखा है। इन क्षेत्रों में पैदा हुए असंतोष के पीछे की वजह ये है कि अमेरिका का इन सभी देशों में एकछत्र राज चलता है और उसकी यही दादागिरी उसके प्रति नकारात्मक भावनाओं को जन्म दे चुकी है। क्यूबा हमेशा ही अमेरिका की दादागिरी को लेकर परेशान रहा है लेकिन क्यूबा ही नहीं ब्राजील और मेक्सिको में भी अब कुछ ऐसी ही स्थिति बनने लगी है।

ब्राजील में हो रहे इस विरोध के पीछे का कारण ये है कि वहां की विपक्षी पार्टियों समेत समाज के एक बड़े वर्ग का मानना है कि अमेरिका ने ब्राजील के राष्ट्रीय चुनावों को प्रभावित किया है। क्योंकि ब्राजील की वर्तमान सरकार के बारे में बताया जाता है कि उसका झुकाव अमेरिका की ओर है। लेकिन अब ब्राजीलियन जनता की नाराजगी अमेरिका के लिए संकट बनती जा रही है। ये नाराजगी इतनी बढ़ चुकी है कि हाल ही में ब्राजील की संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पर विद्रोहियों ने हमला बोल दिया और ब्राजील की सरकार की भयंकर किरकिरी हो गई। इस विरोध का मूल कारण अमेरिका ही था।‌

अब आपको बताते हैं कि मेक्सिको में क्यों अमेरिका को लेकर असंतोष है? मेक्सिकन घुसपैठियों का मुद्दा अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी उठाती रहती है। मेक्सिकन घुसपैठियों को बाहर फेंकने की जैसी मांग करती रहती है। आरोप लगाए जाते हैं कि जो घुसपैठिए मेक्सिको से आते हैं, वे ड्रग्स का व्यापार करते हैं, जिससे अमेरिका ड्रग्स की चपेट में जाता दिख रहा है। इसके कारण रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के बीच टकराव तो है लेकिन ड्रग्स जैसे बिजनेस के कारण मेक्सिकन बाइडन प्रशासन के निशाने पर हैं। इसके चलते मेक्सिकन लोगों की संख्या अमेरिका में कम होती जा रही है। यही वजह है मेक्सिको में अमेरिका में असंतोष की स्थिति है।

और पढ़ें: “भारत एक महाशक्ति है”, अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर स्वीकार कर लिया भारत का पक्ष

भारत बढ़ाना चाहता है निर्यात

अब हम लैटिन अमेरिका में अमेरिका के प्रति उत्पन्न असंतोष के बीच भारत का लैटिन अमेरिका के नजदीक आने के मायने क्या हैं? वो समझते हैं दरअसल, भारत लैटिन अमेरिका में अपना निवेश बढ़ाकर वहां अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर तलाश कर रहा है। बता दें कि भारत लैटिन अमेरिका को टेक्सटाइल, फार्मा, प्लास्टिक, मशीनरी, केमिकल्स का निर्यात करता है। जानकारों के मुताबिक भारत टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स व ज्वैलरी, लेदर गुड्स जैसे रोजगारपरक सेक्टर के निर्यात की बढ़ोतरी दर को जारी रखना चाहता है। इसलिए लैटिन अमेरिका में भारतीय निर्यात का पैर पसारना आवश्यक हो गया है।

बता दें कि भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 420 अरब डालर का वस्तु निर्यात किया है। भारत वहां लगातार अपना व्यापार बढ़ा रहा है। निर्यात की बात करें तो वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, लैटिन अमेरिका में भारत का निर्यात 2021-22 (अप्रैल-मार्च) में 18.89 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि 2020-21 में निर्यात 12.74 बिलियन डॉलर था। इसमें सीधे तौर पर 48% की प्रभावशाली वृद्धि हुई है। विदेश व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार लैटिन अमेरिका में भारत को अपना निर्यात बढ़ाने के लिए अभी पर्याप्त जगह है। लैटिन अमेरिका में भारत ब्राजील को सबसे अधिक भारत निर्यात करता है और ब्राजील में भी अमेरिका के प्रति भयंकर असंतोष है। भारत की कोशिश लैंटिन अमेरिका में अपने व्यापार का विस्तार करने की है, जिससे वहां अपनी पकड़ मजबूत की जा सके।

जिस नीति से अमेरिका भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध स्थापित कर भारत के लिए मुसीबतों का जाल बुनता था, कुछ वैसा ही अब अमेरिका के साथ भारत भी करने वाला है। अमेरिका भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान को समर्थन देता था। अमेरिका चाहता है कि दुनिया उसके इशारों पर नाचे। अमेरिका अपने व्यापार का विस्तार करने के लिए दूसरे देशों के हितों की जरा भी चिंता नहीं करता। अमेरिका में दूसरे देशों को युद्ध के लिए भड़काने जैसे आरोप भी लगे हैं। लेकिन अब भारत ने उसके जैसी ही नीति बनाने पर काम करना शुरू कर दिया है, जिससे स्वयं को दुनिया का चौधरी समझने वाले अमेरिका के घर में भारत अपनी पकड़ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इस क्षेत्र में चीन भी अपनी पैठ बनाने के प्रयास में है। लेकिन भारत की इस क्षेत्र में मौजूदगी उसके होश उड़ाने के लिए काफी है। भारत के विश्वस्तर पर बढ़ते कद से सबसे अधिक विचलित चीन और पश्चिमी देश ही दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत ने चीन और अमेरिका को उसके क्षेत्र में घुसकर भारत उसी के जाल में फंसाने की दिशा में काम कर रहा है। यही कारण है कि भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2023- 24 के बजट में लैटिन अमेरिका के बजट में 7 प्रतिशत का बढ़ोतरी किया है। ऐसे में ये देखना बेहद ही दिलचस्प होने वाला है कि आने वाले समय में भारत की इस रणनीति का क्या प्रभाव पड़ता है?

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