तालिबान पर प्रियंका का आक्रोश, लेकिन वायनाड और केरल की सच्चाई पर चुप्पी क्यों?
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ग्रेटर निकोबार परियोजना: सरकार ने ठोस आंकड़ों के साथ राहुल गांधी को दिया जवाब, इसे भारत के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया

    ग्रेटर निकोबार परियोजना: सरकार ने ठोस आंकड़ों के साथ राहुल गांधी को दिया जवाब, इसे भारत के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया

    सत्ता के गलियारों से पुलिस के रडार तक: राजनीतिक विवाद के केंद्र में संदीप पाठक

    सत्ता के गलियारों से पुलिस के रडार तक: राजनीतिक विवाद के केंद्र में संदीप पाठक

    बंगाल में ‘महामुकाबला’: एग्जिट पोल के बाद सुलगती सियासत और बांग्लादेश में मची खलबली

    बंगाल में ‘महामुकाबला’: एग्जिट पोल के बाद सुलगती सियासत और बांग्लादेश में मची खलबली

    बंगाल चुनाव में ‘बांग्लादेशी’ ट्विस्ट: निशिकांत दुबे के निशाने पर TMC, घुसपैठ के मुद्दे पर छिड़ा सियासी संग्राम

    बंगाल चुनाव में ‘बांग्लादेशी’ ट्विस्ट: निशिकांत दुबे के निशाने पर TMC, घुसपैठ के मुद्दे पर छिड़ा सियासी संग्राम

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    IMF रैंकिंग का भ्रम और भारतीय अर्थव्यवस्था की हकीकत: छठी रैंक महज एक सांख्यिकीय ‘ग्लिच’, तीसरे स्थान की ओर भारत की रफ्तार बरकरार

    IMF रैंकिंग का भ्रम और भारतीय अर्थव्यवस्था की हकीकत: छठी रैंक महज एक सांख्यिकीय ‘ग्लिच’, तीसरे स्थान की ओर भारत की रफ्तार बरकरार

    साउथ एशिया का ‘एनर्जी गार्जियन’ बना भारत: संकट के दौर में पड़ोसियों को दी नई जीवनरेखा

    साउथ एशिया का ‘एनर्जी गार्जियन’ बना भारत: संकट के दौर में पड़ोसियों को दी नई जीवनरेखा

    किस्मत भारत पर मेहरबान: वैश्विक गैस कीमतों में गिरावट से बदला खेल, LPG संकट से उबरने की नई रणनीति

    किस्मत भारत पर मेहरबान: वैश्विक गैस कीमतों में गिरावट से बदला खेल, LPG संकट से उबरने की नई रणनीति

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डार्क ईगल का उदय: क्या 15 मिलियन डॉलर की हाइपरसोनिक मिसाइल ईरान के साथ जारी गतिरोध को खत्म कर पाएगी?

    डार्क ईगल का उदय: क्या 15 मिलियन डॉलर की हाइपरसोनिक मिसाइल ईरान के साथ जारी गतिरोध को खत्म कर पाएगी?

    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    नौ साल, 516 अधिकारी: मॉरीशस में भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति की पूरी कहानी

    नौ साल, 516 अधिकारी: मॉरीशस में भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति की पूरी कहानी

    बंगाल की खाड़ी में गूंजेगी भारत की ताक़त, पाकिस्तान में ख़लबली : GNSS जैमिंग एक्सरसाइज से बदलेगा युद्ध का भविष्य

    बंगाल की खाड़ी में गूंजेगी भारत की ताक़त, पाकिस्तान में ख़लबली : GNSS जैमिंग एक्सरसाइज से बदलेगा युद्ध का भविष्य

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी पर पाकिस्तान में बड़ा हमला: लश्कर आतंकी अमीर हमजा को मारी गई गोली

    भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी पर पाकिस्तान में बड़ा हमला: लश्कर आतंकी अमीर हमजा को मारी गई गोली

    Donald Trump Iran ceasefire

    हॉर्मुज टोल टैक्स: अपनी जान छुड़ाने के लिए ट्रम्प पूरी दुनिया को फिरौती, महंगाई के नए दलदल में बेरहमी से झोंक चुके हैं

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    सीबीएसई कक्षा 12 के परिणाम 2026 जल्द आने की संभावना, सत्यापन अंतिम चरण में

    सीबीएसई कक्षा 12 के परिणाम 2026 जल्द आने की संभावना, सत्यापन अंतिम चरण में

    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    एग्जिट पोल का विज्ञान: कैसे तय होते हैं हार-जीत के आंकड़े और क्यों ‘साइलेंट वोटर’ बिगाड़ देता है सारा गणित?

    एग्जिट पोल का विज्ञान: कैसे तय होते हैं हार-जीत के आंकड़े और क्यों ‘साइलेंट वोटर’ बिगाड़ देता है सारा गणित?

    नेहरू की ‘इतिहास दृष्टि’ पर असहज सवाल: डॉ. राकेश कुमार आर्य की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी’

    नेहरू की ‘इतिहास दृष्टि’ पर असहज सवाल: डॉ. राकेश कुमार आर्य की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी’

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आईपीएल 2026: चेन्नई सुपर किंग्स की दमदार वापसी, कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत का इंतजार जारी

    आईपीएल 2026: चेन्नई सुपर किंग्स की दमदार वापसी, कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत का इंतजार जारी

    अंतरिक्ष का ‘बरमूडा ट्रायंगल’: 480 किमी ऊपर सैटेलाइट्स को निगल रहा रहस्यमयी ज़ोन, वैज्ञानिक भी सतर्क

    अंतरिक्ष का ‘बरमूडा ट्रायंगल’: 480 किमी ऊपर सैटेलाइट्स को निगल रहा रहस्यमयी ज़ोन, वैज्ञानिक भी सतर्क

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    ग्रेटर निकोबार परियोजना: सरकार ने ठोस आंकड़ों के साथ राहुल गांधी को दिया जवाब, इसे भारत के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया

    ग्रेटर निकोबार परियोजना: सरकार ने ठोस आंकड़ों के साथ राहुल गांधी को दिया जवाब, इसे भारत के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया

    सत्ता के गलियारों से पुलिस के रडार तक: राजनीतिक विवाद के केंद्र में संदीप पाठक

    सत्ता के गलियारों से पुलिस के रडार तक: राजनीतिक विवाद के केंद्र में संदीप पाठक

    बंगाल में ‘महामुकाबला’: एग्जिट पोल के बाद सुलगती सियासत और बांग्लादेश में मची खलबली

    बंगाल में ‘महामुकाबला’: एग्जिट पोल के बाद सुलगती सियासत और बांग्लादेश में मची खलबली

    बंगाल चुनाव में ‘बांग्लादेशी’ ट्विस्ट: निशिकांत दुबे के निशाने पर TMC, घुसपैठ के मुद्दे पर छिड़ा सियासी संग्राम

    बंगाल चुनाव में ‘बांग्लादेशी’ ट्विस्ट: निशिकांत दुबे के निशाने पर TMC, घुसपैठ के मुद्दे पर छिड़ा सियासी संग्राम

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    IMF रैंकिंग का भ्रम और भारतीय अर्थव्यवस्था की हकीकत: छठी रैंक महज एक सांख्यिकीय ‘ग्लिच’, तीसरे स्थान की ओर भारत की रफ्तार बरकरार

    IMF रैंकिंग का भ्रम और भारतीय अर्थव्यवस्था की हकीकत: छठी रैंक महज एक सांख्यिकीय ‘ग्लिच’, तीसरे स्थान की ओर भारत की रफ्तार बरकरार

    साउथ एशिया का ‘एनर्जी गार्जियन’ बना भारत: संकट के दौर में पड़ोसियों को दी नई जीवनरेखा

    साउथ एशिया का ‘एनर्जी गार्जियन’ बना भारत: संकट के दौर में पड़ोसियों को दी नई जीवनरेखा

    किस्मत भारत पर मेहरबान: वैश्विक गैस कीमतों में गिरावट से बदला खेल, LPG संकट से उबरने की नई रणनीति

    किस्मत भारत पर मेहरबान: वैश्विक गैस कीमतों में गिरावट से बदला खेल, LPG संकट से उबरने की नई रणनीति

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डार्क ईगल का उदय: क्या 15 मिलियन डॉलर की हाइपरसोनिक मिसाइल ईरान के साथ जारी गतिरोध को खत्म कर पाएगी?

    डार्क ईगल का उदय: क्या 15 मिलियन डॉलर की हाइपरसोनिक मिसाइल ईरान के साथ जारी गतिरोध को खत्म कर पाएगी?

    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    नौ साल, 516 अधिकारी: मॉरीशस में भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति की पूरी कहानी

    नौ साल, 516 अधिकारी: मॉरीशस में भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति की पूरी कहानी

    बंगाल की खाड़ी में गूंजेगी भारत की ताक़त, पाकिस्तान में ख़लबली : GNSS जैमिंग एक्सरसाइज से बदलेगा युद्ध का भविष्य

    बंगाल की खाड़ी में गूंजेगी भारत की ताक़त, पाकिस्तान में ख़लबली : GNSS जैमिंग एक्सरसाइज से बदलेगा युद्ध का भविष्य

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    समझौते की संभावना नहीं, फिर युद्ध की ओर ईरान अमेरिका

    भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी पर पाकिस्तान में बड़ा हमला: लश्कर आतंकी अमीर हमजा को मारी गई गोली

    भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी पर पाकिस्तान में बड़ा हमला: लश्कर आतंकी अमीर हमजा को मारी गई गोली

    Donald Trump Iran ceasefire

    हॉर्मुज टोल टैक्स: अपनी जान छुड़ाने के लिए ट्रम्प पूरी दुनिया को फिरौती, महंगाई के नए दलदल में बेरहमी से झोंक चुके हैं

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    सीबीएसई कक्षा 12 के परिणाम 2026 जल्द आने की संभावना, सत्यापन अंतिम चरण में

    सीबीएसई कक्षा 12 के परिणाम 2026 जल्द आने की संभावना, सत्यापन अंतिम चरण में

    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    पीयूष गोयल ने तेज किया GeM का कायाकल्प: AI टूल्स और व्यापक पहुंच के साथ सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की तैयारी

    एग्जिट पोल का विज्ञान: कैसे तय होते हैं हार-जीत के आंकड़े और क्यों ‘साइलेंट वोटर’ बिगाड़ देता है सारा गणित?

    एग्जिट पोल का विज्ञान: कैसे तय होते हैं हार-जीत के आंकड़े और क्यों ‘साइलेंट वोटर’ बिगाड़ देता है सारा गणित?

    नेहरू की ‘इतिहास दृष्टि’ पर असहज सवाल: डॉ. राकेश कुमार आर्य की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी’

    नेहरू की ‘इतिहास दृष्टि’ पर असहज सवाल: डॉ. राकेश कुमार आर्य की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया की डिस्कवरी’

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आईपीएल 2026: चेन्नई सुपर किंग्स की दमदार वापसी, कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत का इंतजार जारी

    आईपीएल 2026: चेन्नई सुपर किंग्स की दमदार वापसी, कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत का इंतजार जारी

    अंतरिक्ष का ‘बरमूडा ट्रायंगल’: 480 किमी ऊपर सैटेलाइट्स को निगल रहा रहस्यमयी ज़ोन, वैज्ञानिक भी सतर्क

    अंतरिक्ष का ‘बरमूडा ट्रायंगल’: 480 किमी ऊपर सैटेलाइट्स को निगल रहा रहस्यमयी ज़ोन, वैज्ञानिक भी सतर्क

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

तालिबान पर प्रियंका का आक्रोश, लेकिन वायनाड और केरल की सच्चाई पर चुप्पी क्यों?

प्रियंका गांधी के लिए यह आत्ममंथन का समय है। वह यह तय करें कि वे किस तरह की नेता बनना चाहती हैं। एक ऐसी जो सिर्फ कैमरे के सामने महिला अधिकारों की बात करे, या एक ऐसी जो अपने ही घर में असमानता के खिलाफ खड़ी हो सके।

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
11 October 2025
in चर्चित, भारत, मत, राजनीति, विश्व, समीक्षा
प्रियंका गांधी का चयनात्मक नारीवाद: काबुल पर बयान लेकिन केरल पर चुप्पी

चयनात्मक नारीवाद से आगे आना होगा प्रियंका गांधी को।

Share on FacebookShare on X

प्रियंका गांधी वाड्रा का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने तालिबान के विदेश मंत्री की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर रखने की निंदा की, एक बार फिर उनके ‘चयनात्मक नारीवाद’ पर बहस को जन्म देता है। उन्होंने इस घटना को भारत की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पर प्रतिक्रिया मांगी। यह आक्रोश सतही तौर पर बिल्कुल सही लगता है, क्योंकि किसी भी समाज में महिलाओं के साथ भेदभाव का विरोध आवश्यक है। लेकिन, जब यह विरोध केवल विदेशी घटनाओं तक सीमित हो और देश के भीतर व्याप्त उसी तरह के अन्याय पर खामोशी छाई रहे तो यह नैतिकता नहीं बल्कि राजनीति लगती है। यही वह विरोधाभास है, जिसने प्रियंका गांधी की इस टिप्पणी को गंभीर विमर्श से अधिक राजनीतिक वक्तव्य बना दिया है।

भारत की राजनीति में महिला सशक्तिकरण को लेकर जो विमर्श चलता है, उसमें प्रियंका गांधी अक्सर खुद को एक प्रगतिशील, उदारवादी और समानता की समर्थक नेता के रूप में प्रस्तुत करती हैं। लेकिन, उनके हालिया रुख से यह प्रश्न उठता है कि क्या यह समानता केवल मंचीय नारेबाज़ी और ट्वीट तक ही सीमित है या यह वास्तव में उनके वैचारिक आचरण का हिस्सा भी है? तालिबान का महिला पत्रकारों पर प्रतिबंध निश्चित रूप से निंदनीय है, लेकिन यह भी उतना ही निंदनीय है कि भारत में कई जगहों पर महिलाओं को आज भी धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से दूसरे दर्जे का नागरिक मानने की प्रवृत्ति जारी है और इन पर प्रियंका की चुप्पी बेहद असहज है।

संबंधितपोस्ट

आज से ही के दिन तालिबान ने तोड़ी थीं बुद्ध की 2 हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं, लेकिन भीम-मीम एकता के अनुयायी इस कृत्य पर 25 वर्ष बाद भी कुछ लिख बोल नहीं सकते

7 साल की कानूनी जंग और इंसाफ की जीत: शाह बानो केस पर बनी फिल्म ‘हक’

रूस हारा, अमेरिका हारा, अब पाकिस्तान की तालिबान से जंग की डींगे: अंतरराष्ट्रीय मज़ाक और उसकी वास्तविक कमजोरी

और लोड करें

मस्जिदों पर क्यों नहीं बोलतीं प्रियंका

यदि प्रियंका गांधी महिलाओं के अधिकारों की सच्ची पैरोकार हैं, तो क्या उन्होंने कभी उस व्यवस्था पर सवाल उठाया जहां भारत की कई मस्जिदों में महिलाओं को आज भी प्रवेश की अनुमति नहीं है? यह सिर्फ एक धार्मिक प्रथा नहीं बल्कि लैंगिक भेदभाव का जीवित उदाहरण है, जो किसी विदेशी तालिबान से कम नहीं। मुंबई की हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश को लेकर वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व, विशेषकर कांग्रेस के शीर्ष चेहरे, इस पर मुखर नहीं हुए। यह वही पार्टी है जो खुद को धर्मनिरपेक्षता और समानता की प्रतीक मानती है, लेकिन जब महिलाओं के अधिकार धार्मिक संस्थानों से टकराते हैं, तो उसकी आवाज़ खामोश हो जाती है। प्रियंका गांधी, जो ऐसे हर मुद्दे पर वैश्विक संवेदनशीलता दिखाती हैं, इस पर चुप रहती हैं। यह चुप्पी केवल अवसरवाद नहीं, बल्कि उस गहरी राजनीतिक झिझक की निशानी है, जो कांग्रेस को लंबे समय से जकड़े हुए है। जहां धार्मिक तुष्टिकरण और सामाजिक सुधार एक साथ नहीं चल सकते।

वायनाड की मुस्लिम महिलाओं पर चुप्पी क्यों?

सबसे बड़ा उदाहरण उनके अपने घर से ही मिलता है, वायनाड से। राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र, जो कांग्रेस की विचारधारा का प्रतीक माना जाता है, वहां आज भी कुछ समुदायों की मुस्लिम महिला उम्मीदवारों को अपने चुनावी पोस्टर में चेहरा दिखाने तक की अनुमति नहीं है। इन महिलाओं को धार्मिक रूढ़िवाद के नाम पर प्रतीकों में बदल दिया जाता है, कहीं फूल, कहीं चांद और कहीं किताब के चित्र उनके चेहरे बन जाते हैं। यह एक तरह का राजनीतिक पर्दा है, जो महिलाओं की पहचान मिटा देता है। सवाल यह है कि प्रियंका गांधी, जो देशभर में महिला आरक्षण और नेतृत्व की बात करती हैं, उन्होंने इस अमानवीय प्रथा पर अब तक एक भी शब्द क्यों नहीं कहा? क्या यह इसलिए कि यह उनके परिवार के राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र से जुड़ा मामला है? या इसलिए कि इससे उनकी पार्टी के कुछ परंपरागत वोट बैंक असहज हो सकते हैं? खैर जो भी कारण हो, यह मौन उस नारीवाद को खोखला बना देता है जो केवल विदेशों में तालिबान की करतूतों पर आवाज़ उठाता है, लेकिन अपने घर की दीवारों में उभरती असमानता पर आंखें मूंद लेता है।

केरल के सीयूएसएटी मामले पर भी मौन

केरल के कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीयूएसएटी) का मामला भी इसी दोहरेपन की पुष्टि करता है। हाल ही में इस विश्वविद्यालय में एक इस्लामिक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुरुषों और महिलाओं के बीच पर्दा लगाकर तालिबान जैसी व्यवस्था लागू की गई। यह किसी धार्मिक स्थल की नहीं, बल्कि एक शैक्षणिक संस्था की घटना थी, जहां विचार, संवाद और समानता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इस घटना ने पूरे राज्य में बहस छेड़ दी, लेकिन प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया फिर भी गायब रही। यह वही राज्य है जहां कांग्रेस एक प्रमुख राजनीतिक ताकत है, और उनके एक बयान से भी एक बड़ा नैतिक संदेश जा सकता था। लेकिन शायद राजनीतिक समीकरणों और वोट बैंक की चिंताओं ने उस संदेश को दबा दिया।

दरअसल, प्रियंका गांधी की समस्या केवल यह नहीं है कि वह कुछ घटनाओं पर बोलती हैं और कुछ पर नहीं, बल्कि यह कि उनकी आवाज़ उस सुविधा के साथ चलती है जो राजनीति में नैतिकता को लचीला बना देती है। तालिबान पर हमला करना सुरक्षित है, क्योंकि वह विदेशी शासन है और भारत में किसी की धार्मिक भावना से टकराता नहीं। लेकिन जब वही तालिबानी सोच भारत के किसी कॉलेज, मस्जिद या समुदाय में दिखती है, तब उनका बोलना कठिन हो जाता है। बता दें कि यही वह सीमारेखा है, जहां सच्चा नारीवाद और दिखावटी नारीवाद दोनों अलग हो जाते हैं।

राजनीतिक चयनात्मकता का यह रोग केवल प्रियंका गांधी तक ही सीमित नहीं, लेकिन वह इसका एक अत्यंत मुखर उदाहरण हैं। जब एक नेता अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तीखा बयान देता है लेकिन अपने प्रभाव क्षेत्र में व्याप्त अन्याय पर मौन रहता है, तो वह नैतिक अधिकार खो देता है। प्रियंका गांधी का यह रवैया यह संदेश देता है कि महिला अधिकारों का मुद्दा भी अब वोट बैंक की तरह इस्तेमाल हो रहा है, जहां आवाज़ केवल तब उठती है जब उसका राजनीतिक लाभ हो। यही कारण है कि कांग्रेस अपने महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को जनता के बीच भरोसेमंद नहीं बना पा रहा है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तालिबान जैसी विचारधाराओं से निपटने के लिए सिर्फ निंदा या ट्वीट पर्याप्त नहीं हैं। उनके प्रभाव का मुकाबला समाज में समानता, शिक्षा और न्याय की संस्थागत संस्कृति से किया जा सकता है। लेकिन जब वही नेता इस संस्कृति के भीतर व्याप्त भेदभाव को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, तो वे अनजाने में उसी मानसिकता को वैधता देते हैं जिसके खिलाफ वे बोलने का दावा करते हैं। यह मौन भारतीय लोकतंत्र के भीतर धार्मिक और सामाजिक चरमपंथ को और गहराई से जड़ें जमाने का मौका देता है।

महिलाओं के अधिकारों पर असली लड़ाई सत्ता के गलियारों में नहीं, बल्कि उन मानसिकताओं के खिलाफ है, जो उन्हें बराबरी का दर्जा देने से इंकार करती हैं। प्रियंका गांधी अगर वास्तव में इस लड़ाई की सच्ची सिपाही बनना चाहती हैं तो उन्हें तालिबान की प्रेस कॉन्फ्रेंस से आगे बढ़कर अपने समाज, अपने प्रदेश और अपनी पार्टी में झांकना होगा। उन्हें यह देखना होगा कि समानता की लड़ाई केवल दूसरों की गलतियों पर टिप्पणी करने से नहीं जीती जा सकती, बल्कि अपने घर के आईने में झांकने की हिम्मत से जीती जाती है।

दिल्ली में तालिबान की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को निकालना निंदनीय था, लेकिन उससे भी ज्यादा निंदनीय यह है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में भी महिलाएं अब भी कई धार्मिक स्थलों, राजनीतिक मंचों और शैक्षणिक संस्थानों से बाहर रखी जा रही हैं। अफगानिस्तान में तालिबान का फरमान और भारत में किसी संस्था या समुदाय का लैंगिक प्रतिबंध, दोनों का उद्देश्य एक ही है: महिला को सीमित, नियंत्रित और मौन रखना।

आत्ममंथन करें प्रियंका गांधी

दरअसल, प्रियंका गांधी के लिए यह आत्ममंथन का समय है। वह यह तय करें कि वे किस तरह की नेता बनना चाहती हैं। एक ऐसी जो सिर्फ कैमरे के सामने महिला अधिकारों की बात करे, या एक ऐसी जो अपने ही घर में असमानता के खिलाफ खड़ी हो सके। सच्चा नेतृत्व वही है जो असहज सच्चाइयों का सामना करने का साहस रखता है, भले ही उससे राजनीतिक असुविधा क्यों न हो। महिलाओं की आज़ादी की लड़ाई को अब ‘सेलेक्टिव सॉलिडेरिटी’ की ज़रूरत नहीं, बल्कि उस ईमानदारी की है जो कह सके, अन्याय कहीं भी हो, गलत ही है, चाहे वह काबुल में हो या केरल में। यही वह कसौटी है जिस पर प्रियंका गांधी का नारीवाद अभी खरा नहीं उतरता।

Tags: FeminismMuslim womenPriyanka GandhiTalibanTaliban Foreign Minister's press conferencewomen journalistsतालिबानतालिबान के विदेश मंत्री का भारत दौरानारीवादप्रियंका गांधीमहिला पत्रकारमुस्लिम महिलाएं
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

अमित शाह की चेतावनी: जनसंख्या असंतुलन के पीछे प्रजनन नहीं, घुसपैठ

अगली पोस्ट

भारत और अफगानिस्तान: बदलती भू-राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत रणनीतिक साझेदार

संबंधित पोस्ट

ग्रेटर निकोबार परियोजना: सरकार ने ठोस आंकड़ों के साथ राहुल गांधी को दिया जवाब, इसे भारत के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया
चर्चित

ग्रेटर निकोबार परियोजना: सरकार ने ठोस आंकड़ों के साथ राहुल गांधी को दिया जवाब, इसे भारत के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया

2 May 2026

नरेंद्र मोदी सरकार ने 81,000 करोड़ रुपये की 'ग्रेटर निकोबार परियोजना' का डेटा के साथ कड़ा बचाव किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना...

सत्ता के गलियारों से पुलिस के रडार तक: राजनीतिक विवाद के केंद्र में संदीप पाठक
राजनीति

सत्ता के गलियारों से पुलिस के रडार तक: राजनीतिक विवाद के केंद्र में संदीप पाठक

2 May 2026

AAP छोड़ने के कुछ ही दिनों के भीतर गैर-जमानती FIR दर्ज होने से प्रतिशोध के आरोप लगे हैं; गिरफ्तारी के डर के बीच राज्यसभा सांसद...

बंगाल में ‘महामुकाबला’: एग्जिट पोल के बाद सुलगती सियासत और बांग्लादेश में मची खलबली
राजनीति

बंगाल में ‘महामुकाबला’: एग्जिट पोल के बाद सुलगती सियासत और बांग्लादेश में मची खलबली

1 May 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति अपनी तीव्रता और अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव के संपन्न होते ही जो तस्वीरें...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

From Runways to Warships: India’s Firefighting Warrior Built for Bases & Battles| IAF | VayuShakti

From Runways to Warships: India’s Firefighting Warrior Built for Bases & Battles| IAF | VayuShakti

00:05:40

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited