भारत की आंतरिक सुरक्षा को डिजिटल माध्यमों से निशाना बनाने की कोशिशों के खिलाफ गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एक लंबे समय से चल रहे साइबर सर्विलांस ऑपरेशन के बाद, ATS ने एक ऐसे अंतर-राज्यीय ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ) मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जो न केवल युवाओं को गुमराह कर रहा था, बल्कि हथियारों, विस्फोटकों और ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसी खतरनाक विचारधारा को फैलाने की साजिश में लिप्त था। यह कार्रवाई बताती है कि कैसे सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह के रूप में किया जा रहा है।
डिजिटल निगरानी से मिला सुराग: संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर थी नज़र
गुजरात ATS की इस कार्रवाई की शुरुआत किसी गुप्त सूचना से नहीं, बल्कि तकनीकी निगरानी (Digital Surveillance) से हुई। जांच अधिकारी पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक कर रहे थे। इसी दौरान गुजरात के पाटन जिले के सिद्धपुर निवासी 22 वर्षीय इरफान कालेखान पठान का नाम सामने आया। अधिकारियों ने पाया कि इरफान लगातार कट्टरपंथी विचारधारा और जिहादी प्रचार-प्रसार से जुड़ी सामग्री साझा कर रहा था। पुख्ता तकनीकी और मानवीय इनपुट मिलने के बाद, ATS ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाया और इरफान को हिरासत में ले लिया। जब उसके मोबाइल फोन की जांच की गई, तो जांचकर्ताओं के होश उड़ गए; उसके फोन में आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े व्यक्तियों और चरमपंथी समूहों के साथ बातचीत के कई प्रमाण मिले।
एन्क्रिप्टेड चैट और विदेशी लिंक: पाकिस्तान-अफगानिस्तान से जुड़े थे तार
इरफान के मोबाइल से मिले डेटा ने इस साजिश की गहराई को उजागर किया। जांच में पाया गया कि वह व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर कई ऐसे समूहों में सक्रिय था, जिनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और उन्हें भर्ती करना था। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि वह एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे आकाओं के संपर्क में था। इन चैट्स में केवल विचारधारा की बातें नहीं थीं, बल्कि देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सुरक्षा तंत्र को चुनौती देने की रणनीतियां बनाई जा रही थीं। यह मॉड्यूल पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आधारित था, जिससे इसे ट्रैक करना काफी चुनौतीपूर्ण था।
‘गजवा-ए-हिंद’ और भर्ती का खतरनाक जाल: मुजाहिदीन तैयार करने की थी योजना
ATS के आरोपों के मुताबिक, इरफान और उसके साथियों ने “गजवा-ए-हिंद” की विचारधारा के तहत एक संगठित नेटवर्क बनाने की कोशिश की थी। उनका लक्ष्य देश के विभिन्न राज्यों से युवाओं को चुनना और उन्हें “मुजाहिदीन” के रूप में तैयार करना था। जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों के बीच हथियारों को चलाने और विस्फोटकों (विशेष रूप से RDX आधारित उपकरण) के इस्तेमाल को लेकर ट्रेनिंग सत्र आयोजित करने की भी चर्चा हुई थी। इसके साथ ही, वे हथियारों की खरीद के रास्तों और फंडिंग (वित्त पोषण) के तरीकों की भी तलाश कर रहे थे। उनकी योजना सीमा पार संपर्कों के माध्यम से अवैध हथियार हासिल करने की थी।
टारगेट पर थे RSS नेता और राजनीतिक हस्तियां: शरीयत लागू करने की मंशा
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस नेटवर्क के निशाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े प्रमुख राजनीतिक नेता और अन्य हस्तियां थीं। वैचारिक बातचीत के दौरान, आरोपी देश में शरीयत कानून लागू करने जैसे कट्टरपंथी विषयों पर चर्चा करते थे। उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स से संकेत मिलता है कि वे किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, जिससे देश की सांप्रदायिक सद्भाव और शांति को भंग किया जा सके। यह नेटवर्क केवल विचारों तक सीमित नहीं था, बल्कि जमीन पर हमले करने की तैयारी में भी जुटा था।
मुंबई से जुड़े तार: मुर्शद शेख की गिरफ्तारी और आपसी तालमेल
इरफान पठान से पूछताछ के बाद इस मॉड्यूल का एक और अहम सिरा महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से जुड़ा। गुजरात ATS ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से मुंबई के साकीनाका इलाके से 21 वर्षीय मुर्शद जाहिद अख्तर शेख को दबोच लिया। मुर्शद को अहमदाबाद लाया गया, जहाँ जांच में पता चला कि वह भी उसी ऑनलाइन नेटवर्क का एक सक्रिय हिस्सा था। वह व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए इरफान के निरंतर संपर्क में था। मुर्शद के मोबाइल से भी भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री, भर्ती से जुड़े चैट्स और फंडिंग के समन्वय से संबंधित डेटा बरामद किया गया है। इन दोनों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि यह मॉड्यूल राज्यों की सीमाओं को लांघकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रहा था।
कानूनी कार्रवाई और 11 दिनों की रिमांड: जारी है बड़ी जांच
गुजरात ATS ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उन पर आपराधिक साजिश रचने और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद, दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 11 दिनों की ATS कस्टडी में भेज दिया गया है। फिलहाल, अधिकारी इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उनके पूरे ढांचे का मानचित्र तैयार करने में जुटे हैं। जांच का दायरा अब अन्य राज्यों और संभावित स्लीपर सेल्स तक फैल गया है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए चल रहे इस कट्टरपंथ के खेल को पूरी तरह खत्म किया जा सके।






























