पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महंगी बिजली, बढ़ती गेहूं की कीमतों और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ खुली राजनीतिक चुनौती में बदलता नजर आ रहा है।
हाल ही में रावलाकोट में आयोजित एक सभा में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने इस्लामाबाद और पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था के खिलाफ अब तक के सबसे तीखे बयान दिए। इससे साफ है कि आंदोलन अब सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन, अधिकार और संसाधनों पर नियंत्रण जैसे बड़े मुद्दों तक पहुंच गया है।
महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन, अब अधिकारों की लड़ाई
यह आंदोलन 2024 और 2025 में बिजली के बढ़े हुए बिल, महंगे गेहूं और अन्य जरूरी सामान की कीमतों के खिलाफ शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पाकिस्तान सरकार की आर्थिक नीतियां उनके साथ भेदभाव कर रही हैं।
बढ़ते विरोध के बाद पाकिस्तान सरकार को बिजली दरों में राहत और गेहूं पर सब्सिडी देने जैसे कदम उठाने पड़े। लेकिन आंदोलन के नेताओं का कहना है कि इससे असली समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
उनका कहना है कि सवाल सिर्फ महंगाई का नहीं, बल्कि यह भी है कि PoK के संसाधनों पर किसका अधिकार है और वहां के लोगों को अपने फैसले लेने का कितना हक है।
‘पाकिस्तानी सेना हमारा राशन रोक रही है’
रावलाकोट की सभा में JAAC के नेता सरदार अमन ने पाकिस्तान की सेना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सेना जानबूझकर लोगों तक भोजन और जरूरी सामान की आपूर्ति रोक रही है, ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी सेना हमारा राशन और खाने-पीने का सामान रोक रही है।”
अमन ने यह भी कहा कि उनका आंदोलन सरकारी सब्सिडी के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे न्याय, सम्मान और आर्थिक अधिकार की मांग कर रहे हैं।
पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर भी उठाए सवाल
सरदार अमन ने पाकिस्तान के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि उसकी सेना PoK की सुरक्षा के लिए वहां मौजूद है।
उन्होंने कहा, “भारत से अपनी रक्षा करना हमारा मामला है, आपका नहीं।“ उनका कहना था कि सुरक्षा और शासन से जुड़े फैसले वहां के लोगों को लेने चाहिए, न कि इस्लामाबाद को।
उन्होंने पाकिस्तान पर यह आरोप भी लगाया कि वह PoK के पानी और प्राकृतिक संसाधनों का फायदा उठा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रहा।
अमन ने यह भी दावा किया कि आंदोलन में शामिल लोगों को आतंकवादी और चरमपंथी बताकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
भारत के साथ व्यापार खोलने की भी उठी मांग
सभा के दौरान सरदार अमन ने कहा कि अगर पाकिस्तान लोगों को आर्थिक अवसर नहीं देता, तो भविष्य में व्यापार के रास्ते पाकिस्तान या भारत, किसी भी दिशा से खोले जाएंगे।
उन्होंने कहा, “बहुत जल्द सभी व्यापारिक रास्ते खुलेंगे, चाहे पाकिस्तान के जरिए हों या भारत के जरिए।”
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नियंत्रण रेखा (LoC) के पार भारत और PoK के बीच होने वाला व्यापार कई साल पहले बंद हो चुका है।
पाकिस्तान के लिए बढ़ रही चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन अब केवल महंगाई के खिलाफ नहीं रह गया है। अब इसमें राजनीतिक अधिकार, संसाधनों पर नियंत्रण और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे बड़े मुद्दे शामिल हो गए हैं।
पाकिस्तान लंबे समय से खुद को कश्मीरियों की आवाज बताता रहा है, लेकिन अब PoK के भीतर से ही उसकी नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।
सरदार अमन ने कहा कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और इसे मुजफ्फराबाद तक ले जाया जाएगा।
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि यह आंदोलन आगे कितना बड़ा रूप लेगा, लेकिन इतना तय है कि बिजली और गेहूं की कीमतों से शुरू हुआ यह विरोध अब पाकिस्तान सरकार और उसकी कश्मीर नीति के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।


































