प्रफुल्ल कुमार महंत – असम आंदोलन एवं सशक्त असम के जनक
सत्ता बड़ी कष्टकारी है। यहां बने रहना कांटों की शैय्या पर सोने समान है और अगर आप पूर्वोत्तर के हैं तो स्थिति अधिक जटिल हो जाती है। परंतु प्रफुल्ल कुमार महंत के लिए "ना" कोई विकल्प नहीं...
सत्ता बड़ी कष्टकारी है। यहां बने रहना कांटों की शैय्या पर सोने समान है और अगर आप पूर्वोत्तर के हैं तो स्थिति अधिक जटिल हो जाती है। परंतु प्रफुल्ल कुमार महंत के लिए "ना" कोई विकल्प नहीं...
“देखिए बर्मन साब, ये एक गीतकार हैं, अच्छा लिखते हैं, हमारे फिल्म के लिए गीत लिखेंगे!” “तुम हमारे फिल्म के लिए गीत लिखेगा?” “जी बर्मन साब, आपके आशीर्वाद से हम अवश्य एक अच्छी रचना प्रस्तुत करेंगे!” “हम...
Battle of Tain Dhar - थर्मोपायली, लोंगेवाला, सारागढ़ी, इन सबके बारे में आपने बहुत सुना होगा पर तेन धार की पवित्र भूमि का उल्लेख कभी सुना है? नौशेरा का नाम सुना है? नहीं? कैसे सुनेंगे, असली इतिहास...
1969 में भारतीय सिनेमा में क्रांति आई थी, तारीख थी 27 सितंबर 1969, इस दिन एक ऐसी फिल्म प्रदर्शित हुई जिसके चलने की आशा कम ही लोगों को थी। होती भी कैसे, हीरो भी नया, निर्देशक भी...
आचार्य चाणक्य की नीति से कौन परिचित नहीं? एक समय कुछ लोग उनसे मिलने जब आए, तो उन्होंने अपने मार्ग का विवरण करते हुए बताया, “आपके पास पहुंचने में हम लोगों को बहुत कष्ट हुआ। आप महाराज...
“कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे, कोई हमारा न रहा” पक्का लड़के का ही दोष है, भला बेचारी स्त्री से क्यों गलती होगी? पिछले कई सदियों से भांति-भांति के नमूनों...
भारत का विभाजन: कांग्रेस पार्टी मृत्यु शैय्या पर लेटी है। कांग्रेस के चश्मोचिराग कांग्रेस पार्टी में उजाला करने की कोशिश में लगे हैं लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उजाला कम और अंधेरा अधिक कर रहे...
Drishyam 2 Movie Review in Hindi- हमारी फिल्में चलती नहीं है! जनता को हमें सबक सिखाना होगा! जनता को हमारा टेस्ट ही नहीं पसंद! ऐसे कई संवाद आपने कुछ स्वघोषित मठाधीशों को दोहराते हुए सुना ही होगा,...
आपको आवश्यकता से अधिक धन मिल जाए तो आप क्या करेंगे? तनिक गाड़ी अधिक खरीदेंगे, स्वर्णाभूषण लेंगे, भवन अच्छे बनवाएंगे? लेकिन बंधु आप जैसे सब नहीं होते जो इतने से संतुष्ट हो जाएं। जूनागढ़ के नवाब तो...
“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है” ये बात ऐसे व्यक्तियों के लिए लागू होती हैं, जो निरंतर रत्नों को खोजने के लिए प्रयासरत रहते हैं। हमारे फिल्म उद्योग में भी कुछ ऐसे जौहरी हैं,...
22 मार्च 2005, चेन्नई, एक चर्चित अभिनेता के असामयिक निधन ने सबको झकझोर कर रख दिया। कैसे नहीं होता, जो व्यक्ति कभी तमिल उद्योग की धड़कन था और जिन्होंने MGR एवं शिवाजी गणेशन जैसे धुरंधरों के समक्ष...
उद्योग और कोलकाता, वो क्या होता है? आज के परिप्रेक्ष्य में ये चुटकुला आप बहुत सुनते होंगे परंतु वो क्या है न, एक समय वो भी था जब कोलकाता, कलकत्ता हुआ करता था और वह भारत की...


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