TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पुलिस स्मृति दिवस पर PM मोदी ने पुलिसकर्मियों को किया याद

    पुलिस स्मृति दिवस पर PM मोदी ने पुलिसकर्मियों को किया याद, अमित शाह ने बाइक रैली को दिखाई हरी झंडी

    कॉकरोच के पुतले

    दिल्ली में दशहरे पर रावण के साथ जलेगा कॉकरोच का पुतला, कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा जारी

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    संघ की सौ वर्ष की यात्रा: नागपुर से देशव्यापी विस्तार तक

    संघ की सौ वर्ष की यात्रा: नागपुर से देशव्यापी विस्तार तक

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    महिला आरक्षण के लिए फिर संसद बुलाएगी सरकार? लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी

    महिला आरक्षण के लिए फिर संसद बुलाएगी सरकार? लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी

    स्टारशील्ड विवाद के बीच भारत का बड़ा दांव: GSAT-7C से कैसे मजबूत होगी वायुसेना की ताकत?

    स्टारशील्ड विवाद के बीच भारत का बड़ा दांव: GSAT-7C से कैसे मजबूत होगी वायुसेना की ताकत?

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    घर: संस्कारों की पहली पाठशाला और राष्ट्र निर्माण का आधार

    घर: संस्कारों की पहली पाठशाला और राष्ट्र निर्माण का आधार

    एस्ट्रोटॉक vs अन्य ऐप्स: कौन सा है सबसे बेस्ट राशिफल प्लेटफॉर्म?

    एस्ट्रोटॉक vs अन्य ऐप्स: कौन सा है सबसे बेस्ट राशिफल प्लेटफॉर्म?

    नील विद्रोह

    “नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पुलिस स्मृति दिवस पर PM मोदी ने पुलिसकर्मियों को किया याद

    पुलिस स्मृति दिवस पर PM मोदी ने पुलिसकर्मियों को किया याद, अमित शाह ने बाइक रैली को दिखाई हरी झंडी

    कॉकरोच के पुतले

    दिल्ली में दशहरे पर रावण के साथ जलेगा कॉकरोच का पुतला, कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा जारी

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    संघ की सौ वर्ष की यात्रा: नागपुर से देशव्यापी विस्तार तक

    संघ की सौ वर्ष की यात्रा: नागपुर से देशव्यापी विस्तार तक

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    महिला आरक्षण के लिए फिर संसद बुलाएगी सरकार? लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी

    महिला आरक्षण के लिए फिर संसद बुलाएगी सरकार? लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी

    स्टारशील्ड विवाद के बीच भारत का बड़ा दांव: GSAT-7C से कैसे मजबूत होगी वायुसेना की ताकत?

    स्टारशील्ड विवाद के बीच भारत का बड़ा दांव: GSAT-7C से कैसे मजबूत होगी वायुसेना की ताकत?

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    घर: संस्कारों की पहली पाठशाला और राष्ट्र निर्माण का आधार

    घर: संस्कारों की पहली पाठशाला और राष्ट्र निर्माण का आधार

    एस्ट्रोटॉक vs अन्य ऐप्स: कौन सा है सबसे बेस्ट राशिफल प्लेटफॉर्म?

    एस्ट्रोटॉक vs अन्य ऐप्स: कौन सा है सबसे बेस्ट राशिफल प्लेटफॉर्म?

    नील विद्रोह

    “नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

श्री औरोबिन्दो: निस्संदेह एक उत्तम भारतीय बुद्धिजीवी जिन्हे कभी उनका उचित सम्मान नहीं मिला

भारत के बौद्धिकता के गुमनाम आधारस्तम्भ

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
4 August 2023
in इतिहास
श्री औरोबिन्दो: निस्संदेह एक उत्तम भारतीय बुद्धिजीवी जिन्हे कभी उनका उचित सम्मान नहीं मिला
Share on FacebookShare on X

जब भारतीय बुद्धिजीवियों की बात हो, तब आपके मस्तिष्क में किनके नाम आते हैं? एपीजे अब्दुल कलाम, अमर्त्य सेन, शशि थरूर जैसे लोगों के ना? अगर तनिक पीछे जाएँ, तो स्मरण में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, या फिर मोहनदास करमचंद गाँधी जैसे लोगों का नाम आएगा. परन्तु ऐसे गणमान्य सदस्यों में एक ऐसे व्यक्ति का नाम पीछे छूट जाता है, जो बौद्धिक क्षमता और वैचारिक दृष्टिकोण में इनमें से कइयों से मीलों आगे थे, परन्तु किन्ही कारणों से उनकी कीर्ति पुडुचेरी से आगे बढ़ ही नहीं पाई. जी हाँ, हम उन्ही श्री अरविन्द घोष यानी स्वामी औरोबिन्दो की बात कर रहे हैं, जिन्होंने भारतीय जनमानस पर एक अमिट छाप छोड़ी, पर इतिहास के पुस्तकों में जिनकी चर्चा लगभग नगण्य होती है.

प्रारम्भ से ही विद्रोही

श्री औरोबिन्दो का व्यक्तित्व कैसा था, ये आप उनके बचपन की कथाओं से ही जान सकते हैं. श्री अरबिंदो का जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता (अब कोलकाता), भारत में हुआ था। वह कृष्ण धुन घोष और स्वर्णलता देवी के चार पुत्रों में से तीसरे थे। उनके पिता, कृष्ण धुन घोष, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के कट्टर समर्थक थे, और ब्रह्म समाज से काफी प्रभावित थे। वे चाहते थे कि उनके बच्चे ब्रिटिश रीति-रिवाजों और विचारधाराओं को अपनाएँ, इतना कि घर में वार्तालाप तक अंग्रेज़ी में होती थी, ताकि भारतीयता का एक अंश भी उनमें पनप न पाए.

संबंधितपोस्ट

विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज से मिलाने के लिए मिले थे ₹5 करोड़? आरोप पर क्रिकेटर की टीम ने खोली पोल

‘जंगल में जन्मीं बेटियां, सांपों से दोस्ती और अध्यात्म’: 8 वर्षों से भारत के जंगलों में छिपी रूसी महिला की कहानी, जानें भावुक संदेश में क्या लिखा?

विदुषी संवाद: धार्मिक और दार्शनिक विमर्शों में महिलाओं की भागीदारी

और लोड करें

परन्तु युवा औरोबिन्दो अलग ही मिटटी के बने थे. प्रारम्भ में नास्तिक सोच रखने वाले अरविन्द धीरे धीरे अज्ञेयवादी यानी agnostic हो गए. इनकी प्रारंभिक शिक्षा लोरेटो कॉन्वेंट, दार्जिलिंग और बाद में सेंट पॉल स्कूल, लंदन में हुई। उन्होंने शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अंग्रेजी, फ्रेंच, लैटिन और ग्रीक सहित कई भाषाओं में उल्लेखनीय दक्षता प्रदर्शित की।

औरोबिन्दो ने अपने घर के नौकरों से हिंदुस्तानी में बात करना सीखा, और अपने पिता की अनेक इच्छाओं के बाद भी उन्होंने ब्रिटिश शासन की अंध स्वीकृति पर सवाल उठाया और भारतीय संस्कृति के प्रति अपने पिता की उपेक्षा से उनका मोहभंग बढ़ता गया। औरोबिन्दो का असर उनके अनुज बरिंद्र कुमार घोष, जो कई मामलों में उनसे भी कट्टर राष्ट्रवादी बन गए.

बौद्धिक जागृति और स्वतंत्रता की आस

अपने पिता के आदेश पर औरोबिन्दो घोष ने इम्पीरियल सिविल सर्विसेज़ में आवेदन किया. परन्तु इनके मानस में राष्ट्रवाद की कोपलें फूटने लगी, और उन्हें अंग्रेजों की दासता स्वीकार न थी. अरबिंदो की बौद्धिक जागृति और राष्ट्रवाद को तब अभिव्यक्ति मिली जब वह महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ III के लिए काम करने के लिए बड़ौदा चले गए। महाराजा के प्रगतिशील शासन के तहत, अरबिंदो को अपने विचारों का पता लगाने और भारतीय संस्कृति में गहराई से उतरने के लिए एक अनुकूल वातावरण मिला।

और पढ़ें: काँवड़ यात्रा के वह आर्थिक लाभ जो कोई वामपंथी आपसे साझा नहीं करना चाहता!

बड़ौदा में अपने समय के दौरान, औरोबिन्दो ने भारतीय स्व-शासन और ब्रिटिश उत्पीड़न से मुक्ति की वकालत करते हुए राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बड़े पैमाने पर लिखना शुरू किया। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की आलोचना की और भारतीय मानस को मानसिक पराधीनता से मुक्त करने की दिशा में काम किया। यहीं इन्होने राष्ट्रवाद के अपने विचार को बढ़ावा दिया, और हिंदी, मराठी जैसी भाषाओँ का स्व अध्ययन किया.

क्रांतिकारी और दूरदर्शी उद्यमी

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति अरबिंदो की प्रतिबद्धता ने उन्हें उस समय की क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। वह अनुशीलन समिति और जुगांतर सहित कई गुप्त क्रांतिकारी समाजों से जुड़े थे, जिन्होंने सशस्त्र प्रतिरोध के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने की मांग की थी।
इसके अतिरिक्त अरबिंदो एक दूरदर्शी उद्यमी भी थे, जिन्होंने नभारत के भविष्य को आकार देने में बौद्धिक स्वतंत्रता और शिक्षा की शक्ति को पहचाना। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा करने और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए युवा क्लबों और पुस्तकालयों की स्थापना की।

“वन्दे मातरम्” और “कर्मयोगिन” जैसे राष्ट्रवादी समाचार पत्रों के संपादक के रूप में, उन्होंने अपने लेखन का उपयोग जनता को प्रेरित करने और स्व-शासन और आध्यात्मिक परिवर्तन के विचारों का प्रसार करने के लिए किया। उनके लेखन में भारत की आध्यात्मिक विरासत और दुनिया को उच्च चेतना की ओर ले जाने की इसकी क्षमता के प्रति उनका विश्वास प्रतिबिंबित होता है।

परन्तु अरबिंदो घोष की विद्वत्ता का परिचय अलीपुर बम काण्ड में देखने को मिला. इनपर राजद्रोह का आरोप लगाया गया, और इन्हे प्रमुख आरोपियों में से एक बनाया गया. परन्तु इन्होने अपना पक्ष ऐसे रखा और अपनी बुद्धिमता का वो प्रमाण दिया कि अनेक ‘साक्ष्य’ होने के बाद भी ब्रिटिश शासन इनपर केवल सरकार विरोधी लेख लिखने का ही दोष सिद्ध कर पाई. इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने कई साथियों का दंड भी काम करवाने में भूमिका निभाई, जिनका किसी भी स्थिति में मृत्युदंड मिलना लगभग तय था.

आध्यात्मिक परिवर्तन और पुडुचेरी की यात्रा

कुछ समय जेल में बिताने के बाद औरोबिन्दो घोष को एक अनोखा अनुभव हुआ. वे अध्यात्म की और मुड़ने लगे. उन्होंने महसूस किया कि स्वतंत्रता के संघर्ष के साथ-साथ आंतरिक क्रांति की भी आवश्यकता है – व्यक्ति और समाज का गहरे स्तर पर परिवर्तन। 1910 में, वह सक्रिय राजनीति से हट गए और खुद को आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए समर्पित करने के लिए पॉन्डिचेरी पहुंचे, जो उस समय एक फ्रांसीसी बस्ती थी, चले गए। उन्होंने श्री अरबिंदो आश्रम की स्थापना की, जो एक आध्यात्मिक समुदाय है जहां दुनिया भर के साधक एक साथ आ सकें और चेतना की उच्च अवस्था की दिशा में काम कर सकें।

पांडिचेरी में अपने वर्षों के दौरान, श्री अरबिंदो गहन आध्यात्मिक अभ्यास और गहन ध्यान में डूब गए। उन्होंने “इंटीग्रल योग” नामक एक अद्वितीय आध्यात्मिक दर्शन विकसित किया, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक और भौतिक सहित जीवन के सभी पहलुओं को एक सामंजस्यपूर्ण संपूर्णता में एकीकृत करना था।

राजनीति से पूर्ण संन्यास न लिया

राजनीति से हटने के बावजूद, श्री अरबिंदो का स्वतंत्रता आंदोलन पर प्रभाव गहरा था। उनके विचार और लेखन स्वतंत्रता सेनानियों और विचारकों को समान रूप से प्रेरित करते रहे। एक प्रमुख क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी नेता, वीर सावरकर, भारत के आध्यात्मिक और बौद्धिक जागरण के बारे में अरबिंदो के दृष्टिकोण से काफी प्रभावित थे। एक अन्य प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय सेना के नेता, सुभाष चंद्र बोस, अरबिंदो की आध्यात्मिक शिक्षाओं और जागृत भारत के दृष्टिकोण से गहराई से प्रेरित थे। इतना ही नहीं, श्री औरोबिन्दो उन चंद लोगों में से एक थे, जिन्होंने मोहनदास करमचंद गाँधी के खोखले वादों और उनके विचारों की पोल पट्टी खोलने में कोई प्रयास अधूरा नहीं छोड़ा. गाँधी के लाख अनुरोध के बाद भी उसे पुडुचेरी अथवा अपने आश्रम के आसपास भी फटकने नहीं दिया.

औरोबिन्दो का विचार स्पष्ट था,

“मेरा मानना है कि गांधी नहीं जानते कि जब कोई व्यक्ति सत्याग्रह या अहिंसा अपनाता है तो उसके स्वभाव में वास्तव में क्या होता है। वह सोचता है कि इससे मनुष्य शुद्ध हो जाते हैं। लेकिन जब मनुष्य पीड़ित होते हैं, या स्वयं को स्वैच्छिक पीड़ा के अधीन करते हैं, तो क्या होता है कि उनका महत्वपूर्ण अस्तित्व मजबूत हो जाता है। ये हलचलें केवल प्राणिक सत्ता को ही प्रभावित करती हैं, किसी अन्य अंग को नहीं। अब जब आप दमन करने वाली ताकत का विरोध नहीं कर सकते तो कहते हैं कि आपको कष्ट होगा। वह पीड़ा महत्वपूर्ण है और यह शक्ति देती है। इस प्रकार पीड़ित व्यक्ति को जब शक्ति मिलती है तो वह और भी बदतर उत्पीड़क बन जाता है”

और पढ़ें: नहीं, TATA ने अपनी पहली MUV कार का नाम सूमो पहलवानों के नाम पर नहीं रखा

इसके अतिरिक्त गाँधी के तुष्टिकरण सम्बन्धी नीतियों पर उन्होंने लिखा, “आप ऐसे धर्म के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से रह सकते हैं जिसका सिद्धांत सहिष्णुता है। लेकिन उस धर्म के साथ शांति से रहना कैसे संभव है जिसका सिद्धांत है “मैं तुम्हें बर्दाश्त नहीं करूंगा”? आप इन लोगों के साथ एकता कैसे रखेंगे? निश्चित रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता इस आधार पर नहीं हो सकती कि मुसलमान हिंदुओं का धर्मांतरण करते रहेंगे जबकि हिंदू किसी मुसलमान का धर्मांतरण नहीं करेंगे । आप ऐसे आधार पर एकता का निर्माण नहीं कर सकते।”

ऐसे रत्न को कैसे हमने गँवा दिया?

ये राष्ट्र का दुर्भाग्य है कि जिस व्यक्ति के आदर्शों और दर्शन को हमें साष्टांग प्रणाम करना चाहिए था, उसे पुडुचेरी और कुछ इतिहास प्रेमियों के अतिरिक्त भारत में शायद ही कोई जानता होगा. शायद इस उपेक्षा का एक कारण अरबिंदो के विचारों की जटिलता में निहित है, जो स्वतंत्रता संग्राम के पारंपरिक राजनीतिक और सामाजिक आख्यानों से परे हैं। आध्यात्मिक परिवर्तन और चेतना के विकास के बारे में उनका दृष्टिकोण कुछ लोगों के लिए पूरी तरह से समझना चुनौतीपूर्ण रहा होगा। एक अन्य कारक सक्रिय राजनीति से उनकी स्वैच्छिक वापसी हो सकती है, जिससे यह गलत धारणा पैदा हुई कि उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य को छोड़ दिया है। हालाँकि, अरबिंदो का ध्यान केवल बाहरी क्रांति से आंतरिक परिवर्तन की ओर स्थानांतरित हो गया था, यह मानते हुए कि सच्ची स्वतंत्रता केवल मानव चेतना में गहन परिवर्तन के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।
एक महान बौद्धिक और दूरदर्शी श्री अरबिंदो ने अपना जीवन भारत की सेवा और मानवता के विकास के लिए समर्पित कर दिया। उनके विचार, लेखन और आध्यात्मिक दर्शन सत्य, स्वतंत्रता और उच्च चेतना के चाहने वालों को प्रेरित करते रहते हैं।

अब समय आ गया है कि राष्ट्र इस गुमनाम नायक के योगदान को स्वीकार करे। श्री अरबिंदो का जीवन और विचार उच्च उद्देश्य और मानवता के लिए बेहतर भविष्य चाहने वालों के लिए आशा और मार्गदर्शन का प्रतीक बने हुए हैं। उनकी विरासत का सम्मान करना और उसे संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इस बौद्धिक दिग्गज की प्रतिभा आने वाली पीढ़ियों के लिए चमकती रहे।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

Tags: ArguablyContributiongreatest Indian intellectualinfluence.legacyliteratureMysticismnever got his duephilosopherPhilosophyPoetRecognitionreformerSpiritualitySri AurobindothinkerVisionary
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी का सच अब छिप नहीं सकेगा

अगली पोस्ट

वो मनुष्य जो भारतीय फुटबॉल के पुनरुत्थान के लिए सर्वाधिक तत्पर है!

संबंधित पोस्ट

नील विद्रोह
इतिहास

“नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

2 October 2026

हमारे देश में अनेक आंदोलन हुए, जिनका दर्द आज भी भारतीयों की रगों में जिंदा है। कुछ आंदोलन ऐसे हैं, जो बिना तोप ताने और...

जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….
इतिहास

जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

2 October 2026

वो कहते हैं “दुर्घटना से देर भली”। आज भारत की आक्रामकता से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। परंतु स्वतंत्रता के पश्चात प्रारम्भिक दो दशकों में...

22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था
इतिहास

‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

28 September 2026

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की चर्चा भगत सिंह का नाम लिए बगैर हमेशा अधूरी ही मानी जाएगी। भगत सिंह का योगदान इतिहास के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

INS Samarthak: The Indigenous Warship Built to Do More Than One Job VO:

INS Samarthak: The Indigenous Warship Built to Do More Than One Job VO:

00:03:01

Why Is India Investing in Underwater Weapons?

00:02:10

How DRDO Is Making India's Military Communications More Secure

00:03:28

How Ice on Aircraft Wings Can Turn Deadly

00:03:19

Indian Army’s New Logistics Plan: Why Bharat Rice Matters

00:04:35
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited