एक भी अनुच्छेद बहसों से बाहर नहीं रहा, एक एक वाक्य पर बहसें हुईं। उसके बाद ड्राफ्ट को फिर से सुधारा गया और 14 नवम्बर, 1949 को पेश किया गया।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला: रमज़ान में मुसलमानों की हत्या पाकिस्तान के लिए नई बात नहीं

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    एलपीजी गैस संकट हुआ खत्म

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    एक गलती और अमेरिकी फिटनेस ऐप ने फ्रांसीसी विमानवाहक पोत की लोकेशन उजागर कर दी।

    एक गलती और अमेरिकी फिटनेस ऐप ने फ्रांसीसी विमानवाहक पोत की लोकेशन उजागर कर दी।

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    इंक़लाब भगत सिंह

    क्रांति की अपनी एक अलग परिभाषा थी भगत सिंह की

    Shahidi Diwas

    भगत सिंह के जीवन के अंतिम 12 घंटों की वो कहानी, जो रोंगटे खड़े कर देती है

    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    21 मार्च: हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश, सिर्फ 2 मिनट का अंतर और पाँच करोड़ लोगों की जिन्दगियों का खात्मा

    21 मार्च: हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश, सिर्फ 2 मिनट का अंतर और पाँच करोड़ लोगों की जिन्दगियों का खात्मा

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    देहरादून में CM धामी ने देखी ‘द केरला स्टोरी 2’, UCC और धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    उदयनिधि स्टालिन ने द्रविड़ विचारधारा को ईसाई और इस्लाम धर्म के समान बताया

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला

    काबुल अस्पताल पर पाकिस्तानी हमला: रमज़ान में मुसलमानों की हत्या पाकिस्तान के लिए नई बात नहीं

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    मिडिल ईस्ट जंग: मोदी ने फिर साबित किया है कि ‘डिप्लोमेसी’ के मामले में वो क्यों हैं मिस्टर भरोसेमंद ?

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    The Silent Rise of India’s Comparison Economy

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    देहरादून में हाई-स्टेक्स MSME समिट का आयोजन, उत्तराखंड ने औद्योगिक गति को बढ़ाने पर दिया जोर

    एलपीजी गैस संकट हुआ खत्म

    एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी, रसोई गैस महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    Indian navy in hormuz and trump

    होर्मुज़ संकट: इधर ट्रम्प चीन से मदद मांग रहे हैं, उधर इंडियन नेवी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ को साथ लेकर भारत लौट रही है

    भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका

    नारी शक्ति: भारत की रक्षा में महिलाओं की मजबूत भूमिका, सशस्त्र बलों में भी बढ़ी भागीदारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    एक गलती और अमेरिकी फिटनेस ऐप ने फ्रांसीसी विमानवाहक पोत की लोकेशन उजागर कर दी।

    एक गलती और अमेरिकी फिटनेस ऐप ने फ्रांसीसी विमानवाहक पोत की लोकेशन उजागर कर दी।

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    इजरायल का ‘धुरंधर-2’ अंदाज़ : ईरान-लेबनान के बाद सीरिया में तेज़ हमले

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

    चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    इंक़लाब भगत सिंह

    क्रांति की अपनी एक अलग परिभाषा थी भगत सिंह की

    Shahidi Diwas

    भगत सिंह के जीवन के अंतिम 12 घंटों की वो कहानी, जो रोंगटे खड़े कर देती है

    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    21 मार्च: हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश, सिर्फ 2 मिनट का अंतर और पाँच करोड़ लोगों की जिन्दगियों का खात्मा

    21 मार्च: हिटलर को मारने की नाकाम आत्मघाती साज़िश, सिर्फ 2 मिनट का अंतर और पाँच करोड़ लोगों की जिन्दगियों का खात्मा

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    पाकिस्तान के जिस प्लेयर ने उड़ाया था भारतीय सेना का मज़ाक, उसे ख़रीद विवादों में घिरी सनराइजर्स की मालकिन काव्या मारन

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

संविधान किसी एक व्यक्ति की देन नहीं, संविधान सभा में 38 सदस्य थे SC/ST: आज़ादी से पहले ही तैयार हो गया था प्रारूप

एक भी अनुच्छेद बहसों से बाहर नहीं रहा, एक एक वाक्य पर बहसें हुईं। उसके बाद ड्राफ्ट को फिर से सुधारा गया और 14 नवम्बर, 1949 को पेश किया गया।

Anand Kumar द्वारा Anand Kumar
26 November 2024
in इतिहास, चर्चित, ज्ञान, राजनीति
जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेंद्र प्रसाद, बाबासाहब भीमराव आंबेडकर

संविधान सभा की 3 समितियों के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे, दो के डॉ राजेंद्र प्रसाद और एक के जवाहरलाल नेहरू

Share on FacebookShare on X

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51(ए) भारतीय जनता के कर्तव्यों में वैज्ञानिक सोच को शामिल करने को कहता है। अगर वैज्ञानिक सोच और तर्कसंगत सोच (साइंटिफिक टेम्पर और रैशनल थिंकिंग) की बात शुरू की जाए तो एक बार ये देखना होगा कि संविधान को लेकर हमारी सोच कितनी तर्कसंगत है? इस प्रश्न पर ध्यान जाते ही आपका ध्यान सोशल मीडिया पोस्ट्स पर भी जायेगा। एक बड़ी सी लिबरल कहलाने वाली, स्वयं को प्रगतिशील बताने वाली जमात आज आपको बाबा साहेब आंबेडकर को संविधान निर्माता के रूप में याद करते दिख जाएगी। उनके लिखे पर तर्क याद दिलाते भी कुछ पोस्ट होंगे। संख्या में बहुत कम ऐसी तथ्यपरक पोस्ट देखते ही याद आ जाता है कि संविधान निर्माताओं की सोच के विरुद्ध जाकर, उनके सोच की धज्जियाँ उड़ाकर हम संविधान दिवस भी मनाते हैं।

अधिकांश जो नैरेटिव चलते हैं, उनका तर्क और तथ्य से नहीं, केवल भावनाओं को भड़काने और वोट बैंक की राजनीति से सम्बन्ध होता है। उदाहरण के तौर पर संविधान निर्माण से जुड़ी तिथियों से देखना शुरू कीजिये। सी. राजगोपालाचारी ने औपचारिक रूप से 15 नवम्बर, 1939 को भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा था। फिरंगी हुकूमत ने अगस्त 1940 में जाकर (करीब एक वर्ष बाद) ये प्रस्ताव मान लिया और संविधान सभा बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। गौर कीजिये कि ये तो 1942 के अत्यंत हिंसक ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ से काफी पहले की बात है। यानी पूर्ण स्वतंत्रता से पहले भी भारतीय लोग अपना एक अलग संविधान बनाने के विषय में सोच चुके थे। सिर्फ प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाने से संविधान सभा नहीं बनी थी, उसके लिए और छह वर्षों का समय लगा। अंततः अगस्त 1946 में जाकर संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव (मतदान से) हुआ।

संबंधितपोस्ट

संविधान दिवस: भारतीय चिंतन परंपरा की दृष्टि से संविधान 

‘राहुल बाबा की पोल खुल गई’: ऊपर भारत का संविधान, अंदर सारे पन्ने कोरे… अमित शाह ने क्यों किया जिक्र?

70 वां संविधान दिवस: अधिकारों से पहले कर्तव्यों को क्यों ऊपर रखना चाहिए

और लोड करें

इस प्रक्रिया से जो संविधान सभा बनी उसमें 389 सदस्य थे। यानी, संविधान बनाने का श्रेय एक व्यक्ति को भी नहीं दिया जा सकता। इन सदस्यों में अनुसूचित जातियों के 33 सदस्य थे और जनजातियों के 5 प्रतिनिधि थे। इसलिए ये कहना कि संविधान नहीं होता तो अनुसूचित जातियों/जनजातियों को कोई अवसर नहीं देता या पिछड़ों को कुर्सी पर नहीं बैठने देता, ये नए गढ़े हुए एक राजनैतिक झूठ से अधिक नहीं। संविधान सभा में पंद्रह महिलाएँ थीं, एक महिला मुस्लिम भी थी। इसलिए महिलाओं को अधिकार भी संविधान से नहीं उससे पहले से मिलने लगे थे। भारत अपने मूल स्त्रियों को सम्मान देने वाले स्वरूप में बहुत तेज गति से आया क्योंकि यहाँ की संस्कृति ही वही थी। दूसरे लोकतंत्र जहाँ महिलाओं को मताधिकार मिलने में सौ-पचास साल लगे, उनसे इसकी तुलना नहीं की जा सकती। जैसा बाकी जगहों पर होता है, वैसा ही वैचारिक विरोध यहाँ भी रहा, लेकिन उसके लिए न किसी का सर काटा गया, न किसी को पत्थरों में चुनवाया गया।

ये जो संविधान सभा बनी थी, उसके प्रमुख डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। जातीय राजनीति के आज के दौर में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जाति उतना बड़ा वोट बैंक नहीं होती इसलिए शायद ही कोई नेता आज आपको डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को याद करता दिखेगा। आप संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) के बारे में एक बार फिर से सोच सकते हैं। इस संविधान सभा ने 13 दिसम्बर, 1946 को संविधान का ड्राफ्ट बाने का काम शुरू कर दिया। काम कैसे क्या जाएगा, संविधान बनाते समय किन उद्देश्यों को ध्यान में रखा जायेगा, इसके लिए एक उद्देश्य संकल्प का प्रस्ताव पारित किया गया और काम शुरू हुआ। अलग-अलग विषयों के लिए 22 समितियों का गठन किया गया जिसमें से 8 प्रमुख और उनके अधीन 14 उपसमितियां बनी। मुख्य समितियों में से 3 की अध्यक्षता नेहरु कर रहे थे, 2 के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वयं थे, 2 की अध्यक्षता सरदार पटेल ने की और एक के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर बने।

इन समितियों ने अप्रैल से अगस्त 1947 के बीच अपनी रिपोर्ट जमा कर दी जिनपर चर्चाएँ भी हुई। यानी कि संविधान कैसा बनने वाला है, उसका प्रारूप भारत के अगस्त 1947 में स्वतंत्र होने से पहले ही आ चुका था। ये चर्चाएँ 30 अगस्त 1947 को समाप्त हुईं। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर BN राऊ ने अक्टूबर 1947 तक में एक ड्राफ्ट संविधान बनाया। BN राऊ संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे। उन्होंने ये ड्राफ्ट संविधान सभा की सात सदस्यों वाली ड्राफ्टिंग समिति को सौंपा। इस ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर थे। जरूरी सुधार आदि करने के बाद ड्राफ्टिंग कमिटी ने संविधान का मसौदा 21 फरवरी, 1948 को संविधान सभा के सामने पेश किया। इस मसौदे को जनता के सामने रखा गया और फिर इसपर टीका-टिप्पणी, आलोचना, सुधार आदि शुरू हुए। एक स्पेशल कमिटी ने आये हुए सुझावों को जांचा, जनता की राय लेकर बदलाव हुए और फिर से ड्राफ्टिंग कमिटी ने मसौदा सुधार कर पेश किया। इसके बाद कहीं जाकर 4 नवम्बर, 1948 को संविधान सभा की औपचरिक बहसें शुरू हुई।

एक भी अनुच्छेद बहसों से बाहर नहीं रहा, एक एक वाक्य पर बहसें हुईं। उसके बाद ड्राफ्ट को फिर से सुधारा गया और 14 नवम्बर, 1949 को पेश किया गया। फिर से बहसें हुई और अंततः जब एक आम राय बनी तब जाकर 26 नवम्बर, 1949 को भारतीय संविधान पर आम सहमती बनी। संविधान के अंतिम स्वरूप पर 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर किये और इस तरह 26 जनवरी को संविधान को लागू करके भारत एक गणराज्य बना।

इस तरह जो संविधान बनकर भारत में लागू हुआ उसकी प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ या फिर ‘पंथनिरपेक्ष’ जैसे शब्द भी नहीं थे। अम्बेडकर पूरे देश पर एक राजनैतिक विचारधारा (समाजवाद या साम्यवाद जैसी) थोपने के सख्त विरुद्ध थे। वैज्ञानिक सोच तभी हो सकती है जब व्यक्ति तर्कपूर्ण विचारों से जांचकर अपनी राजनैतिक सोच स्वयं विकसित करे। पंथनिरपेक्ष शब्द डॉ. अम्बेडकर के निधन के करीब दो दशक बाद, 42वें संशोधन से प्रस्तावना में घुसा दिया गया।

आज जिस सेक्युलर का अर्थ कुछ लोग धूर्ततापूर्ण तरीके से धर्मनिरपेक्ष बताते हैं, वो असल में पंथनिरपेक्ष है, धर्मनिरपेक्ष है ही नही। संविधान दिवस पर संविधान से जुड़े दूसरे मिथकों के अलावा हमें ऐसे बदलावों से भी लड़ने की तैयारी करनी चाहिए जो देश पर आपातकाल लागू करके संविधान को रोकने वाले नेताओं ने लागू किये थे। विरोध की इस आजादी के बिना तो आजादी अधूरी है!

स्रोत: संविधान दिवस, Constitution Day, Dr Rajendra Prasad, डॉ रैन्द्र प्रसाद
Tags: Constitution DayDr Rajendra Prasadडॉ राजेंद्र प्रसादसंविधान दिवस
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

खतरे में राहुल गांधी की नागरिकता: हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जबाव, दोहरी नागरिकता रखने का है आरोप

अगली पोस्ट

पाकिस्तान के मंदिर: बंटवारे के पहले जहां लगती थी भक्तों की भीड़, बिना मूर्ति सालों वीरान रहा वो स्वामीनारायण मंदिर

संबंधित पोस्ट

इंक़लाब भगत सिंह
इतिहास

क्रांति की अपनी एक अलग परिभाषा थी भगत सिंह की

23 March 2026

लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आग़ाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इंक़लाब लायेगा। मैं रहूँ या न रहूँ पर यह वादा हैं...

Shahidi Diwas
इतिहास

भगत सिंह के जीवन के अंतिम 12 घंटों की वो कहानी, जो रोंगटे खड़े कर देती है

23 March 2026

लाहौर सेंट्रल जेल में दिनांक 23 मार्च 1931 के दिन का आरम्भ बड़ा ही सामान्य था लेकिन यह दिन तब तक ही सामान्य रहा जब...

22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था
इतिहास

‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

23 March 2026

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की चर्चा भगत सिंह का नाम लिए बगैर हमेशा अधूरी ही मानी जाएगी। भगत सिंह का योगदान इतिहास के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited