ध्रुव राठी की नागरिकता और भारत में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी को लेकर विवाद गहरा गया है। 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद भाजपा नेता और बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर राठी की नागरिकता, पासपोर्ट और आव्रजन स्थिति की जांच की मांग की। राठी के जर्मन नागरिक होने की बात इस विवाद के केंद्र में है, लेकिन उनकी नागरिकता और भारत में प्रवेश की शर्तों का आधिकारिक सत्यापन होना अभी जरूरी है।
इस बीच, 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले राठी को पुलिस हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आईं। इससे यह सवाल और अहम हो गया है कि क्या कोई विदेशी नागरिक भारत में राजनीतिक आंदोलन में हिस्सा ले सकता है? क्या ऐसा करना अपने आप में अपराध है? और अगर वीजा की शर्तों का उल्लंघन साबित होता है, तो क्या देश से निकाला जा सकता है? आइए, कानून को आसान भाषा में समझते हैं।
क्या विदेशी नागरिक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन कर सकते हैं?
इसका जवाब केवल नागरिकता के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित व्यक्ति की आव्रजन स्थिति और भारत में प्रवेश की अनुमति की शर्तों के आधार पर भी तय होगा।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार भारतीय नागरिकों को देता है। विदेशी नागरिकों को ये अधिकार अनुच्छेद 19 के तहत प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 21 जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण विदेशी नागरिकों को भी प्रदान करता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि विदेशी नागरिकों को भारत में हर प्रकार की राजनीतिक गतिविधि करने की स्वतः अनुमति है। भारत में विदेशी नागरिकों का प्रवेश और उनका प्रवास आव्रजन कानूनों तथा वीजा की शर्तों से नियंत्रित होता है। यदि किसी व्यक्ति को पर्यटन या यात्रा के लिए अनुमति मिली है, तो उसे उस अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की वैधता संबंधित वीजा श्रेणी और लागू नियमों के आधार पर जांची जा सकती है।
इसलिए किसी विदेशी नागरिक का प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में हर परिस्थिति में अपराध घोषित नहीं किया जा सकता। यह देखना होगा कि उसने किस अनुमति पर भारत में प्रवेश किया और क्या उसकी गतिविधि उस अनुमति की शर्तों के विरुद्ध थी।
अगर ध्रुव राठी जर्मन नागरिक हैं, तो क्या होगा?
भारत में दोहरी नागरिकता की सामान्य व्यवस्था नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किसी अन्य देश की स्वेच्छा से नागरिकता प्राप्त करने पर भारतीय नागरिकता समाप्त होने के प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति के पास जर्मन नागरिकता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता की स्थिति की जांच संबंधित कानूनी तथ्यों के आधार पर करनी होगी।
हालांकि, जर्मनी में रहना, वहां पढ़ाई करना या वहां काम करना अपने आप में जर्मन नागरिक होने का प्रमाण नहीं है। इसी तरह, सोशल मीडिया पर किए गए दावों से किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं होती।
यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक है, तो उसकी स्थिति भी अलग होगी। OCI का दर्जा भारतीय नागरिकता के बराबर नहीं है। OCI कार्डधारकों को भारत में रहने और आने-जाने जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन उन्हें भारतीय नागरिकों के सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते। नागरिकता अधिनियम की धारा 7D के तहत निर्धारित कानूनी आधारों और प्रक्रिया के अनुसार OCI पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
क्या गृह मंत्रालय वीजा रद्द कर सकता है या देश से निकाल सकता है?
यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी विदेशी नागरिक ने अपने वीजा या भारत में रहने की अनुमति की शर्तों का उल्लंघन किया है, तो संबंधित अधिकारी लागू आव्रजन कानूनों के तहत कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।
इसमें मामले के तथ्यों के अनुसार कारण बताओ नोटिस, भारत में रहने की अनुमति पर पुनर्विचार, देश छोड़ने का निर्देश या निर्वासन जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। भविष्य में भारत आने पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना संबंधित कानूनों और आदेशों पर निर्भर करेगी।
पुलिस हिरासत में लिए जाने पर क्या अधिकार मिलते हैं?
अगर किसी व्यक्ति को प्रदर्शन के दौरान या उससे पहले हिरासत में लिया जाता है, तो यह देखना जरूरी होता है कि पुलिस ने उसे किस कानूनी आधार पर हिरासत में लिया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 170 पुलिस को संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी की अनुमति देती है। इसके लिए कानूनी शर्तों का पूरा होना जरूरी है। इस धारा के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को सामान्यतः 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, जब तक किसी अन्य कानूनी प्रावधान के तहत आगे हिरासत अधिकृत न हो।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह की हिरासत में 24 घंटे बाद स्वतः रिहाई हो जाती है। यदि नियमित आपराधिक मामला दर्ज है, तो आगे की हिरासत और मजिस्ट्रेट के सामने पेशी से संबंधित नियम लागू होंगे।
यदि हिरासत में लिया गया व्यक्ति विदेशी नागरिक है, तो उसके दूतावास से संपर्क और कांसुलर सहायता का प्रश्न भी उठ सकता है। वियना कांसुलर संबंध सम्मेलन के अनुच्छेद 36 के तहत संबंधित अधिकार लागू परिस्थितियों और प्रक्रिया के अनुसार मिलते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा जाता है, तो वह उचित परिस्थितियों में अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की जा सकती है। वहीं, आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने के लिए BNSS की धारा 528 के तहत उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों का सहारा लिया जा सकता है। हालांकि, याचिका दाखिल करने का अधिकार और उसमें राहत मिलना अलग-अलग बातें हैं।
ध्रुव राठी के मामले में अब क्या देखना होगा?
इस विवाद में आगे की कानूनी स्थिति मुख्य रूप से तीन सवालों के जवाब पर निर्भर करेगी। पहला, क्या ध्रुव राठी भारतीय नागरिक हैं, जर्मन नागरिक हैं या किसी अन्य कानूनी श्रेणी के तहत भारत में रह रहे हैं? दूसरा, उन्होंने भारत में प्रवेश किस पासपोर्ट और किस प्रकार की अनुमति के आधार पर किया? तीसरा, क्या बेंगलुरु के प्रदर्शन में उनकी भागीदारी ने वास्तव में किसी लागू कानून या वीजा शर्त का उल्लंघन किया?
ध्रुव राठी पहले भी विभिन्न कानूनी विवादों में चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2024 में भाजपा प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था। उसी वर्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बेटी से संबंधित एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत हुई थी; उस मामले में पोस्ट के पैरोडी अकाउंट से जुड़े होने की बात सामने आई थी। वर्ष 2023 में डाबर इंडिया ने अपने उत्पाद से संबंधित वीडियो को लेकर कानूनी कार्रवाई की थी।
































