फ्रांस में 17 अक्टूबर 2026 को महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बीच बड़े पैमाने पर लूटपाट, आगजनी और पुलिस से हिंसक टकराव हुआ। सैकड़ों हजार लोग सड़कों पर उतरे, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने आंदोलन के मूल मुद्दों को पीछे धकेल दिया।
इसी घटनाक्रम के बीच ब्रिटिश एक्टिविस्ट टॉमी रॉबिन्सन की एक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर अलग बहस छेड़ दी। उन्होंने लिखा:
“Everything looted. Apart from pork products. Explains a lot.”
इसका आशय था कि सब कुछ लूट लिया गया, लेकिन पोर्क उत्पाद छोड़ दिए गए। रॉबिन्सन ने इस कथित पैटर्न को धार्मिक पहचान से जोड़ने का संकेत दिया। पोर्क इस्लाम में निषिद्ध है, इसलिए पोस्ट को कई लोगों ने इस दावे के रूप में पढ़ा कि लूटपाट करने वालों ने धार्मिक मान्यता के कारण कुछ उत्पादों को हाथ नहीं लगाया।
लेकिन यहां एक बुनियादी सवाल है: क्या इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि हुई है? और क्या उपलब्ध सबूत यह साबित करते हैं कि फ्रांस में यहूदी कारोबारों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया गया, जबकि मुस्लिम कारोबार सुरक्षित रहे?
फ्रांस में वास्तव में क्या हुआ?
17 अक्टूबर को फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। पेरिस में नकाबपोश समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, सुपरमार्केट, कैफे, हेयर सैलून, कपड़ों की दुकानों और मोबाइल फोन स्टोरों में लूटपाट की। सार्वजनिक इमारतों और वाहनों को भी निशाना बनाया गया।
Associated Press और Reuters की रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा के दौरान गिरफ्तारियां हुईं और पुलिसकर्मी घायल हुए। लिमोज शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आगजनी की घटना भी सामने आई। फ्रांसीसी सरकार ने हिंसक तत्वों और कट्टरपंथी समूहों की भूमिका पर सवाल उठाए।
यहूदी प्रतिष्ठानों पर हमलों की खबरें
इस घटनाक्रम का एक गंभीर पहलू यहूदी समुदाय से जुड़े प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। Jewish Telegraphic Agency की 18 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मार्सेई में यहूदी स्वामित्व वाली दुकानों में आग लगाई गई और पेरिस के एक सिनेगॉग में तोड़फोड़ हुई। यह घटनाएं व्यापक हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के बीच सामने आईं। क्या ये हमले यहूदी पहचान के कारण किए गए थे? यह एक गंभीर सवाल है।
टॉमी रॉबिन्सन की पोस्ट को आगे बढ़ाने वाले कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने यह संकेत दिया कि पोर्क उत्पादों को छोड़ना और दूसरे सामान को लूटना धार्मिक पहचान का प्रमाण है।
मैक्रों ने कहा कि फ्रेंच लोग फ्रांस के साथ ऐसा क्या कैसे सकते हैं ?
18 अक्टूबर को राष्ट्र के नाम संबोधन में मैक्रों ने कहा, “How can French people do this to France?” यानी, “फ्रांसीसी लोग फ्रांस के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?” उन्होंने हिंसा को लेकर गुस्सा और शर्मिंदगी जताई तथा कहा कि लूटपाट करने वालों को नुकसान की भरपाई करनी होगी और गणराज्य को गिराने की कोशिश करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
मगर इसके साथ जो नहीं कहा गया और मगर मायने साफ थे कि फ्रांस को अपने देश मानने वाले लोग ऐसा नहीं कर सकते और जो लोग कर रहे है वो फ्रैंच नहीं है।

































