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गृह युद्ध के विस्फोटक पर बैठा है पाकिस्तान, किसी भी समय हो सकता है तहस-नहस

पाकिस्तान की स्थिति हर दिन बद से बदतर होती जा रही है!

Yogesh Sharma द्वारा Yogesh Sharma
28 February 2023
in मत
पाकिस्तान गृहयुद्ध

Source: TFI MEDIA

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पाकिस्तान में गृहयुद्ध: पड़ोसी देश पाकिस्तान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। पाकिस्तान की सरकार पूरी तरह से लाचार है। स्थिति इतनी बुरी है कि पाकिस्तानियों को दाल-रोटी के भी लाले पड़े हैं और अब जिस तरह की घटनाएं पाकिस्तान से निकलकर सामने आ रही हैं वो बताती हैं कि भविष्य में वहां की स्थिति और बिगड़ने जा रही है।

इस लेख में पढ़िए कैसे पाकिस्तान में गृहयुद्ध की स्थिति बन गई है।

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पाकिस्तान में कर्मचारियों का वेतन रुका

पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गर्त में है। ऋण लेकर पाकिस्तान सरकार कुछ दिनों के लिए अपने देश को दिवालिया होने से बचा लेती है लेकिन स्थिति पुन: वैसी ही हो जाती है। हालात ये हैं कि अब पाकिस्तान में मंत्रियों-कर्मचारियों का वेतन रोके जाने की बात भी सामने आ रही है।

संकट की इस घड़ी में पाकिस्तानी जनता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद कर रही है। पाकिस्तानी लोग बार-बार यह कह रहे हैं कि काश! पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते। चरमराती अर्थव्यवस्था के बीच पाकिस्तान में आंतरिक स्थिति भी दिन-पर-दिन बुरी होती जा रही है- कुल मिलाकर स्थिति पाकिस्तान में गृहयुद्ध की बनी हुई है।

जिस आतंकवाद को पाकिस्तानी सरकार और पाकिस्तानी सेना ने भारत को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से पाला था, आज वही आतंकवाद उसके भय का सबसे बड़ा कारण बन गया है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के विरोध प्रदर्शन और रैलियों के मध्य पाकिस्तान पंजाब की कार्यवाहक सरकार ने आतंकी हमलों का भय जताते हुए लाहौर में सात दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी है, यदि आज पाकिस्तान जैसा आतंकपरस्त देश आतंकवाद के कारण धारा 144 लागू कर रहा है तो आप समझ सकते हैं कि स्थिति कितनी दयनीय हो गई है।

और पढ़ें: लाहौर समझौते के बाद कैसे पाकिस्तान ने भारत की पीठ में छुरा घोंपा?

हालात तो इतने बुरे हो चुके हैं कि पाकिस्तान के खेल के मैदानों में लोग जनरेटर की बैटरी और सीसीटीवी कैमरों की फाइबर केबल को भी नहीं छोड़ रहे हैं। पाकिस्तान सुपर लीग में एक अजीबोगरीब घटना देखने को मिली। इस टूर्नामेंट के मध्य गद्दाफी स्टेडियम से लाखों रुपये की चोरी हो गई।

पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड या गद्दाफी स्टेडियम के अधिकारियों ने मामले पर कोई सूचना जारी नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गद्दाफी स्टेडियम से सीसीटीवी कैमरे, स्टेडियम में रोशनी के लिए लगे जनरेटर की बैटरी और सीसीटीवी कैमरों की फाइबर केबल के साथ कुछ अन्य वस्तुएं भी चोरी हुई हैं।

चोरी हुए सामान का मूल्य 10 लाख पाकिस्तानी रुपये बताया जा रहा है। अब आप विचार कर रहे होंगे कि 10 लाख कौन-सी बड़ी संपदा है लेकिन आपको समझना होगा कि पाकिस्तान के लिए 10 लाख रुपये बहुत अधिक हैं- क्योंकि जिस देश में लोग खाने के लिए आटा ना क्रय कर पाएं- जिस देश में लोग आधा कप चाय पीकर काम चलाएं- जिस देश में लोग अन्न के लिए दंगे करने पर उतारू हो जाएं तो आप समझ सकते हैं कि उस देश के लिए 10 लाख रुपये क्या महत्व रखते हैं?

पाकिस्तान में गृहयुद्ध: बलूचिस्तानियों का विरोध प्रदर्शन

एक तरफ पाकिस्तान में बुरी आर्थिक स्थिति के कारण लोग आग-बबूला हो रहे हैं तो दूसरी ओर पूरे पाकिस्तान में अराजकता की स्थिति बनी हुई है। पूरे पाकिस्तान में बलूचिस्तानी बहुत बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसका कारण पाकिस्तानी सरकार और पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच लोगों को प्रताड़ना देना है।

बलूच लोगों पर हो रही प्रताड़ना के मामले बीच-बीच में आते रहते हैं- 1.3 करोड़ की जनसंख्या वाले इस प्रांत में अत्याचार जारी है। 2004 से अब तक यहां लगभग 4 हजार लोगों की हत्या की गई है।

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यही कारण है कि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग करने वाले संगठन आए दिन पाकिस्तानी सेना और सरकार के लोगों को लक्ष्य बनाते रहते हैं। इसके बाद भी बलूच लोगों पर हो रहे अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। वर्तमान में पाकिस्तान में बलूची जो प्रदर्शन कर रहे हैं, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण है बलूच महिलाओं का गायब होना।

बलूचिस्तान में महिलाओं के अचानक गायब होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। क्वेटा, कराची, केच, खुजदार, मांड और बलूचिस्तान के अन्य हिस्सों में बलूच महिलाओं को गायब किया जा रहा है।

पाकिस्तान सेना और अन्य एजेंसियां पिछले कई वर्षों से बलूच लोगों को उठाकर ले जा रही थी- जो बलूच गायब होते थे उनमें ज्यादातर युवा होते थे लेकिन अब बलूच महिलाओं को पाकिस्तानी सेना और वहां की अन्य एजेंसियां लक्ष्य कर रही हैं। 3 फरवरी को बलूचिस्तान के राजधानी शहर क्वेटा से पाकिस्तानी सेना खुफिया एजेंसियों के सहयोग से रहीम जहरी, उसकी मां महबास खातून उसकी पत्नी रशीदा जफरी और उसके दो बच्चों को उठा ले गई।

इसी तरह पाकिस्तानी सेना महल बलूच, उनकी दो बेटियों और अन्य महिलाओं को उठा ले गई। पिछले वर्ष अगस्त में पाकिस्तानी सेना बोलन जिले के उच कमान इलाके से 13 महिलाओं को उठा ले गई थी।

बलूची की प्रसिद्ध कवयित्री हबीबा पीर जान का कराची से अपहरण कर लिया गया और एक अन्य महिला को केच जिले से हिरासत में लिया गया। 2018 और 2019 में भी बलूच महिलाओं के गायब होने के मामले सामने आए थे।

मानवाधिकार संगठन वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स के एक अनुमान के मुताबिक पिछले तीन दशकों में 6,000 से अधिक बलूच लोगों का इस तरह अपहरण किया है। उनके बारे में अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। संस्था के मुताबिक 2009 से अब तक 1,400 बलूच लोगों के शव मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीते दो वर्षों में 287 बलूचों का अपहरण किया गया है। पाकिस्तान की सेना का बलूचियों पर जिस तरह का अत्याचार जारी है, उससे बलूचों में भयंकर आक्रोश है।

पाकिस्तान में गृहयुद्ध: आतंकवाद बना पाकिस्तान का काल

उधर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, पाकिस्तान के लिए सिर दर्द बना हुआ है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर टीटीपी के कई हजार आतंकी मौजूद हैं, जो पाकिस्तान की सरकार के विरुद्ध एक प्रकार का युद्ध छेड़े हुए हैं।

और पढ़ें: दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बननने जा रहा है पाकिस्तान, तहरीक-ए-लब्बैक ने बनाया है ‘मास्टर प्लान’

समय-समय पर पाकिस्तान की सेना पर हमले करके टीटीपी पाकिस्तान को दहलाता रहता है और संभावनाएं ये भी हैं कि कभी भी अफगानिस्तान के तालिबान के साथ हाथ मिलाकर टीटीपी पाकिस्तान पर संपूर्ण हमला कर सकता है।

इसके साथ ही चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर भी पाकिस्तान के गले की हड्डी बन गया है। पाकिस्तान में सीपैक के विरुद्ध पिछले कई वर्षों से प्रदर्शन हो रहे हैं और अब इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप लेना शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर सीपैक पर काम कर रहे चीन के अधिकारियों के ऊपर हमले हो रहे हैं- जिसके बाद चीन भी पाकिस्तान को और ज्यादा छूट देने के मूढ़ में दिखाई नहीं दे रहा है।

ये परिस्थितियां बताती हैं कि पाकिस्तान इस कंगाली की स्थिति में चारों ओर से संकटों से घिरा हुआ है। एक ओर पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी सरकार के विरुद्ध लोगों के भीतर आक्रोश भरा है। दूसरी ओर पाकिस्तान का पाला हुआ आतंकवाद ही उसके जी का जंजाल बन गया है।

तीसरी ओर बलूच अब और अत्याचार सहने के लिए तैयार नहीं हैं और वो किसी भी सीमा तक जाते हुए दिख रहे हैं और सीपैक का प्रश्न भी इन दिनों और बड़ा हो गया है- ऐसे में निश्चित तौर पर यह  कहा जा सकता है कि पाकिस्तान गृद युद्ध के विस्फोटक पर बैठा है और जिस दिन इस विस्फोटक का धमाका पाकिस्तान में होगा, उस दिन पाकिस्तान का तहस-नहस होना निश्चित है।

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Tags: balooch protest in pakistanPakistan Civil WarPakistan Economic situationपाकिस्तान में प्रदर्शन
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