इस्तांबुल में पाकिस्तान की कूटनीतिक हार: जब झूठ, दोहरापन और ‘ब्लेम इंडिया’ की नीति ने उसे दुनिया के सामने नंगा कर दिया
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    BL Santosh BJP Punjab Mission 120 Days ahead of Punjab Assembly Election 2027पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने संगठन विस्तार के लिए 120 दिनों की रणनीति पर काम तेज किया है।

    पंजाब में BJP का ‘मिशन 120 दिन’: हर सीट पर 5 हजार कार्यकर्ताओं का टारगेट, युवा-किसान मोर्चे को मिला बड़ा टास्क

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    नील विद्रोह

    “नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    BL Santosh BJP Punjab Mission 120 Days ahead of Punjab Assembly Election 2027पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने संगठन विस्तार के लिए 120 दिनों की रणनीति पर काम तेज किया है।

    पंजाब में BJP का ‘मिशन 120 दिन’: हर सीट पर 5 हजार कार्यकर्ताओं का टारगेट, युवा-किसान मोर्चे को मिला बड़ा टास्क

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    नील विद्रोह

    “नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

इस्तांबुल में पाकिस्तान की कूटनीतिक हार: जब झूठ, दोहरापन और ‘ब्लेम इंडिया’ की नीति ने उसे दुनिया के सामने नंगा कर दिया

इस्तांबुल में हुई वार्ता में पाकिस्तान का यह चेहरा पूरी तरह उजागर हुआ, वह चेहरा जो एक ओर अमेरिका को ‘आतंक के खिलाफ साझेदार’ दिखता है, तो दूसरी ओर उन्हीं आतंकियों का वित्तपोषक भी है।

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
29 October 2025
in चर्चित, भारत, भू-राजनीति, विश्व
इस्तांबुल में पाकिस्तान की कूटनीतिक हार: जब झूठ, दोहरापन और ‘ब्लेम इंडिया’ की नीति ने उसे दुनिया के सामने नंगा कर दिया

आज पाकिस्तान जिस दुर्दशा में है, वह उसकी अपनी बनाई हुई है।

Share on FacebookShare on X

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर एक बार फिर पाकिस्तान ने वही किया, जो वह दशकों से करता आया है। आतंक को पालने के बाद शांति का दिखावा करना, फिर जब अपनी ही बनाई आग में जलने लगे तो उसका दोष भारत पर मढ़ देना। तुर्की और क़तर की मध्यस्थता में इस्तांबुल में आयोजित पाकिस्तान–तालिबान शांति वार्ता का हालिया पतन इसी दोहरेपन का जीवंत उदाहरण बन गया है। पाकिस्तान ने इस बैठक में पहली बार स्वीकार किया कि वह अमेरिकी ड्रोन अभियानों को अपनी ज़मीन से चलाने की अनुमति देता है। यह स्वीकारोक्ति उस इस्लामी गणराज्य की उस लंबे समय से चली आ रही नीति को पूरी तरह उघाड़ देती है, जो खुद को संप्रभुता का रक्षक बताता है, लेकिन गुप्त रूप से वाशिंगटन की रणनीति का सहयोगी बना रहता है।

यह वार्ता, जो दक्षिण एशिया में एक दुर्लभ शांति-प्रयास के रूप में देखी जा रही थी, अब पूरी तरह ढह चुकी है। अफ़ग़ान प्रतिनिधिमंडल, जो पहले ही पाकिस्तान के दोहरी चालों से सावधान था, ने इस खुलासे को विश्वासघात बताया। उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने न केवल अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता को कमजोर किया है, बल्कि अमेरिकी एजेंडे को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर क्षेत्र को अस्थिर किया है। जब अफ़ग़ान प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान से यह गारंटी मांगी कि वह भविष्य में अपनी ज़मीन को अमेरिकी ड्रोन हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा, तो पाकिस्तानी दल ने पहले सहमति जताई। मगर कुछ ही मिनटों बाद रावलपिंडी से आया एक आपात फोन कॉल सब कुछ पलट गया, कथित तौर पर सेना मुख्यालय से आदेश मिला कि इस विषय पर कोई वचन नहीं देना है।

संबंधितपोस्ट

लद्दाख की 28 जगहों के नाम सरकारी नक्शे पर दर्ज, गोगरा-हॉट स्प्रिंग भी शामिल

जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

चीन के शिनजियांग के रास्ते उड़ानें शुरू करने की तैयारी, पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से बढ़ा खर्च

और लोड करें

यही वह क्षण था जब वार्ता की हवा निकल गई। क़तर और तुर्की के मध्यस्थ भी चकित रह गए कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि इतने अस्थिर, अभद्र और उग्र कैसे हो सकते हैं। उन्होंने वार्ता को साबोटाज बाय डिज़ाइन यानी जानबूझकर विफल करने की चाल बताया। पाकिस्तानी प्रतिनिधि दल की अगुवाई आईएसआई के मेजर जनरल शाहाब असलम कर रहे थे, वही अधिकारी जिनका नाम पहले कश्मीर के पहलगाम हमले के संचालन में भी जुड़ा था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी।

असलम ने अफ़ग़ान प्रतिनिधियों से मांग की कि वे पाकिस्तान के खिलाफ काम कर रहे सभी आतंकी गुटों खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को नियंत्रण में लें। जवाब में अफ़ग़ानों ने बिल्कुल सटीक उत्तर दिया टीटीपी पाकिस्तानी नागरिक हैं, अफ़ग़ान नहीं। अपने नागरिकों पर नियंत्रण आपकी जिम्मेदारी है, हमारी नहीं। इस एक वाक्य ने पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीति की पोल खोल कर रख दी।

दरअसल, टीटीपी वही संगठन है जिसे कभी पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने पाला-पोसा था। अफ़ग़ानिस्तान में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए उसने इन्हें रणनीतिक संपत्ति माना। लेकिन जैसे-जैसे तालिबान ने काबुल में सत्ता संभाली, इन तथाकथित संपत्तियों ने अपने मालिकों के खिलाफ ही हथियार उठा लिए। अब वही पाकिस्तान जो कभी आतंकियों का संरक्षक था, उन्हीं के हमलों से त्रस्त है।

टूट चुका है पाकिस्तानी सेना का मनोबल

पाकिस्तान की सेना, विशेषकर जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में, आज गहरे दबाव में है। पश्चिमी सीमांत पर तालिबान के हमले बढ़ रहे हैं, उत्तर वज़ीरिस्तान और कुर्रम में पाक सैनिकों को भारी नुकसान हुआ है। उधर, भारत के साथ सीमा पर पाकिस्तान की उकसावनी का जवाब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी सटीक कार्रवाईयों से दिया, जिसने उसके अग्रिम ठिकानों और आतंक-लॉन्चपैड्स को बुरी तरह ध्वस्त किया। इन दोहरी विफलताओं पूर्व और पश्चिम दोनों मोर्चों पर पराजय ने पाकिस्तानी सेना के आत्मविश्वास को तोड़ दिया है। ऐसे में ब्लेम इंडिया की नीति एक बार फिर उनका आसान बहाना बन गई है।

यह प्रवृत्ति कोई नई नहीं। हर बार जब पाकिस्तान भीतर से सड़ने लगता है, वह बाहरी दुश्मन गढ़ता है और भारत उसके लिए सबसे सुविधाजनक लक्ष्य होता है। चाहे वह बलूचिस्तान में विद्रोह हो, सिंध में आर्थिक ठहराव या तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी संगठनों की हिंसा। हर समस्या की जड़ में इस्लामाबाद भारत को देखता है। यही उसकी आत्मवंचना है, वही बीमारी जिसने उसके लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और समाज तीनों को खोखला कर दिया है।

कैसे फेल्ड स्टेट बना पाकिस्तान

इस्तांबुल में हुई वार्ता में पाकिस्तान का यह चेहरा पूरी तरह उजागर हुआ, वह चेहरा जो एक ओर अमेरिका को ‘आतंक के खिलाफ साझेदार’ दिखता है, तो दूसरी ओर उन्हीं आतंकियों का वित्तपोषक भी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी वहां लगभग लड़खड़ाते दिखाई दिए। उनकी हर दलील में या तो झूठ था या आत्मविरोध। जब क़तर के राजदूत ने पूछा कि क्या अमेरिका के ड्रोन आपके एयरबेस से उड़ते हैं, तो मेजर जनरल असलम का उत्तर था हमारे पास भी अमेरिका से समझौता है। यह स्वीकारोक्ति केवल एक बयान नहीं थी, यह पाकिस्तान की कूटनीतिक नैतिकता की मृत्यु-पत्र थी।

अब सोचिए, एक देश जो दशकों से अपने नागरिकों को यह झूठ बेचता रहा कि हम किसी विदेशी ताकत को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देंगे, वही देश अब खुद मान रहा है कि अमेरिकी ड्रोन उसकी सरज़मीं से उड़ते हैं और पड़ोसी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं। यही तो वह दोहरापन है, जिसने पाकिस्तान को फेल्ड स्टेट बना दिया है।

भारत के लिए इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दुनिया अब पाकिस्तान की इस ढोंग-नीति को साफ़-साफ़ देख रही है। तालिबान का रुख जो कभी पाकिस्तान का अनुचर माना जाता था, अब स्पष्ट रूप से बदल चुका है। अफ़ग़ान प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा कि वे पाकिस्तान की भीतर की समस्याओं को अपने सिर नहीं लेंगे। यह वही तालिबान है जिसे पाकिस्तान ने कभी अपनी रणनीतिक गहराई कहा था, जो अब कह रहा है कि आपकी लड़ाई आपकी है। यह पाकिस्तान की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक हार है, और भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बिना एक भी गोली चलाए।

आज पाकिस्तान जिस दुर्दशा में है, वह उसकी अपनी बनाई हुई है। अमेरिका के लिए वह महज़ एक अस्थायी किराए का ठिकाना है, चीन के लिए एक ऋणग्रस्त ग्राहक और अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक अविश्वसनीय पड़ोसी। रही बात भारत की तो भारत अब न तो उसके आरोपों से विचलित होता है, न ही उसके छलावे में आता है। मोदी युग का भारत सीमा पर भी आत्मविश्वासी है, और कूटनीति में भी आक्रामक। पाकिस्तान के लिए यह नई वास्तविकता सबसे असहज है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब उसकी कश्मीर कार्ड की चमक भी फीकी पड़ चुकी है। जब वह तालिबान से लेकर तुर्की तक सबके बीच उपहास का पात्र बन गया, तब उसने अपनी पुरानी लय पकड़ी भारत हमें अस्थिर कर रहा है। लेकिन इस बार कोई भी देश उसकी कहानी पर विश्वास नहीं कर रहा। अमेरिका जानता है कि पाकिस्तान के साथ कोई भी समझौता दो दिन से ज़्यादा टिकाऊ नहीं। चीन को भी एहसास है कि जिस देश का शासन खुद अपने आतंकियों से सुरक्षित नहीं, वह सीपेक कॉरिडोर की सुरक्षा कैसे करेगा।

भारत के लिए वार्ता टूटने का मतलब

इस्तांबुल वार्ता की विफलता दरअसल पाकिस्तान के लिए सिर्फ कूटनीतिक हार नहीं, बल्कि मानसिक और वैचारिक दिवालियापन का प्रतीक है। वह आज भी खुद को इस्लामी दुनिया का नेता मानता है, लेकिन उसके भीतर इतनी अस्थिरता है कि न वह अपने नागरिकों को रोटी दे पा रहा है, न अपने सैनिकों को सुरक्षा। उसके प्रधानमंत्री बदलते रहते हैं, लेकिन नीतियां वही रहती हैं झूठ, दोहरापन और भारत-द्वेष।

एक राष्ट्रवादी दृष्टि से देखें तो भारत को इस स्थिति से तीन महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। पहला—दुनिया में आज कोई भी देश आतंक को राजनीतिक औज़ार बनाकर टिक नहीं सकता, पाकिस्तान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। दूसरा कूटनीतिक स्थायित्व केवल शब्दों से नहीं, विश्वसनीयता से बनता है, पाकिस्तान ने उसे खो दिया है। और तीसरा भारत को अपनी नीति में आत्मविश्वास बनाए रखना होगा, क्योंकि अब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था भारत को स्थिर शक्ति के रूप में देखती है, जबकि पाकिस्तान को एक असफल प्रयोग के रूप में।

इस्तांबुल की इस विफलता ने एक सच्चाई को फिर उजागर किया है, पाकिस्तान के पास अब न कोई रणनीति बची है, न कोई साख। जो कभी तालिबान को इस्लामी भाइयों कहकर इस्तेमाल करता था, वही आज उन्हीं से सुरक्षा की भीख मांग रहा है। जिसने भारत को हर मोर्चे पर नुकसान पहुंचाने की कसम खाई थी, वही आज अपने घर में उठती आग बुझाने में असमर्थ है।

भारत को इस पर चिंता नहीं, बल्कि सतर्क गर्व होना चाहिए कि दक्षिण एशिया का शक्ति-संतुलन अब स्थायी रूप से बदल चुका है। काबुल से इस्तांबुल तक अब यह स्पष्ट है कि नई दिल्ली की विदेश नीति स्थिरता, विकास और संप्रभुता पर आधारित है, जबकि इस्लामाबाद की नीति भ्रम, छल और आत्मविनाश पर।

आख़िर में, इस्तांबुल की वह टूटी हुई मेज़ अब पाकिस्तान की टूटी हुई कूटनीति का प्रतीक बन गई है। जब एक देश झूठ को सच की तरह बेचता है, जब वह अपने ही नागरिकों के आतंक से डरने लगता है, और जब उसकी सेना बाहरी मालिकों की टेलीफोन कॉल पर अपनी नीतियां बदलती है तो वह देश इस्लाम का किला नहीं रह जाता, बल्कि एक चेतावनी बन जाता है कि कैसे राष्ट्र स्वयं को नष्ट करते हैं। पाकिस्तान अब वही चेतावनी है। और भारत अपने विवेक, संयम और शक्ति से उस चेतावनी के ठीक उलट दिशा में बढ़ रहा है।

Tags: AfghanistanChinaIndiaIstanbul talksPakistanTalibanTerrorismUSअफ़ग़ानिस्तानअमेरिकाआतंकवादइस्तांबुल वार्ताचीनतालिबानपाकिस्तानभारत
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

बिहार में मोदी का महासंकल्प: रोड शो से जन-जन तक ‘राष्ट्रवादी विकास यात्रा’

अगली पोस्ट

बाबरी मस्जिद विवाद और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी: जब सुप्रीम कोर्ट ने तन्हा अब्दुल रहमान को दी स्पष्ट चेतावनी

संबंधित पोस्ट

सुपर अल नीनो की नई चेतावनी: भारत में कम पड़ेगी सर्दी? गेहूं की फसल और महंगाई पर मंडराया खतरा
चर्चित

सुपर अल नीनो की नई चेतावनी: भारत में कम पड़ेगी सर्दी? गेहूं की फसल और महंगाई पर मंडराया खतरा

10 October 2026

सुपर अल नीनो की आशंका ने दुनिया भर में मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य...

JNU से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम बर्खास्त, 11 छात्राओं की शिकायतें; क्या अब जाएगी सांसदी?
चर्चित

JNU से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम बर्खास्त, 11 छात्राओं की शिकायतें; क्या अब जाएगी सांसदी?

9 October 2026

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर हुई आंतरिक जांच के बाद तत्काल...

भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर
विश्व

भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

9 October 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारतीय IT कंपनियों और विदेशी पेशेवरों के खिलाफ सख्ती बढ़ाई, तो भारत ने भी अपनी बात स्पष्ट...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Why Is the World Buying India’s Akash Missile System? Who’s Next in Line? | Armenia | Make in India

Why Is the World Buying India’s Akash Missile System? Who’s Next in Line? | Armenia | Make in India

00:04:19

Inside India’s Most Famous Fighter Squadrons: Their Wars, Jets & Legacy | IAF | AirForceDay

00:05:58

Hanuman Chalisa Kept Me Going': Flydubai Hero Smit

00:10:03

How Pakistan-Linked Drug Networks Are Targeting India | Coast Guard Deals a ₹3,000 Crore Blow

00:03:28

How SkyStriker Hunts Its Target: Inside India’s Loitering Munition

00:03:49
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited