अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प कल कुछ घंटों पहले तक एक सभ्यता की समाप्ति का खुला ऐलान कर रहे थे। ऑलमोस्ट गरिया रहे थे कि ए…@#^$ हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) खोल दो, नहीं तो हम तुम्हें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे। यहां भारत में तो एक अलग तरह का ही माहौल था– लोग इस चिंता में डूबे थे कि सुबह साढ़े 5 बजे जब ट्रम्प साहब की डेडलाइन खत्म होगी तो क्या होगा? अटकलें चल रही थीं कि ट्रम्प कल ईरान पर कौन सा बम गिराएंगे?
कई विशेषज्ञ तो बकायदा परमाणु हमले पर मंथन शुरू कर चुके थे कि अगर अमेरिका ने एटम बम गिराया तो क्या भारत तक रेडिएशन पहुंचेगा? पहुंचेगा तो कैसे बचें?
लेकिन सुबह होते होते सारा उत्साह ठंडा पड़ गया, क्योंकि डेडलाइन खत्म होने से पहले ही ट्रम्प साहब ने ईरान के साथ दो हफ्तों के एक सीजफायर को रज़ामंदी दे दी थी। लाइव एटम बम विस्फोट देखने के तमाम ख्वाहिशमंदों की ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। डॉनल्ड ट्रम्प ने अपने पोस्टमैन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के ज़रिए मैसेज दिलवाया कि ईरान ने उनकी बात मान ली है और अब वो दो हफ्ते के लिए युद्ध रोक रहे हैं, यानी सीजफायर कर रहे हैं।
ट्रम्प ने इसे दुनिया के लिए बहुत बड़ा दिन बता दिया। वैसे ये दिन है भी बहुत बड़ा क्योंकि आज का दिन दुनिया हमेशा याद रखेगी कि कैसे ट्रम्प ने आज के ही दिन दुनिया को महंगाई में झोंकने का पूरा इंतज़ाम कर दिया था।
बक़ौल ट्रम्प अमेरिका ने ईरान पर तरस खाते हुए उसे हॉर्मुज का ठेका पूरी तरह सौंप दिया है, ताकि ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स (गुंडा टैक्स कहना ज्यादा सही होगा) वसूल सके वो भी डॉलर में, और उगाहे गए पैसों से अपनी टूट–फूट की मरम्मत करवा सके।
लेकिन ये बड़ी बड़ी बातें हम जैसे साधारण लोगों के गले नहीं उतर रही है। बात ये है कि जो ट्रम्प साहब कभी हॉर्मुज को लेकर इतना भावुक थे कि वो ईरान की पूरी सभ्यता खत्म करने पर उतारू थे, वही ईरान पर इतने दयालु कैसे हो गए?
ट्रम्प की कृपा से दुनिया ‘टोल टैक्स’ के नए युग में प्रवेश कर चुकी है
दरअसल हुआ ये कि इस दौरान अमेरिका को अपनी हैसियत पता चल गई। दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नेवी होने के बाद भी ट्रम्प अपने दम पर हॉर्मुज नहीं खुलवा सके, न ही अपने जहाज़ हॉर्मुज के आसपास भेजने की हिम्मत जुटा सके।
उन्होने नाटो ही नहीं चीन तक से हॉर्मुज खुलवाने की गुहार लगा डाली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
हारकर उन्होने हॉर्मुज पर ईरान के कब्जे को वैधता दे डाली और किसी तरह अपनी जान छुड़ा ली। लेकिन अपनी जान छुड़ाने के चक्कर में वो पूरी दुनिया पर एक नया टोल टैक्स थोप गए हैं– ‘हॉर्मुज का टोल टैक्स।’
ईरान जो अभी तक सुविधा शुल्क के नाम पर चुनिंदा जहाजों को गुजरने दे रहा था और उनसे चीनी करंसी में फिरौती वसूल रहा था, अब वो आधिकारिक रूप से हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से पैसे वसूल सकेगा वो भी 20 लाख अमेरिकी डॉलर प्रति जहाज़।
ज़ाहिर है– ये टोल टैक्स या फिर फिरौती आख़िरकार हमारे और आपके जैसे आम लोग अपनी जेब से ही चुकाएंगे, क्योंकि हमीं हैं जो महंगा तेल और उसकी वजह से महंगा हुआ सामान खरीदेंगे।
अब हॉर्मुज कोई ऐसा–वैसा साधारण रास्ता तो है नहीं। ये दुनिया का सबसे बिजी, सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है– ख़ासकर एनर्जी सप्लाई के मामले में, जहां से दुनिया का क़रीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस गुजरता है। खाड़ी देशों का लगभग पूरा कारोबार ही इसी रास्ते से होता है। लेकिन अब यहां से गुजरने वाला हर टैंकर, हर जहाज़ 20 लाख अमेरिकी डॉलर ईरान को चुकाएगा।
यानी खाड़ी देशों की पूरी एनर्जी सप्लाई पहले से महंगी हो जाएगी और इसका असर भी पूरी दुनिया पर दिखाई देगा। ख़ासकर भारत, जापान, कोरिया और चीन जैसे देशों पर, जो खाड़ी देशों से आने वाली एनर्जी पर काफी हद तक निर्भर हैं।
कुल मिलाकर ट्रम्प अपनी होशियारी में, या जानबूझ कर पूरी दुनिया को महंगाई के दलदल में झोंकने का इंतज़ाम कर चुके हैं। यकीनन ये एक मानवीय आपदा है और इसके सबसे बड़े कर्ता-धर्ता डॉनल्ड ट्रम्प ही हैं।
कुल मिलाकर दुनिया के बाकी देश (ख़ासकर खाड़ी देश ) यही कह रहे हैं
खाया–पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना….





























