TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    BL Santosh BJP Punjab Mission 120 Days ahead of Punjab Assembly Election 2027पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने संगठन विस्तार के लिए 120 दिनों की रणनीति पर काम तेज किया है।

    पंजाब में BJP का ‘मिशन 120 दिन’: हर सीट पर 5 हजार कार्यकर्ताओं का टारगेट, युवा-किसान मोर्चे को मिला बड़ा टास्क

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    नील विद्रोह

    “नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    आंदोलन या सिर्फ सुर्खियां? नियमों के बावजूद राहुल गांधी का प्रदर्शन, फिर हिरासत; उठे बड़े सवाल

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    Rahul Gandhi का आकाशवाणी धरना: ECI ने खोली पूरी टाइमलाइन, 4 बजे तक मीटिंग की मांग क्यों नहीं आई?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, ट्रंप की वापसी के बाद क्यों बढ़ी भारतीयों की चिंता?

    BL Santosh BJP Punjab Mission 120 Days ahead of Punjab Assembly Election 2027पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने संगठन विस्तार के लिए 120 दिनों की रणनीति पर काम तेज किया है।

    पंजाब में BJP का ‘मिशन 120 दिन’: हर सीट पर 5 हजार कार्यकर्ताओं का टारगेट, युवा-किसान मोर्चे को मिला बड़ा टास्क

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    India-Switzerland Deal: अमेरिका से ट्रेड डील में गतिरोध के बीच 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख नौकरियों का प्लान

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    नील विद्रोह

    “नील क्रांति का क्रेडिट भी महात्मा गांधी को मिला” जबकि आंदोलन की वास्तविकता कुछ और ही है

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    जब नेहरू वाली गलती दोहराने वाले थे लालबहादुर शास्त्री….

    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

तख्तापलट के डर से नेहरू ने सेना में नहीं बनने दिया तालमेल, 70 सालों बाद ‘चीफ ऑफ डिफेंस’ के मायने

Abhinav Kumar द्वारा Abhinav Kumar
18 August 2019
in रक्षा, रणनीति
सेना पीएम मोदी

PC: NewsState

Share on FacebookShare on X

‘’बलं विद्या च विप्राणां राज्ञः सैन्यं बलं।‘’ यानी विद्या ही ब्राह्मणों का बल है, राजा का बल सेना है। आचार्य चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा था कि किसी राष्ट्र की आन्तरिक शान्ति व्यवस्था तथा बाहरी सुरक्षा के लिए सेना अतिआवश्यक है। सेना को मजबूत और सुदृढ़ बनाना राजा का काम होता है और मौजूदा दौर की बात करें तो लोकतन्त्र में राजा की भूमिका में प्रधानमंत्री होता है। यह प्रधानमंत्री का दायित्व है कि वह अपने राष्ट्र की सेना को अपने दुश्मन देशों की सेना से ज्यादा ताकतवर बनाए। भारतीय परिपेक्ष्य में भी ऐसा ही हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेना को डेटरेंस के लिए निरंतर मजबूत किया जा रहा है ताकि दुश्मन देश आँख उठा कर भी न देख सके।

इसी क्रम में पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से एक बड़ी घोषणा की और कहा कि सेना को संगठित करने के लिए ‘चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ की नियुक्ति की जाएगी जिससे सेना के तीनों अंगों में निर्णायक क्षमता बढ़ेगी। हालांकि यह पहली बार नहीं है कि ‘चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ कि मांग उठी हो। आजादी के पहले यह पद ब्रिटिश शासन काल में ‘कमांडर-इन-चीफ’ के नाम से जाना जाता था। स्वतन्त्रता के बाद भी लॉर्ड माउंटबैटन ने इस पद को बनाए रखने की सलाह दी थी लेकिन जवाहर लाल नेहरू ने इसे अस्वीकार कर दिया था। नेहरू का यह फैसला कितना भारी पड़ा वह हम वर्ष 1962 की चीन से मिली करारी हार में देख सकते है।

संबंधितपोस्ट

पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा, भारत-कनाडा ट्रेड डील को साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी

भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों को मिलेगी नई ताकत, 586 करोड़ का करार

20वें रोजगार मेले में 51 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे PM मोदी, 45 जगहों पर होगा कार्यक्रम

और लोड करें

दरअसल, जवाहर लाल नेहरू को रणनीतिक और सैन्य मामलों की बहुत कम या कोई समझ नहीं थी इसलिए उन्हें रक्षा मामलों में नौकरशाहों और राजनीतिक नेताओं ने निर्देशित किया। सेना को लेकर उनके मन में कोई विचार ही नहीं थे, इस वजह से उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिससे भारत को बुनियादी और बड़े पैमाने पर काफी नुकसान का सामना करना पड़ा।

जवाहर लाल नेहरू ने ब्रिटिश परंपराओं और कामों से प्रभावित होकर, एक प्रसिद्ध ब्रिटिश वैज्ञानिक पीएमएस ब्लैकेट को रक्षा क्षेत्र का सलाहकार नियुक्त किया जिन्हें रक्षा और सुरक्षा रणनीतियों की कोई विशेष जानकारी नहीं थी। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद शीत युद्ध की शुरुआत और चीन की सत्ता में कम्युनिस्टों के आने से बढ़ने वाले खतरों व चुनौतियों के बारे में भी उन्हें कोई ज्ञान नहीं था। इस कारण से स्वतन्त्रता के बाद के दिनों में भारत रक्षा रणनीति में दिशाहिन रहा।

इतना ही नहीं वर्ष 1947 में सेना मुख्यालय में सैन्य सचिव मेजर जनरल रुद्र ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि जब जनरल लॉकहार्ट कमांडर-इन-चीफ थे, तब उन्होंने सितंबर 1947 में आने वाली चुनौतियों और प्रतिरक्षा के लिए प्रधानमंत्री नेहरू के समक्ष योजनाओं का एक शोध पत्र प्रस्तुत किया था। इस पर नेहरू ने चिल्लाते हुए कहा “बकवास! सब बकवास! हमें किसी रक्षा योजना की आवश्यकता नहीं है। हमारी नीति अहिंसा की है। हम किसी को सैन्य खतरा नहीं मानते हैं। सेना को खदेड़ो। हमारी सुरक्षा खतरों को पूरा करने के लिए पुलिस ही काफी है।” इस बात की पुष्टि मेजर जेनरल कुलदीप सिंह बाजवा ने अपनी पुस्तक जम्मू-कश्मीर वॉर 1947-1948 में की है। किसी देश के प्रधानमंत्री की ऐसी मानसिकता से सेना का मनोबल गिरना लाजिमी है।

स्वतन्त्रता के बाद नए-नए सत्ता में आए नेहरू और उनके मंत्री परिषद के कुछ मंत्रियों को यह भी अशंका था कि एक शक्तिशाली और एकीकृत सेना उनकी राजनीतिक आकांक्षा को चुनौती दे सकती है इसलिए अपने शासनकाल में नेहरू ने आधिकारिक वरीयता में सैन्य नेतृत्व के कद को कम कर दिया था। उन्होंने कई रक्षा नियुक्तियों, संरचनाओं और सुरक्षा तंत्रों को भंग कर दिया जो सशस्त्र बलों के बीच वैचारिक एकता, एकीकरण और संयुक्तता को बढ़ावा दे सकते थे।

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हर वह कदम उठाए जिससे सेना एकजुट ना रह पाये।

इन गलतियों में सबसे बड़ी गलती रही उनके कमांडर-इन-चीफ के पद को निरस्त करना। नेहरू को यह डर था कि सेना कहीं तख्तापलट न कर दे जो विश्व के अफ्रीका और मध्य एशिया के कुछ देशों में देखने को मिल रहा था। सत्ता के लिए वह इतने भूखे थे कि उन्होंने देश के हित के बारे में कभी नहीं सोचा। लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू को यह सुझाव दिया था कि वे किसी को ‘कमांडर इन चीफ’ बनाए लेकिन नेहरू ने इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया था।

इस पर लॉर्ड माउंटबेटन ने कहा था, ‘नेहरू ने पहले इस तरह के पोस्ट का विरोध किया था क्योंकि इससे भारतीय राजनीतिज्ञों को महान ‘कमांडर इन चीफ इन इंडिया’ के विचार को समाप्त करने की प्रेरणा मिलेगी। चीन से युद्ध के पहले भी लॉर्ड माउंटबेटन ने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल थिमया को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने का सुझाव दिया था लेकिन फिर से रक्षा मंत्री कृष्णन मेनन के दबाव में आकार प्रधानमंत्री नेहरू ने इसे अस्वीकार कर दिया। जनरल थिमय्या और कृष्णा मेनन के बीच का आपसी विवाद किसी से छिपा नहीं था लेकिन इसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ा और चीन से हार के कारण विश्व में भारत की साख को गहरा धक्का भी लगा।

जवाहरलाल नेहरू के इस फैसले का सेना पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा साथ ही राजनीतिक नेतृत्व और नौकरशाही के पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला है। जवाहरलाल नेहरू की अनेक गलतियों में से यह एक बड़ी गलती साबित हुई जो भारत को भरी पड़ी तथा चीन से हार का सामना करना पड़ा।

सेना के वर्चस्व को कम करने के लिए उन्होंने न सिर्फ कमांडर इन चीफ का पद हटाया अपितु सेना की संख्या में भी भरी कटौती की थी वह भी तब जब चीन तिबाट पर चढ़ाई कर रहा था। यह जानते हुए भी नवंबर 1950 में जब चीन ने पहले ही तिब्बत में प्रवेश कर लिया, नेहरू ने संसद में एक बहस के दौरान घोषणा की कि उन्होंने रक्षा खर्च और सेना के आकार को कम करने के लिए रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया था। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1951 में सेना के 50,000 सैनिकों को हटा दिया गया था।

नेहरू की सेना के लिए इस मानसिकता का असर वर्ष 1962 की युद्ध के दौरान दिखाई दिया, जब हमारे सशस्त्र बल तालमेल के बिना ही एक संगठित चीनी सेना के खिलाफ लड़े और भारत को हार का सामना करना पड़ा था। हार के बावजूद, नेहरू का व्यामोह इतना अधिक था कि उन्होंने सीडीएस नियुक्त करने की मांग से इनकार कर दिया और फिर आगे आने वाली सभी सरकारों ने इस प्रवृत्ति को जारी रखा। हालांकि कारगिल युद्ध में जीत के बाद भी देश की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों का पता लगाने के लिए गठित समिति ने भी चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के नियुक्ति की पैरवी की थी। इसके बाद नरेश चंद्र टास्क फोर्स ने भी चीफ्स ऑफ स्टॉफ कमेटी के स्थाई प्रमुख के नियुक्ति की पैरवी की थी।

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सुझावों के 20 वर्ष बाद इसे पूरा करने का जज्बा दिखाया है। बता दें कि दिसंबर, 2015 में नौसेना के विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य पर सवार होकर पीएम मोदी ने कंबाइंड कमांडर्स कांफ्रेंस को संबोधित करने के दौरान ही ‘चीफ ऑफ डिफेंस’ बनाने का संकेत दे दिया था। तब भी उन्होंने कहा था, “संयुक्त रूप से शीर्ष अधिकारी की ज़रूरत लंबे समय से बनी हुई है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को तीनों सेनाओं के कमांड का अनुभव होना चाहिए। हमारी सेना के वरिष्ठ सैन्य प्रबंधन में सुधार की ज़रूरत है। अतीत में दिए गए कई सैन्य सुधार के प्रस्तावों को लागू नहीं किया जा सका है, यह दुखद है। मेरे लिए यह प्राथमिकता का विषय है।” इस बार 73वें स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर इस बड़े बदलाव का ऐलान भी कर दिया। इससे सेना के तीनों अंगों को बदलते तकनीक और वक्त के साथ युद्ध के दौरान तालमेल करने में मदद मिलेगी। ‘चीफ ऑफ डिफेंस’ तीनों सेनाओं के प्रभारी होंगे। इससे तीनों सेनाओं को एक नेतृत्व प्राप्त होगा। आचार्य चाणक्य ने भी एक सेनापति रखने का संदेश अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र में दिया है। उन्होंने लिखा है:

अल्पबीजहतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम् ।

अर्थात कम बीज से खेत तथा बिना सेनापति वाली सेना नष्ट हो जाती है। प्रधानमंत्री ने कहा ये व्यवस्था इसलिए की गई है क्योंकि आज के समय में तीनों सेनाओं का साथ चलना बेहद जरूरी है। तीनों सेनाएं एक साथ चलें तभी देश सुरक्षित रहेगा।

 

 

 

Tags: पं. नेहरूपीएम मोदीभारतीय सेनारक्षा मंत्रालय
शेयर1513ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

रामचन्द्र गुहा के इस मोदी विरोधी लेख की हर लाइन, हर शब्द, हर अक्षर पूरी तरह बकवास और कूड़ा है

अगली पोस्ट

अमित शाह ने एक भाषण में शेहला राशिद के फलते-फूलते राजनीतिक करियर को तबाह कर दिया

संबंधित पोस्ट

1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग
रक्षा

1948 में ‘जल उषा’, 2026 में FSS-1: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की 78 साल की समुद्री छलांग

6 October 2026

मंगलवार की सुबह विशाखापत्तनम में एक बड़ा जहाज़ बंगाल की खाड़ी में उतरा। वहां खड़े लोगों ने ज़ोरदार जयकारे लगाए। यह नौसेना का पहला फ्लीट...

16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?
रक्षा

16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

17 September 2026

दो आखिरी Tejas Mk-1 twin-seater trainer विमान शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को सौंपे जाएंगे। इसके साथ 40 विमानों वाला शुरुआती Tejas Mk-1 ऑर्डर पूरा हो...

BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping
अर्थव्यवस्था

BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

12 September 2026

क्या डॉलर की पकड़ कमजोर हो रही है?  यह सवाल पिछले कुछ समय से वैश्विक आर्थिक बहस के केंद्र में है। BRICS देशों की बढ़ती...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Starlink vs India: The Bigger Game Nobody Is Talking About | Elon Musk | Ambani | PM Modi

Starlink vs India: The Bigger Game Nobody Is Talking About | Elon Musk | Ambani | PM Modi

00:16:08

Why Is the World Buying India’s Akash Missile System? Who’s Next in Line? | Armenia | Make in India

00:04:19

Inside India’s Most Famous Fighter Squadrons: Their Wars, Jets & Legacy | IAF | AirForceDay

00:05:58

Hanuman Chalisa Kept Me Going': Flydubai Hero Smit

00:10:03

How Pakistan-Linked Drug Networks Are Targeting India | Coast Guard Deals a ₹3,000 Crore Blow

00:03:28
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited