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3 साल पहले सेना ने शुरू की थी घर में ‘घुसकर मारने की प्रथा’, पाक क्या चीन भी तब से शांत है

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
29 September 2019
in रक्षा
पाक

PC: Web Dunia

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28 सितंबर 2016 की रात को जब पूरी दुनिया सो रही थी, तो लाइन ऑफ कंट्रोल से कुछ दूरी पर हमारे वीर सैनिक अगले निर्देश की प्रतीक्षा कर रहे थे। ये कोई आम सैनिक नहीं थे बल्कि भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेज़ के पैराशूट रेजीमेंट के प्रशिक्षित सैनिक थे। LOC के पास खड़े जवानों के हृदय में एक आग जल रही थी जो किसी भी हद तक जाने के लिए उन्हें प्रेरित कर रहा था। हुआ वही, 11 दिन से भभक रही बदले की आग को बुझाने के लिए यानि उरी हमले का बदला लेने के लिए हमारे वीर सैनिकों ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर आतंकियों पर जबरदस्त प्रहार किया जिसे पाकिस्तान कभी नहीं भूल सकता।

इस कहानी की शुरूआत पाक ने की थी लेकिन अतं भारतीय सेना के जवानों ने की आइए जानते हैं कि कैसे ये सब सफल हुआ।

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जब उरी पर हमला हुआ था, तो सीमा पार आतंकियों और उनके आकाओं को पूर्ण विश्वास था कि हर बार की तरह भारत कूटनीतिक स्तर पर विरोध करेगा, और कुछ ‘कड़े कदम’ लेकर फिर उसे भूल जाएगा। पर शायद उन्हे भारत में बढ़ते आक्रोश का कोई अंदाज़ा नहीं था, जिसने भारत को उस मुहाने पर खड़ा कर दिया, जहां से फिर हमने फिर कभी मुड़के नहीं देखा।

आज सीमा पार छिपे हुये आतंकियों पर हमारी सेना की सर्जिकल स्ट्राइक्स को पूरे हुये 3 वर्ष हो चुके हैं। ये भारत के विदेश एवं सुरक्षा नीति में परिवर्तन की वो कथा है जो सदियों तक हमारे आने वाली पीढ़ियों को गर्व से बताई जाएंगी। इसकी शुरुआत 2 जनवरी 2016 को हुई, जब कुछ आतंकवादियों ने पठानकोट में स्थित भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर हमला कर दिया था। इस हमले में भारतीय सुरक्षाबलों के 7 जवान वीरगति को प्राप्त हुये और 25 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इस हमले में स्पष्ट रूप से आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद का हाथ बताया जा रहा था, परंतु काफी साक्ष्य देने के बावजूद पाकिस्तान ने उन आतंकियों को बचाने की पूरी कोशिश की। इसके बाद हमारे सुरक्षाबलों पर लगातार हमले किए, जिसमें पंपोर में सुरक्षाबलों पर दो बार आतंकी हमले हुए।

परंतु सभी सीमाओं को लांघते हुये आतंकियों ने 18 सितंबर 2016 को उरी में स्थित भारतीय सेना के बेस कैम्प पर हमला कर दिया। लगभग 18 निहत्थे जवानों को उन्होने सोते वक्त या तो गोलियों से भून दिया या फिर उनके शिविरों में आग लगा दी। इसके अलावा आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान 3 और सैनिक वीरगति को प्राप्त हुये, जिसके कारण कुल शहीदों की संख्या 21 तक पहुँच गयी। इसके अलावा सेना के 100 अन्य जवान घायल भी हुये थे।

इस हमले के बाद भारत की रक्षा नीति में व्यापक बदलाव हुआ। भारत, जो इससे पहले तक आतंकी हमले पर चुप्पी साधने के लिए बदनाम था, अब आक्रामक हो चुका था। हमारे जवानों ने सीमा पार के आतंकियों को इस नापाक हरकत के लिए सबक सिखाने की ठान ली थी। सीमा पार आतंकियों और उनके पाकिस्तान के आकाओं ने भारत को हर बार की तरह इस बार भी हल्के में लिया, और बाद में यही उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

हमले के तुरंत बाद आक्रोशित भारतीयों ने पाकिस्तान से सभी प्रकार के संबंध खत्म करने की बात की, जिसके कारण पाकिस्तान के कलाकारों के भारत में काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। परंतु इसके साथ भारत जिस प्रतिशोध की तैयारी कर रहा था, उसका अंदाज़ा आतंकियों व देश में किसी भी व्यक्ति को नहीं था। केंद्र सरकार ने भारतीय सेना के साथ मिलकर 2015 की भांति सीमा पार जाकर आतंकियों को निष्क्रिय करने हेतु क्रॉस बार्डर सर्जिकल स्ट्राइक्स की योजना तैयार की।

इससे पहले 2015 में जब NSCN K के आतंकियों ने 18 भारतीय सैनिकों को मौत के घाट उतारा था, तब भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर इन आतंकियों के ठिकाने को क्षत विक्षत कर दिया और कई आतंकियों को जहन्नुम भेज दिया था। इस बार पड़ोसी देश पर हमारा कोई रहम नहीं था और सीमा पार कार्रवाई की दृष्टि से वर्षों बाद ये भारत की पहली आक्रामक कार्रवाई।

इसके लिए पैरा स्पेशल फोर्सेज़ के चौथे और नौवें बटालियन के जवानों के अलावा उरी हमले में नुकसान झेलने वाले बिहार रेजीमेंट और डोगरा रेजीमेंट के घातक टुकड़ी के जवानों को भी चुना गया, जिन्हें कर्नल X के नेतृत्व में सीमा पार 8 आतंकी लॉंच पैड को निष्क्रिय करने के निर्देश दिये गए। अब यह हाथ पर हाथ धरने वाला शान्तिप्रिय भारत नहीं था। ये नया भारत हो गया था, जो घर में घुसकर आतंकियों को मारने का बूता रखता था।

अंतत: 28 सितंबर 2016 को एलओसी के पास लगभग 100 जवानों को पैरा ड्रॉप किया गया, और उन्हें सीमा पार चकोटी, भीमबेर, लेप, मुजफ्फराबाद इत्यादि में स्थित आतंकी लॉंच पैड को निष्क्रिय करने भेजा गया, जिसमें सूत्रों के अनुसार विभिन्न आतंकी संगठनों के आतंकी छुपे हुए थे। आधी रात होते ही हमारे जवान आतंकियों पर टूट पड़े, और उन्होंने उक्त लॉंच पैड्स पर छुपे आतंकियों को निष्क्रिय करके ही दम लिया। इसके साथ ही उन्होंने आतंकियों की रक्षा के लिए आए पाक रेंजर्स और पाक एसएसजी कमांडो को भी धराशायी किया। वास्तविक आंकड़ों पर आज भी मतभेद है, परंतु ऐसा कहा जाता है कि भारतीय जवानों ने लगभग 35-70 आतंकी और पाकिस्तान के सुरक्षाबलों के लगभग 10-20 जवान धाराशायी किए थे।

इस कार्रवाई ने दुनिया को दिखा दिया था कि भारत अपने किसी भी शत्रु को धाराशायी करने का माद्दा रखता है। इसके पश्चात सेना को हर प्रकार के संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने और शक्तियाँ प्रदान की, जिसके कारण भारतीय सेना ने डोकलाम में गुंडई कर रहे चीनी फौज को भी अच्छा सबक सीखाया। आज विश्व में भारत को कोई भी हल्के में नहीं लेता, और इसके पीछे उरी हमले के बाद देश की नीतियों और देश के जनमानस में आया परिवर्तन प्रमुख कारण है।

Tags: उरीपाकिस्तानभारतीय सेनासर्जिकल स्ट्राइक
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