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फेसबुक के बुरे एल्गोरिदम के पीछे ‘शेरिल सैंडबर्ग’ का असली दिमाग !

फेसबुक से देना पड़ा इस्तीफा !

Deeksha Sharma द्वारा Deeksha Sharma
6 June 2022
in चर्चित
शेरिल सैंडबर्ग फेसबुक

Source- Google

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जब आप किसी संगठन या आर्गेनाइजेशन का हिस्सा बनते हैं तो कई बार अपने काम के प्रति इतने डेडीकेटेड हो जाते हैं कि आप कभी-कभी सही और गलत के बीच का फर्क करना भी भूल जाते हैं। आज बात करेंगे एक ऐसी है अति महत्वकांक्षी महिला की जिनका मानना था की विकास सबसे ऊपर है फिर चाहे वह लोग हो या लोकतंत्र। अगर अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लोकतंत्र को भी ताक पर रखना पड़े तो कोई हर्ज नहीं। शेरिल सैंडबर्ग ने एक बार टिप्पणी की थी कि उन्हें लगता है कि उन्हें धरती पर इसलिए भेजा गया ताकि वह आर्गेनाइजेशन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सके और अगर उनके काम को देखा जाए तो शायद यह बात पूरी तरह गलत भी नहीं है। वह सिलिकॉन वैली में सबसे शक्तिशाली अधिकारियों में से एक रही हैं।

2000 के दशक के मध्य में गूगल में एक विज्ञापन प्रमुख के रूप में, और बुधवार को अपने इस्तीफे तक 14 वर्षों तक फेसबुक पर मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) के रूप में, उन्होंने वाकई में फेसबुक को काफी फायदा पहुंचाया लेकिन इसी दौरान फेसबुक पर बगावत के स्वर भी बढ़ते दिखे। कंपनी को तो फायदा हुआ लेकिन लोकतंत्र को तार-तार कर दिया गया। जहां एक तरफ शेरिल सैंडबर्ग जॉब के साथ-साथ अपने परिवार और अपने बच्चों को समय दे सकें इस बात का ख्याल रखती वहीं दूसरी तरफ उनके चलाए नए नए प्लान और प्रोजेक्ट दुनिया के बच्चों को उनके माता-पिता से दूर करने लगे।

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शेरिल सैंडबर्ग के कार्यकाल में कुछ बड़ी उपलब्धियां

फेसबुक में उनके कार्यकाल के दौरान शेरिल सैंडबर्ग की सबसे बड़ी उपलब्धि रही फेसबुक personalized ads  जिन्होंने लोगों को फायदा भी पहुंचाया लेकिन उससे ज्यादा नुकसान। शेरिल सैंडबर्ग उन लोगों में से एक थी जिन्होंने गूगल के विज्ञापन व्यवसाय को इतना बड़ा बना दिया कि यह हर विज्ञापनदाता के बजट का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया। फिर, 2008 में फेसबुक में शामिल होने के बाद, वह उसी स्वयं-सेवा मॉडल को सोशल नेटवर्किंग कंपनी में ले आई। वैसे तो उपयोगकर्ताओं को उनके खोज प्रश्नों के आधार पर लक्षित किया जाता है, यानी यूट्यूब आपको वही वीडियो दिखाएगा जैसा कि आप पिछले कुछ समय से सर्च करते आए हैं लेकिन फेसबुक अब लोगों की व्यक्तिगत पहचान, कनेक्शन और रुचियों के आधार पर उन्हें लक्षित करने लगा। फेसबुक को इस तरीके से मुनाफा कमाते देख अन्य तकनीकी कंपनियों ने भी इसी व्यावसायिक मॉडल के अनुरूप काम शुरू कर दिया। और उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा से पैसे कमाने लगे।

जब फेसबुक की शुरुआत हुई थी तो इसे लोगों के बीच दूरियां घटाने और नए लोगों से दोस्ती करने वाली एक सोशल नेटवर्कसाइट के रूप में लोगों ने काफी सराहा। लेकिन समय के साथ कब फेसबुक बड़े पैमाने पर गलत सूचना, अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाला, और हिंसा बढ़ाने वाला प्लेटफॉर्म बन गया इसका पता ही नहीं चला। गोपनीयता उल्लंघनों पर लगाम लगाने में इसकी विफलता के लिए इसे फटकारा भी गया।इसके अलावा, चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप और उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा का ट्रैक खोने के बारे में कई बार शेरिल सैंडबर्ग और जुकरबर्ग को कटघरे में घसीटा गया। लेकिन फेसबुक पर इन सब का कोई फर्क नहीं पड़ा।

म्यांमार और श्रीलंका में जातीय हिंसा को बढ़ावा दिया गया, हिंसक वीडियो और महामारी की गलत सूचना को वायरल होने दिया गया और 2021 में यूएस कैपिटल में दक्षिणपंथी विद्रोह के संगठन को बढ़ावा दिया गया। यह सभी गुनाहों की बड़ी लिस्ट में से वे कुछ चंद गुनाह है जो फेसबुक में काम करते समय शेरिल सैंडबर्ग ने जुकरबर्ग के साथ मिलकर किए हैं। फेसबुक में काम करने वाले कर्मियों ने ब्लूमबर्ग को बताया की शेरिल तब तक किसी गलत खबर को नहीं रोकती थी जब तक की वह पूरी दुनिया में फैल कर हाहाकार ना मचाने लगे।

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शेरिल सैंडबर्ग ने फेसबुक की गोपनीयता के साथ खिलवाड़ किया

शेरिल सैंडबर्ग ने न केवल फेसबुक के लिए एक मनी-प्रिंटिंग बिजनेस मॉडल का निर्माण किया, बल्कि उनकी देखरेख में ही सेंसरशिप, गलत सूचना और विवाद बढ़ने लगे। यहां तक की यह खबरें भी उठी कि वह राजनेताओं को प्रशिक्षित करती हैं कि किस तरह फेसबुक का इस्तेमाल कर लोगों को अपने पक्ष में किया जाए। आप सोच रहे होंगे कि फेसबुक में 14 साल तक अपनी हुकूमत जमाने के बाद अचानक वहां से क्यों जा रही हैं। जब उन्हें जुकरबर्ग के साथ कटघरे में खड़ा किया गया, उनसे सवाल पूछे गए कि वह क्यों लोगों की गोपनीयता के साथ खिलवाड़ कर रही है, उस समय वह नहीं डरी तो ऐसा क्या था जिसने उन्हें फेसबुक से इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया।

दरअसल, शेरिल सैंडबर्ग ने फेसबुक से इस्तीफा देने की घोषणा तब की जब कंपनी को यह शक हुआ कि शेरिल सैंडबर्ग ने अपनी शादी के लिए कॉर्पोरेट संसाधनों का दुरुपयोग किया हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है। सैंडबर्ग ने 2020 में घोषणा की कि वह लॉस एंजिल्स में स्थित एक परामर्श फर्म के संस्थापक और सीईओ टॉम बर्नथल से जुड़ी हुई हैं। यह जांच मई में शुरू हुई और इस जांच के पीछे की वजह थी ‘द जर्नल’ की अप्रैल में आई रिपोर्ट जिसमें लिखा था कि सालों पहले शेरिल ने यूके के एक टैब्लॉइड द डेली मेल को अपने तत्कालीन प्रेमी बॉबी कोटिक, (CEO of Activision Blizzard) के बारे में एक कहानी की रिपोर्ट करने से रोकने के लिए दबाव बनाया था। हालांकि फेसबुक के एक अधिकारी का कहना है यह केवल एक अफवाह है लेकिन सच सामने आते कहां देर लगती है। गत वर्षों में, फेसबुक के खिलाफ बढ़ती आलोचनाओं के साथ सैंडबर्ग की सार्वजनिक छवि धूमिल हुई। कानून, संचालन और नीति में शेरिल की विशेषज्ञता वे गुण थे जिन्हें जुकरबर्ग अपनी वर्चुअल रियालिटी जैसे दूरदर्शी और महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए चाहते थे।

और पढ़ें: फेसबुक नहीं फेकबुक, Fb ने आख़िरकार किया स्वीकार

आज भले ही शेरिल सैंडबर्ग ने फेसबुक से रिजाइन कर दिया हो और वह दुनिया में अपनी छवि को एक ऐसी सशक्त महिला की तरह दिखाना चाहती हो जिसने कभी भी अपने सपनों का अपनी महत्वाकांक्षाओं का बलिदान नहीं दिया लेकिन फेसबुक में अपने कार्यकाल के दौरान जो गलत नीतियां शेरिल ने अपनाई, उसके लिए वह हमेशा जवाबदेही रहेंगी।

Tags: जुकरबर्गफेसबुकशेरिल सेंडबर्ग
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