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शहरी नक्सलवाद के खिलाफ लाए गए विधेयक को लेकर नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं में आक्रोश।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले प्रस्तुत किया गया महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक कड़ी आलोचना का सामना कर रहा है।

Akash Gaur द्वारा Akash Gaur
16 July 2024
in राजनीति, समीक्षा
महाराष्ट्र, महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, शहरी नक्सलवाद, नक्सलवाद
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले प्रस्तुत किया गया महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक (Maharashtra Special Public Security Bill) राज्य के नागरिक संगठनों की कड़ी आलोचना का सामना कर रहा है। कई प्रमुख नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं, जैसे तुषार गांधी, ने इस विधेयक में ‘गैरकानूनी गतिविधि’ की अस्पष्ट परिभाषा और ‘खतरे’ शब्द की अनुपस्थिति की आलोचना की है। उनका मानना है कि इस अस्पष्टता के कारण पुलिस द्वारा इसका दुरुपयोग हो सकता है।

विधेयक की आलोचना

तुषार गांधी, जो महात्मा गांधी के परपोते हैं, ने इस विधेयक को सड़कों पर लड़ने की बात कही है। हिंदू अखबार को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने इसे जनविरोधी विधेयक करार दिया है और कहा कि इससे महाराष्ट्र एक ‘पुलिस राज्य’ में बदल जाएगा और असहमति जताने वाले और विरोध करने वालों को ‘शहरी नक्सली’ करार दिया जाएगा।

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सरकार की दलीलें

महाराष्ट्र में महायूति सरकार ने मौजूदा कानूनों को माओवाद के खतरे से निपटने में अपर्याप्त मानते हुए यह विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया है। यह विधेयक केवल उन व्यक्तियों को दंडित करने का प्रावधान नहीं करता जो गैरकानूनी संगठनों के सदस्य हैं, बल्कि उन लोगों को भी दंडित करता है जो ऐसे संगठनों से जुड़े हैं या उनकी गतिविधियों में सहयोग करते हैं।

विधेयक का विवरण

विधेयक के कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. गैरकानूनी संगठन की घोषणा: राज्य सरकार को यह अधिकार होगा कि यदि कोई संगठन नक्सलवाद को किसी भी प्रकार से समर्थन या प्रचारित करता है, तो उसे ‘गैरकानूनी’ घोषित किया जा सकेगा। यह घोषणा सरकारी राजपत्र में अधिसूचना जारी कर की जाएगी।
  2. सलाहकार बोर्ड की नियुक्ति: विधेयक पारित होने के बाद राज्य सरकार एक सलाहकार बोर्ड नियुक्त करेगी, जो ‘गैरकानूनी’ घोषित संगठन की समीक्षा करेगा और विधेयक के कार्यान्वयन पर सरकार को सुझाव देगा।
  3. दंड के प्रावधान:
    • यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी संगठन का सदस्य नहीं है, लेकिन वह किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करता है या ऐसे संगठन के सदस्यों को शरण देता है, तो उसे भी दंडित किया जाएगा। इस स्थिति में तीन साल की कैद और 3 लाख रुपये का जुर्माना होगा।
    • यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी संगठन का सदस्य नहीं है, लेकिन उसने उसकी गतिविधियों में सहयोग किया है, तो उसे दो साल की कैद और 2 लाख रुपये का जुर्माना होगा।
    • यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी संगठन का सदस्य है और उसने कोई गैरकानूनी गतिविधि की योजना बनाई है या उसे अंजाम दिया है, तो उसे सात साल की कैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा।

नागरिक संगठनों की चिंता

कई नागरिक संगठनों का मानना है कि इस विधेयक में स्पष्टता की कमी के कारण इसका दुरुपयोग हो सकता है। इस विधेयक में ‘खतरे’ की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे पुलिस को मनमाने ढंग से कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है। इसके अलावा, विरोध प्रदर्शन और असहमति जताने वाले लोगों को भी इस कानून के तहत निशाना बनाए जाने की आशंका है।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक के प्रस्ताव ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां सरकार का मानना है कि यह विधेयक माओवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, वहीं नागरिक संगठनों का मानना है कि यह विधेयक जनविरोधी है और इससे असहमति को दबाया जाएगा। इस विधेयक का भविष्य क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल यह विवादों के घेरे में है।

और पढ़ें:- अर्बन नक्सलियों के लिए महाराष्ट्र सरकार का गिफ्ट।

Tags: MaharashtraMaharashtra Special Public Safety BillNaxalismUrban Naxalismनक्सलवादमहाराष्ट्रमहाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयकशहरी नक्सलवाद
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