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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच SIT के हाथों में, 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे (दान) से जुड़े कथित धन के दुरुपयोग की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) ने औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है। यह मामला तेजी से देश के सबसे चर्चित वित्तीय मामलों में शामिल हो गया है।

Kashish Mishra द्वारा Kashish Mishra
15 June 2026
in चर्चित, संस्कृति
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच

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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे (दान) से जुड़े कथित धन के दुरुपयोग की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) ने औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली है। यह मामला तेजी से देश के सबसे चर्चित वित्तीय मामलों में शामिल हो गया है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि कथित अनियमितताओं की रकम 200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है, हालांकि अधिकारी अभी भी पूरे मामले की जांच कर वास्तविक आंकड़ों का सत्यापन कर रहे हैं।

अब तक जांच एजेंसियों ने करीब 2 करोड़ रुपये नकद, एक कार और तीन आईफोन बरामद किए हैं। पांच संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और उनकी संपत्तियों, बैंक लेनदेन तथा पिछले कुछ वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति में आए बदलावों की जांच की जा रही है।

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मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था कैसे होती है?

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के लिए परिसर में 14 निर्धारित संग्रह केंद्र बनाए गए हैं। यहां जमा होने वाला चढ़ावा एक अत्यधिक सुरक्षित और गोपनीय कमरे में ले जाया जाता है, जहां उसकी गिनती की जाती है। सुरक्षा कारणों से इस कमरे का स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है और वहां केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है।

मंदिर में प्रतिदिन लगभग 1 से 1.5 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में नकद दान और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की बड़ी मात्रा मंदिर में आती है। इनकी गिनती और सत्यापन के लिए कई स्तरों की व्यवस्था बनाई गई है।

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 50 लोग शामिल बताए जाते हैं। इनमें 24 कर्मचारी एक निजी एजेंसी के माध्यम से नोटों की गिनती का कार्य करते हैं, 12 कर्मचारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से निगरानी की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि 14 अधिकारी और ऑडिटर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) तथा टीसीएस से जुड़े हैं, जो ऑडिट और सत्यापन का काम देखते हैं।

अचानक बढ़ी संपत्ति से पैदा हुआ संदेह

सूत्रों के अनुसार, जांच की शुरुआत तब हुई जब दान व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति में असामान्य बदलाव देखने को मिले। बताया गया कि पिछले पांच वर्षों में कुछ लोगों ने जमीनें खरीदीं, महंगी गाड़ियां लीं और उनकी जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया, जबकि उनकी घोषित आय अपेक्षाकृत कम थी।

इन तथ्यों ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। शुरुआत में इस पर आंतरिक स्तर पर सवाल उठे, लेकिन तत्काल कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। बाद में अयोध्या के रामकोट क्षेत्र के एक स्थानीय कर्मचारी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक किया। इसके बाद मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंचा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तक इसकी चर्चा पहुंचने के बाद यह एक बड़ा विवाद बन गया।

वरिष्ठ अधिकारियों की एंट्री और SIT की जांच

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले दिल्ली से एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विशेष विमान के जरिए अयोध्या पहुंचे और उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ बैठक कर मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि वह उच्च अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और उसे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

इस SIT का नेतृत्व लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। जांच संबंधी कार्यों की निगरानी पूर्व सीबीआई अधिकारी एवं आईपीएस अधिकारी किरण एस. कर रही हैं, जबकि वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट दस्तावेजों और दान संबंधी लेनदेन की जांच विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन के जिम्मे है।

किन लोगों की हो रही है जांच?

जांच के दायरे में कई ऐसे लोग हैं जो दान व्यवस्था से जुड़े थे। इनमें सबसे प्रमुख नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनकी अनुमानित संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसमें अयोध्या एयरपोर्ट के पास एक हॉस्टल, रेस्तरां में हिस्सेदारी, अयोध्या और लखनऊ में आवासीय संपत्तियां तथा एक टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी संपत्तियां शामिल हैं। अधिकारी उनकी पहले की आर्थिक स्थिति और वर्तमान संपत्ति के बीच अंतर की जांच कर रहे हैं।

उनके भतीजे मनीष यादव भी जांच के दायरे में हैं और पूछताछ के दौरान उनके पास से कथित रूप से 36 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई है।

दान में मिलने वाले आभूषणों की देखरेख करने वाले के.डी. तिवारी से भी पूछताछ की जा रही है। उन पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के आरोपों की जांच हो रही है। हालांकि उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा है कि उनका काम केवल आभूषणों का रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें ट्रस्ट को सौंपना था और उनकी आर्थिक स्थिति उनके परिवार के अन्य पेशों के कारण मजबूत है।

इसके अलावा राजेश पाठक, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश सहित कई अन्य लोगों की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। लवकुश के घर से कथित रूप से करीब 10 लाख रुपये नकद और हाल ही में हुए निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने राम मंदिर में आने वाले दान की निगरानी व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की आशंका ने व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है।

अयोध्या के कुछ संतों ने भी जांच समिति की संरचना पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी शामिल किया जाना चाहिए था। वहीं, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इस विवाद से स्वयं को अलग बताते हुए कहा है कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्य तक सीमित है, जबकि ट्रस्ट के आंतरिक वित्तीय प्रबंधन का काम अलग व्यवस्था के तहत होता है।

फिलहाल SIT तेजी से जांच कर रही है। उसकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताएं कुछ व्यक्तियों तक सीमित थीं या फिर दान प्रबंधन प्रणाली में कोई व्यापक खामी मौजूद थी।

नोट: इस मामले में कई आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। अंतिम निष्कर्ष SIT की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

Tags: ayodhya ram madirnipendra mishraSITअयोध्या राम मंदिरनृपेंद्र मिश्रा
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