हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत आए चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने अपने संस्मरण में कुंभ का ज़िक्र किया है
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

कहानी कुंभ की: कैसे शुरू हुआ था दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन; आदि से आज तक…

हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत आए चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने अपने संस्मरण में कुंभ का ज़िक्र किया है

khushbusingh1 द्वारा khushbusingh1
24 December 2024
in इतिहास, ज्ञान, संस्कृति
महाकुंभ का आयोजन हर 144 साल पर होता है और यह केवल प्रयागराज के संगम पर ही होता है

महाकुंभ का आयोजन हर 144 साल पर होता है और यह केवल प्रयागराज के संगम पर ही होता है

Share on FacebookShare on X

कुछ ही दिनों के बाद प्रयागराज में महाकुंभ-2025 शुरू होने जा रहा है। इसको लेकर जोर-शोर से तैयारियाँ हो रही हैं। वहीं, इस बार रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार महाकुंभ मेले को भव्य एवं आध्यात्मिक रंग-रूप देने में जुटी हुई है। प्रयागराज में आयोजित होने वाला महाकुंभ है, जो हर 12 साल पर आयोजित किया जाता है। बता दें कि प्रयागराज गंगा, यमुना और विलुप्त सरस्वती के संगम पर बसा है और यहाँ के महाकुंभ की महिमा अपार बताई जाती है। यही कारण है कि हर सनातनी अपने जीवन में कम-से-कम एक बार प्रयागराज महाकुंभ में स्नान ज़रूर करना चाहता है। आज हम बताएंगे कुंभ की पूरी कहानी और जानेंगे कैसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन शुरू हुआ था ।

कुंभ का आरंभ कब हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। कहा जाता है कि आधुनिक कुंभ का स्वरूप हूणों को पराजित करने वाले क्षत्रिय सम्राट हर्षवर्धन बैंस (590-647 ईस्वी) ने छठी शताब्दी में शुरू किया था। हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान 629-645 ईस्वी में चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (या Xuanzang) भारत आया था। उसने अपने संस्मरण में इसका ज़िक्र किया है। सम्राट हर्ष के नाम से विख्यात हर्षवर्धन बैंस का उस समय संपूर्ण उत्तर भारत और दक्षिण में गोदावरी तक उनका शासन था। प्रयागराज कुंभ स्थल पर उनकी आदमकद प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। हालाँकि, इस बार उत्तर प्रदेश शासन ने सम्राट हर्षवर्धन की प्रतिमा को संगम क्षेत्र से हटा दिया, जिसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था। हालाँकि, जो भी हो लेकिन कुंभ के आयोजन में सम्राट हर्ष का बहुत बड़ा योगदान है।

संबंधितपोस्ट

दिव्य और भव्य होगा हरिद्वार कुंभ 2027: सीएम धामी ने दिये ये निर्देश

विदेश में भी बजा योगी सरकार के महाकुंभ प्रबंधन का डंका, अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया जाएगा कुंभ मैनेजमेंट

आचार्य प्रशांत: असली धर्मगुरु या ब्रैंडिंग से बने बाबा, क्या हैं उनके आलोचक और समर्थकों के दावे?

और लोड करें

एक अन्य मान्यता है कि कुंभ अनादि काल से अनवरत चलता आ रहा है। सम्राट हर्षवर्धन ने इसे भव्य एवं अलग रूप दिया था। यह कुंभ इस्लामी आक्रांताओं के समय में भी बंद नहीं हुआ। हालाँकि, कुंभ मेले का पहला लिखित प्रमाण भागवत पुराण में मौजूद है। वहीं, कुंभ से संबंधित समुद्र मंथन का ज़िक्र भागवत पुराण, विष्णु पुराण, महाभारत और रामायण में भी है। शास्त्रों के अनुसार, कुंभ का सीधा संबंध समुद्र मंथन से हैं। कुंभ मेला ‘कुंभ’ और ‘मेला’ से बना है। अमृत के अमर पात्र या कलश को भी कुंभ कहा जाता है। देवासुर संग्राम में राक्षसों को हराने के लिए सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। तब भगवान ने देवताओं को समुद्र यानी क्षीर सागर में मंथन करके अमृत निकालने और उसे पीने के लिए कहा था। देवताओं ने असुरों के राजा बलि को समुद्र मंथन करके अमृत निकालने के लिए तैयार कर लिया।समुद्र मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी का रुप दिया गया।

समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्नों में एक रत्न अमृत जैसे ही निकला, देवताओं के इशारे पर इंद्र के पुत्र जयंत अमृत कलश लेकर उड़ गए। इसमें बृहस्पति, सूर्य, चंद्रमा और शनि ने भी साथ दिया। अमृत कलश पर अधिकार को लेकर देव और राक्षसों के बीच 12 दिनों तक भागने-पकड़ने और भयानक युद्ध चला और अंत में यह देवताओं के हाथ लगा। अमृत कलश की छीना-झपटी में इसकी कुछ बुँदें पृथ्वी के चार स्थानों पर गिर गईं। इनमें से पहली बूँद प्रयागराज में, दूसरी हरिद्वार में, तीसरी उज्जैन में और चौथी बूँद नासिक में गिरी थी। इसलिए इन्हीं चार जगहों पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। यह भी कहा जाता है कि असुरों से अमृत कलश लेकर भागने के दौरान जयंत ने इन्हीं चार स्थानों पर इसे छिपाने की कोशिश की थी लेकिन असुर आ गए और इस दौरान अमृत की बूँदे छलक कर वहाँ गिर गईं।

अमृत कलश लेकर देवता पृथ्वी के चारों तरफ 12 दिनों तक भागते रहे। इस तरह देवताओं के 12 दिन पृथ्वी पर 12 साल के बराबर होते हैं। इसलिए हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। सारे नवग्रहों में सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति और शनि की भूमिका कुंभ में महत्वपूर्ण मानी जाती है। दरअसल, जब अमृत कलश को लेकर देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध चल रहा था, तब कलश की खींचातानी में चंद्रमा ने अमृत को बहने से बचाया था। उस दौरान बृहस्पति ने कलश को इन धर्मस्थलों पर छुपाने में मदद की थी। वहीं, भगवान सूर्य ने कलश को फूटने से बचाया था और शनि ने इंद्र के कोप से उसकी रक्षा की थी। इसीलिए जब इन ग्रहों का योग एवं संयोग एक निश्चित राशि में होता है, तभी कुंभ मेला लगता है।

हिंदू पुराणों के अनुसार, कुंभ पाँच प्रकार का होता है- महाकुंभ, पूर्ण कुंभ, अर्ध कुंभ, कुंभ और माघ कुंभ। महाकुंभ का आयोजन हर 144 साल पर होता है। यह केवल प्रयागराज के संगम पर ही होता है। वहीं, पूर्ण कुंभ 12 वर्षों में आयोजित किया जाता है। पूर्ण कुंभ का आयोजन 4 तीर्थस्थलों में होता है। ये प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं- उत्तराखंड का हरिद्वार, मध्य प्रदेश का उज्जैन, महाराष्ट्र का नासिक और उत्तर प्रदेश का प्रयागराज है। ये सारे तीर्थस्थल अलग-अलग नदियों पर बसे हैं। हरिद्वार गंगा नदी, उज्जैन शिप्रा नदी, नासिक गोदावरी नदी पर बसा है। वहीं, प्रयागराज गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर बसा है। वहीं, अर्ध कुंभ का आयोजन हर 6 साल पर होता है। इसका आयोजन केवल दो स्थानों- प्रयागराज और हरिद्वार में होता है। कुंभ मेला इन चारों स्थानों पर हर तीन साल में आयोजित किया जाता है। माघ कुंभ हर साल सिर्फ प्रयागराज में आयोजित किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, जब बृहस्पति वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है। जब सूर्य मेष राशि और बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में किया जाता है। जब बृहस्पति सिंह राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन उज्जैन में किया जाता है। जब सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तो उज्जैन में जो कुंभ मनाया जाता है उसे सिंहस्थ कुंभ कहते हैं। जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह महाकुंभ मेला नासिक में मनाया जाता है।

कई ज्योतिषियों का मानना है कि बृहस्पति ग्रह 12 साल में 12 राशियों का चक्कर लगाता है। इसलिए कुंभ मेले का आयोजन उस समय के अनुसार होता है। उनका मानना है कि जब बृहस्पति ग्रह किसी विशेष राशि में होता है, तभी कुंभ का आयोजन होता है। दरअसल, बृहस्पति ग्रह और सूर्य की स्थिति का कुंभ से गहरा संबंध है। जब बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करता है और सूर्य मकर राशि में होता है, तब कुंभ मेले का आयोजन होता है। बृहस्पति को अपनी कक्षा में 12 साल का समय लगता है। इसलिए पूर्ण कुंभ हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियाँ होती हैं। ये राशियाँ 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके अलावा 12 साल का चक्र मानव जीवन में एक विशेष ऊर्जा परिवर्तन को दर्शाता है।

कुंभ मेले को लेकर कूर्म पुराण में कहा गया है कि इसमें स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और उत्तम भोग की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही देवलोक की प्राप्ति होती है। स्कन्द पुराण में कहा गया है कि कुंभ में स्नान करने से मनवांछित कामना की पूर्ति होती है। भविष्य पुराण में स्वर्ग और मोक्ष मिलने की बात कही गई है। अग्नि पुराण में कहा गया है कि कुंभ में स्नान करने से करोड़ों गायों को दान करने के बराबर पुण्य मिलता है। ब्रह्म पुराण में अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, कुंभ के महात्म्य को लेकर महाभारत सहित अन्य कई ग्रंथों में चर्चा की गई है।

कुंभ में स्नान करने के लिए दुनिया भर के साधु, संन्यासी, तपस्वी, कल्पवासी, श्रद्धालु आदि आते हैं। इनमें संतों के कई अखाड़े भी शामिल होते हैं। इनमें शैव संप्रदाय और वैष्णव संप्रदाय प्रमुख है। इसके अलावा गुरु नानक की शिक्षा पर आधारित उदासीन अखाड़े और गुरु गोरखनाथ पंथ के अनुयायी नागपंथी अखाड़े के संन्यासी भी इसमें हिस्सा लेते हैं। महाकुंभ में मान्यता प्राप्त कुल 13 मान्यता अखाड़े हिस्सा ले रहे हैं। ये अखाड़े हैं– जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, पंचाग्नि अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा, उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा, उदासीन नया अखाड़ा और निर्मल पंचायती अखाड़ा। अब एक और अखाड़ा शामिल हो गया है। इसका नाम किन्नर अखाड़ा है। हालाँकि, यह अखाड़ा परिषद द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है लेकिन यह जूना अखाड़े से जुड़ा हुआ है।

स्रोत: उत्तर प्रदेश, महाकुंभ 2025, प्रयागराज महाकुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ, अखाड़े, शैव संप्रदाय, वैष्णव संप्रदाय, Mahakumbh 2025, Prayagraj Mahakumbh, Ardh Kumbh, Purna Kumbh, Akharas, Shaiva sect, Vaishnav sect, Uttar Pradesh
Tags: AkharasArdh KumbhMahakumbh 2025Prayagraj MahakumbhPurna KumbhShaiva sectVaishnav sectअखाड़ेअर्ध कुंभपूर्ण कुंभप्रयागराज महाकुंभमहाकुंभ 2025वैष्णव संप्रदायशैव संप्रदाय
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

पहले बोला ‘बंदर’ अब बुमराह की गेंदबाजी पर उठाए सवाल, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कोहली-जडेजा से भी कर चुका है बवाल

अगली पोस्ट

‘भागवत’ ज्ञान पर ‘मोहन’ को संतों की नसीहत: मंदिर-मस्जिद पर अब क्या करेगा हिंदू समाज?

संबंधित पोस्ट

तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद
चर्चित

तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

15 July 2026

तिरुपति बालाजी मंदिर में पहली आरती को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि सरकार उस...

दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों
इतिहास

दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

7 July 2026

कहते हैं संयोग और चमत्कार इस दुनिया में होते हैं। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी घटित हुआ। एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक के अनुवाद कार्य में...

राम मंदिर चढ़ावा विवाद
चर्चित

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

30 June 2026

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद साधु-संत समाज की भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। श्रीराम...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Mass Detentions and Enforced Disappearances: The Aftermath of July 5

Mass Detentions and Enforced Disappearances: The Aftermath of July 5

00:03:20

What's Really Behind Xinjiang's Global Supply Chains?

00:03:26

IRAN HITS UAE OIL TANKERS

00:03:28

THE CAMPS AFTER URUMQI

00:03:51

BANGKOK PUB FIRE HORROR

00:04:07
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited