जेएनयू परिसर में सोमवार देर रात एक बार फिर हिंसक झड़प की घटना सामने आई, जिसने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों के अनुसार, लगातार बढ़ते विवाद, धरना-प्रदर्शन और टकराव की घटनाओं से पढ़ाई प्रभावित हो रही है और गैर-राजनीतिक छात्रों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
छात्र संगठनों के बीच मारपीट
ताजा मामला छात्र संगठनों के बीच मारपीट से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि यह झड़प करीब 1:30 बजे शुरू होकर सुबह लगभग 3 बजे तक चली। इस दौरान आरोप है कि वामपंथी छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों पर हमला किया। कई छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए झाड़ियों और कैंपस के घने जंगलों में छिपना पड़ा। एबीवीपी छात्रों का कहना है कि वे केवल एक प्रदर्शन देखने गए थे, लेकिन एक समूह ने उन्हें घेरकर लात-घूंसों, बेल्ट और ईंट-पत्थरों से हमला किया। कुछ छात्रों ने दावा किया कि हमलावरों के पास धारदार वस्तुएं भी थीं, जिससे अफरा-तफरी मच गई। मारपीट में कई छात्र घायल हुए और कुछ की तबीयत बिगड़ने की भी सूचना है।
घटना के बाद तनावपूर्ण माहौल
घटना के वीडियो में एक सुरक्षाकर्मी भी दिखाई दिया। छात्रों का आरोप है कि लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद झड़प को रोकने के प्रभावी प्रयास नहीं किए गए। जेएनयू प्रशासन और सुरक्षा प्रबंधन की ओर से छात्रों को रोकने या उन्हें सुरक्षित करने के लिए कोई आदेश नहीं जारी किए गए। प्रशासन ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान भी नहीं दिया है।
छात्रों का कहना है कि हाल के समय में परिसर में लगातार तोड़फोड़, विवाद और प्रदर्शन की घटनाओं ने पढ़ाई के माहौल को प्रभावित किया है। ताजा झड़प के बाद सुरक्षा व्यवस्था, रात्रिकालीन निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने जेएनयू के परिसर में छात्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिसर में शांति बनाए रखना और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई है। छात्र संगठनों का मानना है कि बिना ठोस कार्रवाई के ऐसे हालात दोबारा पैदा हो सकते हैं और विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल और भी प्रभावित हो सकता है।






























