भारतीय राजनीति के फलक पर असदुद्दीन ओवैसी एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं, जिनके शब्द अक्सर कूटनीतिक सीमाओं को तोड़कर सीधे प्रहार करते हैं। गुजरात के सूरत में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए, एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। ओवैसी ने न केवल कांग्रेस को भारत के ‘बंटवारे’ (Partition) के लिए जिम्मेदार ठहराया, बल्कि उन आरोपों की धज्जियां भी उड़ा दीं जिनमें उनकी पार्टी को भाजपा की ‘B-टीम’ कहा जाता है। उन्होंने विपक्षी दलों को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए चुनौती दी कि वे अपनी हार के लिए दूसरों को दोष देना बंद करें और अपनी ताकत के दम पर भाजपा का मुकाबला करें।
बंटवारे का जिक्र और कांग्रेस की ऐतिहासिक जवाबदेही
ओवैसी ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कांग्रेस को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के लिए जो लोग जिम्मेदार थे, उनमें कांग्रेस सबसे प्रमुख थी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्षता और एकता का सबसे बड़ा पैरोकार बताती है। ओवैसी का तर्क था कि कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक गलतियों को छिपाने के लिए आज छोटे दलों पर निशाना साध रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस ने कभी भी स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व को उभरने नहीं दिया और हमेशा उन आवाजों को दबाने की कोशिश की जो उनके तय किए गए सांचे में फिट नहीं बैठती थीं।
पश्चिम बंगाल का गणित: ‘B-टीम’ के आरोपों का पर्दाफाश
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच ओवैसी ने आंकड़ों के जरिए विपक्ष के ‘वोट कटवा’ वाले नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने सूरत की रैली में एक कागज की पर्ची दिखाते हुए चुनावी अंकगणित समझाया। ओवैसी ने कहा, “पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, ममता बनर्जी की टीएमसी पूरी ताकत से मैदान में है, और वाम मोर्चा लगभग 250 सीटों पर दावेदारी कर रहा है। इसके उलट, मेरी पार्टी (AIMIM) केवल 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।” ओवैसी का सवाल सीधा था—जो पार्टी सिर्फ 11 सीटों पर है, वह 294 सीटों वाले राज्य में किसी की हार या जीत का कारण कैसे बन सकती है? उन्होंने इसे विपक्ष की ‘बौद्धिक दिवालियापन’ करार दिया।
विपक्ष को चुनौती: ‘बाकी की 270 सीटें जीतकर दिखाओ’
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और टीएमसी पर तंज कसते हुए ओवैसी ने एक बड़ी चुनौती पेश की। उन्होंने कहा, “अगर आपमें दम है, तो एआईएमआईएम की उन 11 सीटों को भूल जाइए और बाकी की 270 से ज्यादा सीटों पर भाजपा को हराकर दिखाइए।” ओवैसी का यह बयान विपक्ष की उस रणनीति पर प्रहार था जिसमें वे अपनी संगठनात्मक कमजोरी को छिपाने के लिए छोटे दलों की मौजूदगी को अपनी हार का बहाना बनाते हैं। उन्होंने साफ किया कि भाजपा के खिलाफ जीत ‘ब्लेम गेम’ से नहीं, बल्कि जमीन पर मेहनत और चुनावी मजबूती से आएगी।
स्वतंत्र नेतृत्व के प्रति प्रतिरोध और ‘तलवार’ जैसी जुबान
ओवैसी ने अपनी पहचान और अपनी राजनीति के अंदाज पर भी बेबाकी से बात की। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को एक ऐसे नेता से परेशानी है जो बिना किसी डर के, तीखी और साफ बात करता है। उन्होंने अपनी तकरीर की तुलना एक ‘तलवार’ से की, जो झूठ और पाखंड को काटती है। ओवैसी के अनुसार, मुख्यधारा की पार्टियां एक ऐसे नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं जो उनकी गुलामी न करे और अपने समुदाय के अधिकारों की बात स्वतंत्र रूप से करे।
राष्ट्रीय राजनीति के लिए बड़ा संदेश
हालांकि यह रैली गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के संदर्भ में थी, लेकिन ओवैसी का संदेश पूरी तरह से राष्ट्रीय था। उन्होंने विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना बंद करें। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि एआईएमआईएम अपनी शर्तों पर राजनीति करेगी और वह किसी की कठपुतली नहीं बनेगी। ओवैसी का यह भाषण 2026 के विधानसभा चुनावों और उसके बाद की राजनीति के लिए एक नई लकीर खींचने वाला साबित हो सकता है।






























