लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दूसरे दिन भी जोरदार हंगामा देखने को मिला। बुधवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और जेडीयू सांसद दिलेश्वर कामत ने बिल पर चर्चा की शुरुआत की।
उधर, राज्यसभा में विपक्ष ने एक दिन पहले सीपीएम के दिल्ली कार्यालय पर हुई छापेमारी का मुद्दा उठाया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। वहीं, सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि यह एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में वह खुद भी दो बार गिरफ्तार हो चुके हैं।
लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई गृह मंत्री के आदेश पर होती है। इस पर सदन में तीखी बहस शुरू हो गई। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि बिना तथ्य के इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते और उन्हें सदन की मर्यादा तथा नियमों का पालन करना चाहिए।
राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी के पास गृह मंत्री द्वारा फायरिंग का आदेश देने का कोई दस्तावेज या सबूत है, तो उसे सदन में पेश करें। अगर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है तो उन्हें अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। ट्रेजरी बेंच के कई सांसदों ने भी राहुल गांधी से माफी की मांग की।
इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यदि विपक्ष के नेता ने कोई गंभीर सवाल उठाया है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किसके आदेश पर हुई। हालांकि किरेन रिजिजू ने कहा कि जांच की मांग अलग बात है, लेकिन बिना सबूत किसी मंत्री पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को बार-बार याद दिलाया कि सदन में केवल तथ्यों के आधार पर ही बात रखी जाए। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के शब्द संसदीय रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं, इसलिए उन्हें जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ बोलना चाहिए।
एंटी पेपर लीक बिल पर बोलते हुए राहुल गांधी ने देश की परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेपर तैयार होने से लेकर छात्रों तक पहुंचने और कॉपियों की जांच तक पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने इसे “एग्जाम सिस्टम नहीं, बल्कि एक्सटॉर्शन सिस्टम“ बताया और दावा किया कि ईमानदार छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कई मामलों में पेपर लीक के लिए लाखों रुपये लिए जाते हैं और निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय के कामकाज में बाहरी हस्तक्षेप बढ़ा है।
राहुल गांधी के गृह मंत्री से जुड़े बयान के बाद सदन में एक बार फिर जोरदार हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष ने उनके बयान को गंभीर और निराधार बताते हुए माफी की मांग की, जबकि विपक्षी सांसद गृह मंत्री से जवाब मांगते रहे।
फिलहाल लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा जारी है। सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा, जबकि विपक्ष इसे और मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव दे रहा है। सदन में इस मुद्दे पर आगे भी तीखी बहस जारी रहने की संभावना है।


































