आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ सवालों के जवाब देने, कोड लिखने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। इसकी ताकत का इस्तेमाल अगर गलत हाथों में पहुंच जाए, तो इसका असर सीधे राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसका ताजा उदाहरण यमन में ईरान समर्थित हूती समूह से जुड़ा है। Anthropic की नई थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में मौजूद एक हथियार इंजीनियरिंग समूह ने कंपनी के AI मॉडल Claude और उसके कोडिंग टूल का इस्तेमाल कई मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े सॉफ्टवेयर पर काम करने के लिए किया।
Anthropic ने 10 सितंबर को जारी अपनी 154 पन्नों की रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सरकारों, आपराधिक समूहों और दूसरे संगठनों ने उसके AI मॉडल का इस्तेमाल साइबर हमलों, जासूसी, प्रचार, जैविक अनुसंधान और पारंपरिक हथियारों से जुड़े कामों में करने की कोशिश की। रिपोर्ट में चीन और रूस से जुड़े मामलों का भी जिक्र है।
हूतियों ने Claude का इस्तेमाल क्यों किया?
रिपोर्ट में Anthropic ने समूह का नाम सीधे नहीं लिया है, लेकिन जिन परिस्थितियों और गतिविधियों का जिक्र किया गया है, वे यमन के ईरान समर्थित हूती संगठन की ओर इशारा करती हैं। हूतियों के पास पहले से ही मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा जखीरा है और वे लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्षों में इनका इस्तेमाल करते रहे हैं।
Anthropic के मुताबिक, उत्तरी यमन में मौजूद एक हथियार इंजीनियरिंग सेल तीन अलग-अलग मिसाइल कार्यक्रमों पर काम कर रहा था। इनमें एक निर्देशित रॉकेट, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा बताई गई रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल और कई वैरिएंट वाली एक मिसाइल फैमिली शामिल थी। इस तीसरे कार्यक्रम में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वाले वैरिएंट का भी जिक्र किया गया।
यहां सबसे अहम बात यह है कि AI ने सिर्फ सामान्य जानकारी देने का काम नहीं किया। Anthropic के मुताबिक, Claude कोड का इस्तेमाल Guidance, Navigation and Control यानी GNC से जुड़े सॉफ्टवेयर पर काम करने में किया गया। आसान भाषा में समझें तो यह उस सॉफ्टवेयर से जुड़ा होता है जो किसी उड़ने वाले वाहन की दिशा, स्थिति और स्थिरता को नियंत्रित करने में मदद करता है।
AI किस तरह मदद कर रहा था?
Anthropic की रिपोर्ट के मुताबिक, Claude का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर तैयार करने, मौजूदा ओपन-सोर्स ऑटोपायलट को दूसरे सिस्टम के साथ जोड़ने, नियंत्रण से जुड़े पैरामीटर को बेहतर करने, सॉफ्टवेयर बिल्ड तैयार करने और फ्लाइट सिमुलेशन जैसे कामों में किया गया।
सबसे चिंताजनक बात यह थी कि ऑपरेटरों ने Claude के कई इंस्टेंस एक साथ चलाए। एक से कोडिंग का काम कराया गया, दूसरे से रिसर्च और तीसरे से पहले किए गए काम की समीक्षा कराई गई। यानी AI को एक तरह की डिजिटल इंजीनियरिंग टीम की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश हुई।
हालांकि Anthropic ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसे इस बात का सबूत नहीं मिला कि इन लोगों ने कोई पूरी तरह ऑपरेशनल गाइडेड हथियार सफलतापूर्वक तैनात किया था। रिपोर्ट के अनुसार, एक गाइडेड रॉकेट का टेस्ट किया गया था, लेकिन वह परीक्षण कथित तौर पर विफल रहा। परीक्षण के बाद भी संबंधित लोगों ने Claude का इस्तेमाल समस्या को समझने और उसे ठीक करने की कोशिश में किया।
सुरक्षा व्यवस्था को कैसे चकमा दिया गया?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियां अपने मॉडलों में खतरनाक इस्तेमाल रोकने के लिए कई सुरक्षा परतें लगाती हैं। Anthropic के मुताबिक, उसके सिस्टम ने कई हानिकारक अनुरोधों को रोक दिया था, लेकिन उपयोगकर्ताओं ने इन सुरक्षा उपायों को चकमा देने के अलग-अलग तरीके अपनाए।रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने अपने असली उद्देश्य को छिपाने की कोशिश की और काम को कई अलग-अलग सेशन में बांट दिया। इस वजह से किसी एक बातचीत को देखने पर उनके पूरे इरादे का पता नहीं चलता था।
यही AI सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। कोई व्यक्ति सीधे यह नहीं पूछता कि किसी खतरनाक हथियार को कैसे बनाया जाए। इसके बजाय वह किसी बड़े प्रोजेक्ट को छोटे-छोटे तकनीकी कामों में बांट सकता है और AI से अलग-अलग हिस्सों में मदद लेने की कोशिश कर सकता है।
Anthropic ने जांच के बाद संबंधित अकाउंट्स को बैन किया और मामले की जानकारी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सुरक्षा साझेदारों के साथ साझा की। कंपनी पहले भी अपने मॉडल के दुरुपयोग के मामलों पर रिपोर्ट जारी करती रही है और अपने Threat Intelligence और Safeguards कार्यक्रम के जरिए ऐसे मामलों की निगरानी करती है।
सिर्फ हूती मामला नहीं, खतरा बड़ा है
Anthropic के मुताबिक, यमन का मामला पारंपरिक हथियारों से जुड़े दुरुपयोग के छह उदाहरणों में से एक है। बाकी मामलों में चीन और रूस से जुड़े लोगों द्वारा हथियारों, मिसाइलों, ड्रोन, बम और अन्य सैन्य प्रणालियों से संबंधित AI के इस्तेमाल की कोशिशों का उल्लेख है।
रिपोर्ट में इसके अलावा रूस से जुड़ी जासूसी और साइबर गतिविधियों, चीन से जुड़े निगरानी कार्यक्रमों तथा रूस, मलेशिया, ईरान और बांग्लादेश से जुड़े प्रचार अभियानों का भी जिक्र है।
सबसे गंभीर हिस्सों में जैविक अनुसंधान से जुड़े पांच मामले हैं। Anthropic का कहना है कि कुछ वैज्ञानिकों ने उसके AI मॉडल का इस्तेमाल ऐसे जैविक अनुसंधान में किया, जिसकी जानकारी का गलत इस्तेमाल जैविक हथियार विकसित करने में हो सकता है। कंपनी ने संबंधित वैज्ञानिकों, संस्थानों और देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए, क्योंकि उनके वास्तविक इरादों को लेकर पर्याप्त निश्चितता नहीं थी।
AI की असली चिंता क्या है?
इस पूरे मामले को सिर्फ इस सवाल से नहीं देखना चाहिए कि AI खुद हथियार बना रहा है या नहीं। फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। असली बदलाव यह है कि AI जटिल तकनीकी काम करने की इंसानी क्षमता को तेज कर सकता है।
यानी जिस काम के लिए पहले विशेषज्ञों की बड़ी टीम, लंबा समय और विशेष तकनीकी ज्ञान चाहिए होता था, उसमें AI किसी व्यक्ति या छोटे समूह की क्षमता बढ़ा सकता है। यही वजह है कि Anthropic अपनी रिपोर्ट में कहता है कि ऐसे मामले भविष्य में AI के दुरुपयोग की दिशा दिखाते हैं। कंपनी ने यह भी माना कि उसके सुरक्षा उपायों ने कई कोशिशों को रोका, लेकिन सभी को रोकना संभव नहीं हुआ।
यह चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि AI अब केवल चैटबॉट नहीं रह गया है। Claude जैसे मॉडल coding, research और agentic tasks कर सकते हैं। Anthropic खुद पहले भी ऐसे मामलों की जानकारी दे चुका है, जिनमें AI सिस्टम को टेस्टिंग के दौरान इंटरनेट तक अनधिकृत पहुंच मिली थी। सितंबर 2026 की एक अपनी जांच में कंपनी ने चार ऐसे साइबर सुरक्षा मामलों का भी आकलन किया है।
दो दिन पहले Anthropic के रिसर्चर ने दी ‘दुनिया खत्म होने’ की चेतावनी
इस रिपोर्ट को और ज्यादा गंभीर बनाने वाली बात यह है कि इसके ठीक दो दिन पहले Anthropic के पूर्व रिसर्चर Jacob Coxon ने कंपनी से इस्तीफा देते हुए AI के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी थी। रिसर्चर ने सोशल मीडिया पर कहा कि AI बनाने वाली कंपनियां तेजी से self-improving superintelligence की दिशा में बढ़ रही हैं और उनके मुताबिक ऐसी तकनीक दशक के अंत तक इंसानों के लिए अस्तित्व का खतरा बन सकती है। उनके इस बयान का Anthropic के Alignment Science से जुड़े Evan Hubinger ने भी समर्थन किया और कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अगले दशक में AI से मानव जाति के खत्म होने की संभावना 10 फीसदी से ज्यादा लगती है।
यही वजह है कि हूतियों से जुड़ी यह घटना उस बड़ी बहस का एक वास्तविक उदाहरण बन जाती है। एक तरफ AI इंसानों की उत्पादकता और वैज्ञानिक क्षमता को कई गुना बढ़ाने का वादा करता है, दूसरी तरफ वही क्षमता अगर आतंकी संगठनों, अपराधियों या दूसरे खतरनाक समूहों के हाथ में पहुंच जाए, तो जोखिम भी उतना ही बड़ा हो सकता है।






























