वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ
आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। आज के दिन हम प्रायः श्रीकृष्ण के बालरूप को याद करते हैं। माखन चुराने वाले नटखट कान्हा, मुरली बजाने वाले गोप गोपियों संग लीला करने वाले गोपाल। इसके अलावा श्रीकृष्ण के और भी...
डॉ. महेंद्र ठाकुर: केमिस्ट्री से डॉक्टरेट, लेकिन सामाजिक कीमियागिरी के समीकरणों में उलझने-सुलझाने में ज्यादा रुचि।
सामाजिक- पर्यावरण कार्यकर्ता, स्थापित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन और पुस्तकों की समीक्षाओं के साथ ही कई बेस्टसेलर और सुप्रसिद्ध पुस्तकों के हिंदी अनुवाद भी इनकी कलम से हुए हैं. X पर @Mahender_Chem नाम से उपस्थिति
आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। आज के दिन हम प्रायः श्रीकृष्ण के बालरूप को याद करते हैं। माखन चुराने वाले नटखट कान्हा, मुरली बजाने वाले गोप गोपियों संग लीला करने वाले गोपाल। इसके अलावा श्रीकृष्ण के और भी...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत सरसंघचालक मोहन भागवत वैश्विक प्रवास पर हैं। इस अभियान के तहत उन्होंने अमेरिका और कनाडा का दौरा किया और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया।...
हाल ही में एक पुस्तक पढ़ी, जिसका शीर्षक है “जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है।” पुस्तक में विकसित भारत 2047 के परिप्रेक्ष्य में युवाओं की संभावित भूमिका को लेकर सूत्ररूप में संदेश देने...
वर्ष 2021 में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अगस्त को 'विभाजन की विभीषका स्मृति दिवस' (Partition Horrors Remembrance Day) के रूप में मनाने का आह्वान किया था। 14 अगस्त 1947 को मजहबी ज़िद के चलते...
कहते हैं संयोग और चमत्कार इस दुनिया में होते हैं। कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी घटित हुआ। एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक के अनुवाद कार्य में लगा हुआ हूँ। अचानक दिल्ली यात्रा पर आना पड़ा। यात्रा पर आने...
अंग्रेजी भाषा का एक शब्द “कॉमेडी”, कदाचित जिसका अर्थ ‘हास्य की वह विधा है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ मनोरंजन और समाज को हँसी के माध्यम से सकारात्मक संदेश देना है’। लेकिन इन दिनों में भारत में कॉमेडी या...
हाल ही में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला के विवाद को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। इस निर्णय में हिंदू पक्ष को विजय मिली है। भोजशाला इस सत्य का जीवंत उदाहरण...
‘इतिहास’ केवल बीते समय की घटनाओं का क्रम नहीं होता, बल्कि किसी राष्ट्र की चेतना, उसकी स्मृतियों और उसकी पहचान का आधार भी होता है। जो कुछ हम अपने अतीत के बारे में जानते और मानते हैं,...
‘भारत’ दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता, संस्कृति और चेतना का जीवंत प्रतीक है। इसकी भूमि पर हर संघर्ष, हर सपना और हर परंपरा हमें हमारी पहचान याद दिलाती है और भविष्य की संभावनाओं की ओर सोचने के...
भारतीय परंपरा में भगवान शिव का स्वरूप अत्यंत व्यापक, गूढ़ और बहुआयामी माना जाता है। वे केवल तप, त्याग, करुणा, संहार और सृजन के अद्भुत संतुलन के प्रतीक हैं। एक ओर वे कैलाशवासी योगी हैं, तो दूसरी...
भारत के राष्ट्रीय जीवन में कुछ तिथियाँ केवल कैलेंडर की सामान्य तिथियाँ नहीं है, बल्कि वे राष्ट्र की चेतना, उसके संकल्प और उसके ऐतिहासिक दायित्व की जीवंत प्रतीक बन जाती हैं। 22 फरवरी ऐसी ही एक तिथि...
आज का युग अभूतपूर्व विकास और तकनीकी प्रगति का युग है, रील्स का दौर है, जीवन की भागदौड़ इतनी तेज है कि ‘ठहराव’ शब्द अब विचित्र लगने लगा है। इसी के साथ पर्यावरण संकट भी गहराता जा...


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