TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    बीजेपी में बदलाव

    हिमाचल नगर निगम चुनाव में भाजपा का दबदबा, 4 में से 3 नगर निगमों पर जमाया कब्जा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    बीजेपी में बदलाव

    हिमाचल नगर निगम चुनाव में भाजपा का दबदबा, 4 में से 3 नगर निगमों पर जमाया कब्जा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

भारत के सबसे महान राजवंशों में से एक था चोल साम्राज्य, लेकिन वामपंथी इतिहासकारों ने इसे दफन कर दिया

चोल साम्राज्य के गौरवशाली हिन्दू इतिहास पर गौर करना जरुरी है!

Aniket Raj द्वारा Aniket Raj
5 January 2022
in ज्ञान
चोल साम्राज्य

Source- TFIPOST

Share on FacebookShare on X

चोल साम्राज्य – दक्षिण भारत के गौरवशाली हिन्दू इतिहास को मिटाने के लिए ब्रिटिश काल से ही लगातार प्रयास किया जा रहा है। ऐतिहासिक मानवविज्ञानी इसके संदर्भ में मुख्यतः दो कारण बताते हैं। पहला, मुगलों ने इब्राहीम धर्म की पूजा की और इसलिए उन्हें दक्षिण के मूर्तिपूजकों की तुलना में अधिक सभ्य माना जाता था और दूसरा त्वचा के रंग और चेहरे की विशेषताओं में स्पष्ट अंतर ने अंग्रेजों को दक्षिण भारतीय लोगों को अपने अफ्रीकी गुलामों की तरह समझने के लिए प्रेरित किया।

इस पागलपन को अंग्रेजों से प्यार करने वाली कांग्रेस पार्टी ने आगे बढ़ाया! महात्मा गांधी को तो हम सभी याद करते हैं, लेकिन वास्तव में महान कामराज को कितने लोग याद करते हैं? मद्रास प्रेसीडेंसी में गांधी के पक्ष में खड़े दक्षिण भारतीय ब्राह्मणों के बारे में कितने लोग जानते हैं? चोलो के गौरवशाली इतिहास का दमन ऐतिहासिक भेदभाव और विकृतिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। आइए, आज हम आपको चोलों के गौरवशाली हिन्दू इतिहास से अवगत कराते हैं।

संबंधितपोस्ट

पोन्नियिन सेल्वन-1 की वो कहानी, जो मणिरत्नम ने अपनी फिल्म में आपको दिखाई ही नहीं

Ancient Hindu Temples: पांच हिंदू मंदिर जिनकी अद्भुत और उत्कृष्ट वास्तुकला के सामने ताजमहल बौना दिखता है

बृहदेश्वर मंदिर मानव इतिहास की उत्कृष्ट कलाओं में से एक क्यों है?

और लोड करें

चोल शासन में ही हुआ था बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण

चोल वंश दक्षिण भारत का एक राजवंश था, जो दुनिया के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले राजवंशों में से एक था। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के शिलालेखों में चोल साम्राज्य का वैभवशाली इतिहास उकेरा हुआ है। चोलों की गढ़ भूमि कावेरी की उपजाऊ घाटी थी, लेकिन उन्होंने 9वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से 13वीं शताब्दी की शुरुआत तक काफी बड़े क्षेत्र पर शासन किया। उन्होंने दक्षिण के पूरे राज्यों को एकजुट किया तथा 907 और 1215 ईस्वी के बीच तीन शताब्दियों से अधिक समय तक राज्य के रूप में संगठित होकर शासन किया। राजेंद्र चोल प्रथम और उनके उत्तराधिकारियों के शासन में चोल राजवंश एक सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति बन गया। नए साम्राज्य की शक्ति को पूर्वी दुनिया में नौसैनिक अभियान द्वारा राज्य के शहरों के साथ-साथ चीन तक इनके शक्ति सामर्थ्य की यश कीर्ति पहुंची। चोल साम्राज्य भारतीय नौसैनिक बेड़े के चरमोत्कर्ष का प्रतिनिधित्व भी करता है।

1010-1153 ईस्वी की अवधि के दौरान, चोल प्रदेश दक्षिण के मालदीव द्वीपों से लेकर उत्तर में आंध्रप्रदेश तक फैला हुआ था। राजराजा चोल प्रथम ने मालदीव प्रायद्वीप और श्रीलंका पर विजय प्राप्त की। जिसके बाद उनके उत्तराधिकारी राजेंद्र चोल ने उत्तर भारत में एक विजयी अभियान भेजा, जिसने गंगा नदी को मैदानी भाग छुआ और पाटलिपुत्र के पाल शासक को हराया। चोलों ने एक स्थायी विरासत छोड़ी। उनके साहित्य संरक्षण और मंदिरों के निर्माण में उनके उत्साह के परिणामस्वरूप तमिल साहित्य और वास्तुकला को एक महान विरासत मिली हैं। राजराजा चोल प्रथम ने ही तंजौर में स्थित हिंदुओं के विशालतम मंदिर में से एक बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण कराया। चोल राजा उत्साही बिल्डर थे और अपने राज्यों में मंदिरों को न केवल पूजा स्थल के रूप में बल्कि आर्थिक गतिविधि के केंद्रों के रूप में भी देखते थे। उन्होंने एक सशक्त और केंद्रीकृत शासन का बीड़ा उठाया और एक अनुशासित नौकरशाही की स्थापना की।

और पढ़ें: महादजी शिंदे : पानीपत के राख से निकले वो शूरवीर जिन्होंने महाराष्ट्र का भाग्य बदल दिया

चोलों ने कराया कई शिव मंदिरों का निर्माण

चोल साम्राज्य के संस्थापक विजयालय थे, जो कांची के पल्लवों के पहले सामंत थे। उन्होंने 850 ईस्वी में तंजौर पर कब्जा कर लिया, उन्होंने वहां देवी निशुंभ मर्दिनी (मां दुर्गा) का एक भव्य मंदिर स्थापित किया। आदित्य प्रथम विजयालय के उत्तराधिकारी बने। आदित्य ने अपने अधिपति पल्लव राजा अपराजिता के खिलाफ पांड्यों की मदद की और उन्हें हराकर पूरे पल्लव साम्राज्य पर कब्जा जमा लिया।

9वीं शताब्दी के अंत तक, चोलों ने पल्लवों को पूरी तरह से हरा दिया था और पांड्यों को कमजोर कर तमिल देश (टोंड मंडल) पर कब्जा कर लिया तथा इसे अपने प्रभुत्व क्षेत्र में शामिल कर लिया। इसके बाद आदित्य एक संप्रभु शासक बन गए और राष्ट्रकूट राजा कृष्ण द्वितीय ने अपनी बेटी का विवाह आदित्य से कर दिया। आदित्य ने कई शिव मंदिरों का निर्माण कराया। उसके बाद 907 ईस्वी में परांतक प्रथम ने उत्तराधिकार संभाला, जो चोलों का पहला महत्वपूर्ण शासक हुआ। परांतक प्रथम एक महत्वाकांक्षी शासक था और अपने शासनकाल की शुरुआत से ही युद्धों में लगा हुआ था। उसने पांड्य शासक राजसिंह द्वितीय को हराकर मदुरै पर विजय प्राप्त की और मदुरैकोंड की उपाधि धारण की।

हालांकि, वो 949 ईस्वी में टोककोलम की लड़ाई में राष्ट्रकूट शासक कृष्ण III से हार गए थे और तब चोलों को तोंड मंडलम को विरोधी को सौंपना पड़ा था। उस समय चोल साम्राज्य का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया था। यह बढ़ती चोल शक्ति के लिए एक गंभीर झटका था। चोल शक्ति का पुनरुद्धार परांतक द्वितीय के प्रवेश से शुरू हुआ, जिसने राजवंश के प्रभुत्व को फिर से स्थापित करने के लिए तोंड मंडलम को पुनः प्राप्त किया।

और पढ़ें: सोनपुर मेला का इतिहास, कथा और महत्व आपको जानना जरूरी है

राजराजा प्रथम ने श्रीलंका पर किया था कब्जा

चोल सत्ता ने चरमोत्कर्ष परांतक द्वितीय के उत्तराधिकारी अरुमोलीवर्मन के तहत हासिल किया, जिन्होंने 985 ईस्वी में खुद को राजराजा प्रथम के रूप में ताज पहनाया। उनके शासन के अगले तीस वर्षों ने चोल साम्राज्यवाद का प्रारंभिक काल बनाया। उनके अधीन चोल साम्राज्य एक व्यापक और संगठित साम्राज्य के रूप में विकसित हुआ। उनके पास अब एक कुशलतापूर्वक संगठित, प्रशासित और एक शक्तिशाली स्थायी सेना और नौसेना थी। राजराजा ने पांड्य, केरल राज्यों और सीलोन के शासकों के बीच संघ को ध्वस्त कर उसे जीत लिया। सीलोन (आज के श्रीलंका) के राजा महिंदा वी की हार के बाद उत्तरी सीलोन चोल प्रांत की राजधानी बन गया।

उन्होंने मालदीव पर भी कब्जा कर लिया। आधुनिक मैसूर के कई हिस्सों को जीतकर राजराजा ने उन पर कब्जा कर लिया, जिससे चालुक्यों के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता तेज हो गई। राजराजा ने तंजावुर में बृहदेश्वर या राजराजा मंदिर नामक शानदार शिव मंदिर बनाया, जो 1010 ईस्वी में पूरा हुआ। इसे दक्षिण भारतीय शैली में वास्तुकला का एक उल्लेखनीय नमूना माना जाता है।

राजेंद्र प्रथम ने दिया था विस्तारवाद पर जोर

राजराजा प्रथम ने श्रीविजय के शासक श्री मारा विजयोत्तुंग वर्मन को नेगापट्टम में एक बौद्ध विहार बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस विहार को श्री मारा के पिता के नाम पर ‘चूड़ामणि विहार’ कहा जाता था। राजराजा के बाद उनके पुत्र राजेंद्र प्रथम ने 1014 ई. से सत्ता की बागडोर संभाली। उन्होंने कुछ वर्षों तक अपने पिता के साथ संयुक्त रूप से शासन किया। उन्होंने अपने पिता द्वारा अपनाई गई विजय और विलय की नीति का भी पालन किया तथा चोलों की शक्ति और प्रतिष्ठा को भी बढ़ाया। राजेंद्र प्रथम ने विस्तारवादी नीति का पालन किया और सीलोन में व्यापक विजय प्राप्त की।

विजय प्राप्त करने के बाद पंड्या और केरल देश को चोल-पांड्य की उपाधि के साथ चोल राजा के अधीन एक वायसराय के रूप में गठित किया गया था। इसका मुख्यालय मदुरै था। कलिंग के माध्यम से आगे बढ़ते हुए, राजेंद्र प्रथम ने बंगाल पर हमला किया और 1022 ईस्वी में पाल शासक महिपाल को हराया, लेकिन उन्होंने उत्तर भारत में कोई क्षेत्र नहीं लिया। इस अवसर के उपलक्ष्य में राजेंद्र प्रथम ने गंगई कोंडा चोला (गंगा के चोल विजेता) की उपाधि धारण की। उन्होंने कावेरी के मुहाने के पास नई राजधानी का निर्माण किया और इसे गंगई कोंडा चोलपुरम (गंगा के चोल विजेता का शहर) नाम दिया। अपने नौसैनिक बलों के साथ उन्होंने मलय प्रायद्वीप और श्रीविजय साम्राज्य पर भी आक्रमण किया, जो सुमात्रा, जावा और पड़ोसी द्वीपों तक फैला हुआ था और चीन के लिए विदेशी व्यापार मार्ग को नियंत्रित करता था। उन्होंने राजनीतिक और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए चीन में दो राजनयिक मिशन भेजे।

और पढ़ें: महाराजा विक्रमादित्य का जीवन परिचय, इतिहास और गौरव कथा

कुलोत्तुंग प्रथम को मिली थी संगम तविर्ता की उपाधि

राजेंद्र प्रथम के उत्तराधिकारी उनके पुत्र राजाधिराज प्रथम ने 1044 ई. में सत्ता संभाली। वह एक सक्षम शासक थे। उन्होंने सीलोन में शत्रुतापूर्ण ताकतों को नीचे रखा और विद्रोही पांड्यों का दमन किया तथा उनके क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया। उन्होंने कल्याणी को बर्खास्त करने के बाद कल्याणी में वीरभिषेक (विजेता का राज्याभिषेक) करके अपनी जीत का जश्न मनाया और विजय राजेंद्र की उपाधि धारण की।

कोप्पम में चालुक्य राजा सोमेश्वर प्रथम के साथ युद्ध में उन्होंने अपना जीवन खो दिया। जिसके बाद उनके भाई राजेंद्र द्वितीय को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया। उन्होंने सोमेश्वर के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कुडल संगमम की लड़ाई में सोमेश्वर को हराया। राजेंद्र द्वितीय के बाद वीर राजेंद्र प्रथम ने सत्ता की बागडोर संभाली। उन्होंने भी चालुक्यों को हराकर तुंगभद्रा के तट पर विजय स्तंभ खड़ा किया। वीर राजेंद्र की मृत्यु 1070 ईस्वी में हुई थी। उनके बाद कुलोत्तुंग प्रथम (1070-1122 ई.) राजा बनें, जो राजराजा प्रथम के परपोते थे। वो वेंगी के चालुक्य नरेश राजराज नरेंद्र और चोल राजकुमारी अम्मांगदेवी (राजेंद्र चोल प्रथम की बेटी) के पुत्र थे। इस प्रकार कुलोत्तुंग प्रथम ने वेंगी के पूर्वी चालुक्यों और तंजावुर के दो-दो राज्यों को एकजुट किया।

आंतरिक प्रशासन में उनके द्वारा किए गए सबसे महत्वपूर्ण सुधार कराधान और राजस्व उद्देश्यों के लिए भूमि का पुनर्सर्वेक्षण था। उन्हें संगम तविर्ता (वो जिन्होंने टोल को समाप्त कर दिया था) की उपाधि भी दी गई।

वामपंथी इतिहासकारों ने सिर्फ मुगलों को महिमामंडित किया

चोल वंश दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले राजवंशों में से एक था, लेकिन वामपंथी इतिहासकारों द्वारा मुगलों को इतिहास में अनंत काल के लिए महिमामंडित कर चोल राज्य और साम्राज्यों को भुला दिया गया है। इन वामपंथी इतिहासकारों द्वारा केवल चोलों और चेरों को ही दरकिनार नहीं किया गया है, बल्कि पूर्वी भारत के अहोम, पाल और सेना राजवंश को भी भुला दिया है। आप सभी को स्मरण होगा  कि चोलों के बारे में प्राथमिक विद्यालय में संक्षिप्त अध्याय था, जबकि आप 10वीं कक्षा तक मुगलों के बारे में पढ़ते रहते हैं। मुझे यह अच्छी तरह याद है, जब आधुनिक समय के सबसे महान सम्राटों में से एक राजराजा चोल का नाम आया, तो मेरे एक सहपाठी ने मजाक में उन्हें “राजराजा छोले” (छोले हिंदी में छोले हैं) के रूप में संदर्भित किया।

यह काफी दुख की बात है कि आज के भारतीय अपने इतिहास के गौरव से इतने अनजान हैं…

Tags: चोल राजवंशचोल साम्राज्यबृहदेश्वर मंदिरराजेंद्र प्रथमरारराजा प्रथम
शेयर382ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

समय से पहले ही भारत के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने हेतु तैयार हैं पीयूष गोयल

अगली पोस्ट

यहाँ पढ़िए सम्पूर्ण करवा चौथ गणेश व्रत कथा हिंदी में

संबंधित पोस्ट

गोवा राज्य स्थापना दिवस
इतिहास

गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

30 May 2026

गोवा क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे छोटा राज्य है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा करीब 450 वर्षों तक पुर्तगाल के शासन...

1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)
इतिहास

अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

28 May 2026

जब विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने अंडमान की सेलुलर जेल में कैद किया, तब उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी...

हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?
चर्चित

हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

27 May 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद इस बार जो अभूतपूर्व माहौल बना है, उसने बोर्ड की पूरी...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Rudram 2 Success: Made in India Missile Ready To Crush Enemy Radars| DRDO’s Big Breakthrough

Rudram 2 Success: Made in India Missile Ready To Crush Enemy Radars| DRDO’s Big Breakthrough

00:03:46

From Runways to Warships: India’s Firefighting Warrior Built for Bases & Battles| IAF | VayuShakti

00:05:40

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited