TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    पीएम मोदी ने याद किया डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान

    पीएम मोदी ने याद किया डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान, बोले- राष्ट्र की एकता के लिए उनका संघर्ष प्रेरणादायक

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    पीएम मोदी ने याद किया डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान

    पीएम मोदी ने याद किया डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान, बोले- राष्ट्र की एकता के लिए उनका संघर्ष प्रेरणादायक

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

पहले भारतीयों ने “चाय” को अस्वीकार कर दिया था, फिर ‘क्रूर पूंजीवाद’ ने सबकुछ बदल दिया

भारतीयों को जबरन चाय का चस्का लगाकर ब्रिटिश सरकार ने खूब पैसे कमाए थे

TFI Desk द्वारा TFI Desk
31 August 2022
in चर्चित, समीक्षा
tea
Share on FacebookShare on X

“अजी हम तो देसी हैं, हम चाय पीते हैं”, इस वाक्यांश को आपने कई-कई बार सुना होगा, कभी न कभी स्वयं भी दोहराया होगा। हालांकि, यह बहुत कम लोगों को पता है कि चाय को लेकर दोहरायी जाने वाली यह बात निहायती झूठ और धोखा है। चाय भारतीय नहीं है, वास्तव में भारतीयों ने तो इसे एक पेय के रूप में अस्वीकार कर दिया था लेकिन फिर क्रूर पूंजीवाद आया और सबकुछ बदल गया।

चाय मूल रूप से एक औषधीय विलासिता थी। सहस्राब्दी के दूसरे भाग के दौरान इस पेय की खपत डच और पुर्तगाली कुलीन वर्ग के बीच होने लगी, इनके बीच चाय लोकप्रिय भी थी। जल्द ही, अंग्रेजों के बीच भी इस पेय की खपत होने लगी। 17वीं शताब्दी तक, ब्रिटिश कुलीन वर्ग ने भी चाय का सेवन करना शुरू कर दिया था। पार्टी की आदतों के कारण यह जल्दी ही एक नियमित पेय में बदल गया। वहीं से ब्रिटिश समाज के मध्यम और निम्न वर्गों ने भी इसे स्वीकार किया। जल्द ही यह एक सदी में एक राष्ट्रीय पेय बन गया।

संबंधितपोस्ट

चाय, लस्सी और सत्तू से पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था में ‘क्रांतिकारी सुधार’ करने जा रहा है

‘चीन में अब Pepsi और Coke नहीं चलेगी’, CCP की यही मांग है!

‘मैं हूँ चायवालों के साथ’, PM मोदी का चाय उत्पादकों को खुला समर्थन विपक्ष के गले की फांस बन गया है

और लोड करें

और पढ़ें- कालिंजर दुर्ग – धर्म और इतिहास, दोनों से है इसका बड़ा गहरा नाता

चाय उत्पादक के रूप में भारत का उदय

लेकिन, समस्या यह थी कि अंग्रेजों के पास घरेलू चाय की इकाइयां नहीं थीं। वे अपने ताज़ा पेय के लिए चीनी आयात पर बहुत अधिक निर्भर रहते थे। उस समय तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने ब्रिटिश व्यापार नीतियों के एशियाई खंड पर एकाधिकार कर लिया था। वे इसे अंग्रेजों के लिए आयात करते थे। फिर भुगतान का क्या होता था? खैर, उन्होंने इसके लिए भारत से होने वाले अफीम व्यापार से अर्जित राजस्व से भुगतान किया। उन्होंने इसे जारी रखने के लिए 2 अफीम युद्ध भी लड़े।

हालांकि, समय के साथ सब कुछ समाप्त हो जाता है और ब्रिटिश अधिकारियों को पता था कि चीन से किये जा रहे आयात के साथ भी ऐसा ही होगा। इसलिए, उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश शुरू कर दी और भारतीय क्षेत्र उनके लिए सोने की खान बन गया। एक इंडोलॉजिस्ट रिसर्च स्कॉलर और सांस्कृतिक इतिहासकार फिलिप लुटगेंडोर्फ ने बताया है कि 18वीं शताब्दी के अंत तक अंग्रेजों ने चाय की पत्तियों को उगाने के लिए भारतीय भूमि पर प्रयोग करना शुरू कर दिया था।

1840 के दशक की शुरुआत तक मेड-इन-इंडिया, विशेष रूप से असमिया चाय ने प्रसिद्धि प्राप्त करना शुरू कर दिया। जबकि चाय व्यापार का केंद्र अभी भी चीन में था, व्यापारी भारत को एक उभरते बाजार के रूप में देखने लगे। 1888 तक ब्रिटेन को किया जाने वाला भारतीय चाय का निर्यात चीनियों से अधिक हो गया था। लेकिन, किस कीमत पर?

खैर, असम के लोगों को चाय के बागानों में कोई दिलचस्पी नहीं थी इसलिए अंग्रेजों ने आंतरिक प्रवास पर भरोसा किया और गंगा के मैदानी इलाकों और नीचे दक्षिण से गिरमिटिया मजदूरों को ले आए। इन बागानों में मजदूरों को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती थी। उनमें से कई की मृत्यु अधिक काम और कुपोषण के कारण हुई। चाय के बागानों की जल गहन प्रकृति के कारण मलेरिया जैसी बीमारियों ने भी सैकड़ों भारतीयों की जान ले ली।

एक निश्चित बिंदु के बाद निर्यात बाजार में गिरावट आयी, ऐसे में अंग्रेजों को नया और दूर का समाधान खोजना था। एक समस्या यह थी कि ब्रिटिश हितों के प्रति वफादार जमींदारों और अन्य शाही भारतीयों के अलावा भारतीयों को चाय अधिक पसंद नहीं थी। भारत में चाय की खपत बढ़ाने के लिए अंग्रेजों ने कर नीति में सुधार किया।

मानो या न मानो, 1900 में, भारत में बनी चाय को ग्लासगो में ले जाना गंगा के मैदानी इलाकों में ले जाने से सस्ता था। 1903 में कर्जन ने चाय के व्यापार पर कर लगाया। ब्रुक बॉन्ड और लिप्टन जैसी कंपनियों ने तब भारत में चाय को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बड़े पैमाने पर विपणन अभियान शुरू किए।

चाय से जुड़ी बुराई को अलग करने के लिए इन कंपनियों ने चाय का नया वर्जन पेश किया। अंग्रेज सिर्फ चाय की पत्तियों को पानी में भिगोकर पीते थे। इन कंपनियों ने भारतीयों से कहा कि चीनी और दूध का भी इस्तेमाल करें, भले ही एक बार में नहीं। उन्होंने चाय बनाने के सही तरीके को लेकर विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। 3 दशकों से अधिक समय तक लाखों निःशुल्क कप वितरित किए गए, लेकिन कुछ खास लाभ नहीं हुआ।

और पढ़ें- सांस्कृतिक जड़ों के साथ पीएम मोदी का विकास वाला मंत्र अब स्वर्णिम इतिहास रचने की ओर अग्रसर है

60 साल लग गए

महामंदी के बाद इन कंपनियों ने अपने उद्देश्य के लिए सामाजिक दबाव का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उदाहरण के लिए उन्होंने गोरे लोगों को सभ्य कहा और भारतीयों को सभ्य बनने के लिए उनकी चाय पीने की आदतों की नकल करने को कहा। मुसलमानों को इस लत के लिए मजबूर करने के लिए, उन्होंने सभी महिला विपणन दस्तों को अपने पुरुष सदस्यों को यह बताने के लिए भेजा कि जब महिलाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण की बात आती है ब्रिटिश और वे एक समान हैं। एक तरफ ध्यान दें तो वास्तव में वे थे।

लेकिन, भारतीयों ने इसे नहीं अपनाया और फिर 1960 के दशक में वास्तव में कुछ करिश्माई हुआ। भारत में किसी ने चाय की पत्ती, दूध और चीनी को मिलाकर उबाला और समय की बचत की। यह लागत के साथ-साथ समय को प्रभावित करने वाला भी था। अब तक पानी और दूध को उबालने के लिए दो अलग-अलग चूल्हे और दो अलग-अलग केतली का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं था। जल्द ही, अदरक और अन्य सामग्री को चाय में डालना शुरू कर दिया गया। इसने अन्य उत्पादों के बीच मसाला चाय जैसे उत्पादों को जन्म दिया।

और पढ़ें- Time Capsule: सभ्यता और भारतवर्ष के इतिहास की रक्षा करने का एक सफल प्रयास है

वो भारतीय ही रहे हैं जिन्होंने एक समय में चाय को ठुकरा दिया था लेकिन आज वे खुशी-खुशी चाय पी रहे हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर जो ब्रुक बॉन्ड और लिप्टन का मालिक है वास्तव में भारत में चाय उद्योग का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है। हम भारतीय चाय के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक हैं लेकिन हमारे उत्पादन का केवल 30 प्रतिशत निर्यात होता है। औसतन हम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 730 ग्राम चाय की पत्तियों का सेवन करते हैं। हम वास्तव में प्रति व्यक्ति खपत के मामले में शीर्ष 30 देशों में से एक हैं।

यह सब सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि अंग्रेज चाहते थे कि हम चाय पीएं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसे पीना बंद कर दें। लेकिन इसके पीछे के इतिहास को स्वीकार करने की जरूरत है। इस मामले में कम से कम हम कॉफी को देसी उत्पाद कहना शुरू कर सकते हैं।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

Tags: कॉफीचाय
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

रूमी से शिवा तक: ब्रह्मास्त्र की “अद्वितीय यात्रा”

अगली पोस्ट

आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में अब ईसाई भी सुरक्षित नहीं हैं

संबंधित पोस्ट

मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट
चर्चित

मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

6 July 2026

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को मंत्रालय के डिजास्टर कंट्रोल रूम में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में आपदा राहत मंत्री...

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती
चर्चित

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

6 July 2026

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक...

मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए।
चर्चित

मोहन भागवत बोले- विभाजन के बाद भारत आए लोग ‘शरणार्थी’ नहीं, बल्कि संघर्ष के योद्धा थे

2 July 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि 1947 के विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों को...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

WHY GEOGRAPHY MAKES INDIA ESSENTIAL TO NEPAL'S ECONOMY | Fuel, Food and Trade | China | Indo-Nepal

WHY GEOGRAPHY MAKES INDIA ESSENTIAL TO NEPAL'S ECONOMY | Fuel, Food and Trade | China | Indo-Nepal

00:03:48

Open Borders, Open Lives: India-Nepal's Social and Economic Bond

00:04:03

THE DRONE GENERAL'S LEGACY: HOW GEN DWIVEDI TRANSFORMED THE INDIAN ARMY | UAV

00:04:51

Nepal's Natural Ally: Why India, Not China ? Indo-Nepal

00:04:05

Pakistan’s Investment Rescue Plan or Another Economic Promise? Munir | Sharif

00:03:41
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited