TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    LR-AShM मिसाइल के साथ भारत ने समुद्री रक्षा और तकनीकी ताकत दिखाई

    भारत ने हाइपरसोनिक हथियार तकनीक में बड़ी छलांग लगाई, LR-AShM का सार्वजनिक प्रदर्शन

    भारत-यूरोपीय संघ समझौता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा अवसर

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की

    शेख हसीना को भारत से बोलने देना खतरनाक मिसाल

    दिल्ली से शेख हसीना के भाषण ने बढ़ाया तनाव, बांग्लादेश ने जताई आपत्ति

    अमेरिका–ईरान तनाव के बीच यूएस ने मजबूत की सैन्य तैनाती

    ईरान के करीब अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य मौजूदगी, एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन तैनात

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय वायुसेना भव्य फ्लाईपास्ट

    गणतंत्र दिवस 2026 लाइव: गणतंत्र दिवस परेड में दिखी सैन्य शक्ति, ब्रह्मोस–आकाश मिसाइलें और अर्जुन टैंक हुई शामिल

    गणतंत्र दिवस 2026: शक्ति प्रदर्शन के लिए तैयार कर्तव्य पथ, आसमान में दिखेगी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक

    गणतंत्र दिवस 2026: शक्ति प्रदर्शन के लिए तैयार कर्तव्य पथ, आसमान में दिखेगी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक

    पुलिस ने दोहराया कि ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ भारत में प्रतिबंधित संगठन है

    गणतंत्र दिवस से पहले पन्नून की धमकियों पर सख्त हुई दिल्ली पुलिस, दर्ज हुआ केस

    भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिरा

    जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवानों की मौत, 7 घायल; बचाव अभियान जारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तानाशाही मॉडल अब केवल चीन की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है

    डिजिटल तानाशाही का मॉडल: चीन और खामोश होती दुनिया

    W’, एलोन मस्क के X को चुनौती

    यूरोप ‘W’ लॉन्च करने को तैयार, X का विकल्प; क्या यूज़र्स करेंगे स्विच?

    भारत ने पश्चिमी दबाव के बावजूद अपनाई स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति

    नियमों वाली दुनिया का भ्रम: भारत ने अपना स्वतंत्र रास्ता चुना

    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    LR-AShM मिसाइल के साथ भारत ने समुद्री रक्षा और तकनीकी ताकत दिखाई

    भारत ने हाइपरसोनिक हथियार तकनीक में बड़ी छलांग लगाई, LR-AShM का सार्वजनिक प्रदर्शन

    भारत-यूरोपीय संघ समझौता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा अवसर

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की

    शेख हसीना को भारत से बोलने देना खतरनाक मिसाल

    दिल्ली से शेख हसीना के भाषण ने बढ़ाया तनाव, बांग्लादेश ने जताई आपत्ति

    अमेरिका–ईरान तनाव के बीच यूएस ने मजबूत की सैन्य तैनाती

    ईरान के करीब अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य मौजूदगी, एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन तैनात

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय वायुसेना भव्य फ्लाईपास्ट

    गणतंत्र दिवस 2026 लाइव: गणतंत्र दिवस परेड में दिखी सैन्य शक्ति, ब्रह्मोस–आकाश मिसाइलें और अर्जुन टैंक हुई शामिल

    गणतंत्र दिवस 2026: शक्ति प्रदर्शन के लिए तैयार कर्तव्य पथ, आसमान में दिखेगी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक

    गणतंत्र दिवस 2026: शक्ति प्रदर्शन के लिए तैयार कर्तव्य पथ, आसमान में दिखेगी ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक

    पुलिस ने दोहराया कि ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ भारत में प्रतिबंधित संगठन है

    गणतंत्र दिवस से पहले पन्नून की धमकियों पर सख्त हुई दिल्ली पुलिस, दर्ज हुआ केस

    भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिरा

    जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरा, 10 जवानों की मौत, 7 घायल; बचाव अभियान जारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तानाशाही मॉडल अब केवल चीन की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है

    डिजिटल तानाशाही का मॉडल: चीन और खामोश होती दुनिया

    W’, एलोन मस्क के X को चुनौती

    यूरोप ‘W’ लॉन्च करने को तैयार, X का विकल्प; क्या यूज़र्स करेंगे स्विच?

    भारत ने पश्चिमी दबाव के बावजूद अपनाई स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति

    नियमों वाली दुनिया का भ्रम: भारत ने अपना स्वतंत्र रास्ता चुना

    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

पीर बाबा और ‘ताबीज़ संस्कृति’ की ओर हिंदू इतना आकर्षित क्यों हो रहे हैं?

इसके पीछे कई कारण हैं लेकिन मनौवैज्ञानिक कारण सबसे महत्वपूर्ण है।

Animesh Pandey द्वारा Animesh Pandey
23 September 2022
in समीक्षा
पीर बाबा
Share on FacebookShare on X

“भर दे झोली मेरी”

“शिरडी वाले साईं बाबा, आया है तेरे दर पे सवाली”

संबंधितपोस्ट

जजों पर टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने विकास दिव्यकीर्ति को भेजा समन, जानें क्या बोले थे शिक्षक?

शादी का झांसा देकर 4 साल तक लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले दरिंदे ‘आरिफ अब्बासी’ को अजमेर पुलिस ने दबोचा

बलात्कारी मौलाना, लेकिन मीडिया बता रहा ‘तांत्रिक’… महिला और उसकी नाबालिग बेटी से रेप, 65 साल का फिजू गिरफ्तार

और लोड करें

“तू मेरी हीर मेरी मैंने दिल से माना तुझे

हर वीरवार पीर बाबा से भी मांगा तुझे!”

ऐसे अनेक गीत कभी न कभी आपने कहीं न कहीं तो सुने ही होंगे। इन गीतों को यदि गुनगुनाया न हो, तो कभी न कभी आपके कानों में ये गूंजा अवश्य होगा। परंतु क्या कभी सोचा आपने कि इन सब में समान बात क्या है? क्या ये सब आपको एक ही संस्कृति, एक ही दिशा की ओर आकृष्ट नहीं करते? क्या ये गीत आपको ये शिक्षा नहीं देते कि हमारा पंथ ही श्रेष्ठ है, बाकी सब व्यर्थ?

इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे हमारे देश में पीर बाबा और ताबीज़ की संस्कृति दनादन बढ़ रही है और कैसे यह प्रवृत्ति एक चिंताजनक रूप ले रही है।

ताबीज़ का यह विवाद बहुत पुराना है

ताबीज़ का यह विवाद बहुत पुराना है जिसकी जड़ें ब्रिटिश काल और उससे पूर्व तक जाती है। एक समय तो लोग धर्मनिरपेक्षता के मद में इतना डूबे हुए थे कि वे ऐसे छंद गाने से पूर्व हिचकते भी नहीं थे,

“अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे,
एक नूर ते सब जग उपजाया कौन भले को मंदे,

लोगा भ्रमी न भूलहु भाई भरमि न भूलहु भाई,
खालिकु खल्क खल्क माहि खालिकु पूरी रहियो सब थाई”

यानी अर्थ स्पष्ट था– लॉजिक और यथार्थ गया तेल लेने, भाईचारा सर्वोपरि हो। इसमें काफी महत्वपूर्ण रोल पीर बाबा की मज़ारों और उनके ताबीज़ों ने भी निभाया। जैसे गरिष्ठ भोजन और सात्विक भोजन का स्थान फास्ट फूड ने ले लिया, वैसे उपवास, भजन इत्यादि पर ताबीज , पीर बाबा की मज़ार ने अतिक्रमण कर लिया। विश्वास नहीं होता तो अजमेर शरीफ के उदाहरण को ही ले लीजिए।

अजमेर दरगाह को भाईचारे का प्रतीक माना जाता रहा है। बॉलीवुड सितारों से लेकर तमाम बड़े-बड़े राजनेता दरगाह में चादर चढ़ाने के लिए आते हैं। परंतु जिस अजमेर दरगाह को अमन, शांति और सद्भाव की मिसाल के रूप में देखा जाता है उसकी वास्तविकता अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। दरगाह के खादिमों द्वारा हिंदुओं के विरुद्ध जमकर भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं जिससे इन खादिमों के शराफत के चोले के पीछे छिपा उनका असली कट्टरपंथी चेहरा बेनकाब हो रहा है।

और पढ़ें- Philippines में हिंदू धर्म : जहां सनातन संस्कृति की छाप अभी भी जीवित है

तनिक सोचिए, जिस अजयमेरु का प्रतीक पुष्कर का महातीर्थ होना चाहिए, उसे अजमेर शरीफ के नाम से पहचाना जाता है। इसके तीन कारण हैं– ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक। अजमेर शरीफ किसके नाम पर बनी थी? मोइनुद्दीन चिश्ती, जिसको कोई संत, कोई फकीर, तो कोई ख्वाजा गरीब नवाज़ कहते हैं, जिनके नाम पर सदियों से यह दरगाह चलती आयी है, वो वास्तव में कौन थे? कहने को एक सूफी धर्मगुरु थे मोइनुद्दीन चिश्ती, परंतु वास्तव में इनके उद्देश्य कुछ और ही थे।

मोइनुद्दीन चिश्ती और इनके जायरीन यानी अनुयाई वास्तव में अजयमेरु में ‘दीक्षा’/इबादत के नाम पर जासूसी करते थे और इनकी कृपा से ही तुर्की आक्रान्ताओं को काफी आवश्यक जानकारी भी मिली थी। इन्होंने ही सुल्तान मुहम्मद घोरी को भारत पर पुनः आक्रमण करने के लिए उत्साहित किया, जो गुजरात में पटखनी खाने के पश्चात लगभग हतोत्साहित हो चुके थे। परंतु इस राजद्रोही का हम गुणगान भी करते हैं, और इसके कब्र पर हर वर्ष चादर भी चढ़ाई जाती है।

परंतु ऐसा युगों-युगों से नहीं था। ये बीच में कुछ समय के लिए बंद भी हुआ था, परंतु पुनः प्रारंभ हुआ था। कैसे? सांस्कृतिक जड़ें यहीं से प्रारंभ होती है जिसमें बॉलीवुड की भी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। आज जो बॉलीवुड मुगलों के दिन-रात गुणगान करता है, जिस मुगल साम्राज्य की जय किए बिना इनका भोजन नहीं पचता, उसी मुगल साम्राज्य ने लगभग खंडहर पड़ चुके मोइनुददीन चिश्ती के मज़ार का पुनरुद्धार कराया। असल में अजमेर पर तुर्की सल्तनत ने कब्जा अवश्य जमाया, परंतु जब महाराणा हम्मीर के नेतृत्व में समूचे राजपूताना ने सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक को सिंगौली के नेतृत्व में पराजित किया तो रिहाई के शर्त अनुसार समूचे राजपूताना को स्वतंत्र कराना पड़ा और अजयमेरु को उसका खोया गौरव पुनः प्राप्त हुआ। मुगलों के आगमन तक किसी ने मोइनुद्दीन चिश्ती की मज़ार को पानी तक नहीं पूछा। परंतु मुगलों के आते ही उसे संरक्षित किया गया और वहां ‘चादर चढ़ाने की प्रथा’ भी प्रारंभ हुई।

और पढ़ें- सत्य साईं कोई ‘बाबा’ नहीं एक औसत जादूगर थे, ये रहे उनके कर्मकांड के काले चिट्ठे

और फिर कुरीति प्रारंभ हुई

यहीं से एक ऐसी कुरीति प्रारंभ हुई, जिसमें सभी ने अपनी रोटियां सेंकी, चाहे वो राजनेता हो या फिर अभिनेता। तुष्टीकरण की राजनीति के लिए अजमेर शरीफ पीर बाबा का जो उपयोग हुआ, और इसे बॉलीवुड ने जिस प्रकार से बढ़ावा दिया, उससे अजमेर शरीफ की ‘चादर’, पुष्कर के महातीर्थ से अधिक महत्वपूर्ण हो गयी और यही सनातन संस्कृति की पराजय भी है, जो इस भ्रम के चक्रव्यूह को भेदने में असफल रही।

इसी के परिणामस्वरूप आज आप अजमेर आते हैं, तो सर्वप्रथम कहां जाने की सोचते हैं? निस्संदेह ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह और कभी अगर पुष्कर मेला लगा तो ‘असली राजस्थान’ का स्वाद लेने हेतु पुष्कर। परंतु अजमेर केवल इन दोनों के लिए ही तो प्रसिद्ध नहीं है। अजमेर में ब्रह्मदेव का मंदिर भी है, जो ब्रह्मांड में उनका एकमात्र मंदिर है, परंतु जीर्ण शीर्ण अवस्था में है।

परंतु यही एक कारण नहीं है जिसके पीछे पीर बाबा ताबीज की संस्कृति कठघरे में खड़ी होती है। आप माने या नहीं, परंतु शिरडी के साईं बाबा और उनकी पूजा भी इसी श्रेणी में आती है और इनकी धूनी के लिए तो भक्त ऐसे लालायित रहते हैं, मानो धूनी नहीं, अमृत हो। इसकी क्या गारंटी थी कि बाबा धूनी ही देते थे, कुछ और नहीं? वैसे भी, साईं बाबा तो औघड़ साधु थे न? तो उन्हें सोने का मुकुट, सोने का सिंहासन एवं सोने के वस्त्र इत्यादि क्यों भेंट में चढ़ाए जाते हैं? इसका कोई विशेष कारण है, या ताबीज प्रेमियों के लिए यहां भी कोई नया बहाना है?

बहाने से याद आया, लोनी मामला स्मरण है? हां-हां वही मामला जिसमें स्वघोषित फ़ैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर, राना अयूब एवं ट्विटर इंडिया केवल न्यायपालिका की कृपा से बाल-बाल बचे थे, अन्यथा इन्हें वर्षों तक सूर्य का प्रकाश भी देखने को न मिलता? पर इन्होंने ऐसा किया क्या था? इसकी जड़ें भी ताबीज से ही संबंधित थी।

जब साम्प्रदायिक टकराव बढ़ाने का किया गया प्रयास 

2021 में गाजियाबाद के लोनी में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई और दाढ़ी काटने का मामला सामने आया था। यह झड़गा मुस्लिम समुदाय के ही दो पक्षों में हुआ था लेकिन कुछ विशेष स्वार्थी तबकों द्वारा जानबूझकर मामले को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास हुआ। यह अफवाह उड़ायी गयी कि वृद्ध को पीटने वाले उससे ‛जय श्रीराम’ बुलवा रहे थे। अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में सभी पहलुओं को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि मुख्य साजिशकर्ता उम्मेद पहलवान इदरीसी ने जानबूझकर कर यह अफवाह फैलायी थी। उसका इरादा साम्प्रदायिक टकराव बढ़ाने का था जिसका लाभ चुनाव में मिल सके।

उम्मेद इदरीसी ने पुलिस को बताया कि वह फेसबुक पर लाइव आकर मुस्लिम लोगों को हिंदुओं के विरुद्ध भड़काता था और स्वयं को कट्टर हिन्दू विरोधी नेता के रूप में स्थापित करना चाहता था। उम्मेद इदरीसी चाहता था कि उसकी छवि कट्टर मुस्लिम नेता की बने जिससे चुनाव में उसे लाभ हो।

उम्मेद इदरीसी ने बताया कि वह लम्बे समय से सपा में है लेकिन उसे टिकट नहीं मिल रहा, इसीलिए उसने अपनी छवि को कट्टर मुस्लिम की बनाने की कोशिश की। उसकी तैयारी चेयरमैन के पद पर चुनाव लड़ने की थी। उसे उम्मीद थी कि एक बार अगर वह अपनी कट्टर मुसलमान की छवि बना लेता है तो सपा भी उसे आसानी से टिकट दे देगी।

पुलिस ने उम्मेद इदरीसी पर और अधिक धाराएं लाद दी हैं, जिससे उसकी रिहाई नामुमकिन हो जाए। उस पर वीडियो में काट छांट करने के लिए जालसाझी का मुकदमा दायर हुआ है। साथ ही पुलिस ने 13 अन्य लोगों की पहचान की है जिन्होंने उम्मेद इदरीसी को भागने में मदद की। इन लोगों पर भी मुकदमा दायर करके इनकी गिरफ्तारी होगी। मीडिया रिपोर्ट की माने तो इसमें कई नेताओं के भी नाम शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम सांप्रदायिकता किस हद तक मौजूद है यह बात लोनी प्रकरण और इदरीसी के बयान से एक बार पुनः सामने आ गयी है। उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिक दंगों का इतिहास रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश में पिछले 4 वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ है, अन्यथा यह वही प्रदेश है जहां कहावतों के अनुसार पतंग कटने पर दंगा हो जाता था।

और पढ़ें- भगवान जगन्नाथ साईं बाबा के चरणों में? यह दृश्य दु:खद है

जब मांगनी पड़ी माफी

ये तो कुछ भी नहीं था। ALT News के कथित पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर गाजियाबाद के लोनी में ताबीज बेचने वाले अल्पसंख्यक बुजुर्ग के साथ हुई मारपीट और दाढ़ी काटने वाले कांड को न केवल सांप्रदायिक रंग दिया गया बल्कि धड़ल्ले से फेक न्यूज भी फैलायी गयी। वहीं इस मामले में यूपी पुलिस की कार्रवाई और जांच के कारण इन सभी कथित वामपंथी पत्रकारों को माफी मांगने पर मजबूर होना पड़ा है। मोहम्मद जुबैर और सबा नकवी के बाद अब राणा अय्यूब ने भी लोनी पुलिस कोतवाली जाकर माफी मांगी है और स्वीकार किया है कि उन्होंने बिना सत्यता के ट्वीट किए थे।

दरअसल, गाजियाबाद के लोनी में ताबीज बेचने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के एक बुजुर्ग के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की थी और ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस वीडियो के जरिए वामपंथी मीडिया समूहों ने ये दिखाने की कोशिश की कि बुजुर्ग को ‘जय श्री राम’ न बोलने के कारण मारा गया और उनकी दाढ़ी काटी गयी। वामपंथियों का अब वही एजेंडा पूरी तरह एक्सपोज हो गया है। फेक न्यूज फैलाने के लिए ALT News के फैक्ट चैकर मोहम्मद जुबैर ने तो पहले ही पुलिस से माफी मांग ली थी और कई दिनों से Twitter से गायब भी थे। वहीं अब राणा अय्यूब को भी इस मामले में पुलिस थाने जाकर सफाई देने (माफी) के लिए मजबूर होना पड़ा है।

और पढ़ें- सूफ़ीवाद: इस्लामिक कट्टरता का एक मासूम चेहरा!

ऐसे में फास्ट फूड कल्चर की भांति बढ़ते इस पीर बाबा और ताबीज के गठजोड़ ने कट्टरवाद को भी खूब बढ़ावा दिया है, कभी तुष्टीकरण के लिए, तो कभी वोट बैंक की राजनीति के लिए इन्हें राजनेताओं ने खूब पोषित किया। परंतु अब और नहीं, अब इनका हिसाब स्पष्ट होगा, एवं उदयपुर कांड के पश्चात तो ये अब शायद ही किसी सहानुभूति के योग्य बचे हैं।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें.

Tags: Alt Newsअजमेरउम्मेद इदरीसीराणा अय्यूब
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

Market me Aai Bacchon ke Liye nai car features & price

अगली पोस्ट

2022 के अंत तक PFI का हो जाएगा समूल विनाश

संबंधित पोस्ट

‘The journey within’: श्रीखंड कैलाश से आत्मबोध तक की यात्रा
समीक्षा

‘The journey within’: श्रीखंड कैलाश से आत्मबोध तक की यात्रा

20 December 2025

जीवन स्वयं एक यात्रा है, उतार-चढ़ाव से भरी, अनुभवों से सजी और निरंतर आगे बढ़ती हुई। किंतु यात्रा केवल स्थानों के बीच की भौतिक गति...

Luxury Sedan Showdown: Price and Maintenance Comparison of a Used Audi A4 vs. Other 2nd Hand Audi Cars
समीक्षा

Luxury Sedan Showdown: Price and Maintenance Comparison of a Used Audi A4 vs. Other 2nd Hand Audi Cars

18 December 2025

In the high-stakes world of luxury sedans, the Audi A4 has long been the "thinking person’s choice." It doesn't scream for attention like a BMW...

जनसंख्या के बदलते संतुलन पर असहज विमर्श प्रस्तुत करती पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’
समीक्षा

जनसंख्या के बदलते संतुलन पर असहज विमर्श प्रस्तुत करती पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’

15 December 2025

अंग्रेजी भाषा में कहा जाता है कि ‘डेमोग्राफी इज डेमोक्रेसी’। किसी भी देश में लोकतंत्र रहेगा या नहीं रहेगा ये इस बात पर निर्भर करता...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Pakistan’s Rafale Narrative Ends at Kartavya Path| Sindoor Formation Exposes the BS022 Claim | IAF

Pakistan’s Rafale Narrative Ends at Kartavya Path| Sindoor Formation Exposes the BS022 Claim | IAF

00:09:35

If US Says NO, F-35 Can’t Fly: The Hidden Cost of Imports | Make In India

00:06:15

Republic Day Shock: India’s Hypersonic Warning to the World| DRDO | HGV | Indian Army

00:05:24

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited