TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात, ई-बसों में मुफ्त सफर के साथ एक सहयात्री को भी मिलेगा लाभ

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    BRICS 2026 VS 2016

    2016 से 2026 तक BRICS में कितना बदलाव आया? 5 देशों के समूह से 11 देशों की ताकत

    jefferies Industrial revolution

    क्या है नया Industrial Revolution? 6 सेक्टर में बड़े बदलाव से बनेगा विकसित भारत 2047

    India GDP DEBATE Q1 FY 2027

    India GDP DEBATE: जीडीपी की तेज रफ्तार या आंकड़ों का खेल? जानिए सच

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    Third Aircraft Carrier Indian Navy China Threat

    भारत को क्यों चाहिए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर? Explainer

    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    ट्रंप का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    स्त्री भारतीय स्त्री-विमर्श को पश्चिमी प्रतिमानों के अनुकरण से आगे ले जाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के भीतर स्त्री की अवधारणा को पुनः देखने का अवसर प्रदान करती है।

    स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy

    दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

    भारत पाकिस्तान का विभाजन

    15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात, ई-बसों में मुफ्त सफर के साथ एक सहयात्री को भी मिलेगा लाभ

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    BRICS 2026 VS 2016

    2016 से 2026 तक BRICS में कितना बदलाव आया? 5 देशों के समूह से 11 देशों की ताकत

    jefferies Industrial revolution

    क्या है नया Industrial Revolution? 6 सेक्टर में बड़े बदलाव से बनेगा विकसित भारत 2047

    India GDP DEBATE Q1 FY 2027

    India GDP DEBATE: जीडीपी की तेज रफ्तार या आंकड़ों का खेल? जानिए सच

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    Third Aircraft Carrier Indian Navy China Threat

    भारत को क्यों चाहिए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर? Explainer

    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    ट्रंप का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    स्त्री भारतीय स्त्री-विमर्श को पश्चिमी प्रतिमानों के अनुकरण से आगे ले जाकर भारतीय ज्ञान परंपरा के भीतर स्त्री की अवधारणा को पुनः देखने का अवसर प्रदान करती है।

    स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy

    दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

    भारत पाकिस्तान का विभाजन

    15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

पीएम मोदी और मोहन भागवत की मुलाकात के क्या हैं मायने?

अतीत में युद्ध और आपात स्थितियों में कैसी रही है संघ की भूमिका, पढ़ें

Shiv Chaudhary द्वारा Shiv Chaudhary
30 April 2025
in समीक्षा
पीएम मोदी और मोहन भागवत की मुलाकात के क्या हैं मायने?
Share on FacebookShare on X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (29 अप्रैल) को देर शाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के साथ लंबी बैठक की है। पीएम मोदी के आवास पर हुई यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के पीएम मोदी के आवास पर अचानक पहुंचने के बाद चर्चाओं का बाज़ार गरम है और इस बैठक के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। जब देश में पहलगाम आतंकी हमले के बाद आक्रोश है और पीएम मोदी कई हाई लेवल मीटिंग कर रहे हैं ऐसे में पीएम और भागवत की इस मुलाकात के मायने भी बढ़ जाते हैं। भागवत के साथ मीटिंग से ठीक पहले भी पीएम मोदी ने NSA, CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बातचीत की थी।

मोदी-भागवत मुलाकात क्यों है अहम?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए नृशंस आतंकी हमले में कम-से-कम 26 लोगों की मौत हो गई, इस हमले से कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने ‘टू नेशन थ्योरी’ की बात दोहराई थी। मुनीर ने कहा, “हम हर आयाम में हिंदुओं से अलग हैं। हमारा मज़हब, रिवाज, परंपरा, सोच और मकसद सब अलग हैं। इसी सोच की बुनियाद पर ‘दो राष्ट्र’ के सिद्धांत का जन्म हुआ था। हम (हिंदू-मुस्लिम) एक राष्ट्र नहीं है बल्कि हम दो राष्ट्र हैं।” मुनीर के इस सिद्धांत के कुछ ही दिनों बाद पहलगाम में धर्म पूछ-पूछकर आतंकियों ने हिंदुओं की हत्या कर दी। इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान और वहां की सेना का हाथ था।

असीम मुनीर के इस बयान के पीछे की मंशा भारत के भीतर अस्थिरता पैदा करने की थी और आतंकियों ने जिस तरह धर्म पूछकर लोगों को मारा उसने भी उसी काम को आगे बढ़ाया। भारत-पाकिस्तान के साथ अगर शस्त्र संघर्ष की स्थिति में जाता है तो देश के भीतर स्थिरता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती हो सकती है। पिछले दिनों जिस तरह पाकिस्तान परस्त लोग सामने आए हैं उन्होंने इस चिंता को बढ़ा दिया है। कहीं पर पाकिस्तान के झंडों की हिफाज़त करने की कोशिश की गई तो कहीं पर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे तक लगाए हैं। संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग संगठन काम कर रहे हैं ऐसे में देश के भीतर माहौल को स्थिर रखने में संघ के स्वयंसेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इसके अलावा किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में सरकार को देश के भीतर भी सभी लोगों को साथ लेकर चलना होगा और सरकार की बातें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इसमें भी संघ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संघ की शाखाओं के ज़रिए देश के बड़े हिस्से में उपस्थिति है और ऐसे में ज़्यादा लोगों तक जल्दी और सही संदेश पहुंचाने में संघ की मदद ली जा सकती है। जिस तरह वक्फ को लेकर देश भर में प्रदर्शन हुए हैं उससे भी देश में एक बड़ा धड़ा।

संगठन-सरकार के बीच टकराव पर संदेश

इस बैठक का एक संदेश संघ और सरकार के बीच टकराव को लेकर हो रही चर्चाओं पर विराम लगाना भी हो सकता है। अक्सर यह चर्चाएं चलती हैं कि संघ और बीजेपी के बीच मतभेदों के चलते ही बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पा रहा था। हालांकि, अब जब संघ प्रमुख भागवत खुद पीएम मोदी से मिलने गए हैं तो इसमें संदेश स्पष्ट है कि संघ किसी भी स्थिति में पूरी तरह से सरकार के साथ खड़ा है। खासतौर पर जब देश के एक बड़े संघर्ष की और जाने की आशंका है ऐसे में संघ का स्पष्ट संदेश है कि देश पर विपत्ति के समय राष्ट्रहित सबसे ऊपर है।

पहले युद्ध में कैसी रही है संघ की भूमिका?

इससे पहले के युद्धों में भी संघ की स्पष्ट भूमिका रही है। अक्टूबर 1947 से ही RSS ने कश्मीर सीमा पर पाकिस्तान की सेना की गतिविधियों पर नज़र रखने शुरू कर दी थी और पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए कई स्वयंसेवकों ने अपने प्राण न्यौछावर तक कर दिए थे। साथ ही, कश्मीर के भारत में विलय को लेकर भी संघ के तत्कालीन प्रमुख एम एस गोलवलकर उपाख्य गुरुजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गुरुजी खुद श्रीनगर जाकर महाराजा से मिले थे और उन्हें भारत में विलय के लिए तैयार किया था। संघ ने बंटवारे के दौरान हज़ारों राहत शिविर भी लगाए थे और आज भी आपदा के समय संघ के स्वयंसेवक लोगों की मदद करने में सबसे आगे नज़र आते हैं। चाहे वह कोविड-19 जैसी महामारी हो या कोई भी प्राकृतिक आपदा।

1962 के भारत-चीन युद्ध में संघ के स्वयंसेवकों ने सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद, रसद और आपूर्ति में मदद की थी। स्वयंसेवक पूरे उत्साह के साथ सीमा पर पहुंचे और जवानों की मदद में जी-जान से जुटे रहे। संघ के स्वयंसेवकों ने सीमा पर सेना के लिए राशन पहुंचाने के साथ-साथ जिस रास्ते से सेना की गाड़ी जाती थी, उसकी सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1963 में  संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने का निमंत्रण दिया था जिसमें सैकड़ों स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित हुए थे।

1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध से पहले हुई सभी दलों की बैठक में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने गोलवलकर को भी बुलाया था। इस युद्ध के दौरान संघ के स्वयंसेवकों को दिल्ली में ट्रैफिक के नियंत्रण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। माना जाता है कि शास्त्री के अनुरोध पर स्वयंसेवकों ने युद्ध के मोर्चे पर तैनात सैनिकों को भोजन और अन्य आवश्यक आपूर्ति भी प्रदान की थी। इस युद्ध के दौरान घायल जवानों के लिए सबसे पहले रक्तदान करने वाले में संघ के स्वयंसेवक शामिल थे और उन्होंने कश्मीर की हवाई पट्टियों से बर्फ हटाने का काम भी किया था।

इसके अलावा दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत विलय में संघ की निर्णायक भूमिका रही थी। बीबीसी की खबर के मुताबिक, संघ के स्वयंसेवकों ने 2 अगस्त 1954 की सुबह पुर्तगाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया, पूरा दादरा नगर हवेली पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करा कर भारत सरकार को सौंप दिया। 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में भी संघ ने बढ़कर भाग लिया था और जब नेहरू ने इसके लिए लड़ाई से इनकार कर दिया तो संघ के स्वयंसेवक खुद ही इसके लिए आंदोलन करने लगे थे और संघ के कार्यकर्ताओं के आंदोलनों के बाद सेना को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा और 1961 में गोवा आज़ाद हुआ। 1999 का कारगिल युद्ध हो या फिर 1984 के सिख दंगे संघ हमेशा भारत और भारत के लोगों के साथ खड़ा नज़र आता है।

2018 में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो देश के लिए RSS के पास तीन दिन के भीतर ‘सेना’ तैयार करने की क्षमता है। भावगत ने तब कहा था, “यह हमारी क्षमता है पर हम सैन्य संगठन नहीं, पारिवारिक संगठन हैं लेकिन संघ में सेना जैसा अनुशासन है। अगर कभी देश को जरूरत हो और संविधान इजाजत दे तो स्वयं सेवक मोर्चा संभाल लेंगे।” संघ प्रमुख के इस बयान को करीब 7 वर्ष बीत गए हैं और देश के सामने आज जब मुश्किल घड़ी आती दिख रही है तो संघ किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार नज़र आ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत की यह मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक समन्वय और सामाजिक एकजुटता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार और संघ के बीच मजबूत समन्वय और साझा उद्देश्यों को दर्शाती है। यह मुलाकात न केवल तात्कालिक संकट के जवाब में एक रणनीतिक कदम है बल्कि दीर्घकालिक रूप से भारत के सामाजिक ताने-बाने को सकारात्मक रुप से प्रभावित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

संबंधितपोस्ट

स्त्री: भारतीय स्त्री-विमर्श और नारीत्व की पुनर्परिभाषा

हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित, मेयर जोहरान ममदानी ने जताया विरोध

और लोड करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (29 अप्रैल) को देर शाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के साथ लंबी बैठक की है। पीएम मोदी के आवास पर हुई यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के पीएम मोदी के आवास पर अचानक पहुंचने के बाद चर्चाओं का बाज़ार गरम है और इस बैठक के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। जब देश में पहलगाम आतंकी हमले के बाद आक्रोश है और पीएम मोदी कई हाई लेवल मीटिंग कर रहे हैं ऐसे में पीएम और भागवत की इस मुलाकात के मायने भी बढ़ जाते हैं। भागवत के साथ मीटिंग से ठीक पहले भी पीएम मोदी ने NSA, CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बातचीत की थी।

मोदी-भागवत मुलाकात क्यों है अहम?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए नृशंस आतंकी हमले में कम-से-कम 26 लोगों की मौत हो गई, इस हमले से कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने ‘टू नेशन थ्योरी’ की बात दोहराई थी। मुनीर ने कहा, “हम हर आयाम में हिंदुओं से अलग हैं। हमारा मज़हब, रिवाज, परंपरा, सोच और मकसद सब अलग हैं। इसी सोच की बुनियाद पर ‘दो राष्ट्र’ के सिद्धांत का जन्म हुआ था। हम (हिंदू-मुस्लिम) एक राष्ट्र नहीं है बल्कि हम दो राष्ट्र हैं।” मुनीर के इस सिद्धांत के कुछ ही दिनों बाद पहलगाम में धर्म पूछ-पूछकर आतंकियों ने हिंदुओं की हत्या कर दी। इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान और वहां की सेना का हाथ था।

असीम मुनीर के इस बयान के पीछे की मंशा भारत के भीतर अस्थिरता पैदा करने की थी और आतंकियों ने जिस तरह धर्म पूछकर लोगों को मारा उसने भी उसी काम को आगे बढ़ाया। भारत-पाकिस्तान के साथ अगर शस्त्र संघर्ष की स्थिति में जाता है तो देश के भीतर स्थिरता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती हो सकती है। पिछले दिनों जिस तरह पाकिस्तान परस्त लोग सामने आए हैं उन्होंने इस चिंता को बढ़ा दिया है। कहीं पर पाकिस्तान के झंडों की हिफाज़त करने की कोशिश की गई तो कहीं पर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे तक लगाए हैं। संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग संगठन काम कर रहे हैं ऐसे में देश के भीतर माहौल को स्थिर रखने में संघ के स्वयंसेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इसके अलावा किसी बड़े संघर्ष की स्थिति में सरकार को देश के भीतर भी सभी लोगों को साथ लेकर चलना होगा और सरकार की बातें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इसमें भी संघ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संघ की शाखाओं के ज़रिए देश के बड़े हिस्से में उपस्थिति है और ऐसे में ज़्यादा लोगों तक जल्दी और सही संदेश पहुंचाने में संघ की मदद ली जा सकती है। जिस तरह वक्फ को लेकर देश भर में प्रदर्शन हुए हैं उससे भी देश में एक बड़ा धड़ा।

संगठन-सरकार के बीच टकराव पर संदेश

इस बैठक का एक संदेश संघ और सरकार के बीच टकराव को लेकर हो रही चर्चाओं पर विराम लगाना भी हो सकता है। अक्सर यह चर्चाएं चलती हैं कि संघ और बीजेपी के बीच मतभेदों के चलते ही बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पा रहा था। हालांकि, अब जब संघ प्रमुख भागवत खुद पीएम मोदी से मिलने गए हैं तो इसमें संदेश स्पष्ट है कि संघ किसी भी स्थिति में पूरी तरह से सरकार के साथ खड़ा है। खासतौर पर जब देश के एक बड़े संघर्ष की और जाने की आशंका है ऐसे में संघ का स्पष्ट संदेश है कि देश पर विपत्ति के समय राष्ट्रहित सबसे ऊपर है।

पहले युद्ध में कैसी रही है संघ की भूमिका?

इससे पहले के युद्धों में भी संघ की स्पष्ट भूमिका रही है। अक्टूबर 1947 से ही RSS ने कश्मीर सीमा पर पाकिस्तान की सेना की गतिविधियों पर नज़र रखने शुरू कर दी थी और पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए कई स्वयंसेवकों ने अपने प्राण न्यौछावर तक कर दिए थे। साथ ही, कश्मीर के भारत में विलय को लेकर भी संघ के तत्कालीन प्रमुख एम एस गोलवलकर उपाख्य गुरुजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गुरुजी खुद श्रीनगर जाकर महाराजा से मिले थे और उन्हें भारत में विलय के लिए तैयार किया था। संघ ने बंटवारे के दौरान हज़ारों राहत शिविर भी लगाए थे और आज भी आपदा के समय संघ के स्वयंसेवक लोगों की मदद करने में सबसे आगे नज़र आते हैं। चाहे वह कोविड-19 जैसी महामारी हो या कोई भी प्राकृतिक आपदा।

1962 के भारत-चीन युद्ध में संघ के स्वयंसेवकों ने सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद, रसद और आपूर्ति में मदद की थी। स्वयंसेवक पूरे उत्साह के साथ सीमा पर पहुंचे और जवानों की मदद में जी-जान से जुटे रहे। संघ के स्वयंसेवकों ने सीमा पर सेना के लिए राशन पहुंचाने के साथ-साथ जिस रास्ते से सेना की गाड़ी जाती थी, उसकी सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1963 में  संघ को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने का निमंत्रण दिया था जिसमें सैकड़ों स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित हुए थे।

1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध से पहले हुई सभी दलों की बैठक में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने गोलवलकर को भी बुलाया था। इस युद्ध के दौरान संघ के स्वयंसेवकों को दिल्ली में ट्रैफिक के नियंत्रण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। माना जाता है कि शास्त्री के अनुरोध पर स्वयंसेवकों ने युद्ध के मोर्चे पर तैनात सैनिकों को भोजन और अन्य आवश्यक आपूर्ति भी प्रदान की थी। इस युद्ध के दौरान घायल जवानों के लिए सबसे पहले रक्तदान करने वाले में संघ के स्वयंसेवक शामिल थे और उन्होंने कश्मीर की हवाई पट्टियों से बर्फ हटाने का काम भी किया था।

इसके अलावा दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत विलय में संघ की निर्णायक भूमिका रही थी। बीबीसी की खबर के मुताबिक, संघ के स्वयंसेवकों ने 2 अगस्त 1954 की सुबह पुर्तगाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया, पूरा दादरा नगर हवेली पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करा कर भारत सरकार को सौंप दिया। 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में भी संघ ने बढ़कर भाग लिया था और जब नेहरू ने इसके लिए लड़ाई से इनकार कर दिया तो संघ के स्वयंसेवक खुद ही इसके लिए आंदोलन करने लगे थे और संघ के कार्यकर्ताओं के आंदोलनों के बाद सेना को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा और 1961 में गोवा आज़ाद हुआ। 1999 का कारगिल युद्ध हो या फिर 1984 के सिख दंगे संघ हमेशा भारत और भारत के लोगों के साथ खड़ा नज़र आता है।

2018 में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो देश के लिए RSS के पास तीन दिन के भीतर ‘सेना’ तैयार करने की क्षमता है। भावगत ने तब कहा था, “यह हमारी क्षमता है पर हम सैन्य संगठन नहीं, पारिवारिक संगठन हैं लेकिन संघ में सेना जैसा अनुशासन है। अगर कभी देश को जरूरत हो और संविधान इजाजत दे तो स्वयं सेवक मोर्चा संभाल लेंगे।” संघ प्रमुख के इस बयान को करीब 7 वर्ष बीत गए हैं और देश के सामने आज जब मुश्किल घड़ी आती दिख रही है तो संघ किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार नज़र आ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत की यह मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक समन्वय और सामाजिक एकजुटता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार और संघ के बीच मजबूत समन्वय और साझा उद्देश्यों को दर्शाती है। यह मुलाकात न केवल तात्कालिक संकट के जवाब में एक रणनीतिक कदम है बल्कि दीर्घकालिक रूप से भारत के सामाजिक ताने-बाने को सकारात्मक रुप से प्रभावित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

स्रोत: जम्मू-कश्मीर, पहलगाम, नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत, बीजेपी, आरएसएस, पाकिस्तान, जवाहरलाल नेहरू, Jammu and Kashmir, Pahalgam, Narendra Modi, Mohan Bhagwat, BJP, RSS, Pakistan, Jawaharlal Nehru
Tags: BJPJammu and KashmirJawaharlal NehruMohan BhagwatNarendra ModiPahalgamPakistanrssआरएसएसजम्मू-कश्मीरजवाहरलाल नेहरूनरेंद्र मोदीपहलगामपाकिस्तानबीजेपीमोहन भागवत
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

जातीय जनगणना पर मुहर के साथ मोदी कैबिनेट की बड़ी सौगातें – कैबिनेट बैठक में लिए गए ये अहम फैसले

अगली पोस्ट

रक्षा के क्षेत्र में इबारत लिख रहा आत्मनिर्भर भारत, आकड़ों और हालातों से जानें ये क्यों जरूरी?

संबंधित पोस्ट

CJP पर बड़ा खुलासा: क्या केजरीवाल की पार्टी चला रही है कॉकरोच जनता पार्टी? पूर्व IAS ने खोला मोर्चा!
चर्चित

CJP पर बड़ा खुलासा: क्या केजरीवाल की पार्टी चला रही है कॉकरोच जनता पार्टी? पूर्व IAS ने खोला मोर्चा!

22 May 2026

पिछले कुछ दिनों से भारतीय सोशल मीडिया स्पेस, खासकर इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नामक एक डिजिटल अभियान ने तहलका मचा रखा है। मीम्स,...

गवर्नर ने मांगा समर्थन का सबूत: क्या तमिलनाडु में विजय के साथ हो रहा है अन्याय?
चर्चित

गवर्नर ने मांगा समर्थन का सबूत: क्या तमिलनाडु में विजय के साथ हो रहा है अन्याय?

7 May 2026

तमिलनाडु की राजनीति आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ लोकतंत्र की परिभाषा और राज्यपाल के अधिकारों के बीच सीधी जंग छिड़ गई है।...

Modi in BJP Head Office
चर्चित

आखिर कैसे आए ये चुनाव परिणाम ?

6 May 2026

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर कोई एक सुसंबद्ध टिप्पणी संपूर्ण स्थितियों का विश्लेषण नहीं कर सकता। सारे राज्यों के राजनीतिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

₹2 Crore Film, ₹143 Crore Hit: The ‘Hanuman Ansh’ Box Office Shock

₹2 Crore Film, ₹143 Crore Hit: The ‘Hanuman Ansh’ Box Office Shock

00:02:46

Who Is Major Rishabh Sambhyal? The Army Officer Who Became a Social Media Sensation

00:03:34

The Missing 54: What Happened to India’s Soldiers After the 1965 & 1971 Wars | POW | Indo-Pak

00:04:43

J-20 vs India: How Super Sukhoi, Rafale & AMCA Could Counter China’s Stealth Fleet | IAF | HAL

00:03:32

QRSAM to Akash NG: India’s Massive Push to Build 2,000 Indigenous Air Defence Missiles | DRDO| IAF

00:04:05
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited