कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में अपने हमले तेज कर दिए हैं। पार्टी ने निगरानी के आरोप, पुराने विदेशी फंड से जुड़े आरोप और 1999 के कंधार विमान अपहरण मामले को लेकर नए सवाल उठाए हैं। इसके जवाब में बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
कंधार मामले से मैथ्यू वैनडाइक केस की तुलना
कांग्रेस की कर्नाटक इकाई ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। इसमें 1999 के कंधार विमान अपहरण मामले और अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के हालिया मामले की तुलना की गई है।
कंधार मामले में अजीत डोभाल ने उन आतंकियों को अफगानिस्तान में छोड़ने की प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर भी शामिल था। कांग्रेस ने वैनडाइक मामले को इसी घटना से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि भारत ने एक बार फिर बाहरी दबाव के आगे झुककर कार्रवाई की।
वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को इस साल मार्च में एनआईए ने म्यांमार से जुड़े कथित आतंकी प्रशिक्षण मामले में गिरफ्तार किया था। शुरुआत में उनके खिलाफ यूएपीए के तहत जांच की गई थी। बाद में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वैनडाइक की हिरासत का मुद्दा भारत के सामने उठाया। इसके बाद पहली चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गईं। वैनडाइक को जमानत मिली और करीब छह महीने हिरासत में रहने के बाद वह अमेरिका लौट गया।
कांग्रेस ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आरोपी को ऐसे अमेरिका भेजा गया, जैसे वह कोई सरकारी मेहमान हो। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री पर अमेरिकी दबाव में आने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने भी वैनडाइक की रिहाई की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
क्या कंधार और वैनडाइक मामले में समानता है?
कांग्रेस के इस दावे से सभी सहमत नहीं हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि दोनों मामलों की तुलना पूरी तरह सही नहीं है। उनका तर्क है कि वैनडाइक के खिलाफ यूएपीए के आरोप औपचारिक रूप से खत्म नहीं किए गए, बल्कि पहली चार्जशीट में इन धाराओं को शामिल नहीं किया गया।
उनके मुताबिक, मामला अभी खुला है और वैनडाइक ने कुछ कानूनी शर्तों के तहत जमानत ली है। जरूरत पड़ने पर भारतीय एजेंसियां आगे भी इस मामले में कार्रवाई कर सकती हैं।
राहुल गांधी ने लगाए फोन निगरानी के आरोप
19 सितंबर को इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अजीत डोभाल पर लोगों के फोन की निगरानी करने और व्हाट्सऐप तथा फेसबुक की बातचीत तक पहुंच रखने का आरोप लगाया। उन्होंने डोभाल को उस छह सदस्यीय ‘सिस्टम’ का हिस्सा बताया, जिसके बारे में उनका कहना था कि वह देश को नियंत्रित करता है।
राहुल गांधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उद्योगपति गौतम अडानी व मुकेश अंबानी के नाम भी लिए। हालांकि, उन्होंने फोन निगरानी के अपने आरोप के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया।
पुराने विदेशी फंड के आरोप भी उठाए
कांग्रेस ने डोभाल से जुड़े पुराने आरोपों को भी फिर से उठाया है। 2017 में कांग्रेस ने दावा किया था कि डोभाल के बेटे विवेक ने नोटबंदी के कुछ दिनों बाद केमैन आइलैंड्स में एक हेज फंड शुरू किया था। पार्टी ने वहां से विदेशी निवेश में बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल उठाए और इसे पैसों की ‘राउंड-ट्रिपिंग’ से जोड़ा था।
कांग्रेस ने इंडिया फाउंडेशन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। डोभाल के दूसरे बेटे शौर्य डोभाल इस थिंक टैंक के बोर्ड में हैं और कुछ केंद्रीय मंत्री भी इससे जुड़े रहे हैं। कांग्रेस ने इसे संभावित हितों के टकराव का मामला बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि, इस मांग पर किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
कंधार मामले पर डोभाल के पुराने बयान का भी जिक्र
कांग्रेस ने 2010 के एक इंटरव्यू का भी हवाला दिया है। उस समय डोभाल सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी थे। इंटरव्यू में उन्होंने कंधार विमान अपहरण मामले से निपटने के तत्कालीन बीजेपी सरकार के तरीके की आलोचना की थी। कांग्रेस का कहना है कि बाद में डोभाल बीजेपी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने।
फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर भी चर्चा
अजीत डोभाल का नाम 2025 में आई फिल्म ‘धुरंधर’ से भी जोड़ा गया है। कुछ लोगों ने दावा किया कि फिल्म उनके करियर से प्रेरित है, जबकि कुछ अन्य लोगों ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि फिल्म की कहानी शहीद मेजर मोहित शर्मा से प्रेरित हो सकती है।
फिल्म में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर राहुल गांधी नाम के एक व्यक्ति का क्रेडिट भी ऑनलाइन चर्चा का कारण बना। हालांकि, इसका कांग्रेस और डोभाल के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद से कोई सीधा संबंध नहीं है।
‘सरेंडर’ वाले बयान पर भी विवाद
राहुल गांधी के एक बयान को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच विवाद हुआ। भोपाल में राहुल गांधी ने कहा था कि भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने ‘सरेंडर’ कर दिया।
उन्होंने सरकार से ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों पर जवाब देने को कहा था, जिनमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने में अपनी भूमिका का दावा किया था।
बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान को सेना का अपमान बताया। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘खतरनाक मानसिकता’ बताया, जबकि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे सेना का गंभीर अपमान कहा। कांग्रेस ने अपने बयान का बचाव किया है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया ‘दुष्प्रचार’ का आरोप
27 सितंबर को केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कांग्रेस पर ‘दुष्प्रचार’ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेना प्रमुख, वायुसेना, सर्जिकल स्ट्राइक, अजीत डोभाल, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्य न्यायाधीश, ईडी, सीबीआई, आईबी और मीडिया संस्थानों तक को निशाना बना रही है।
बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उन्हें राजनीतिक विवाद में ला रही है।
फिलहाल कांग्रेस के आरोपों और बीजेपी के जवाब के बीच विवाद जारी है। कांग्रेस जहां कंधार से लेकर वैनडाइक मामले और निगरानी के आरोपों को जोड़कर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों को निशाना बनाने की कोशिश बता रही है। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए कई आरोपों पर अभी भी अलग-अलग दावे और व्याख्याएं सामने आ रही हैं।






























