TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    दिवाली पर ₹5 लाख करोड़ का कारोबार! दिल्ली में ₹80 हजार करोड़ की उम्मीद, किन बाजारों में सबसे ज्यादा रौनक

    दिवाली पर ₹5 लाख करोड़ का कारोबार! दिल्ली में ₹80 हजार करोड़ की उम्मीद, किन बाजारों में सबसे ज्यादा रौनक

    E20 पेट्रोल को E30 कौन बना रहा है? कर्नाटक में 31.2% तक मिला एथेनॉल, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

    E20 पेट्रोल को E30 कौन बना रहा है? कर्नाटक में 31.2% तक मिला एथेनॉल, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

    धनतेरस पर ₹1.25 लाख करोड़ की खरीदारी, महंगे सोने-चांदी के आगे भी नहीं टूटा लोगों का उत्साह

    धनतेरस पर ₹1.25 लाख करोड़ की खरीदारी, महंगे सोने-चांदी के आगे भी नहीं टूटा लोगों का उत्साह

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    13,629 फीट पर IL-76MD की लैंडिंग, IAF ने कैसे बनाया विश्व रिकॉर्ड? क्या है न्योमा एयरबेस की ताकत

    13,629 फीट पर IL-76MD की लैंडिंग, IAF ने कैसे बनाया विश्व रिकॉर्ड? क्या है न्योमा एयरबेस की ताकत

    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    दिवाली पर ₹5 लाख करोड़ का कारोबार! दिल्ली में ₹80 हजार करोड़ की उम्मीद, किन बाजारों में सबसे ज्यादा रौनक

    दिवाली पर ₹5 लाख करोड़ का कारोबार! दिल्ली में ₹80 हजार करोड़ की उम्मीद, किन बाजारों में सबसे ज्यादा रौनक

    E20 पेट्रोल को E30 कौन बना रहा है? कर्नाटक में 31.2% तक मिला एथेनॉल, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

    E20 पेट्रोल को E30 कौन बना रहा है? कर्नाटक में 31.2% तक मिला एथेनॉल, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

    धनतेरस पर ₹1.25 लाख करोड़ की खरीदारी, महंगे सोने-चांदी के आगे भी नहीं टूटा लोगों का उत्साह

    धनतेरस पर ₹1.25 लाख करोड़ की खरीदारी, महंगे सोने-चांदी के आगे भी नहीं टूटा लोगों का उत्साह

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    13,629 फीट पर IL-76MD की लैंडिंग, IAF ने कैसे बनाया विश्व रिकॉर्ड? क्या है न्योमा एयरबेस की ताकत

    13,629 फीट पर IL-76MD की लैंडिंग, IAF ने कैसे बनाया विश्व रिकॉर्ड? क्या है न्योमा एयरबेस की ताकत

    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

पराली जलाने के आंकड़ों पर सवाल, क्या सैटेलाइट से बच रही आग? नया Fire Watch खोलेगा पोल

पराली जलाने की घटनाएं 80 हजार से 6 हजार कैसे हुईं? सैटेलाइट की निगरानी पर उठे सवाल

Abhishek Sharma द्वारा Abhishek Sharma
7 November 2026
in पर्यावरण
पराली जलाने के आंकड़ों पर सवाल, क्या सैटेलाइट से बच रही आग? नया Fire Watch खोलेगा पोल
Share on FacebookShare on X

हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं कम हो रही हैं या फिर सैटेलाइट की नजर से आग बच निकल रही है? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सरकारी आंकड़ों में खेतों में आग लगाने की घटनाएं तेजी से घटी हैं। 2021 में जहां करीब 80 हजार पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या करीब 6 हजार बताई गई। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि खेतों में पराली जलाना भी उतना ही कम हो गया है?

इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए पर्यावरण और टिकाऊ विकास पर काम करने वाली संस्था iFOREST ने Fire Watch नाम का नया मल्टी-सैटेलाइट डैशबोर्ड लॉन्च किया है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ खेतों में आग की गिनती नहीं करेगा, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश करेगा कि आग कब लगाई गई, कहां लगाई गई और कितने खेत इससे प्रभावित हुए।

संबंधितपोस्ट

GPS पर निर्भरता घटाएगा NavIC? NVS-03 लॉन्च से भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम को मिली नई ताकत

रात में भी ‘सूरज की रोशनी’ बेचेगा अमेरिका! भारत की Skyroot Aerospace कैसे करेगी मदद, जानिए पूरा प्लान

गगनयान मिशन: ISRO ने Crew और Service Module को अलग करने का टेस्ट किया सफल, अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्यों है अहम?

और लोड करें

यानी अब पराली जलाने की निगरानी का तरीका सिर्फ आग की लपटें गिनने तक सीमित नहीं रहेगा। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए यह भी समझने की कोशिश होगी कि जमीन पर वास्तव में कितना नुकसान हुआ है।

सवाल यह भी है कि क्या अब तक सैटेलाइट की निगरानी में कुछ आग छूट जाती थीं? क्या किसान सैटेलाइट के गुजरने के समय को ध्यान में रखकर पराली जला सकते हैं? और भारत के पास क्या ऐसा अपना सैटेलाइट है, जो हर समय खेतों पर नजर रख सके? समझते हैं…

Fire Watch क्या है, पराली जलाने की निगरानी कैसे करेगा?

Fire Watch को iFOREST यानी International Forum for Environment, Sustainability and Technology ने विकसित किया है। यह एक ऑनलाइन मल्टी-सैटेलाइट डैशबोर्ड है। इसे 5 नवंबर 2026 को लॉन्च किया गया।

इसकी शुरुआत चार राज्यों से हुई है:

  • पंजाब

  • हरियाणा

  • उत्तर प्रदेश

  • मध्य प्रदेश

आने वाले समय में दूसरे राज्यों को भी इसमें शामिल करने की योजना है।

इस डैशबोर्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पराली जलाने की समस्या को तीन अलग-अलग पैमानों पर देखता है।

निगरानी का पैमानाक्या पता चलेगा?
Active Fire Countकितनी जगहों पर आग का पता चला और कहां-कहां आग लगी
Daily Fire Timingदिन के किस समय पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा हुईं
Burnt Areaकितने वर्ग किलोमीटर खेतों में जलने के निशान मिले

इन तीनों आंकड़ों को एक साथ देखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि किस जिले में पराली जलाने की गतिविधि कितनी है और समस्या का वास्तविक भौगोलिक विस्तार कितना हो सकता है।

Active Fire Count का मतलब जमीन पर लगी आग की वास्तविक कुल संख्या नहीं है। यह सैटेलाइट द्वारा दर्ज किए गए फायर डिटेक्शन की संख्या है। एक ही आग अलग-अलग सैटेलाइट से एक से अधिक बार दर्ज हो सकती है। दूसरी तरफ छोटी या कम समय तक जलने वाली आग छूट भी सकती है।

अब तक पराली जलाने की निगरानी में क्या कमी थी?

अब तक पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी में मुख्य रूप से पोलर ऑर्बिटिंग सैटेलाइट का इस्तेमाल होता रहा है।

ये ऐसे सैटेलाइट हैं जो पृथ्वी के ध्रुवों के आसपास से गुजरते हुए अलग-अलग समय पर धरती के हिस्सों की तस्वीरें लेते हैं। ये एक ही जगह पर लगातार नजर नहीं रख सकते।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए पंजाब के किसी खेत में किसान ने दोपहर 3 बजे पराली जलाई। लेकिन उस इलाके के ऊपर संबंधित सैटेलाइट सुबह 10:30 बजे या दोपहर 1:30 बजे से गुजर चुका है।

ऐसे में अगर आग सैटेलाइट के गुजरने के बाद लगी और अगले निरीक्षण से पहले बुझ गई, तो उसके Active Fire के रूप में दर्ज होने की संभावना कम हो सकती है। यानी सैटेलाइट ने उस खेत की तस्वीर तो ली, लेकिन आग लगने के समय वहां मौजूद नहीं था। यही है सैटेलाइट मॉनिटरिंग का टाइम गैप।

iFOREST की 2025 की स्टडी के मुताबिक, पारंपरिक निगरानी में इस्तेमाल होने वाले MODIS और VIIRS सैटेलाइट दिन के सीमित समय में ही खेतों पर नजर रखते हैं। इसके उलट, कई बड़े खेतों में आग दोपहर 3 बजे के बाद लगाई जा रही थी। इस कारण दर्ज होने वाली घटनाओं और वास्तविक गतिविधि के बीच अंतर पैदा हो सकता है।

Fire Watch किन सैटेलाइट की मदद लेगा?

Fire Watch की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग सैटेलाइट के डेटा को मिलाकर इस्तेमाल किया गया है। हर सैटेलाइट की अपनी खासियत है।

सैटेलाइट/सेंसरक्या काम करेगा?
MODIS (Terra और Aqua)खेतों में सक्रिय आग का पता लगाना
VIIRS (NOAA-20)अपेक्षाकृत बेहतर रिजॉल्यूशन के साथ आग की पहचान
Meteosat-8 और Meteosat-9 (SEVIRI)लगभग हर 15 मिनट में निगरानी कर आग लगने का समय समझना
Sentinel-2आग के बाद खेतों की तस्वीरों से जले हुए क्षेत्र का अनुमान लगाना

इनकी भूमिका को समझिए।

MODIS और VIIRS: ये आग से निकलने वाली गर्मी यानी थर्मल सिग्नल को पहचानते हैं। इससे पता चलता है कि किस इलाके में आग जैसी गतिविधि हुई है।

Meteosat-8 और Meteosat-9: ये जियोस्टेशनरी सैटेलाइट हैं। यानी पृथ्वी के मुकाबले लगभग एक ही क्षेत्र पर लगातार नजर रखते हैं। इनमें लगे SEVIRI सेंसर से करीब 15 मिनट के अंतराल पर तस्वीरें मिलती हैं। इससे पता लगाने में मदद मिलती है कि दिन के किस समय आग की गतिविधि सबसे ज्यादा होती है।

Sentinel-2: इसका काम थोड़ा अलग है। यह आग की लपटें गिनने के बजाय खेतों की जमीन में हुए बदलावों को पहचानने में मदद करता है। इसके लिए आग लगने के पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना की जाती है।

इस तरह Fire Watch को आग की संख्या, समय और जले हुए क्षेत्र की अलग-अलग जानकारी मिलती है।

सरकारी आंकड़ों में पराली जलाने की घटनाएं इतनी कम कैसे हो गईं?

यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। पिछले कुछ वर्षों में सरकारी रिकॉर्ड में पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

सालदर्ज पराली जलाने की घटनाएं
2021करीब 80,000
2025करीब 6,000

इन आंकड़ों को देखकर लगता है कि पराली जलाने की समस्या काफी हद तक कम हो गई है। लेकिन iFOREST के मुताबिक, तस्वीर इतनी सीधी नहीं है।

संस्था की 2025 की स्टडी में कुछ अहम बातें सामने आईं:

  • पंजाब और हरियाणा में पारंपरिक सैटेलाइट से दर्ज आग की घटनाओं में भारी गिरावट आई।

  • कई बड़ी आग दोपहर 3 बजे के बाद लगती पाई गईं।

  • पारंपरिक सैटेलाइट की निगरानी के समय से बाहर होने के कारण ऐसी घटनाएं दर्ज होने से छूट सकती हैं।

  • आग की संख्या में कमी का मतलब यह जरूरी नहीं कि जलने वाले खेतों का क्षेत्रफल भी उसी अनुपात में घटा हो।

आग की संख्या और जले हुए खेतों का क्षेत्रफल अलग-अलग चीजें हैं।

मान लीजिए एक जिले में 100 जगह आग लगी और दूसरे जिले में 50 जगह। जरूरी नहीं कि पहले जिले में ही ज्यादा जमीन जली हो। दूसरे जिले में कम जगह आग लगी हो, लेकिन हर जगह बड़े क्षेत्र में पराली जलाई गई हो। यही वजह है कि केवल आग की गिनती के आधार पर पराली जलाने की समस्या का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।

क्या भारत के पास अपना ऐसा सैटेलाइट नहीं है जो लगातार निगरानी कर सके?

भारत अंतरिक्ष तकनीक में बड़ी क्षमता रखता है। मौसम, कृषि, आपदा प्रबंधन और सीमाओं की निगरानी के लिए देश के पास कई तरह के सैटेलाइट हैं। लेकिन लगातार और बार-बार किसी खास क्षेत्र की निगरानी करने वाली जियोस्टेशनरी अर्थ ऑब्जर्वेशन क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत है।

इसी मुद्दे पर 2026 में संसद की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति ने भी चिंता जताई थी। हालांकि, समिति की रिपोर्ट मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्र में जंगलों में लगने वाली आग की निगरानी पर थी, न कि विशेष रूप से पराली जलाने पर।

समिति ने कहा कि भारत फायर मॉनिटरिंग के लिए विदेशी सैटेलाइट प्रणालियों पर निर्भर है। इसने ऐसी स्वदेशी जियोस्टेशनरी सैटेलाइट प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की, जो चौबीसों घंटे आग की निगरानी कर सके।

EOS-05 यानी GISAT-1A क्या है?

भारत के पास इस दिशा में अपनी तकनीक विकसित करने की क्षमता भी है। EOS-05 (GISAT-1A) इसी तरह का एक महत्वपूर्ण मिशन है।

इस सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए सितंबर 2026 में लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप की बार-बार तस्वीरें लेना और प्राकृतिक आपदाओं सहित जमीन पर होने वाले बदलावों की निगरानी करना है।

GISAT कार्यक्रम के लिए जारी डिजाइन संबंधी जानकारियों में कुछ विशेषताएं बताई गई हैं:

  • चुने हुए क्षेत्रों की करीब हर 5 मिनट में तस्वीर लेने की क्षमता।

  • साफ आसमान की स्थिति में पूरे भारतीय भूभाग को लगभग हर 30 मिनट में कवर करने की क्षमता।

  • जमीन और वनस्पति में होने वाले बदलावों की निगरानी।

लेकिन यहां एक जरूरी बात है। EOS-05 के ऑपरेशनल होने की स्थिति को लेकर उपलब्ध WMO रिकॉर्ड में सितंबर 2026 तक इसे कमीशनिंग चरण में बताया गया था। इसलिए इसे अभी पूरी तरह चालू और पराली निगरानी में इस्तेमाल हो रही प्रणाली बताना सही नहीं होगा।

आग बुझने के बाद भी सैटेलाइट कैसे पकड़ेगा पराली जलाने की घटना?

Fire Watch की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है Burnt Area Mapping। इस तकनीक में सिर्फ आग की लपटों को नहीं देखा जाता, बल्कि आग लगने के बाद जमीन पर हुए बदलावों की पहचान की जाती है।इसके लिए Sentinel-2 की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसे ऐसे समझिए:

  1. सबसे पहले खेतों की आग लगने से पहले की सैटेलाइट तस्वीर ली जाती है।

  2. फिर जलने के मौसम के बाद उसी इलाके की तस्वीर ली जाती है।

  3. दोनों तस्वीरों की तुलना करके जमीन और वनस्पति में हुए बदलावों की पहचान की जाती है।

  4. इन बदलावों के आधार पर जले हुए कृषि क्षेत्र का अनुमान लगाया जाता है।

इसके लिए NBR यानी Normalized Burn Ratio और dNBR जैसे तकनीकी पैमानों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसका फायदा यह है कि अगर किसी खेत में आग लगी और सैटेलाइट ने उस समय आग की लपटें नहीं देखीं, तब भी बाद में जमीन पर मौजूद जलने के निशान से उस क्षेत्र की पहचान संभव हो सकती है।

हालांकि, हर बदलाव पराली जलने का प्रमाण नहीं होता। फसल कटाई, खेत की जुताई और दूसरी गतिविधियों से भी जमीन की तस्वीर बदल सकती है। इसलिए Burnt Area Mapping को भी सावधानी से समझना जरूरी है।

अब आग की गिनती नहीं, जले हुए खेतों का हिसाब भी जरूरी

पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि कितनी जगह आग लगी। यह भी समझना जरूरी है कि आग कब लगी, कितनी देर तक लगी और कितनी जमीन को प्रभावित किया।

Fire Watch इसी कमी को दूर करने की कोशिश है। यह अलग-अलग सैटेलाइट के डेटा को मिलाकर पराली जलाने की अधिक व्यापक तस्वीर पेश करेगा।

Tags: Delhi PollutionFire WatchGISAT-1AiFORESTISROPunjab HaryanaSatellite MonitoringStubble Burning
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

दिवाली पर ₹5 लाख करोड़ का कारोबार! दिल्ली में ₹80 हजार करोड़ की उम्मीद, किन बाजारों में सबसे ज्यादा रौनक

संबंधित पोस्ट

अर्नब के बाद मुरासु! क्या भारत में बढ़ रहे हैं साइक्लोन? 130 साल का डेटा क्या बताता है
चर्चित

अर्नब के बाद मुरासु! क्या भारत में बढ़ रहे हैं साइक्लोन? 130 साल का डेटा क्या बताता है

2 November 2026

एक चक्रवात का असर खत्म भी नहीं हुआ कि दूसरा तूफान समुद्र में तैयार हो गया। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान...

चक्रवात अर्नब का नाम किसने रखा? जानिए बंगाल की खाड़ी के तूफानों के नामकरण का पूरा नियम
पर्यावरण

चक्रवात अर्नब का नाम किसने रखा? जानिए बंगाल की खाड़ी के तूफानों के नामकरण का पूरा नियम

27 October 2026

बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवात को अर्नब नाम दिया गया है। यह नाम किसी अधिकारी ने तूफान बनने के बाद अचानक नहीं चुना।...

सुपर अल नीनो की नई चेतावनी: भारत में कम पड़ेगी सर्दी? गेहूं की फसल और महंगाई पर मंडराया खतरा
चर्चित

सुपर अल नीनो की नई चेतावनी: भारत में कम पड़ेगी सर्दी? गेहूं की फसल और महंगाई पर मंडराया खतरा

10 October 2026

सुपर अल नीनो की आशंका ने दुनिया भर में मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

India Built Rudra and Prachand. Now It Wants to Make Their Gun at Home.

India Built Rudra and Prachand. Now It Wants to Make Their Gun at Home.

00:03:14

INS Samarthak: The Indigenous Warship Built to Do More Than One Job VO:

00:03:01

Why Is India Investing in Underwater Weapons?

00:02:10

How DRDO Is Making India's Military Communications More Secure

00:03:28

How Ice on Aircraft Wings Can Turn Deadly

00:03:19
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited