एक रामभक्त कवि के रूप में तुलसी की ख्याति भक्ति काल के अन्य कवियों में भी फैल चुकी थी। तुलसी के समकालीन कवियों में मीरा, रहीम आदि के साथ उनके पत्रव्यवहार की जानकारी मिलती है।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा

    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा, मोदी पर पश्चिमी दबाव को किया खारिज; भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का किया समर्थन

    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा

    पुतिन ने जताया भारत पर भरोसा, मोदी पर पश्चिमी दबाव को किया खारिज; भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का किया समर्थन

    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

कष्ट में बीता बचपन, जवानी में पत्नी से फटकार और रहीम से मित्रता: कुछ ऐसे रामबोला से बन गए गोस्वामी तुलसीदास

पढ़िए कहानी उन गुरुओं की भी, जिन्होंने तुलसीदास को बनाया विद्वान

architsingh द्वारा architsingh
24 October 2024
in इतिहास, ज्ञान, संस्कृति
गोस्वामी तुलसीदास, रामचरितमानस

भले ही गोस्वामी तुलसीदास को लोग रामचरितमानस की वजह से ही अधिक जानते हों, किन्तु उन्होंने इसके अलावा भी 11 ग्रंथों की रचना की

Share on FacebookShare on X

कहा जाता है कि कलम की ताकत से व्यक्ति यदि चाहे तो बहुत कुछ हासिल कर सकता है। हमारे सामने अनेक ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने वर्षों पहले अपनी लेखनी चलाई और उनकी रचनाओं के माध्यम से आज भी वे सभी रचनाकार हमारे मध्य उपस्थित हैं। ऐसे ही भक्तिकाल में एक महान भक्त कवि गोस्वामी तुलसीदास हुए। तुलसीदास का नाम भारत के घर-घर में बड़े ही सम्मान एवं आदर के साथ लिया जाता है।

इसका एक मात्र कारण है उनकी लेखनी, जिससे उन्होंने ‘रामचरितमानस’ की रचना की। आज हम तुलसीदास के जीवन के विभिन्न पक्षों पर चर्चा करेंगे।

संबंधितपोस्ट

‘भारत पर इस्लामी आक्रमण होगा, तो किस तरफ होंगे सेना के मुस्लिम’? अंबेडकर को था संदेह, लिखा – इस्लाम के लिए हमारा देश दारुल हर्ब

आज से ही के दिन तालिबान ने तोड़ी थीं बुद्ध की 2 हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं, लेकिन भीम-मीम एकता के अनुयायी इस कृत्य पर 25 वर्ष बाद भी कुछ लिख बोल नहीं सकते

‘शिवायण’: भ्रांतियों से सत्य की ओर जाने का रास्ता बताती पुस्तक

और लोड करें

अद्भुत है इनके जन्म की कथा

गोस्वामी तुलसीदास के जन्म की कहानी बेहद अद्भुत है। इनका जन्म कब हुआ था इस संबंध में एक दोहा बहुत प्रचलित है:

“पन्द्रह सौ चौवन विसे कालिन्दी के तीर,
श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी धरयो शरीर।”

स्पष्ट है, इनका जन्म संवत 1554 में पवित्र श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में सप्तमी तिथि को हुआ था। हालाँकि तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद है, सामान्य मत यही है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में राजापुर नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता आत्माराम दुबे एक सम्मानित ब्राह्मण थे।

इनके जन्म के समय कुछ ऐसी अद्भुत घटनाएं घटीं, जो वास्तव में इनको एक सामान्य पुरुष से पृथक करती हैं। कहा जाता है कि जब इनका जन्म हुआ तो ये रोये ही नहीं। बल्कि इनके मुँह से ‘राम’ निकला। यह देखकर लोगों को समझते देर न लगी कि वाकई तुलसी कोई दिव्य बालक थे। इतना ही नहीं, बल्कि जन्म के समय इनके शरीर का आकार भी सामान्य न होकर अपेक्षाकृत अधिक बड़ा था। साथ ही जन्म के समय इनके मुख में दांतों की भी उपस्थिति थी। कहा जाता है कि जन्म के समय अपने बालक में ये लक्षण देखकर उनके माता-पिता किसी अमंगल की आशा से भयभीत थे।

कष्टों में बीता तुलसी का बचपन

उनकी माता हुलसी ने इस भय से कि बालक के जीवन पर कोई संकट न आए, अपनी एक दासी चुनियां को नवजात के साथ उसके ससुराल भेज दिया। किन्तु वास्तव में विधि का विधान ही कुछ और था और हुलसी अगले दिन ही स्वर्ग सिधार गईं। चुनियां ने बालक तुलसीदास का पालन-पोषण बड़े प्रेम से किया किंतु जब तुलसीदास करीब साढ़े पाँच वर्ष के हुए तो चुनियां भी शरीर छोड़ गईं। चुनिया की मृत्यु के पश्चात तुलसी को अनाथ बच्चे की तरह मांग कर खाने की भी नौबत आ गई। इस तरह देखा जाए तो जन्म एक सम्मानित ब्राह्मण परिवार में होने के बावजूद तुलसी का बचपन कष्टों में ही व्यतीत हुआ।

कौन थे अनाथ को तुलसीदास बनाने वाले गुरु, कैसे अर्जित की विद्या

चूँकि बाल्यकाल में तुलसी अनाथ की भाँति जीवन यापन कर रहे थे, ऐसे में स्वाभाविक सा प्रश्न है कि तुलसी ने विद्या कैसे अर्जित की। चूँकि जो रचनाएँ तुलसी ने लिखीं, उन्हें कोई अज्ञानी व्यक्ति नहीं लिख सकता। ऐसे में इनके विद्यार्थी जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर चर्चा करना समीचीन रहेगा। तुलसी के गुरु कौन थे इस संबंध में स्वयं तुलसी ने कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है। विद्वानों का मानना है कि उनके जीवन में पांच गुरु रहे हैं। इनके नाम हैं – राघवानंद, जगन्नाथदास, शेषसनातन, नरसिंह और नरहरि। अलग-अलग विद्वान अलग-अलग वक्त पर इन गुरुओं की चर्चा करते हैं। हालाँकि इनका अध्ययन किस तरह प्रारंभ हुआ, इससे जुड़ा एक प्रसंग विद्वानों की चर्चा में काफी प्रचलित है।

कहा जाता है श्री नरहर्यानंद जी, श्री अनंतानंद जी के प्रिय शिष्य थे तथा उस समय वे रामशैल पर निवास कर रहे थे। इस संबंध में यह प्रचलित है कि उन्हें स्वप्न में भगवान शिव से प्रेरणा प्राप्त हुई और वे बालक तुलसीदास को ढूँढ़ते हुए चुनिया के ससुराल पहुँचे जहाँ तुलसी दास भिक्षा माँगकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनका मानना था कि जन्म के समय सबसे पहला शब्द तुलसी ने राम बोला था, इसीलिए उन्होंने तुलसी का नाम रामबोला रख दिया। वे बालक को अपने साथ अयोध्या लाए और यहीं उनका यज्ञोपवीत संस्कार कराया।

यहाँ भी तुलसीदास ने बिना सिखाए ही गायत्री मंत्र का उच्चारण करके लोगों को एक बार पुनः चकित कर दिया। तत्पश्चात नरहरि जी ने वैष्णवों के पांच संस्कार कराके तुलसी को राम मंत्र से दीक्षित किया। इस तरह उनका औपचारिक विद्याध्ययन प्रारंभ हो गया। तुलसीदास बेहद प्रतिभाशाली थे। वे एक बार जो भी सुन लेते थे, उसे कंठस्थ कर लेते थे।

इस तरह कुछ बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के बाद नरहरि जी उन्हें लेकर शूकर क्षेत्र सोरों पहुँचे, जहाँ उन्होंने मौखिक रूप में रामचरितमानस सुनाई। अब आगे की शिक्षा के लिए तुलसी को काशी में शेष सनातन जी के पास वेदाध्ययन के लिए छोड़ा गया। यहाँ लगभग 15 वर्षों तक तुलसीदास ने वेद-वेदांग का अध्ययन किया।

गृहस्थ जीवन में तुलसी के कदम

विद्या प्राप्त करने के बाद तुलसी का मन गृहस्थ की ओर प्रवृत्त हुआ और वे अपने गाँव वापस आए। यहाँ आकर उन्हें ज्ञात हुआ कि उनका पूरा परिवार नष्ट हो चुका है, जिससे उन्हें काफी दुख हुआ। अतः भारी मन से उन्होंने अपने पिता सहित सभी पितरों का श्राद्ध किया। चूँकि अब तुलसी की ख्याति रामकथा कहने के कारण बढ़ चुकी थी, अतः उन्होंने वहीं अपने गाँव में रामकथा सुनाते हुए जीवन यापन करने शुरू कर दिया।

कुछ समय पश्चात अपने गुरुजनों से सलाह लेकर उन्होंने संवत 1583 में रत्नावली नामक कन्या से विवाह किया और सुखपूर्वक अपना वैवाहिक जीवन व्यतीत करने लगे।

पत्नी की डाँट से लिया वैराग्य

कहा जाता है कि एक दिन रत्नावली अपने भाई के साथ मायके गईं। तुलसीदास भी उनकी आसक्ति के चलते अपनी पत्नी के पीछे-पीछे वहाँ पहुँच गए। यह देखकर रत्नावली को अपने मायके में काफी शर्मिंदगी महसूस हुई और अत्यंत रोष के साथ धिक्कारते हुए तुलसी से कहा:

“अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति!
नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत?”

अर्थात आपकी जैसी आसक्ति मेरे हाड़ मांस के शरीर में है, ऐसी यदि भगवान में होती, तो आपका बेड़ा पार हो जाता। पत्नी की इस फटकार ने तुलसीदास को इतना प्रभावित किया कि वह उसी समय वहाँ से चल दिए और सन्यास लेकर रामकथा में ही डूब गए।

तुलसीदास की रचनाएँ

इस तरह तुलसीदास के निजी जीवन से जुड़े कुछ पहलुओं को हमने छुआ। किन्तु तुलसी को भारत के घर-घर में जगह दिलाई उनकी रचनाओं ने। रामकथा पर आधारित उनकी सबसे प्रमुख रचना ‘रामचरितमानस’ है, जो आज भी घर-घर में पूजास्थान पर हमें मिलती है। अपनी इसी रचना के कारण तुलसी कालजयी हो गए। भले ही इन्हें लोग रामचरितमानस की वजह से ही अधिक जानते हों, किन्तु उन्होंने इसके अलावा भी 11 ग्रंथों की रचना की।

उन्होंने रामचरितमानस, रामलीला नहछा, बरवै रामायण, पार्वती मंगल, जानकी मंगल और रामाज्ञा प्रश्न आदि रचनाएँ लिखीं, जो अवधी भाषा में उपलब्ध हैं। वहीं कुछ रचनाएँ उन्होंने ब्रज भाषा में भी लिखीं, यथा- कृष्ण गीतावली, साहित्य रत्नावली, दोहावली, वैराग्य संदीपनी और विनय पत्रिका आदि। इन रचनाओं के अतिरिक्त चार अन्य बेहद प्रचलित रचनाएँ हैं, जिन्हें तुलसीदास रचित माना जाता है, इनमें हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक, हनुमान बाहुक, तुलसी सतसाईं शामिल हैं।

तुलसी की ख्याति

एक रामभक्त कवि के रूप में तुलसी की ख्याति भक्ति काल के अन्य कवियों में भी फैल चुकी थी। तुलसी के समकालीन कवियों में मीरा, रहीम आदि के साथ उनके पत्रव्यवहार की जानकारी मिलती है।

मीराबाई और गोस्वामी तुलसीदास के बीच की पत्र वार्ता का उल्लेख वेणी माधव दास द्वारा रचित मूल गोसाईं चरित में मिलता है। मूल गोसाईं चरित तुलसीदास की सर्वाधिक प्रामाणिक जीवनी मानी जाती है। मीरा ने तुलसी को जो पत्र लिखा, उसके पीछे की मंशा अपने माता-पिता द्वारा उनकी भक्ति को न समझा जाना था।

मीराबाई, रहीम और तुलसीदास: भक्ति के मार्ग पर मित्रता की कहानी

कहा जाता है कि मीराबाई के पत्र के उत्तर में ही तुलसीदास ने विनय पत्रिका के इस पद को लिखा: “जाके प्रिय न राम वैदेही, तजिए ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही।” तुलसीदास ने मीराबाई को भक्ति के रास्ते में आने वाली हर बाधा को छोड़ने की बात लिखी है।

इसके अलावा, तुलसी और रहीम भी समकालीन थे और प्रमाण मिलते हैं कि इनके बीच मैत्री का संबंध था। हालाँकि मध्यकाल के जिस दौर में ये दोनों कवि हुए, उस समय धार्मिक कट्टरता अपने चरम पर थी, किंतु रहीम स्वयं भक्त थे तथा हिंदू अवतारों के प्रति सम्मान का भाव रखते थे। वहीं, गोस्वामी तुलसीदास का मानना भी यही था कि भक्त किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय का हो, वह सम्मान का पात्र है।

तुलसी और रहीम के बीच परस्पर अवतारवाद पर चर्चा के अनेक प्रसंग मिलते हैं। कहा जाता है कि एक बार जब इन दोनों भक्त कवियों के मध्य ईश्वर की महिमा पर चर्चा चल रही थी, तभी उधर से एक हाथी अपनी सूंड से अपने सिर पर धूल फेंकता हुआ निकला। यह देख कर तुलसीदास ने रहीम से प्रश्न किया: “धूल धरत नित शीश पर कहु रहीम केहि काज?” चूँकि रहीम हिंदू पौराणिक कथाओं के अच्छे जानकार थे, इसलिए उन्होंने तुरंत उत्तर दिया: “जेहि रज से पत्नी तरी, तेहि ढूँढत गजराज।” यानी जिस राम की चरणों की धूल से गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार हो गया, यह हाथी भी उन्हीं चरणों की धूल खोज रहा है।

कई बार दोनों के बीच पत्र व्यवहार की जानकारी भी मिलती है। एक बार, एक गरीब ब्राह्मण अपनी कन्या के विवाह हेतु धन की याचना करने गोस्वामी जी के पास आया। उन्होंने दोहे की एक पंक्ति लिखकर उसके हाथ अपने मित्र रहीम के पास भिजवा दी: “सुर तिय, मुनि तिय, नाग तिय, यह जाँचत सब कोय।” यह पत्र पढ़कर रहीम ने ब्राह्मण को धन दिया और दोहे की पूर्ति कर उसे वापस तुलसीदास के पास भेज दिया: “गोद लिए हुलसी फिरे, तुलसी सो सुत होय।” इस तरह, रहीम और तुलसी की मित्रता के अनेक किस्से हमें मिलते हैं।

जब तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना पूरी कर ली, तो उसकी प्रशंसा में रहीम ने लिखा: “रामचरित मानस विमल, संतन जीवन प्रान। हिंदू जन को वेद सम, जनमहि प्रकट पुरान।”

इस तरह, जीवन भर राम को आराध्य मानते हुए साहित्य साधना में रत तुलसीदास जीवन के अंतिम दिनों में वाराणसी के अस्सी घाट पर रहने लगे थे। वहीं, एक दिन सम्वत 1680 में उन्होंने राम-राम कहते हुए जीवन त्याग दिया। इनकी मृत्यु के संबंध में भी एक दोहा प्रचलित है: “संवत सोलह सौ असी, असी गंग के तीर।
श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर।”

स्रोत: Goswami Tulsidas, गोस्वामी तुलसीदास, Ramcharitmanas, रामचरितमानस, History, इतिहास
Tags: Goswami TulsidasHistoryRamcharitmanasइतिहासगोस्वामी तुलसीदासरामचरितमानस
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

अमेरिकी अख़बार से भारत को बदनाम करवाने के लिए कनाडा ने रची ‘फर्जी कहानी’, NSA तक को लगाया: इस्तीफे से बचने के लिए ट्रूडो का तिकड़म?

अगली पोस्ट

लौट के बुद्धू घर को आए…पति को छोड़ फरहान के पास गई थी अभिनेत्री, अब सुना रही टॉर्चर के किस्से

संबंधित पोस्ट

गोवा राज्य स्थापना दिवस
इतिहास

गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

30 May 2026

गोवा क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे छोटा राज्य है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा करीब 450 वर्षों तक पुर्तगाल के शासन...

1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)
इतिहास

अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

28 May 2026

जब विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने अंडमान की सेलुलर जेल में कैद किया, तब उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी...

हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?
चर्चित

हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

27 May 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद इस बार जो अभूतपूर्व माहौल बना है, उसने बोर्ड की पूरी...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

AIRCRAFT CARRIERS: INDIA’S MOST POWERFUL TOOL OF MARITIME POWER PROJECTION | INS Vikrant |

AIRCRAFT CARRIERS: INDIA’S MOST POWERFUL TOOL OF MARITIME POWER PROJECTION | INS Vikrant |

00:03:22

Rudram 2 Success: Made in India Missile Ready To Crush Enemy Radars| DRDO’s Big Breakthrough

00:03:46

From Runways to Warships: India’s Firefighting Warrior Built for Bases & Battles| IAF | VayuShakti

00:05:40

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited