TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद

    तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

चमड़ी उधेड़ते बेंत… फिर भी हर बेत के साथ चिल्लाता ‘भारत माता की जय! – जब मात्र 15 साल की उम्र में पहली बार गिरफ्तार हुए थे चंद्रशेखर ‘आजाद’

हमारी लड़ाई आखरी फैसला होने तक जारी रहेगी और वह फैसला है जीत या मौत-चंद्रशेखर आज़ाद

himanshumishra द्वारा himanshumishra
27 February 2025
in इतिहास, चर्चित
Chandrasekhar Azad

चंद्रशेखर आजाद और असहयोग आंदोलन (Image Source: X)

Share on FacebookShare on X

महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आज़ाद का शुरुआती झुकाव महात्मा गांधी और उनके अहिंसक आंदोलन की ओर था। मात्र 15 वर्ष की उम्र में, जब उनके हमउम्र बच्चे खेलकूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते थे, उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। उन्हें पूरा विश्वास था कि गांधीजी के नेतृत्व में देश जल्द ही स्वतंत्र हो जाएगा। इस उम्मीद और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ वे आंदोलन में कूद पड़े। लेकिन जब अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया और उनका नाम पूछा, तो उन्होंने बेखौफ होकर कहा— “मेरा नाम आज़ाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और घर जेलखाना!” यह शब्द केवल जवाब नहीं थे, बल्कि उनके भीतर सुलग रही क्रांति की पहली चिंगारी थी।

लेकिन यह चिंगारी जल्द ही शोला बन गई। 1922 में जब चौरी-चौरा की घटना के बाद महात्मा गांधी ने बिना किसी से चर्चा किए अचानक असहयोग आंदोलन वापस ले लिया, तो युवा चंद्रशेखर आज़ाद स्तब्ध रह गए। उन्होंने अपनी आँखों के सामने देखा कि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष अधूरा छोड़ दिया गया। उनके भीतर उबाल आ गया— क्या अंग्रेजों से आज़ादी केवल अहिंसा से संभव है? क्या संघर्ष किए बिना देश को स्वतंत्र कराया जा सकता है? यही वह क्षण था जब उनके विचारों में बदलाव आया। अब वे क्रांतिकारी आंदोलन की ओर मुड़ गए, जहाँ भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे वीरों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजी सत्ता को उखाड़ फेंकने की शपथ ली। यह उनकी असली क्रांतिकारी यात्रा की शुरुआत थी, जिसमें उन्होंने गुलामी को कभी स्वीकार नहीं किया और जीवन भर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते रहे।

संबंधितपोस्ट

आज तक ‘आज़ाद’ नहीं हो सकीं चंद्रशेखर आजाद की अस्थियां, 5 दशक से लखनऊ में बंद है अस्थि कलश

क्या नेहरू ने चंद्रशेखर आज़ाद की मुखबिरी की थी? CID की गोपनीय फाइलों में छुपा वो राज़, जो आज भी उनकी शहादत की अनसुलझी गुत्थी बना हुआ है!

हिंदू देवी-देवताओं और महाकुंभ को अपशब्द कहने वाली महिला गिरफ्तार, खुद को बताती है अंबेडकर की बेटी

और लोड करें

चंद्रशेखर से चंद्रशेखर ‘आजाद’ तक का सफरनामा

मध्यप्रदेश के छोटे से गाँव भाबरा (अब चंद्रशेखर आज़ादनगर) में 23 जुलाई 1906 को जन्मे चंद्रशेखर का बचपन सामान्य नहीं था। उनके खेल भी साधारण नहीं थे। जहां आम बालक खिलौनों से खेलते थे, वहीं आज़ाद धनुष-बाण चलाने में निपुण हो रहे थे। भीलों के बीच रहते हुए उन्होंने निशानेबाजी की वह कला सीखी, जो आगे चलकर अंग्रेजों के लिए काल बन गई। लेकिन उनके भीतर कुछ और भी सुलग रहा था— एक ऐसी ज्वाला जो भारत की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने को आतुर थी। यह ज्वाला धीरे-धीरे धधक रही थी, लेकिन 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड ने इसे चिंगारी दे दी।

देशभर में मातम पसरा था, लेकिन यह मातम चंद्रशेखर के लिए विद्रोह की शुरुआत थी। अंग्रेजों की बर्बरता ने उनकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया। अब उनके भीतर जो आग थी, वह दहकने लगी थी। फिर आया 1920— जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का शंखनाद किया। यही वह क्षण था, जब सुलगती चिंगारी एक धधकता ज्वालामुखी बन गई! मात्र 15 साल की उम्र में चंद्रशेखर पढ़ाई कर रहे थे अब क्रांति के रण में कूद पड़े।

वह सड़कों पर उतर आए, नारे बुलंद किए, अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी। लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें धरना देते हुए गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें पेश किया गया उस समय के कुख्यात मजिस्ट्रेट मि. खरेघाट के सामने, जो क्रांतिकारियों को कठोरतम सजा देने के लिए जाना जाता था। लेकिन यह कोई साधारण बालक नहीं था— यह था चंद्रशेखर आज़ाद!

मजिस्ट्रेट ने जब उसका नाम पूछा, तो जवाब मिला—
“मेरा नाम आज़ाद है!”
“पिता का नाम?”
“स्वाधीन!”
“घर कहां है?”
“मेरा घर जेलखाना है!”

अंग्रेज अधिकारी बौखला गए। एक 14 साल के बालक का ऐसा साहस? मजिस्ट्रेट ने तमतमाकर 15 कोड़ों की सजा सुना दी। अंग्रेज जल्लाद ने पूरी ताकत से चंद्रशेखर की नंगी पीठ पर कोड़े बरसाने शुरू किए। हर कोड़े के साथ उनकी चमड़ी उधड़ती गई, लेकिन उनके होंठों से सिर्फ “भारत माता की जय” और “महात्मा गांधी की जय” निकलता रहा।

जब कोड़े पूरे हो गए, तो जेलर ने नियम के अनुसार उनकी हथेली पर तीन आने रखे। लेकिन चंद्रशेखर ने वह सिक्के जेलर के मुँह पर दे मारे और बोले— “भारत की स्वतंत्रता बिकाऊ नहीं है!” और जिले से भागकर बाहर आ गए। जेल से लौट के आने पर बनारस के ज्ञानवापी मोहल्ले में उनका भव्य अभिनंदन हुआ। अब वह केवल चंद्रशेखर नहीं थे, बल्कि ‘चंद्रशेखर आज़ाद’ बन चुके थे।

इस घटना का जिक्र जवालाल नेहरू ने भी अपनी आत्मकथा ‘मेरे कहानी’ में भी किया है. जहां उन्होंने इसे कायदा तोड़ने वाले एक छोटे से लड़के की कहानी के तौर पर प्रेषित किया है –

“ऐसे ही कायदे (कानून) तोड़ने के लिये एक छोटे से लड़के को, जिसकी उम्र १४ या १५ साल की थी और जो अपने को आज़ाद कहता था, बेंत की सजा दी गयी। उसे नंगा किया गया और बेंत की टिकटी से बाँध दिया गया। बेत एक एक कर उस पर पड़ते और उसकी चमड़ी उधेड़ डालते पर वह हर बेत के साथ चिल्लाता ‘भारत माता की जय!’। वह लड़का तब तक यही नारा लगाता रहा, जब तक की वह बेहोश न हो गया। बाद में वही लड़का उत्तर भारत के क्रान्तिकारी कार्यों के दल का एक बड़ा नेता बना।”

कांग्रेस से मोहभंग और क्रांतिकारी पथ पर अंतिम संकल्प

लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। चौरी-चौरा कांड के बाद जब महात्मा गांधी ने बिना किसी चर्चा के असहयोग आंदोलन वापस ले लिया, तो चंद्रशेखर आज़ाद का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने देखा कि जिन युवाओं ने अपनी जान दांव पर लगाई थी, उनकी कुर्बानी बेकार चली गई। अहिंसा का मार्ग अब उन्हें अधूरा और कमजोर लगने लगा। उन्हें समझ आ गया था कि आज़ादी की यह लड़ाई सिर्फ अहिंसा से नहीं जीती जा सकती— दुश्मन को उन्हीं की भाषा में जवाब देना होगा!

बनारस में रहते हुए, वे मन्मथनाथ गुप्त और प्रणवेश चटर्जी के संपर्क में आए और जल्द ही “हिन्दुस्तान प्रजातंत्र संघ” (HRA) का हिस्सा बन गए। अब उनका लक्ष्य एकदम साफ था— ब्रिटिश हुकूमत को हर हाल में उखाड़ फेंकना। गांधीजी के फैसले से जहां हजारों नवयुवकों का कांग्रेस से मोहभंग हुआ, वहीं आज़ाद ने इसे अपने क्रांतिकारी सफर की दिशा बदलने का संकेत समझा। जब 1924 में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सान्याल और योगेशचंद्र चटर्जी ने क्रांतिकारियों को संगठित कर “हिन्दुस्तान प्रजातांत्रिक संघ” की नींव रखी, तो आज़ाद भी अपने पूरे जुनून के साथ इसमें कूद पड़े।

लेकिन क्रांति के लिए संसाधन चाहिए थे। शुरुआत में क्रांतिकारियों ने धन जुटाने के लिए कुछ अमीर घरों में डकैतियां डालीं, लेकिन एक सख्त नियम बना कि किसी भी महिला को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। एक बार, जब एक महिला ने चंद्रशेखर आज़ाद की पिस्तौल छीन ली, तो अपने बलशाली शरीर के बावजूद उन्होंने उसे वापस लेने की कोशिश नहीं की। लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे और पूरा गांव उन पर टूट पड़ा, तो राम प्रसाद बिस्मिल ने हस्तक्षेप किया, महिला से पिस्तौल वापस ली और क्रांतिकारियों को वहां से सुरक्षित निकाला। इस घटना के बाद, संगठन ने फैसला किया कि अब केवल अंग्रेजी सरकार के ठिकानों पर ही हमले किए जाएंगे।

1925 का काकोरी कांड इस क्रांतिकारी संघर्ष का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। 9 अगस्त 1925 को ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटकर क्रांतिकारियों ने दिखा दिया कि अब लड़ाई खुलेआम होगी। हालांकि, इस योजना का अशफाक उल्ला खान ने पहले ही विरोध किया था, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि यह सरकार को क्रांतिकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने का मौका देगा— और वही हुआ। अंग्रेजों ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन चंद्रशेखर आज़ाद को पकड़ नहीं पाए।

बाकी सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। 17 दिसंबर 1927 को राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और 19 दिसंबर 1927 को बाकी तीनों वीरों को फांसी दे दी गई। इन बलिदानों ने पूरे क्रांतिकारी आंदोलन को झकझोर कर रख दिया, लेकिन आज़ाद का संकल्प और मजबूत हो गया।

अपने सभी प्रिय साथियों को खोने के बावजूद, चंद्रशेखर आज़ाद ने पीछे हटने की बजाय अपनी लड़ाई को और भी तेज कर दिया। उन्होंने उत्तर भारत के सभी क्रांतिकारियों को संगठित किया और 8 सितंबर 1928 को दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में एक गुप्त सभा का आयोजन किया। यहीं पर उन्होंने भगत सिंह को संगठन का प्रचार प्रमुख बनाया और तय किया कि अब सभी क्रांतिकारी संगठनों को एकजुट होकर एक ही लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा।

कई घंटों की गहन चर्चा के बाद, “हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन” का नाम बदलकर “हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन” रखा गया। आज़ाद को इस संगठन का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया। अब लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट था— “हमारी लड़ाई अंतिम सांस तक चलेगी, और यह खत्म होगी केवल जीत या मौत पर!”

 

 

 

 

स्रोत: चंद्रशेखर आजाद, चंद्रशेखर आजाद और असहयोग आंदोलन, चंदशेखर आजाद और महात्मा गाँधी, चंद्रशेकर आजाद पुण्यतिथि, Chandrasekhar Azad, Chandrasekhar Azad and the Non-Cooperation Movement, Chandrasekhar Azad and Mahatma Gandhi, Chandrasekhar Azad Punyatithi
Tags: Chandrasekhar AzadChandrasekhar Azad and Mahatma GandhiChandrasekhar Azad and the Non-Cooperation MovementChandrasekhar Azad Punyatithiचंदशेखर आजाद और महात्मा गाँधीचंद्रशेकर आजाद पुण्यतिथिचंद्रशेखर आज़ादचंद्रशेखर आजाद और असहयोग आंदोलन
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

46 साल बाद संभल के खग्गू सराय शिव मंदिर में हुआ जलाभिषेक; महाशिवरात्रि के अवसर पर लगा भक्तों का तांता

अगली पोस्ट

‘एकता के महायज्ञ से युग परिवर्तन की आहट’: महाकुंभ के समापन पर PM मोदी ने लिखा ब्लॉग, एकता का दिया ‘महामंत्र’

संबंधित पोस्ट

सम में बाढ़ की स्थिति मंगलवार को और गंभीर हो गई।
चर्चित

Assam Floods: बाढ़ ने बढ़ाई तबाही, मरने वालों की संख्या 4 हुई, 37 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

15 July 2026

असम में बाढ़ की स्थिति मंगलवार को और गंभीर हो गई। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर...

तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद
चर्चित

तिरुपति बालाजी की पहली आरती पर विवाद, कर्नाटक सरकार बदलना चाहती है पुराना नियम

15 July 2026

तिरुपति बालाजी मंदिर में पहली आरती को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि सरकार उस...

नोएडा की गैलेक्सी वेगा सोसायटी में लिफ्ट में फंसीं
चर्चित

नोएडा की गैलेक्सी वेगा सोसायटी में लिफ्ट में फंसीं चार बच्चियां, आधे घंटे तक बंद रहीं

14 July 2026

नोएडा वेस्ट की गैलेक्सी वेगा सोसायटी में एक बार फिर लिफ्ट सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। 13 जुलाई की रात करीब 10:30...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

What's Really Behind Xinjiang's Global Supply Chains?

What's Really Behind Xinjiang's Global Supply Chains?

00:03:26

IRAN HITS UAE OIL TANKERS

00:03:28

THE CAMPS AFTER URUMQI

00:03:51

BANGKOK PUB FIRE HORROR

00:04:07

Vietnam Speedboat Tragedy: How 15 Indian Tourists Lost Their Lives

00:03:35
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited