TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    TCS केस में अदालत की अहम टिप्पणी

    TCS धर्म परिवर्तन केस: गर्भवती निदा खान को जमानत, कोर्ट ने दिया मानवीय आधार का हवाला

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट

    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट: हाई टाइड और तेज हवाओं की चेतावनी, 17 उड़ानें रद्द

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पश्चिम बंगाल में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा उनका जीवन और विचार

    यूपी केबिनेट के अहम फैसले

    यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, स्टार्टअप नीति को मंजूरी, पशुओं का होगा बीमा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    दिल्ली की एक शाम: जैसे दो घंटे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ बिताए हों

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

राजा महेंद्र प्रताप सिंह: आजादी की लड़ाई का योद्धा, जिसने काबुल में बनाई थी स्वतंत्र भारत की पहली निर्वासित सरकार

राजा महेंद्र प्रताप सिंह 32 वर्षों तक विदेशों में रहकर अंग्रेजी शासन के खिलाफ लड़ते रहे, लेकिन स्वतंत्रता के बाद कांग्रेसी सरकारों में उनके योगदान को उचित जगह नहीं मिली

TFI Desk द्वारा TFI Desk
1 December 2025
in इतिहास, चर्चित
राजा महेंद्र प्रताप सिंह

राजा महेंद्र प्रताप सिंह को इतिहास ने पहचाना, लेकिन देर से

Share on FacebookShare on X

“हमारी आज़ादी के आंदोलन में कई महान व्यक्तित्वों ने अपना सबकुछ खपा दिया. लेकिन यह देश का दुर्भाग्य रहा है कि आज़ादी के बाद ऐसे राष्ट्र नायक और नायिकाओं को अगली पीढियों को परिचित ही नहीं कराया गया।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के संदर्भ में ये शब्द तब कहे थे, जब वो वर्ष 2021 में उनके नाम पर बनी यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करने अलीगढ़ पहुंचे थे।
आज राजा महेंद्र प्रताप सिंह की जयंती है। उनका जन्म एक दिसम्बर, 1886 को हाथरस के मुरसान में के एक प्रसिद्ध जाट राजवंश में हुआ था।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह न सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, बल्कि एक शिक्षाविद, समाजसेवी और बाद में राजनीतिज्ञ भी रहे। लेकिन उन्हें जिस वजह से सबसे ज्यादा जाना जाता है वो है स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार (निर्वासित) की स्थापना।

संबंधितपोस्ट

सेलुलर जेल: अंग्रेज़ों के भयावह अत्याचार के ‘सबसे बड़े प्रतीक’ को कितना जानते हैं आप?

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन: देश की स्वतंत्रता के लिए बम बनाने वाले शब्दों के संत ‘अज्ञेय’ की क्रांतिकारी कहानी

हाथरस भगदड़ कांड में सूरजपाल सिंह जाटव को क्लीन चिट, जानें न्यायिक आयोग ने किसे माना 121 मौतों को ज़िम्मेदार?

और लोड करें

स्वतंत्र भारत की पहली निर्वासित सरकार की स्थापना

राजा महेंद्र प्रताप ने 1915 में ही न सिर्फ काबुल जाकर स्वतंत्र भारत की प्रथम निर्वासित सरकार की स्थापना की थी, बल्कि रूस, जर्मनी, जापान और कई देशों के दौरे कर उन्होने इस सरकार को मान्यता भी दिलवाई थी।
कुछ ऐसा ही वर्ष 1942 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भी किया था। बहरहाल, सुभाष चंद्र बोस निर्वासित सरकार के गठन के बाद स्वदेश नहीं लौट सके, लेकिन राजा महेंद्र प्रताप सिंह भारत भी लौटे और आज़ादी के बाद राजनीति में भी सक्रिय हुए।

आज़ादी की लड़ाई में उनका योगदान इतना गहरा और अनोखा था कि ब्रिटिश सरकार ने उनके ख़िलाफ़ पूरे विश्व भर में सर्च वारंट जारी कर रखा था।
लेकिन विडंबना यह है कि स्वतंत्र भारत में लंबे समय तक उनकी भूमिका को उतनी जगह नहीं मिली, जितने के वो हकदार थे।

छात्र जीवन में पड़ी ब्रितानी शासन से लड़ाई की बुनियाद

राजा महेंद्र प्रताप, अपने पिता राजा घनश्याम सिंह के तीसरे पुत्र थे। पिता राजा थे, तो बेटे की परवरिश भी उसी राजसी माहौल में हुई। वृंदावन से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद वो अलीगढ़ पहुंचे, जहां अलीगढ़ के मोहम्मडन एंग्लो ओरियंटल कॉलिज (अब AMU) उन्होने फर्स्ट डिविज़न के साथ एम.ए की परीक्षा पास की।
ब्रिटिश साम्राज्य से लड़ाई और भारत को आज़ाद कराने का सपना भी इस युवा राजकुमार ने यहीं पढ़ाई के दौरान न सिर्फ देखा, बल्कि उसे पूरा करने के लिए अपना सब कुछ दाँव पर भी लगाया।
एक बार जब वो स्नातक के छात्र थे, तो उन्होने देखा कि एक छात्र की किसी मामूली सी बात पर एक पुलिस वाले से झड़प हो गई। प्रधानाचार्य ने इस पर उसे तीन साल के लिए विद्यालय से निकाल दिया। इसके विरोध में राजा महेन्द्र प्रताप के नेतृत्व में छात्रों ने हड़ताल कर दी। उनके भाषण से नाराज़ होकर उन्हें भी विद्यालय से निकाल दिया गया। इस घटना ने युवा महेंद्र प्रताप के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

राजा महेन्द्र प्रताप अपने पिता धनश्याम सिंह के साथ ही अपने टीचर अशरफ अली से भी बहुत प्रभावित थे। अशरफ़ अली भले ही मुस्लिम समुदाय से आते थे, लेकिन हिन्दू धर्म व संस्कृति को लेकर उनकी जानकारी कमाल की थी। महेंद्र प्रताप के मन में भी संस्कृति और समाज के प्रति प्रेम की बुनियाद इन दोनों के सानिध्य में ही पड़ी।

कांग्रेस अधिवेशन में शामिल होने पर टूटा संबंध
महेंद्र प्रताप छात्र ही थे कि उनकी शादी पंजाब के एक प्रतिष्ठित राजवंश में कर दी गई। लेकिन ससुर नहीं चाहते थे कि उनका दामाद राजनीति में जाए या स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा ले। 1906 में जब कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होने के लिए महेंद्र प्रताप सिंह कोलकाता पहुँचे, तो उनके ससुर ने उनसे पूरी तरह संबंध तोड़ लिये।
महेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल ज़रूर हुए थे, लेकिन उस रास्ते को लेकर उनके मन में द्वंद था, वहां से लौट कर वो देश भ्रमण पर निकल पड़े। इस दौरान उनका सामना देशवासियों की दुर्दशा, उनकी लाचारी और अंग्रेजी शासन के अत्याचारों से हुआ।

32 वर्ष विदेशों में रहकर जगाई स्वतंत्रता की अलख

बाद में वो वर्ष 2007 में वो विदेश भी गए, जहां उन्होने तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के लिए दुनिया के प्रमुख शहरों का दौरा किया। इस यात्रा के बाद उनके मन में देश को आजाद करवाने की ललक और तेज हो गई।
वो समझ चुके थे कि अंग्रेजों से लड़ाई सिर्फ कांग्रेस के बताए रास्ते से नहीं लड़ी जा सकती, इसके लिए हथियार भी उठाने होंगे, किताबें भी उठानी होंगी।
विदेश से भारत लौटकर उन्होंने अपनी सम्पत्ति से एक विद्यालय की स्थापना की।

इसके बाद उनकी सबसे महत्वपूर्ण विदेश यात्रा दिसंबर 1914 में हुई, जब वे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत की स्वतंत्रता के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने के उद्देश्य से विदेश गए। इस दौरान वो यूरोप और एशिया के कई देशों में गए, जहाँ उन्होंने जर्मनी, बुल्गारिया, तुर्की और अफगानिस्तान की यात्रा की।
दिसम्बर 1915 में उन्होंने काबुल में अपनी अध्यक्षता में भारत की अस्थायी सरकार की। इसमें मौलाना बरकत अली को प्रधानमंत्री बनाया गया।

अगले 31 साल वे जर्मनी, स्विटरजरलैंड, अफगानिस्तान, तुर्की, यूरोप, अमरीका, चीन, जापान, रूस आदि देशों में घूमकर आजादी की अलख जगाते रहे।
उनके इन प्रयासों से अंग्रेजी शासन इतना नाराज़ हुआ कि उन्हें राजद्रोही घोषित कर उनकी सम्पत्ति तक जब्त कर ली गई। वर्ष 1925 में तिब्बत मिशन पर रवाना हुए, जहां ल्हासा जाकर वो दलाई लामा से मिले।
वे भारत की ही नहीं, तो विश्व के हर देश की स्वाधीनता के पक्षधर थे। वर्ष में उन्होंने न्यूयार्क में नीग्रो लोगों की स्वतंत्रता के समर्थन में भाषण दिया।

सितम्बर 1938 में उन्होंने एक सैनिक बोर्ड का गठन किया, जिसमें वे अध्यक्ष थे, जबकि विख्यात स्वंत्रतता सेनानी रास बिहारी बोस उसके उपाध्यक्ष तथा आनंद मोहन सहाय इसके महामंत्री बने।
द्वितीय विश्व युद्ध में उन्हें बंदी बना लिया गया; पर कुछ नेताओं के प्रयास से वे मुक्त करा लिये गये।

कांग्रेस में नहीं मिली खास तरजीह
आखिरकार 1946 में जब वो भारत लौटे तो सबसे पहले वर्धा में महात्मा गांधी से मिलने गए। लेकिन भारतीय राजनीति में उस दौर की कांग्रेस सरकारों के ज़माने में उन्हें कोई अहम ज़िम्मेदारी निभाने का मौक़ा नहीं मिला। आजादी के बाद भी जवाहर लाल नेहरू की विदेश नीति में जर्मनी और जापान मित्र देश नहीं रहे थे और राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने इन देशों से मदद माँगकर आज़ादी की लड़ाई शुरू की थी, ऐसे में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को कांग्रेस में बहुत ज़्यादा तरजीह नहीं मिली।
बाद में उन्होने निर्दलीय ही राजनीति में उतरने का फैसला किया और वर्ष 1957 में मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव में भी उतरे जहां उन्होने युवा नेता अटल बिहारी वाजपेई को हराया और संसद पहुंचे।

राजा महेन्द्र प्रताप पंचायती राज को ही वास्तविक स्वाधीनता मानते थे। वे आम आदमी के अधिकारों के समर्थक तथा नौकरशाही को दी गई अत्यधिक शक्तियों के विरोधी थे।वे ‘भारतीय स्वाधीनता सेनानी संघ’ तथा ‘अखिल भारतीय जाट महासभा’ के भी अध्यक्ष रहे।

Tags: आजादी की लड़ाईनिर्वासित सरकार के प्रथम राष्ट्रपतिभारत की प्रथम निर्वासित सरकारराजा महेंद्र प्रताप सिंहस्वतंत्रता संग्रामहाथरस
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

चक्रवात ‘दित्वाह’ से लड़ रहे श्री लंका की मदद को भारत ने बढ़ाया हाथ, ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ ने बताया भारत क्यों है सबसे ‘भरोसेमंद’ पड़ोसी

अगली पोस्ट

हरियाणा में खेल विभाग के सचिव-निदेशक का तबादला: लापरवाही को लेकर नायब सरकार का बड़ा एक्शन

संबंधित पोस्ट

राम मंदिर दान जांच
चर्चित

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मांगी एसआईटी रिपोर्ट, केंद्र-राज्य और ट्रस्ट को जारी किया नोटिस

13 July 2026

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने इस मामले से जुड़ी चार अलग-अलग...

अमेरिका ने फिर किया ईरान पर हमला
चर्चित

अमेरिका ने फिर किया ईरान पर हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव

13 July 2026

अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर सैन्य कार्रवाई करते हुए पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, रविवार...

कोचिंग विवाद खान सर के पटना कोचिंग सेंटर पर हमला
चर्चित

कोचिंग विवाद मामला: पटना कोर्ट से खान सर और दोनों बॉडीगार्ड्स को अग्रिम जमानत

13 July 2026

कोचिंग विवाद से जुड़े चर्चित मामले में पटना के चर्चित शिक्षक खान सर, जिनका वास्तविक नाम फैसल खान है, और उनके दोनों निजी बॉडीगार्ड्स को...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited