पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक नया संकट खड़ा कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में बड़े भूस्खलन के कारण सिजी नदी का बहाव रुक गया है। इससे नदी पर अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया है और उसके पीछे तेजी से पानी जमा हो रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि यह बांध टूटता है, तो नीचे के इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आ सकती है।
यह भूस्खलन लगातार बारिश के कारण सिजी-मागी ब्लॉक प्वाइंट के पास हुआ, जो अरुणाचल-असम सीमा पर स्थित लिकाबाली कस्बे से कुछ दूरी पर है। मलबे के कारण नदी का रास्ता बंद हो गया और वहां एक कृत्रिम झील बन गई है। लगातार बढ़ता पानी इस प्राकृतिक बांध पर दबाव बढ़ा रहा है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह बांध टूट गया तो अचानक तेज रफ्तार से पानी का बड़ा बहाव नीचे की ओर आएगा, जिससे लोगों की जान, घर, पशुधन, पुल, सड़कें और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान हो सकता है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने की सलाह
जिला प्रशासन ने लिकाबाली और सिजी नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। यही नदी आगे असम में जाकर गाई नदी के नाम से बहती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे—
- नदी के किनारे जाने से बचें।
- पानी के पास अनावश्यक आवाजाही न करें।
- जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार रहें।
साथ ही लोगों से कहा गया है कि यदि नदी का जलस्तर अचानक बढ़े, तेज आवाज सुनाई दे या मलबे के बांध में कोई दरार दिखाई दे, तो तुरंत प्रशासन या पुलिस को सूचना दें।
असम में भी बाढ़ से बिगड़े हालात
इस बीच पड़ोसी राज्य असम में भी बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। धेमाजी जिले के जोनाई, सिसीबोरगांव, धेमाजी और गोगामुख राजस्व क्षेत्रों के 69 गांवों में करीब 15,483 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ के कारण सिमेन नदी पर बना एक रेलवे पुल ढह गया है। एक लोहे का पुल भी बह गया है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग-52 की सुरक्षा के लिए बने तटबंधों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
अरुणाचल में राहत और बचाव अभियान जारी
अरुणाचल प्रदेश में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। 24 जून को केयी पन्योर जिले की एक जलविद्युत परियोजना कॉलोनी में आई फ्लैश फ्लड के बाद लापता हुए तीन लोगों, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, की तलाश अभी भी जारी है। अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं।
कई सड़कें टूटीं, कई इलाकों का संपर्क कटा
भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने राज्य के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है।
ईस्ट सियांग जिले में 11 प्रमुख सड़कों में से 9 या तो भूस्खलन और मलबे के कारण बंद हो गई हैं या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। अब तक केवल दो सड़कें ही दोबारा खोली जा सकी हैं।
सबसे ज्यादा नुकसान पासीघाट-रुन्ने-ताकिलालुग रोड पर हुआ है, जहां लेतोंग पुल का एक हिस्सा बाढ़ में बह गया। वहीं पासीघाट-यागरुंग-लेदुम-तेने रोड को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। इसके अलावा पासीघाट को पांगिन, मरियांग-यिंगकियोंग और मेबो-डामबुक-बोमजिर से जोड़ने वाली कई अहम सड़कें भी बंद हैं।
मौसम विभाग ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में 200 मिमी से अधिक बारिश होने की चेतावनी दी है। विभाग ने लोगों से बिना जरूरी काम के यात्रा करने से बचने की सलाह दी है।
बीआरओ ने 36 घंटे में बहाल किया अहम सड़क संपर्क
भारी तबाही के बीच एक राहत की खबर भी सामने आई है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कई भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और सड़क टूटने के बावजूद केवल 36 घंटे में किमिन-पोटिन रोड को दोबारा चालू कर दिया।
यह सड़क राज्य के पांच ऊंचाई वाले जिलों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। भारी बारिश के कारण यहां सड़कें मलबे, बड़े पत्थरों और उखड़े हुए पेड़ों से भर गई थीं, जिससे कई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके पूरी तरह कट गए थे।

































