त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास तस्करी के एक मामले में कार्रवाई करने पहुंची सीमा सुरक्षा बल (BSF) की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। सोमवार को सिपाहीजाला जिले के आशाबाड़ी इलाके में हुई इस घटना में BSF के तीन जवान घायल हो गए। घायलों में एक कंपनी कमांडर भी शामिल हैं। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि इस मामले में तीन महिलाओं समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, BSF के जवानों को इलाके में तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद जवानों ने मौके पर पहुंचकर एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया। इस कार्रवाई का कुछ ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया और सड़क पर जाम लगा दिया। इसी दौरान BSF के तीन जवानों को लेकर एक गाड़ी वहां पहुंची तो भीड़ ने उसे घेर लिया।
लाठी-डंडों और बांस से जवानों पर हमला
आरोप है कि भीड़ ने BSF की गाड़ी पर लाठी-डंडों और बांस से हमला किया। लोगों ने गाड़ी में तोड़फोड़ की और एक जवान की राइफल छीनने की भी कोशिश की। इस हमले में तीन जवान घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले के दौरान एक आरोपी के भी घायल होने की खबर है।
घटना की जानकारी मिलते ही BSF और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हालात को काबू में किया। पुलिस ने सोमवार रात से ही आरोपियों की तलाश में अभियान शुरू कर दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में कुछ अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है।
BSF और ग्रामीणों के आरोप अलग-अलग
इस घटना को लेकर BSF और ग्रामीणों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं। BSF और पुलिस के शुरुआती बयान के मुताबिक, जवानों ने तस्करी के आरोप में एक व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई के तहत पकड़ा था। इसके विरोध में ग्रामीणों ने रास्ता रोका और बाद में जवानों पर हमला कर दिया।
वहीं, पुलिस सूत्रों के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि BSF के जवानों ने एक स्थानीय व्यक्ति के साथ मारपीट की थी। इसी बात को लेकर लोगों ने सड़क पर जाम लगाया था। इस मामले में BSF और ग्रामीणों, दोनों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने कालामचौरा थाने में दोनों पक्षों की शिकायतों पर मामला दर्ज किया है। ग्रामीणों की शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच अभी बाकी है।
मुख्यमंत्री और विपक्ष ने की हमले की निंदा
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने BSF जवानों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस घटना को बर्बर बताते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में लगे जवान सम्मान और सुरक्षा के हकदार हैं।
विपक्ष ने भी इस घटना की आलोचना की है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ वामपंथी नेता जितेंद्र चौधरी ने भी जवानों पर हमले की निंदा की।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर क्यों होता है तनाव?
त्रिपुरा की सीमा बांग्लादेश से लगती है। इस इलाके में कई जगह गांव और खेती की जमीन सीमा के काफी करीब हैं। सीमा के आसपास मवेशियों, नशीले पदार्थों और दूसरे सामानों की तस्करी की घटनाएं होती रहती हैं।
BSF इन गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाती है। इस दौरान जवानों का स्थानीय लोगों से आमना-सामना भी होता है। कई बार तस्करी के आरोपियों को पकड़ने या कार्रवाई करने पर ग्रामीण विरोध करने लगते हैं। इससे तनाव और टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
इससे पहले दक्षिण त्रिपुरा में भी BSF और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। उस समय BSF ने दावा किया था कि जवानों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिसमें तीन कथित तस्करों की मौत हो गई थी। वहीं, स्थानीय लोगों ने BSF पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में BSF ने जांच के आदेश दिए थे और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
फिलहाल आशाबाड़ी की घटना की जांच जारी है। पुलिस के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, हमले में शामिल बाकी आरोपियों को पकड़ना। दूसरी, ग्रामीणों की शिकायत की निष्पक्ष जांच करना और तीसरी, भविष्य में सीमा पर ऐसे टकराव रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।


































