आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में सोमवार रात हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि आसमान में ऊंची लपटों के साथ काले धुएं का गुबार दिखाई देने लगा। इस घटना से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, कंपनी के मुताबिक आग पर कुछ ही समय में काबू पा लिया गया और इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। किसी के घायल होने की भी खबर नहीं है।
HPCL के अनुसार, 2 नवंबर की रात करीब 10 बजे रिफाइनरी के पिच इंटरमीडिएट स्टोरेज टैंक में आग लगी थी। सूचना मिलते ही रिफाइनरी की फायर और सेफ्टी टीम ने आपातकालीन व्यवस्था शुरू कर दी। दमकल कर्मियों ने आग को टैंक के आसपास के इलाके तक ही सीमित रखा और जल्द ही उस पर काबू पा लिया।
आग बुझाने को लेकर अधिकारियों के बयानों में थोड़ा अंतर सामने आया है। एक सर्किल इंस्पेक्टर के मुताबिक, HPCL की अपनी दमकल गाड़ियों ने आग बुझाई, जबकि राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आंध्र प्रदेश अग्निशमन विभाग के उपकरणों की भी मदद ली गई थी।
क्या होता है पिच टैंक, जहां लगी आग?
जिस टैंक में आग लगी, उसमें पिच नाम का गाढ़ा पदार्थ रखा जाता है। कच्चे तेल से पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन निकालने के बाद जो भारी और चिपचिपा अवशेष बचता है, उसे पिच कहा जाता है। यह पदार्थ तारकोल जैसा होता है।
पिच को बड़े टैंकों में रखा जाता है। इसमें आग लगने पर बहुत ज्यादा धुआं निकलता है, जो आसपास के बड़े इलाके में फैल सकता है। इसी वजह से सोमवार रात विशाखापत्तनम के कई हिस्सों से आग और काले धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया।
आग से कितना नुकसान हुआ?
HPCL के एक अधिकारी ने PTI को बताया कि इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई और न ही कोई घायल हुआ। कंपनी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि आग से रिफाइनरी की मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इससे तेल उत्पादन पर बड़े असर की आशंका कम है।
हालांकि, जिस टैंक में आग लगी थी, उसे कितना नुकसान हुआ और उसमें कितना पिच मौजूद था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। आग लगने की असली वजह का भी पता नहीं चला है। HPCL ने कहा है कि कंपनी सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों के उच्च मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
देश की अहम तेल रिफाइनरियों में शामिल है विशाख रिफाइनरी
विशाखापत्तनम की यह रिफाइनरी भारत के पूर्वी तट पर ईंधन की आपूर्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसकी शुरुआत साल 1957 में हुई थी। उस समय इसे कैलटेक्स ऑयल रिफाइनिंग इंडिया ने स्थापित किया था। साल 1976 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ और 1978 में इसे HPCL में शामिल कर लिया गया।
आज इस रिफाइनरी की सालाना तेल शोधन क्षमता 1.5 करोड़ टन है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसने रिकॉर्ड 1.604 करोड़ टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया था।
यहां LPG, पेट्रोल, डीजल, नेफ्था, विमान ईंधन, बिटुमेन और सल्फर जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिफाइनरी की रेजिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी के शुरू होने की सराहना की थी। इस सुविधा से रिफाइनरी की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली है।
पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हादसे
विशाख रिफाइनरी में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी यहां कई गंभीर औद्योगिक हादसे हो चुके हैं। साल 1997 से इस प्लांट में दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड रहा है।
सबसे गंभीर हादसों में से एक साल 2013 में हुआ था। उस समय रिफाइनरी के विस्तार का काम चल रहा था और कूलिंग टावर में आग लगने से 6 कर्मचारियों की मौत हो गई थी। इस हादसे में 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
हाल के दिनों में राजस्थान के पचपदरा, मथुरा और वडोदरा की रिफाइनरियों में भी आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में विशाख रिफाइनरी की घटना ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिच टैंक में आग कैसे लगी और इसकी वजह क्या थी। इसके अलावा यह भी पता लगाना जरूरी है कि टैंक को कितना नुकसान हुआ और उसे दोबारा इस्तेमाल करने में कितना समय लगेगा।
रिफाइनरी में हाल ही में बड़े स्तर पर विस्तार किया गया है और अब यहां तय क्षमता से भी ज्यादा कच्चे तेल का प्रसंस्करण हो रहा है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और नियमित जांच का महत्व और बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों के लिए भी यह जानना जरूरी है कि आग लगने की वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी। कंपनी की ओर से आग पर जल्द काबू पाने की जानकारी दी गई है, लेकिन हादसे की असली वजह और नुकसान का पूरा ब्योरा सामने आना अभी बाकी है।

































