TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की रेड: क्या है पूरा विवाद और कहां हैं कांग्रेस नेता?

    पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की रेड: क्या है पूरा विवाद और कहां हैं कांग्रेस नेता?

    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    ममता बनर्जी और ‘इस्लामिक भावनाएं’: चुनावी रणनीति या बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण?

    ममता बनर्जी और ‘इस्लामिक भावनाएं’: चुनावी रणनीति या बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण?

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: उम्मीदवार सूची से ब्राह्मणों की लगभग पूरी अनुपस्थिति

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: उम्मीदवार सूची से ब्राह्मणों की लगभग पूरी अनुपस्थिति

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मध्य पूर्व तनाव के बीच रूस का भारत को बड़ा ऊर्जा प्रस्ताव: तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश से बदलती वैश्विक रणनीति

    मध्य पूर्व तनाव के बीच रूस का भारत को बड़ा ऊर्जा प्रस्ताव: तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश से बदलती वैश्विक रणनीति

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारत के परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू, कल्पक्कम ब्रीडर रिएक्टर ने हासिल की ‘क्रिटिकलिटी’

    भारत के परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू, कल्पक्कम ब्रीडर रिएक्टर ने हासिल की ‘क्रिटिकलिटी’

    IAF का स्वदेशी FF Bot: युद्ध के बाद आग से जंग लड़ने की नई ताकत

    IAF का स्वदेशी FF Bot: युद्ध के बाद आग से जंग लड़ने की नई ताकत

    IAF का ‘एयरबोर्न इंटरनेट’ नेटवर्क: 2,500 स्वदेशी SDR सिस्टम शामिल करने की तैयारी

    IAF का ‘एयरबोर्न इंटरनेट’ नेटवर्क: 2,500 स्वदेशी SDR सिस्टम शामिल करने की तैयारी

    INS अरिधमन लॉन्च की तैयारी: भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी से बढ़ेगी समुद्री ताकत

    INS अरिधमन लॉन्च की तैयारी: भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी से बढ़ेगी समुद्री ताकत

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    जन विश्वास बिल 2026: छोटे अपराधों से मिली राहत, संसद ने पास किया ऐतिहासिक सुधार कानून

    जन विश्वास बिल 2026: छोटे अपराधों से मिली राहत, संसद ने पास किया ऐतिहासिक सुधार कानून

    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की रेड: क्या है पूरा विवाद और कहां हैं कांग्रेस नेता?

    पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की रेड: क्या है पूरा विवाद और कहां हैं कांग्रेस नेता?

    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    ममता बनर्जी और ‘इस्लामिक भावनाएं’: चुनावी रणनीति या बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण?

    ममता बनर्जी और ‘इस्लामिक भावनाएं’: चुनावी रणनीति या बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण?

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: उम्मीदवार सूची से ब्राह्मणों की लगभग पूरी अनुपस्थिति

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: उम्मीदवार सूची से ब्राह्मणों की लगभग पूरी अनुपस्थिति

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मध्य पूर्व तनाव के बीच रूस का भारत को बड़ा ऊर्जा प्रस्ताव: तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश से बदलती वैश्विक रणनीति

    मध्य पूर्व तनाव के बीच रूस का भारत को बड़ा ऊर्जा प्रस्ताव: तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश से बदलती वैश्विक रणनीति

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारत के परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू, कल्पक्कम ब्रीडर रिएक्टर ने हासिल की ‘क्रिटिकलिटी’

    भारत के परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू, कल्पक्कम ब्रीडर रिएक्टर ने हासिल की ‘क्रिटिकलिटी’

    IAF का स्वदेशी FF Bot: युद्ध के बाद आग से जंग लड़ने की नई ताकत

    IAF का स्वदेशी FF Bot: युद्ध के बाद आग से जंग लड़ने की नई ताकत

    IAF का ‘एयरबोर्न इंटरनेट’ नेटवर्क: 2,500 स्वदेशी SDR सिस्टम शामिल करने की तैयारी

    IAF का ‘एयरबोर्न इंटरनेट’ नेटवर्क: 2,500 स्वदेशी SDR सिस्टम शामिल करने की तैयारी

    INS अरिधमन लॉन्च की तैयारी: भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी से बढ़ेगी समुद्री ताकत

    INS अरिधमन लॉन्च की तैयारी: भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी से बढ़ेगी समुद्री ताकत

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    लेह में स्पेस जैसा माहौल: गगनयान मिशन के लिए ISRO का ‘मिशन मित्रा’ टेस्ट

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    IPL 2026: पंजाब ने चेन्नई को हराकर प्वाइंट्स टेबल में मारी छलांग, नंबर-1 पर कब्जा

    जन विश्वास बिल 2026: छोटे अपराधों से मिली राहत, संसद ने पास किया ऐतिहासिक सुधार कानून

    जन विश्वास बिल 2026: छोटे अपराधों से मिली राहत, संसद ने पास किया ऐतिहासिक सुधार कानून

    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

प्रधानमंत्री के रेस से लेकर विधायकी का चुनाव हारने तक, के कामराज के पतन की कहानी

के. कामराज जो अपने गृह राज्य तमिलनाडु में अपनी ही सीट नहीं बचा पाए और 1967 के विधानसभा चुनाव को हार गए। इस लेख में जानिए के. कामराज के किंगमेकर से सीट हारने तक की पूरी कहानी

Devesh Sharma द्वारा Devesh Sharma
5 January 2023
in इतिहास
के कामराज

Source- TFI

Share on FacebookShare on X

कुमारस्वामी कामराज यानी के. कामराज, जिन्हें भारतीय राजनीति में किंगमेकर के रूप में जाना जाता है। जिसने 1960 के दशक की राजनीति में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद पहले लाल बहादुर शास्त्री और उसके बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में एक असल किंगमेकर की भूमिका निभाई। लेकिन 1967 में ऐसा क्या हुआ कि जो के. कामराज कभी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हुआ करते थे वे अपने गृह राज्य तमिलनाडु में अपनी ही विधानसभा सीट को नहीं बचा पाए और 1967 के विधानसभा चुनाव को हार गए। आइए आज के इस लेख में के. कामराज के किंगमेकर से सीट हारने तक की पूरी कहानी पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

और पढ़ें: पंचवर्षीय योजना नेहरू की देन नहीं थी, बल्कि वो भी कॉपी-पेस्ट की गयी थी

संबंधितपोस्ट

जन्मदिवस विशेष: नाभा जेल में नेहरू की बदबूदार कोठरी और बाहर निकलने के लिए अंग्रेजों को दिया गया ‘वचनपत्र’

जनता की ज़मीन, सत्ता की जागीर नहीं: मानेसर लैंड डील में भूपेंद्र हुड्डा को झटका, न्याय ने कांग्रेस के ‘विकास मॉडल’ की खोल दी पोल

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

और लोड करें

सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे नेता 

बात है 1963 की, जब गांधीवादी विचारधारा को मानने वाले के. कामराज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और केंद्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री पद संभाल रहे थे। लेकिन 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद नेहरू की छवि देश-दुनिया में पहले के मुकाबले कमजोर हो गई थी और कांग्रेस पार्टी में लोग सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिरने के लिए तैयार थे। ऐसे में पार्टी की जमीनी पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही थी। कामराज ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को सुझाव दिया कि कांग्रेस पार्टी को और मजबूत करने के लिए नेताओं को सत्ता का लोभ छोड़कर वापस संगठन में लौटना चाहिए।

कामराज ने इसकी शुरुआत स्वयं 02 अक्टूबर 1963 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दी थी। उनके साथ बीजू पटनायक और एस. के. पाटिल सहित 6 अन्य मुख्यमंत्रियों और मोरारजी देसाई, जगजीवन राम और लाल बहादुर शास्त्री सहित 6 केबिनेट मंत्रियों ने अपने पद छोड़ दिए। कामराज की इस योजना को भारतीय राजनीति में ‘कामराज प्लान’ के नाम से जाना जाता है। कामराज के प्लान के लागू होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने के. कामराज को 9 अक्टूबर, 1963 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया।

और पढ़ें: 1949: जब नेहरू ने सदैव के लिए भारत की सीमा सुरक्षा से समझौता कर लिया

कामराज 1963 तक मद्रास के मुख्यमंत्री बने रहे

केंद्र की राजनीति में पहुंचने से पहले के. कामाराज अपने गृह राज्य मद्रास में भी झंडे गाड़ चुके थे। वे सी. राजगोपालाचारी के सामने एक नये कांग्रेसी नेता के रूप में उभरकर आ रहे थे। हालांकि 1952 के मद्रास विधानसभा चुनाव में सी. राजगोपालाचारी यानी ‘राजा जी’ को मुख्यमंत्री चुना गया लेकिन कामराज का उदय इतनी तेजी से हो रहा था कि महज दो साल के भीतर ‘राजा जी’ को उनके लिए ‘सिंहासन खाली करना’ पड़ा और साल 1954 में उनको मद्रास का मुख्यमंत्री बना दिया गया और कामराज 1963 तक मद्रास के मुख्यमंत्री बने रहे। लेकिन कामराज की किस्मत में तो किंगमेकर बनना लिखा था और ऐसा ही हुआ।

1964 में जब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आकस्मिक निधन हुआ तो कांग्रेस में प्रधानमंत्री पद को लेकर संघर्ष शुरू हो गया और मोरारजी देसाई बिदक कर सामने आ गए। लेकिन कामराज ने इस समय सर्वसम्मति की बात कर मोरारजी देसाई के तेवर ठंडे कर दिए। कामराज के नेतृत्व में सिंडीकेट ने शास्त्री का समर्थन किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नीलम संजीव रेड्डी, निजा लिंगाप्पा, अतुल्य घोष, एसके पाटिल जैसे ग़ैर-हिंदी भाषी नेताओं के गुट को सिंडीकेट के नाम से जाना जाता था।

1966 में सोवियत संघ में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद कांग्रेस के सामने एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद के लिए चुनौती आ गई। इस बार सिंडिकेट ने स्वयं के. कामराज को प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने कहा कि जिसे ठीक से हिंदी नहीं आती उसे देश का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए। लेकिन इस बार मोरारजी जी देसाई प्रधानमंत्री का ताज पहनने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठे थे और कामराज की किसी भी बात से सहमत नहीं हुए और मतदान कराने की बात पर अड़ गए। मोरारजी देसाई के अड़ जाने के बाद वोट काराया गया तो उन्होंने इंदिरा का समर्थन प्रधानमंत्री पद के लिए किया। इस तरह इंदिरा कांग्रेस संसदीय दल में 355 सांसदों का समर्थन पाकर प्रधानमंत्री बन गईं और मोरारजी देसाई फिर पीछे रह गए। लेकिन उनकी राजनीति के पतन की कहानी और कांग्रेस में परिवारवाद के पनपने की कहानी यहीं से शुरू होती है।

और पढ़ें: लाल बहादुर शास्त्री जो प्रधानमंत्री पद के प्रथम विकल्प तो नहीं थे पर उत्कृष्ट प्रधानमंत्री हुए

आम चुनावों तक चुप्पी

दरअसल, इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद के. कामराज को लगा कि वे इंदिरा गांधी को अपने हिसाब से चलाएंगे इसलिए वे 1967 में होने वाले आम चुनावों तक चुप्पी साधे रहे लेकिन जब 1967 में आम चुनाव हुए तो किंगमेकर कामराज का इंदिरा को प्रधानमंत्री पद के लिए चुनने का फैसला गलत साबित हुआ। कांग्रेस को उस चुनाव में 285 सीटें मिली थीं लेकिन 1967 में ही हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी 6 राज्यों में सत्ता खो बैठी और तमिलनाडु भी उन्हीं में से एक था। स्थिति तो ऐसी बन गई कि के कामराज स्वयं अपने विधानसभा सीट विरुदुनगर से चुनाव हार गए।

कामराज तमिलनाडु में भी अपनी पकड़ खो चुके थे वहां तो 1965 में हिंदी के राजभाषा बनने के बाद डीमके एक नई पार्टी उभरकर सामने आई थी। जिसके बाद कांग्रेस चुनाव भी हार गई थी। ऐसे में कामराज की हालत एक बूढ़े शेर की तरह हो गई थी जिससे अब लोग डरना बंद कर चुके थे। लेकिन अभी भी वे कांग्रेस में मौजूद थे। लेकिन कब तक, इंदिरा ने एक और दांव चला और उन्होंने कहा कि हारे हुए नेताओं को पद छोड़ना चाहिए. कामराज ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया. हालांकि नए कांग्रेस अध्यक्ष एस. निजालिंगाप्पा बने मगर संगठन के फैसले अभी भी कामराज ही ले रहे थे। लेकिन कब तक, 1967 में जब डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कार्यकाल पूरा करने के बाद राष्ट्रपति चुनाव हुए तो संगठन ने आंध्र प्रदेश के नेता नीलम संजीव रेड्डी को प्रत्याशी घोषित किया तो वहीं इंदिरा ने उपराष्ट्रपति वीवी गिरि को पर्चा दाखिल करने को कहा।

इंदिरा ने राष्ट्रपति चुनाव से ठीक एक दिन पहले कांग्रेसियों से कहा कि कांग्रेसजनों अंतरआत्मा की आवाज सुनो और वोट डालो। ठीक वैसा ही हुआ जैसा इंदिरा गांधी चाहती थीं कामराज समर्थित रेड्डी चुनाव हार गए और वीवी गिरि को राष्ट्रपति बना दिया गया।

और पढ़ें: इंदिरा गांधी के संरक्षण में संजय गांधी ने जमकर मचाया था ‘उत्पात’

कामराज की धुर विरोधी डीएमके पार्टी

संगठन के वरिष्ठ नेता इस बात से झल्ला उठे उन्होंने नवंबर 1969 में पार्टी की एक मीटिंग बुलाकर इंदिरा गांधी को पार्टी से बाहर निकाल दिया और कांग्रेस संसदीय दल को नया नेता चुन लेने के लिए कहा। जब वोटिंग हुई तो संसदीय दल की मीटिंग में इंदिरा के पक्ष में 285 में 229 सांसदों ने समर्थन किया। बचे वोट उन्होंने तमिलनाडु में कामराज की धुर विरोधी डीएमके पार्टी से गठबंधन कर जुटा लिए और लेफ्ट पार्टियां भी उनके साथ आ गईं। इसके बाद कांग्रेस पार्टी दो भागों में विभाजित हो गई। एक कांग्रेस ओ (ऑर्गनाइजेशन) और दूसरी कांग्रेस (रूलिंग) जो इंदिरा संभाल रही थीं इसे कांग्रेस आई के नाम से भी जाना जाता था।

इसके बाद कामराज ने तमिलनाडु की ओर रुख किया लेकिन उनकी पकड़ वहां अब ठीली हो चुकी थी। हालांकि 1971 में वे लोकसभा चुनकर भी पहुंचे लेकिन उनकी पार्टी के दूसरे प्रत्याशी बुरी तरह चुनाव हार गए और अंत में 72 वर्ष की उम्र में 2 अक्टूबर 1975 को गांधी जयंती के दिन हार्टअटैक से उनकी मौत हो गई। तो ये थी एक ऐसे कांग्रेसी नेता की कहानी जो भारत में कभी किंगमेकर कहे जाते थे और पीएम पद की रेस में थे लेकिन कभी पीएम बन न सके।

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें। 

Tags: K. KamarajLal Bahadur Shastriकांग्रेसजवाहर लाल नेहरूलाल बहादुर शास्त्री
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है? : योग्यता एवं शपथ

अगली पोस्ट

ठग चीन ने मूर्ख पाकिस्तान को 15 करोड़ डॉलर का ‘कबाड़’ बेच दिया

संबंधित पोस्ट

पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास
इतिहास

पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत एक प्रवास

7 April 2026

‘भारत’ दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता, संस्कृति और चेतना का जीवंत प्रतीक है। इसकी भूमि पर हर संघर्ष, हर सपना और हर परंपरा हमें हमारी...

राम नवमी: दक्षिण एशिया का प्रमुख त्योहार, जानें रामायण के विश्वव्यापी प्रसार की कहानी
इतिहास

राम नवमी: दक्षिण एशिया का प्रमुख त्योहार, जानें रामायण के विश्वव्यापी प्रसार की कहानी

26 March 2026

राम नवमी हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे भारत में भक्ति और भव्यता के साथ मनाया जाता है। लेकिन,...

इंक़लाब भगत सिंह
इतिहास

क्रांति की अपनी एक अलग परिभाषा थी भगत सिंह की

23 March 2026

लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आग़ाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इंक़लाब लायेगा। मैं रहूँ या न रहूँ पर यह वादा हैं...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited